🔰राष्ट्रीय अन्धता नियंत्रण पॉलिसी🔰
♻️स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से केन्द्रीय प्रवर्तीत योजनान्तर्गत यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है,
🔰 राष्ट्रीय अन्धता नियंत्रण कार्यकम का प्रमुख उद्देश्य - राज्य में अंधता के 2.24 प्रतिशत (1976) को घटा कर 0.34 प्रतिशत लाना है।
✅ वर्तमान में राज्य में अंधता की दर 1% है।
❗️ प्रतिवर्ष अक्टूबर माह के द्वितीय गुरूवार को विश्व दृष्टि दिवस मनाया जाता हैं।
🔰 8 मार्च से 14 मार्च तक ग्लूकोमा सप्ताह मनाया जाता है।
★ राजस्थान, अंधता नियंत्रण पॉलिसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य है।
♻️स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से केन्द्रीय प्रवर्तीत योजनान्तर्गत यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है,
🔰 राष्ट्रीय अन्धता नियंत्रण कार्यकम का प्रमुख उद्देश्य - राज्य में अंधता के 2.24 प्रतिशत (1976) को घटा कर 0.34 प्रतिशत लाना है।
✅ वर्तमान में राज्य में अंधता की दर 1% है।
❗️ प्रतिवर्ष अक्टूबर माह के द्वितीय गुरूवार को विश्व दृष्टि दिवस मनाया जाता हैं।
🔰 8 मार्च से 14 मार्च तक ग्लूकोमा सप्ताह मनाया जाता है।
★ राजस्थान, अंधता नियंत्रण पॉलिसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य है।
👍9👏1
राजस्थान के प्रमुख महोत्सव📚
(Imp for पटवारी, REET, RAJ JEN)
मरू महोत्सव-जैसलमेर
ऊंट महोत्सव-बीकानेर
गणगौर महोत्सव-जयपुर-
गज महोत्सव-जयपुर
मेवाड़ महोत्सव-उदयपुर
मारवाड़ महोत्सव-जोधपुर
ग्रीष्म महोत्सव-माउंट आबू(सिरोही)
थार महोत्सव-बाड़मेर
तीज महोत्सव-जयपुर
पतंग महोत्सव-जयपुर/ जोधपुर/ जैसलमेर
कार्तिक महोत्सव-पुष्कर (अजमेर)
घुड़ला महोत्सव-जोधपुर
मत्स्य महोत्सव-अलवर
कामधेनु महोत्सव-पथमिड़ा (जालौर)
हिंडोला महोत्सव-पुष्कर (अजमेर)
मांड महोत्सव-बीकानेर
अमृत महोत्सव-अजमेर
शेखावटी महोत्सव-चूरू/ सीकर/ झुंझुनू
शिल्पग्राम महोत्सव-उदयपुर
ब्रज महोत्सव-भरतपुर
शीत महोत्सव-माउंट आबू (सिरोही)
बेणेश्वर महोत्सव-डूंगरपुर
बैलून महोत्सव-बाड़मेर
कजली तीज महोत्सव-बूंदी
सिंजारा महोत्सव-जयपुर
कोटपूतली महोत्सव-जयपुर
घूमर महोत्सव-जयपुर
गैर महोत्सव-भीलवाड़ा
न्हाण महोत्सव-कोटा
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(Imp for पटवारी, REET, RAJ JEN)
मरू महोत्सव-जैसलमेर
ऊंट महोत्सव-बीकानेर
गणगौर महोत्सव-जयपुर-
गज महोत्सव-जयपुर
मेवाड़ महोत्सव-उदयपुर
मारवाड़ महोत्सव-जोधपुर
ग्रीष्म महोत्सव-माउंट आबू(सिरोही)
थार महोत्सव-बाड़मेर
तीज महोत्सव-जयपुर
पतंग महोत्सव-जयपुर/ जोधपुर/ जैसलमेर
कार्तिक महोत्सव-पुष्कर (अजमेर)
घुड़ला महोत्सव-जोधपुर
मत्स्य महोत्सव-अलवर
कामधेनु महोत्सव-पथमिड़ा (जालौर)
हिंडोला महोत्सव-पुष्कर (अजमेर)
मांड महोत्सव-बीकानेर
अमृत महोत्सव-अजमेर
शेखावटी महोत्सव-चूरू/ सीकर/ झुंझुनू
शिल्पग्राम महोत्सव-उदयपुर
ब्रज महोत्सव-भरतपुर
शीत महोत्सव-माउंट आबू (सिरोही)
बेणेश्वर महोत्सव-डूंगरपुर
बैलून महोत्सव-बाड़मेर
कजली तीज महोत्सव-बूंदी
सिंजारा महोत्सव-जयपुर
कोटपूतली महोत्सव-जयपुर
घूमर महोत्सव-जयपुर
गैर महोत्सव-भीलवाड़ा
न्हाण महोत्सव-कोटा
