✨️Important👇
✨️प्रथम फोटो में 'पन्ना धाय पेनोरमा, कमेरी देवगढ़ राजसमंद में स्थित है |
✨️दूसरे फोटो में 'पन्ना धाय पार्क' उदयपुर में स्थित है |
👉पन्ना धाय पैनोरमा पाड़ोली (चित्तौड़गढ़)में निर्माण की घोषणा
👆पेनोरमा (राजसमंद) व पार्क (उदयपुर) दोनों अलग अलग जगह अवस्थित है, इसलिए परीक्षा में कंफ्यूज ना होवें🤗
BY:- ANSHU CHOUDHARY
✨️प्रथम फोटो में 'पन्ना धाय पेनोरमा, कमेरी देवगढ़ राजसमंद में स्थित है |
✨️दूसरे फोटो में 'पन्ना धाय पार्क' उदयपुर में स्थित है |
👉पन्ना धाय पैनोरमा पाड़ोली (चित्तौड़गढ़)में निर्माण की घोषणा
👆पेनोरमा (राजसमंद) व पार्क (उदयपुर) दोनों अलग अलग जगह अवस्थित है, इसलिए परीक्षा में कंफ्यूज ना होवें🤗
BY:- ANSHU CHOUDHARY
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राजस्थान इतिहास के प्रमुख शिलालेख🔰
[ Special RAS MAINS EXAM ]
1.घोसुण्डी शिलालेख- घोसुण्डी (चितौडगढ)
यह शिलालेख ब्राह्मी व संस्कृत भाषा में लिखित है, इसमें गजवंश के पुत्र सर्वतात द्वारा अश्वमेध यज्ञ का वर्णन है।
2. नाथ प्रशस्ति- कैलाशपुरी (उदयपुर)
यह प्रशस्ति एकलिंगजी के मंदिर के पास लकुलिश मंदिर में स्थित है।
3. हर्षनाथ प्रशस्ति- हर्षनाथ मंदिर,सीकर इस प्रशस्ति के अनुसार हर्षमंदिर का निर्माण विग्रहराज के सामंत अल्लट नें करवाया। चैहानो का वंशक्रम का वर्णन है।
4.बिजौलिया शिलालेख- बिजौलिया (भीलवाडा)
इसमें सांभर व अजमेंर के चौहानों का वर्णन है। चौहानों को वत्सगौत्रिय ब्राह्मण बताया है।सांभर झील का निर्माण वासुदेव चौहान द्वारा होना बताया है।
इस प्रशस्ति के रचयिता- गुणभद्र व लेखक कायस्थ केशव है।
5. चीरवा का शिलालेख- चीरवा (उदयपुर)
इसमें बप्पा रावल के वंशजो का वर्णन है।
इसका मंडन सन् 1272 में रत्नप्रभसुरि नें किया।
6. रणकपुर प्रशस्ति- चौमुखा मंदिर (पाली)
इस प्रशस्ति में कालभौज व बप्पा रावल को अलग-अलग व्यक्ति बताया है।
7. राजप्रशस्ति- राजसमंद
राजसमंद झील के नौ-चौकी पाल पर 25 शिलालेखो में विश्वका सबसे बड़ा शिलालेख इतिहास है।
इसमें बप्पा रावल से राजसिंह तक का वर्णन है।
अमरसिंह द्वारा मुगलो के साथ की गई संधि का भी वर्णन है।
रचयिता- रणछौडभट्ट तैलंग
8. कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति- चितौडदुर्ग
9. जैन कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति- चितौडदुर्ग
.