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राजस्थान के क्षेत्रीय नृत्य
■ शेखावटी - गीदड़ , चंग, ढप, कच्ची घोड़ी, जिन्दाद, लहुर नृत्य
■ मारवाड़ - डांडिया , घुडला , झांझी नृत्य
■ बीकानेर - अग्नि नृत्य
■जालोर ढोल नृत्य
■ भरतपुर - बम व हुरंगा , नौटंकी , चरकुला
■ झालावाड़ - बिंदौरी नृत्य
■ नाथद्वारा - डांग नृत्य
■ मेवाड़ - रण , लोवडी नृत्य
■ वागड़ - पाँचपदा , पेजणनृत्य
■ डूंगरपुर - चोगोला नृत्य
■ मांडल - नाहर नृत्य
■ फलौदी - थाली नृत्य
■ हाड़ौती - चकरी नृत्य
■ चुरू - कबूतरी नृत्य
■ मेवात - खारी नृत्य
■ धरियाबाद - मोहिली नृत्य
■ जैसलमेर - हिंडौला नृत्य
■ चौहटन - कानुडा नृत्य
■ ब्यावर का मयूर व भैरव नृत्य
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■ शेखावटी - गीदड़ , चंग, ढप, कच्ची घोड़ी, जिन्दाद, लहुर नृत्य
■ मारवाड़ - डांडिया , घुडला , झांझी नृत्य
■ बीकानेर - अग्नि नृत्य
■जालोर ढोल नृत्य
■ भरतपुर - बम व हुरंगा , नौटंकी , चरकुला
■ झालावाड़ - बिंदौरी नृत्य
■ नाथद्वारा - डांग नृत्य
■ मेवाड़ - रण , लोवडी नृत्य
■ वागड़ - पाँचपदा , पेजणनृत्य
■ डूंगरपुर - चोगोला नृत्य
■ मांडल - नाहर नृत्य
■ फलौदी - थाली नृत्य
■ हाड़ौती - चकरी नृत्य
■ चुरू - कबूतरी नृत्य
■ मेवात - खारी नृत्य
■ धरियाबाद - मोहिली नृत्य
■ जैसलमेर - हिंडौला नृत्य
■ चौहटन - कानुडा नृत्य
■ ब्यावर का मयूर व भैरव नृत्य
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राजस्थान के प्रमुख सम्प्रदाय, संस्थापक, केन्द्र एक नजर 🔰
1. दादू सम्प्रदाय - जयपुर
केन्द्र/पीठ - नारायणा
प्रवर्तक - दादू जी
2. रामानुज सम्प्रदाय - जयपुर
केन्द्र/पीठ - गलताजी
प्रवर्तक - रामानुजाचार्य
3. रामानन्दी सम्प्रदाय -
केन्द्र/पीठ - a. गलताजी - जयपुर - रामानन्द जी
b. रेवासा - सीकर - अग्रदास जी
c. गलताजी - जयपुर - स्वामी कृष्णदास पयहरी
4. परनामी सम्प्रदाय - जयपुर
केन्द्र/पीठ - आदर्श नगर
प्रवर्तक - महामति प्राणनाथ
5. जसनाथी सम्प्रदाय - बीकानेर
केन्द्र/पीठ - कतरियासर
प्रवर्तक - जसनाथ जी
6. विश्नोई सम्प्रदाय - बीकानेर
केन्द्र/पीठ - मकाम-तालवा
प्रवर्तक - जाम्भेश्वर जी
7. गौड़ीय सम्प्रदाय -
a. गोविन्द देवजी मन्दिर - जयपुर - गोरांग महाप्रभु चैतन्य
b. मदनमोहन जी मन्दिर - करौली
8. दासी सम्प्रदाय - नागौर
केन्द्र/पीठ - मेड़ता
प्रवर्तक - मीरां बाई
9. निरंजनी सम्प्रदाय - नागौर
केन्द्र/पीठ - डीडवाना व गाड़ा
प्रवर्तक - हरिदास जी
10. लालदासी सम्प्रदाय -
केन्द्र/पीठ - a. धौलीधूब - अलवर - ललदास जी
b. नगला - भरतपुर - ललदास जी
11. निष्कलंक सम्प्रदाय - डूंगरपुर
केन्द्र/पीठ - साबला
प्रवर्तक - माव जी
12. निम्बाक्र सम्प्रदाय - निम्बकाचार्य
13. वल्लभ सम्प्रदाय -
कुल 5 पीठे है, कोटा, नाथद्वारा, कांकरौली, कामवन
प्रवर्तक - वल्लभाचार्य
14. a. नाथ पंथ - प्रवर्तक - नाथ मुनि
b. बैराग पंथ - अजमेर
केन्द्र/पीठ - राताडूंगा
प्रवर्तक - नाथ मुनि
c. माननाथी सम्प्रदाय - जोधपुर
केन्द्र/पीठ - महामन्दिर
प्रवर्तक - नाथ मुनि
15. रामस्नेही सम्प्रदाय -
केन्द्र/पीठ - a.शाहपुरा - भीलवाड़ा - रामचरण
b. रैण - नागौर - दरियावजी
c. सिंहथल - बीकानेर - हरि रामदास जी
d. खेड़पा - जोधपुर - रामदास जी
16. चरणदासी सम्प्रदाय - डेहरा - चरण दास जी
17. तेरापंथ सम्प्रदाय - पाली
केन्द्र/पीठ - सिरयारी
प्रवर्तक - भीखण जी
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1. दादू सम्प्रदाय - जयपुर
केन्द्र/पीठ - नारायणा
प्रवर्तक - दादू जी
2. रामानुज सम्प्रदाय - जयपुर
केन्द्र/पीठ - गलताजी
प्रवर्तक - रामानुजाचार्य
3. रामानन्दी सम्प्रदाय -
केन्द्र/पीठ - a. गलताजी - जयपुर - रामानन्द जी
b. रेवासा - सीकर - अग्रदास जी
c. गलताजी - जयपुर - स्वामी कृष्णदास पयहरी
4. परनामी सम्प्रदाय - जयपुर
केन्द्र/पीठ - आदर्श नगर
प्रवर्तक - महामति प्राणनाथ
5. जसनाथी सम्प्रदाय - बीकानेर
केन्द्र/पीठ - कतरियासर
प्रवर्तक - जसनाथ जी
6. विश्नोई सम्प्रदाय - बीकानेर
केन्द्र/पीठ - मकाम-तालवा
प्रवर्तक - जाम्भेश्वर जी
7. गौड़ीय सम्प्रदाय -
a. गोविन्द देवजी मन्दिर - जयपुर - गोरांग महाप्रभु चैतन्य
b. मदनमोहन जी मन्दिर - करौली
8. दासी सम्प्रदाय - नागौर
केन्द्र/पीठ - मेड़ता
प्रवर्तक - मीरां बाई
9. निरंजनी सम्प्रदाय - नागौर
केन्द्र/पीठ - डीडवाना व गाड़ा
प्रवर्तक - हरिदास जी
10. लालदासी सम्प्रदाय -
केन्द्र/पीठ - a. धौलीधूब - अलवर - ललदास जी
b. नगला - भरतपुर - ललदास जी
11. निष्कलंक सम्प्रदाय - डूंगरपुर
केन्द्र/पीठ - साबला
प्रवर्तक - माव जी
12. निम्बाक्र सम्प्रदाय - निम्बकाचार्य
13. वल्लभ सम्प्रदाय -
कुल 5 पीठे है, कोटा, नाथद्वारा, कांकरौली, कामवन
प्रवर्तक - वल्लभाचार्य
14. a. नाथ पंथ - प्रवर्तक - नाथ मुनि
b. बैराग पंथ - अजमेर
केन्द्र/पीठ - राताडूंगा
प्रवर्तक - नाथ मुनि
c. माननाथी सम्प्रदाय - जोधपुर
केन्द्र/पीठ - महामन्दिर
प्रवर्तक - नाथ मुनि
15. रामस्नेही सम्प्रदाय -
केन्द्र/पीठ - a.शाहपुरा - भीलवाड़ा - रामचरण
b. रैण - नागौर - दरियावजी
c. सिंहथल - बीकानेर - हरि रामदास जी
d. खेड़पा - जोधपुर - रामदास जी
16. चरणदासी सम्प्रदाय - डेहरा - चरण दास जी
17. तेरापंथ सम्प्रदाय - पाली
केन्द्र/पीठ - सिरयारी
प्रवर्तक - भीखण जी
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👍11❤1
संगीत राज ग्रँथ
◆महाराणा कुम्भा द्वारा संगीतराज ग्रँथ लिखा गया।
◆यह 5 कोषों में विभाजित है।
◆ 5 कोष- 1.पाठ्य रत्न कोष
2.वाद्य रत्न कोष
3.गीत रत्न कोष
4.नृत्य रत्न कोष
5. रस रत्न कोष
◆ प्रत्येक कोष 4-4 भागों में विभाजित है जिन्हें उल्लास कहा जाता है
◆प्रत्येक उल्लास 4-4 भागों में विभाजित है जिन्हें परीक्षण जाता है।
◆इस प्रकार संगीत राज के छोटे बड़े कुल खण्ड -5×4×4=80 है।
बोर्ड द्वारा आज तक इस में से कुल 6 प्रश्न पूछे गये है।
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◆महाराणा कुम्भा द्वारा संगीतराज ग्रँथ लिखा गया।
◆यह 5 कोषों में विभाजित है।
◆ 5 कोष- 1.पाठ्य रत्न कोष
2.वाद्य रत्न कोष
3.गीत रत्न कोष
4.नृत्य रत्न कोष
5. रस रत्न कोष
◆ प्रत्येक कोष 4-4 भागों में विभाजित है जिन्हें उल्लास कहा जाता है
◆प्रत्येक उल्लास 4-4 भागों में विभाजित है जिन्हें परीक्षण जाता है।
◆इस प्रकार संगीत राज के छोटे बड़े कुल खण्ड -5×4×4=80 है।
बोर्ड द्वारा आज तक इस में से कुल 6 प्रश्न पूछे गये है।
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👍6❤2🤔1
✅ राजस्थान के प्रमुख जातीय मेले 🔰