10 रायसिंह प्रशस्ति- बीकानेर
इसमें बीकानेर दुर्ग का निर्माण तथा बीका से रायसिंह तक का वर्णन है।
रचयिता- कृष्ण भट्ट
BY:- ANSHU CHOUDHARY
[ Special RAS MAINS EXAM ]
1.घोसुण्डी शिलालेख- घोसुण्डी (चितौडगढ)
यह शिलालेख ब्राह्मी व संस्कृत भाषा में लिखित है, इसमें गजवंश के पुत्र सर्वतात द्वारा अश्वमेध यज्ञ का वर्णन है।
2. नाथ प्रशस्ति- कैलाशपुरी (उदयपुर)
यह प्रशस्ति एकलिंगजी के मंदिर के पास लकुलिश मंदिर में स्थित है।
3. हर्षनाथ प्रशस्ति- हर्षनाथ मंदिर,सीकर इस प्रशस्ति के अनुसार हर्षमंदिर का निर्माण विग्रहराज के सामंत अल्लट नें करवाया। चैहानो का वंशक्रम का वर्णन है।
4.बिजौलिया शिलालेख- बिजौलिया (भीलवाडा)
इसमें सांभर व अजमेंर के चौहानों का वर्णन है। चौहानों को वत्सगौत्रिय ब्राह्मण बताया है।सांभर झील का निर्माण वासुदेव चौहान द्वारा होना बताया है।
इस प्रशस्ति के रचयिता- गुणभद्र व लेखक कायस्थ केशव है।
5. चीरवा का शिलालेख- चीरवा (उदयपुर)
इसमें बप्पा रावल के वंशजो का वर्णन है।
इसका मंडन सन् 1272 में रत्नप्रभसुरि नें किया।
6. रणकपुर प्रशस्ति- चौमुखा मंदिर (पाली)
इस प्रशस्ति में कालभौज व बप्पा रावल को अलग-अलग व्यक्ति बताया है।
7. राजप्रशस्ति- राजसमंद
राजसमंद झील के नौ-चौकी पाल पर 25 शिलालेखो में विश्वका सबसे बड़ा शिलालेख इतिहास है।
इसमें बप्पा रावल से राजसिंह तक का वर्णन है।
अमरसिंह द्वारा मुगलो के साथ की गई संधि का भी वर्णन है।
रचयिता- रणछौडभट्ट तैलंग
8. कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति- चितौडदुर्ग
9. जैन कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति- चितौडदुर्ग
.
10 रायसिंह प्रशस्ति- बीकानेर
इसमें बीकानेर दुर्ग का निर्माण तथा बीका से रायसिंह तक का वर्णन है।
रचयिता- कृष्ण भट्ट
BY:- ANSHU CHOUDHARY
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✅ थार विशेष (अति महत्वपूर्ण)🔰
🟥 थार का घड़ा - चंदन नलकूप
🟧 थार का लाल- स्वरूप खां मांगणियार
🟨 थार की कला - उस्ता कला
🟩 थार का कल्पवृक्ष- खेजड़ी
🟦 थार होटल- बाड़मेर
🟪 थार महोत्सव- बाड़मेर
⬛️ थार की गंगा- लूणी
⬜️ थार की बाई- गवरी बाई
🟫 थार की वैष्णो- तनोट माता
⬜️ थार की गायिका- मांड
🟪 थार/रेगिस्तान का जल महल- बाटाडू कुआं
🟥 थार का सागवान - रोहिड़ा
🟧 थार का चीता - गोडावण
🟨 थार का लता - रूक्मा देवी
BY:- ANSHU CHOUDHARY
🟥 थार का घड़ा - चंदन नलकूप
🟧 थार का लाल- स्वरूप खां मांगणियार
🟨 थार की कला - उस्ता कला
🟩 थार का कल्पवृक्ष- खेजड़ी
🟦 थार होटल- बाड़मेर
🟪 थार महोत्सव- बाड़मेर
⬛️ थार की गंगा- लूणी
⬜️ थार की बाई- गवरी बाई
🟫 थार की वैष्णो- तनोट माता
⬜️ थार की गायिका- मांड
🟪 थार/रेगिस्तान का जल महल- बाटाडू कुआं
🟥 थार का सागवान - रोहिड़ा
🟧 थार का चीता - गोडावण
🟨 थार का लता - रूक्मा देवी
BY:- ANSHU CHOUDHARY