▪️मीणा का सबसे बड़ा मेला रामेश्वर धाम (सवाई माधोपुर) में लगता है
▪️रामेश्वर में चम्बल, बनास, सीप का त्रिवेणी संगम होता है
▪️इस स्थान को मीणा प्रयाग के नाम से जाना जाता है
▪️सहारिया जनजाति का सबसे बड़ा मेला सीताबाडी मेला बारां में लगता है
▪️यह मेला ज्येष्ठ माह की अमावस्या को लगता है
▪️गरासिया जनजाति का सबसे बडा मेला सियावा का मेला या मनखा रो मेलो सियावा (सिरोही) में लगता है
▪️यह मेला बैशाख शुक्ल चतुर्थी को लगता है
▪️डामोर जनजाति का सबसे बडा मेला ग्यारसी की रेवाडी का मेला डूंगरपुर में लगता है
▪️डामोर जनजाति का एक अन्य महत्वपूर्ण मेला झेला बावसी मेला गुजरात के पंचमहल जिले में लगता है
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▪️मीणा का सबसे बड़ा मेला रामेश्वर धाम (सवाई माधोपुर) में लगता है
▪️रामेश्वर में चम्बल, बनास, सीप का त्रिवेणी संगम होता है
▪️इस स्थान को मीणा प्रयाग के नाम से जाना जाता है
▪️सहारिया जनजाति का सबसे बड़ा मेला सीताबाडी मेला बारां में लगता है
▪️यह मेला ज्येष्ठ माह की अमावस्या को लगता है
▪️गरासिया जनजाति का सबसे बडा मेला सियावा का मेला या मनखा रो मेलो सियावा (सिरोही) में लगता है
▪️यह मेला बैशाख शुक्ल चतुर्थी को लगता है
▪️डामोर जनजाति का सबसे बडा मेला ग्यारसी की रेवाडी का मेला डूंगरपुर में लगता है
▪️डामोर जनजाति का एक अन्य महत्वपूर्ण मेला झेला बावसी मेला गुजरात के पंचमहल जिले में लगता है
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रोड स्टैटिक्स 2021-22 की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार कुछ बदलाब जो निम्न लिखित है ।
____
राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों की संख्या = 52
राजस्थान में राज्य राजमार्गों की संख्या = 171
सर्वाधिक राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई वाले जिले -
(1) बाड़मेर = 879.50 KM
(2) बीकानेर = 866.65 KM
न्यूनतम राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई वाला जिला
(1) करौली = 68 KM
राज्य में सर्वाधिक लंबाई वाला राष्ट्रीय राजमार्ग =
NH -52 (राजगढ़-चुरू से झालावाड़)
कुल लंबाई = 793.55 किलोमीटर
राज्य में सर्वाधिक लंबाई वाला राज्य राजमार्ग =
SH -1(झालावाड़ से भरतपुर )
कुल लम्बाई = 403 किलोमीटर
राज्य का पूर्णतः सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग - NH-25 = 483 KM
राज्य का पूर्णत: सबसे छोटा राष्ट्रीय राजमार्ग - NH-156 = 12.08 KM
Note - यह पूर्व में भी भेजा जा चुका है अगर अभी तक अपडेट नहीं किया है तो इसे परिवहन के नोट्स में अपडेट कर दें।
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राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों की संख्या = 52
राजस्थान में राज्य राजमार्गों की संख्या = 171
सर्वाधिक राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई वाले जिले -
(1) बाड़मेर = 879.50 KM
(2) बीकानेर = 866.65 KM
न्यूनतम राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई वाला जिला
(1) करौली = 68 KM
राज्य में सर्वाधिक लंबाई वाला राष्ट्रीय राजमार्ग =
NH -52 (राजगढ़-चुरू से झालावाड़)
कुल लंबाई = 793.55 किलोमीटर
राज्य में सर्वाधिक लंबाई वाला राज्य राजमार्ग =
SH -1(झालावाड़ से भरतपुर )
कुल लम्बाई = 403 किलोमीटर
राज्य का पूर्णतः सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग - NH-25 = 483 KM
राज्य का पूर्णत: सबसे छोटा राष्ट्रीय राजमार्ग - NH-156 = 12.08 KM
Note - यह पूर्व में भी भेजा जा चुका है अगर अभी तक अपडेट नहीं किया है तो इसे परिवहन के नोट्स में अपडेट कर दें।
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1. विश्व धरोहर सूची में शामिल दुर्ग :-
आमेर , चितौड़गढ़, कुंभलगढ़ , गागरोन , रणथंभोर , जैसलमेर
2. राव रणमल की हवेली :- चितौड़गढ़ दुर्ग
- बांसदरा पहाड़ी पर कौनसा किला बना है - सज्जनगढ़
3. अचलगढ़ दुर्ग का निर्माण प्रारंभ किसने करवाया - परमारो ने
4. सुहाग मंदिर, सुख मंदिर , जय मंदिर किस किले में है - आमेर किले में
5. आमेर का किला किस पहाड़ी पर बना है - कालीखोह पहाड़ी पर
6. किस किले में रानी रत्नावली महल, खिरनी हवेली, नगर सेठ की हवेली , मोधो की हवेली स्थित हैं - भानगढ़ किले में
7. अकबर की छतरी किस दुर्ग में हैं - बयाना दुर्ग में
8. कौनसा किला ग्वालियर दुर्ग की कुंजी कहलाता है - मंडरायल किला
9. किस दुर्ग का परकोटा तिहरा परकोटा है - गागरोन दुर्ग का
10. पुष्य हवेली कहा है - जोधपुर में
11. बागोर की हवेली का निर्माण किसने करवाया ? - अमरचंद ने
12. महनसर और जयदयाल की हवेली कहा स्थित हैं - बिसाऊ में
13. जैसलमेर की सबसे ऊंची इमारत है - सालिम सिंह की हवेली
14. बूंदी के रंगमहलो का निर्माण किसने करवाया ? - छत्रसाल ने
15. इकथंबियामहल डूंगरपुर का निर्माण किसने करवाया ? - शिव सिंह ने
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आमेर , चितौड़गढ़, कुंभलगढ़ , गागरोन , रणथंभोर , जैसलमेर
2. राव रणमल की हवेली :- चितौड़गढ़ दुर्ग
- बांसदरा पहाड़ी पर कौनसा किला बना है - सज्जनगढ़
3. अचलगढ़ दुर्ग का निर्माण प्रारंभ किसने करवाया - परमारो ने
4. सुहाग मंदिर, सुख मंदिर , जय मंदिर किस किले में है - आमेर किले में
5. आमेर का किला किस पहाड़ी पर बना है - कालीखोह पहाड़ी पर
6. किस किले में रानी रत्नावली महल, खिरनी हवेली, नगर सेठ की हवेली , मोधो की हवेली स्थित हैं - भानगढ़ किले में
7. अकबर की छतरी किस दुर्ग में हैं - बयाना दुर्ग में
8. कौनसा किला ग्वालियर दुर्ग की कुंजी कहलाता है - मंडरायल किला
9. किस दुर्ग का परकोटा तिहरा परकोटा है - गागरोन दुर्ग का
10. पुष्य हवेली कहा है - जोधपुर में
11. बागोर की हवेली का निर्माण किसने करवाया ? - अमरचंद ने
12. महनसर और जयदयाल की हवेली कहा स्थित हैं - बिसाऊ में
13. जैसलमेर की सबसे ऊंची इमारत है - सालिम सिंह की हवेली
14. बूंदी के रंगमहलो का निर्माण किसने करवाया ? - छत्रसाल ने
15. इकथंबियामहल डूंगरपुर का निर्माण किसने करवाया ? - शिव सिंह ने
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👍6
राजस्थान के क्षेत्रीय नृत्य
■ शेखावटी - गीदड़ , चंग, ढप, कच्ची घोड़ी, जिन्दाद, लहुर नृत्य
■ मारवाड़ - डांडिया , घुडला , झांझी नृत्य
■ बीकानेर - अग्नि नृत्य
■जालोर ढोल नृत्य
■ भरतपुर - बम व हुरंगा , नौटंकी , चरकुला
■ झालावाड़ - बिंदौरी नृत्य
■ नाथद्वारा - डांग नृत्य