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राजस्थान के प्रमुख साके
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1. रणथंभौर का साका
यह सन् 1301 में अलाउद्दीन खिलजी के ऐतिहासिक आक्रमण के समय हुआ था। इसमें हम्मीर देव चौहान विश्वासघात के परिणामस्वरूप वीरगति को प्राप्त हुआ तथा उसकी पत्नी रंगादेवी ने जौहर किया था। इसे राजस्थान के गौरवशाली इतिहास का प्रथम साका माना जाता है।
2. चित्तौड़गढ़ के साके
चित्तौड़ में सर्वाधिक तीन साके हुए हैं।
◆प्रथम साका- यह सन् 1303 में राणा रतन सिंह के शासनकाल में अलाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ पर आक्रमण के समय हुआ था। इसमें रानी पद्मनी सहित स्त्रियों ने जौहर किया था।
◆द्वितीय साका- यह 1535 ईस्वी में राणा विक्रमादित्य के शासनकाल में गुजरात के सुल्तान बहादुरशाह के आक्रमण के समय हुआ था। इसमेंरानी कर्मवती के नेतृत्व में स्त्रियों ने जौहर किया था।
◆तृतीय साका- यह 1568 में राणा उदयसिंह के शासनकाल में अकबर के आक्रमण के समय हुआ था जिसमें जयमल और पत्ता के नेतृत्व में चित्तौड़ की सेना ने मुगल सेना का जमकर मुकाबला किया और स्त्रियों ने जौहर किया था।
3. जालौर का साका
कान्हड़देव के शासनकाल में 1311 – 12 में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय हुआ था।
4. गागरोण के किले के साके
◆प्रथम साका- 1423 ईस्वी में अचलदास खींची के शासन काल में माण्डू के सुल्तान होशंगशाह के आक्रमण केसमय हुआ था।
◆द्वितीय साका- यह सन् 1444 में माण्डू के सुल्तान महमूद खिलजी के आक्रमण के समय हुआ था।
5. जैसलमेर के ढाई साके
जैसलमेर में कुल ढाई साके होना माना जाता है। इसके तीसरे साके में वीरों ने केसरिया तो किया था किन्तु जौहर नहीं हुआ इस कारण इसको अर्ध साका कहा जाता है।
◆प्रथम साका- यह अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय हुआ था।
◆द्वितीय साका- यह फिरोजशाह तुगलक के आक्रमण के समय हुआ।
◆तृतीय साका (अर्ध साका)- यह लूणकरण के शासन काल में कंधार के शासक अमीर अली के आक्रमण के समय हुआ था।
By:- ANSHU CHOUDHARY
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1. रणथंभौर का साका
यह सन् 1301 में अलाउद्दीन खिलजी के ऐतिहासिक आक्रमण के समय हुआ था। इसमें हम्मीर देव चौहान विश्वासघात के परिणामस्वरूप वीरगति को प्राप्त हुआ तथा उसकी पत्नी रंगादेवी ने जौहर किया था। इसे राजस्थान के गौरवशाली इतिहास का प्रथम साका माना जाता है।
2. चित्तौड़गढ़ के साके
चित्तौड़ में सर्वाधिक तीन साके हुए हैं।
◆प्रथम साका- यह सन् 1303 में राणा रतन सिंह के शासनकाल में अलाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ पर आक्रमण के समय हुआ था। इसमें रानी पद्मनी सहित स्त्रियों ने जौहर किया था।