■ मेवाड़ - रण , लोवडी नृत्य
■ वागड़ - पाँचपदा , पेजणनृत्य
■ डूंगरपुर - चोगोला नृत्य
■ मांडल - नाहर नृत्य
■ फलौदी - थाली नृत्य
■ हाड़ौती - चकरी नृत्य
■ चुरू - कबूतरी नृत्य
■ मेवात - खारी नृत्य
■ धरियाबाद - मोहिली नृत्य
■ जैसलमेर - हिंडौला नृत्य
■ चौहटन - कानुडा नृत्य
■ ब्यावर का मयूर व भैरव नृत्य
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■ शेखावटी - गीदड़ , चंग, ढप, कच्ची घोड़ी, जिन्दाद, लहुर नृत्य
■ मारवाड़ - डांडिया , घुडला , झांझी नृत्य
■ बीकानेर - अग्नि नृत्य
■जालोर ढोल नृत्य
■ भरतपुर - बम व हुरंगा , नौटंकी , चरकुला
■ झालावाड़ - बिंदौरी नृत्य
■ नाथद्वारा - डांग नृत्य
■ मेवाड़ - रण , लोवडी नृत्य
■ वागड़ - पाँचपदा , पेजणनृत्य
■ डूंगरपुर - चोगोला नृत्य
■ मांडल - नाहर नृत्य
■ फलौदी - थाली नृत्य
■ हाड़ौती - चकरी नृत्य
■ चुरू - कबूतरी नृत्य
■ मेवात - खारी नृत्य
■ धरियाबाद - मोहिली नृत्य
■ जैसलमेर - हिंडौला नृत्य
■ चौहटन - कानुडा नृत्य
■ ब्यावर का मयूर व भैरव नृत्य
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🤔2
1. झाला हवेली किस जिले में है -कोटा
2.किस संस्था ने अछूतों की शिक्षा के लिए चूरू में कबीर पाठशाला स्थापित की -सर्व हितकारिणी सभा
3.किस चौहान वंश के शासक ने प्रताप लंकेश्वर की उपाधि धारण की थी-सोमेश्वर
4.राजस्थान में खेतड़ी कॉपर कंपलेक्स भारत सरकार द्वारा किस वर्ष में स्थापित हुआ था- 1967
5.पहरावना तथा तन्ना विवाह किस जनजाति में प्रचलित है-गरासिया जनजाति
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2.किस संस्था ने अछूतों की शिक्षा के लिए चूरू में कबीर पाठशाला स्थापित की -सर्व हितकारिणी सभा
3.किस चौहान वंश के शासक ने प्रताप लंकेश्वर की उपाधि धारण की थी-सोमेश्वर
4.राजस्थान में खेतड़ी कॉपर कंपलेक्स भारत सरकार द्वारा किस वर्ष में स्थापित हुआ था- 1967
5.पहरावना तथा तन्ना विवाह किस जनजाति में प्रचलित है-गरासिया जनजाति
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👍4
🫖भारतीय वन अधिनियम, 1927
☕वन नीति, 1952 (संशोधित 1988)
🫖वन्यजीव संरक्षण अधि 1972
☕वन संरक्षण अधिनियम 1980
🫖पर्यावरण संरक्षण अधि. 1986
☕जैवविविधता अधीनियम 2002
🫖जैव विविधता प्राधिकरण 2003
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☕वन नीति, 1952 (संशोधित 1988)
🫖वन्यजीव संरक्षण अधि 1972
☕वन संरक्षण अधिनियम 1980
🫖पर्यावरण संरक्षण अधि. 1986
☕जैवविविधता अधीनियम 2002
🫖जैव विविधता प्राधिकरण 2003
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👍4
💐💐🎍🎍स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गठित संस्था/संघ/ संगठन✍✍✍
👉सर्व सेवा संघ :- सर्वोदयी श्री सिदराज ढढढा द्वारा स्थापित
👉सभ्य सभा की स्थापना:- इसकी स्थापना गुरू गोविन्द गिरी ने आदिवासी हितों की सुरक्षा के
लिए की थी।
👉राजस्थान सेवा संघ (1919):-इस संस्था को 1920 में अजमेर स्थानांतरित कर दिया गया।
👉राजस्थान सेवा संघ में प्रमुख भूमिका अर्जुनलाल
सेठी, विजयसिंह पथिक,केसरीसिंह बारहठ एवं रामनारायण चौधरी ने निभाई थी।
👉राजपुताना मध्य भारत सभा (1919): इसकी स्थापना आमेर में जमनालाल बजाज ने की थी। इसमें मुख्य भूमिका अर्जुनलाल सेठी एवं विजयसिंह पथिक ने निभाई थी।
👉वीर भारत समाज (1910):- इसकी स्थापना विजयसिंह पथिक ने की थी।
👉वीर भारत सभा (1910):- इसकी स्थापना केसरीसिंह बारहठ़ एवं गोपालसिंह खरवा ने
की थी।
जैन वर्द्धमान विद्यालय (1907):- इसकी स्थापना अर्जुनलाल सेठी ने जयपुर में
की थी।
वागड़ सेवा मंदिर एवं हरिजन सेवा समिति (1935):-इसकी स्थापना भोगीलाल पाण्ड्या ने की थी।
मारवाड़ सेवा संघ (1920):-इसकी स्थापना चांदमल सुराणा ने की थी।मारवाड़ सेवा संघ को सन् 1924 में जयनारायण व्यास ने पुनः जीवित किया और एक नई संस्था की स्थापना की जिसे
‘‘मारवाड़ हितकारणी सभा’’ के नाम से जाना गया। मारवाड़ हितकारणी सभा की स्थापना 1929 में हुई।
अखिल भारतीय देषी राज्य लोक परिषद
(1927):- इसकी स्थापना में मुख्य भूमिका जवाहरलाल नेहरू ने निभाई थी। इसका प्रथम अधिवेशन मुम्बई में हुआ था। जिसकी अध्यक्षता रामचन्द्र राव ने की थी। इसका उद्देष्य देशी रियासतों में शान्तिपूर्वंक तरीके से उत्तरदायी शासन की स्थापना करना था।
चरखा संघ (1927):-इसकी स्थापना जमनालाल बजाज ने जयपुर में की थी।
सस्ता साहित्य मण्डल (1925):- इसकी स्थापना हरिभाऊ उपाध्याय ने अजमेर के हटूडी में की थी।
जीवन कुटीर (1927):- इसकी स्थापना हीरालाल शास्त्री द्वारा जयपुर में की गई थी। वर्तमान में यह निवाई (टोंक) में हैं।
वनस्थली विद्यापीठ (1938):-इसकी स्थापना हीरालाल शास्त्री द्वारा रतनलाल शास्त्री के साथ मिलकर की गई थी। जीवन कुटीर योजना को ही बाद में वनस्थली विद्यापीठ कहा गया था।
सर्वहितकारिणी सभा (1907):- इसके संस्थापक कन्हैयालाल ढुढँ थें।
सन् 1914 में गोपालदास (बीकानेर) ने इसे पुर्नजिवित किया था।
विद्या प्रचारिणी सभा (1914):- इसकी स्थापना हरि भाई किंकर ने की थी।
नागरी प्रचारणी सभा (1934):-इसकी स्थापना ज्वालाप्रसाद ने धौलपुर में की थी।
नरेन्द्र मण्डल (1921):-देशी राज्यों के राजाओं द्वारा निर्मित मण्डल जिसके चांसलर बीकानरे के
महाराजा गंगासिंह थे।
हरिजन सेवा संघ (1938):-इसकी स्थापना भोगीलाल
पाण्ड्या ने डुंगरपुर में की थी।
उपरमाल पंच बोर्ड :- 1917 में विजय सिंह पथिक द्वारा स्थापित।
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👉सर्व सेवा संघ :- सर्वोदयी श्री सिदराज ढढढा द्वारा स्थापित
👉सभ्य सभा की स्थापना:- इसकी स्थापना गुरू गोविन्द गिरी ने आदिवासी हितों की सुरक्षा के
लिए की थी।
👉राजस्थान सेवा संघ (1919):-इस संस्था को 1920 में अजमेर स्थानांतरित कर दिया गया।
👉राजस्थान सेवा संघ में प्रमुख भूमिका अर्जुनलाल
सेठी, विजयसिंह पथिक,केसरीसिंह बारहठ एवं रामनारायण चौधरी ने निभाई थी।
👉राजपुताना मध्य भारत सभा (1919): इसकी स्थापना आमेर में जमनालाल बजाज ने की थी। इसमें मुख्य भूमिका अर्जुनलाल सेठी एवं विजयसिंह पथिक ने निभाई थी।
👉वीर भारत समाज (1910):- इसकी स्थापना विजयसिंह पथिक ने की थी।
👉वीर भारत सभा (1910):- इसकी स्थापना केसरीसिंह बारहठ़ एवं गोपालसिंह खरवा ने
की थी।
जैन वर्द्धमान विद्यालय (1907):- इसकी स्थापना अर्जुनलाल सेठी ने जयपुर में
की थी।
वागड़ सेवा मंदिर एवं हरिजन सेवा समिति (1935):-इसकी स्थापना भोगीलाल पाण्ड्या ने की थी।