◆द्वितीय साका- यह 1535 ईस्वी में राणा विक्रमादित्य के शासनकाल में गुजरात के सुल्तान बहादुरशाह के आक्रमण के समय हुआ था। इसमेंरानी कर्मवती के नेतृत्व में स्त्रियों ने जौहर किया था।
◆तृतीय साका- यह 1568 में राणा उदयसिंह के शासनकाल में अकबर के आक्रमण के समय हुआ था जिसमें जयमल और पत्ता के नेतृत्व में चित्तौड़ की सेना ने मुगल सेना का जमकर मुकाबला किया और स्त्रियों ने जौहर किया था।
3. जालौर का साका
कान्हड़देव के शासनकाल में 1311 – 12 में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय हुआ था।
4. गागरोण के किले के साके
◆प्रथम साका- 1423 ईस्वी में अचलदास खींची के शासन काल में माण्डू के सुल्तान होशंगशाह के आक्रमण केसमय हुआ था।
◆द्वितीय साका- यह सन् 1444 में माण्डू के सुल्तान महमूद खिलजी के आक्रमण के समय हुआ था।
5. जैसलमेर के ढाई साके
जैसलमेर में कुल ढाई साके होना माना जाता है। इसके तीसरे साके में वीरों ने केसरिया तो किया था किन्तु जौहर नहीं हुआ इस कारण इसको अर्ध साका कहा जाता है।
◆प्रथम साका- यह अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय हुआ था।
◆द्वितीय साका- यह फिरोजशाह तुगलक के आक्रमण के समय हुआ।
◆तृतीय साका (अर्ध साका)- यह लूणकरण के शासन काल में कंधार के शासक अमीर अली के आक्रमण के समय हुआ था।
By:- ANSHU CHOUDHARY
👍3
☀️राजीव गांधी शहरी ओलंपिक खेल मैं शामिल खेलों को याद रखने का देसी तरीका 👉👉 BAF Ko TV ki जरूरत है
B----- बास्केटबॉल
A ------ एथलेटिक्स
F----- फुटबॉल
Ko---- खो खो
T------ टेनिस बॉल किकेट
V-----. वोलीवोल
Ki---- कबड्डी
☀️राजीव गांधी ग्रामीण ओलंपिक खेलों में शामिल खेल को याद रखने का देसी तरीका 👉👉
TV SKH KO ........ देना है
T------- टेनिस बॉल क्रिकेट
V ------वॉलीबॉल
S-------शूटिंग बॉल
K-------कबड्डी
H------ हॉकी
KO----- खो खो
✍️✍️✍️✍️
By:- ANSHU CHOUDHARY
B----- बास्केटबॉल
A ------ एथलेटिक्स
F----- फुटबॉल
Ko---- खो खो
T------ टेनिस बॉल किकेट
V-----. वोलीवोल
Ki---- कबड्डी
☀️राजीव गांधी ग्रामीण ओलंपिक खेलों में शामिल खेल को याद रखने का देसी तरीका 👉👉
TV SKH KO ........ देना है
T------- टेनिस बॉल क्रिकेट
V ------वॉलीबॉल
S-------शूटिंग बॉल
K-------कबड्डी
H------ हॉकी
KO----- खो खो
✍️✍️✍️✍️
By:- ANSHU CHOUDHARY
👍4
📜Top 5 Revision Fact📜
1. मरू विकास कार्यक्रम 1977-78
2. मेवात क्षेत्र विकास कार्यक्रम 1986-87
3. मगरा क्षेत्र विकास कार्यक्रम 2005-06
4. अरावली विकास कार्यक्रम 1974-75
5. डांग क्षेत्र विकास कार्यक्रम 1994-95
1. मरू विकास कार्यक्रम 1977-78
2. मेवात क्षेत्र विकास कार्यक्रम 1986-87
3. मगरा क्षेत्र विकास कार्यक्रम 2005-06
4. अरावली विकास कार्यक्रम 1974-75
5. डांग क्षेत्र विकास कार्यक्रम 1994-95
👍5❤2
किसान आंदोलन और संबंधित व्यक्ति
1. बिजोलिया किसान आंदोलन
साधु सीतारामदास, प्रेमचंद भील, फतह करण चारण, ब्रह्मदेव, विजय सिंह पथिक, माणिक्य लाल वर्मा, जमनालाल बजाज
2. बेंगू किसान आंदोलन -
रूपा जी और कृपा जी धाकड़, विजय सिंह पथिक व रामनारायण चौधरी
3. बूंदी किसान आंदोलन
पंडित नैनू राम शर्मा, रामनारायण चौधरी, हरि भाई किंकर, भंवरलाल सुनार, नारायण सिंह, नानक जी भील, देव लाल गुर्जर
4. सीकर किसान आंदोलन
हरलाल सिंह, नेतराम सिंह, पृथ्वी सिंह गोठड़ा
5. भरतपुर किसान आंदोलन - भौजी लंबरदार
6. मेव किसान आंदोलन - मोहम्मद हादि, चौधरी यासीन खान
7. उदरासर किसान आंदोलन - जीवन चौधरी
8. दुधवाखारा किसान आंदोलन - हनुमान सिंह
9. करौली किसान आंदोलन - कुंवर मदन सिंह (1927)
BY:- ANSHU CHOUDHARY
1. बिजोलिया किसान आंदोलन
साधु सीतारामदास, प्रेमचंद भील, फतह करण चारण, ब्रह्मदेव, विजय सिंह पथिक, माणिक्य लाल वर्मा, जमनालाल बजाज
2. बेंगू किसान आंदोलन -
रूपा जी और कृपा जी धाकड़, विजय सिंह पथिक व रामनारायण चौधरी
3. बूंदी किसान आंदोलन
पंडित नैनू राम शर्मा, रामनारायण चौधरी, हरि भाई किंकर, भंवरलाल सुनार, नारायण सिंह, नानक जी भील, देव लाल गुर्जर
4. सीकर किसान आंदोलन
हरलाल सिंह, नेतराम सिंह, पृथ्वी सिंह गोठड़ा
5. भरतपुर किसान आंदोलन - भौजी लंबरदार
6. मेव किसान आंदोलन - मोहम्मद हादि, चौधरी यासीन खान
7. उदरासर किसान आंदोलन - जीवन चौधरी
8. दुधवाखारा किसान आंदोलन - हनुमान सिंह
9. करौली किसान आंदोलन - कुंवर मदन सिंह (1927)
BY:- ANSHU CHOUDHARY
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बागोर सभ्यता
✍️ यह स्थल भीलवाड़ा जिले में कोठरी नदी के तट पर स्थित हैं।
✍️ इस सभ्यता का उत्खनन 1967 से 1969 के मध्य वीरेंद्र नाथ मिश्र के द्वारा किया गया।
✍️ इस मध्यपाषाण कालीन स्थल से पशुपालन के प्राचीनतम प्रमाण मिले हैं।
✍️ बागोर सभ्यता में 14 प्रकार की कृषि किए जाने के अवशेष मिले हैं।
✍️ बागोर सभ्यता को 'आदिम जाति का संग्रहालय' कहा गया है।
✍️ यहाँ पर उत्खनन का कार्य महासतियों के टिले पर किया गया है।
✍️ बागौर सभ्यता में तीन स्तरों के अवशेष प्राप्त हुए है |
✍️ यहाँ से मध्य पाषाण काल के पाँच मानव कंकाल मिले हैं, जो सुनियोजित ढंग से दफ़नाए गये थे।
By:- ANSHU CHOUDHARY
✍️ यह स्थल भीलवाड़ा जिले में कोठरी नदी के तट पर स्थित हैं।
✍️ इस सभ्यता का उत्खनन 1967 से 1969 के मध्य वीरेंद्र नाथ मिश्र के द्वारा किया गया।
✍️ इस मध्यपाषाण कालीन स्थल से पशुपालन के प्राचीनतम प्रमाण मिले हैं।
✍️ बागोर सभ्यता में 14 प्रकार की कृषि किए जाने के अवशेष मिले हैं।
✍️ बागोर सभ्यता को 'आदिम जाति का संग्रहालय' कहा गया है।
✍️ यहाँ पर उत्खनन का कार्य महासतियों के टिले पर किया गया है।
✍️ बागौर सभ्यता में तीन स्तरों के अवशेष प्राप्त हुए है |
✍️ यहाँ से मध्य पाषाण काल के पाँच मानव कंकाल मिले हैं, जो सुनियोजित ढंग से दफ़नाए गये थे।
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