मारवाड़ सेवा संघ (1920):-इसकी स्थापना चांदमल सुराणा ने की थी।मारवाड़ सेवा संघ को सन् 1924 में जयनारायण व्यास ने पुनः जीवित किया और एक नई संस्था की स्थापना की जिसे
‘‘मारवाड़ हितकारणी सभा’’ के नाम से जाना गया। मारवाड़ हितकारणी सभा की स्थापना 1929 में हुई।
अखिल भारतीय देषी राज्य लोक परिषद
(1927):- इसकी स्थापना में मुख्य भूमिका जवाहरलाल नेहरू ने निभाई थी। इसका प्रथम अधिवेशन मुम्बई में हुआ था। जिसकी अध्यक्षता रामचन्द्र राव ने की थी। इसका उद्देष्य देशी रियासतों में शान्तिपूर्वंक तरीके से उत्तरदायी शासन की स्थापना करना था।
चरखा संघ (1927):-इसकी स्थापना जमनालाल बजाज ने जयपुर में की थी।
सस्ता साहित्य मण्डल (1925):- इसकी स्थापना हरिभाऊ उपाध्याय ने अजमेर के हटूडी में की थी।
जीवन कुटीर (1927):- इसकी स्थापना हीरालाल शास्त्री द्वारा जयपुर में की गई थी। वर्तमान में यह निवाई (टोंक) में हैं।
वनस्थली विद्यापीठ (1938):-इसकी स्थापना हीरालाल शास्त्री द्वारा रतनलाल शास्त्री के साथ मिलकर की गई थी। जीवन कुटीर योजना को ही बाद में वनस्थली विद्यापीठ कहा गया था।
सर्वहितकारिणी सभा (1907):- इसके संस्थापक कन्हैयालाल ढुढँ थें।
सन् 1914 में गोपालदास (बीकानेर) ने इसे पुर्नजिवित किया था।
विद्या प्रचारिणी सभा (1914):- इसकी स्थापना हरि भाई किंकर ने की थी।
नागरी प्रचारणी सभा (1934):-इसकी स्थापना ज्वालाप्रसाद ने धौलपुर में की थी।
नरेन्द्र मण्डल (1921):-देशी राज्यों के राजाओं द्वारा निर्मित मण्डल जिसके चांसलर बीकानरे के
महाराजा गंगासिंह थे।
हरिजन सेवा संघ (1938):-इसकी स्थापना भोगीलाल
पाण्ड्या ने डुंगरपुर में की थी।
उपरमाल पंच बोर्ड :- 1917 में विजय सिंह पथिक द्वारा स्थापित।
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🔰 RAJSSP मोबाइल ऐप
▪️सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री टीकाराम जूली ने अम्बेडकर भवन स्थित सभागार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों को घर बैठे वार्षिक सत्यापन किए जाने के लिए RAJSSP मोबाइल ऐप को लाॅन्च किया।
▪️सामाजिक सुरक्षा पेंशनर्स के लिए यह सुविधा प्रदान करने वाला राजस्थान भारत में पहला राज्य हैं।
▪️इससे लगभग 94 लाख पेंशनर्स को यह सुविधा मिलेगी।
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▪️इससे लगभग 94 लाख पेंशनर्स को यह सुविधा मिलेगी।
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👫 महिला समानता दिवस 🤩
26 अगस्त, 2022
📕 जेईसीसी, सीतापुरा, जयपुर में होगा कार्यक्रम
📗 प्रथम महिला निधि का किया जाएगा लोकार्पण
📘 200 करोड़ का वित्तीय संस्थान
📕 बजट 2022-23 में की गई थी घोषणा
💥 तेलंगाना राज्य की महिला निधि से समझौता
💥 प्रदेश के 6 जिलों से होगी शुरुआत
1. करौली 2. अलवर 3. कोटा
4. डूंगरपुर 5. राजसमंद 6. जोधपुर
26 अगस्त, 2022
📕 जेईसीसी, सीतापुरा, जयपुर में होगा कार्यक्रम
📗 प्रथम महिला निधि का किया जाएगा लोकार्पण
📘 200 करोड़ का वित्तीय संस्थान
📕 बजट 2022-23 में की गई थी घोषणा
💥 तेलंगाना राज्य की महिला निधि से समझौता
💥 प्रदेश के 6 जिलों से होगी शुरुआत
1. करौली 2. अलवर 3. कोटा
4. डूंगरपुर 5. राजसमंद 6. जोधपुर
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