🛫 राजस्थान के प्रमुख हवाई अड्डे 🛩
🔻 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: यह जयपुर से 10 किमी की दूरी पर स्थित है।
1. सांगानेर हवाई अड्डा - जयपुर
2. नल हवाई अड्डा - बीकानेर
3. कोटा हवाई अड्डा - कोटा
4. जैसलमेर हवाई अड्डा - जैसलमेर
5. रातानाडा हवाई अड्डा - जोधपुर
6. डबोक हवाई अड्डा - उदयपुर
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🔻 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: यह जयपुर से 10 किमी की दूरी पर स्थित है।
1. सांगानेर हवाई अड्डा - जयपुर
2. नल हवाई अड्डा - बीकानेर
3. कोटा हवाई अड्डा - कोटा
4. जैसलमेर हवाई अड्डा - जैसलमेर
5. रातानाडा हवाई अड्डा - जोधपुर
6. डबोक हवाई अड्डा - उदयपुर
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ओमप्रकाश मिठारवाल
☞इन्हें वर्ष 2022 में अर्जुन पुरस्कार प्राप्त हुआ है !
☞ इनका संबंध राजस्थान के सीकर जिले से है!
☞ ओमप्रकाश मिठारवाल का संबंध निशानेबाजी से है!
☞ 2018 में चांगवान में आयोजित विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप में 50 मीटर पिस्टल में स्वर्ण पदक प्राप्त किया था!
☞ 2018 में गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक प्राप्त किया!
करणी सिंह (बीकानेर) :-
☞ करणी सिंह प्रथम अर्जुन पुरस्कार विजेता राजस्थानी थे !
☞ इन्हें 1961 में निशानेबाजी खेल में अर्जुन पुरस्कार प्राप्त हुआ!
✿अर्जुन पुरस्कार: शुरुआत :- 1961
☞ सबसे पुराना खेल पुरस्कार है !!
पुरस्कार राशि - 15 लाख रूपये
☞इन्हें वर्ष 2022 में अर्जुन पुरस्कार प्राप्त हुआ है !
☞ इनका संबंध राजस्थान के सीकर जिले से है!
☞ ओमप्रकाश मिठारवाल का संबंध निशानेबाजी से है!
☞ 2018 में चांगवान में आयोजित विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप में 50 मीटर पिस्टल में स्वर्ण पदक प्राप्त किया था!
☞ 2018 में गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक प्राप्त किया!
करणी सिंह (बीकानेर) :-
☞ करणी सिंह प्रथम अर्जुन पुरस्कार विजेता राजस्थानी थे !
☞ इन्हें 1961 में निशानेबाजी खेल में अर्जुन पुरस्कार प्राप्त हुआ!
✿अर्जुन पुरस्कार: शुरुआत :- 1961
☞ सबसे पुराना खेल पुरस्कार है !!
पुरस्कार राशि - 15 लाख रूपये
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🔻 वर्तमान में राजस्थान के 16 कंजर्वेशन रिजर्व की सूची-
(1) बीसलपुर (टोंक ) 2008
(2) जोहड़बीड-गढ़वाल (बीकानेर) - 2008
(3) सुंधामाता(जालौर व सिरोही ) 2008
(4) गुढ़ा विश्नोई (जोधपुर) - 2011
(5) शाकम्भरी (सीकर व झुंझुनू )2012
(6) गोगेलाव(नागौर ) 2012
(7) बीड़ झुंझूनू(झुंझुनू) - 2012
(8) रोटू(नागौर)2012
(9) उम्मेद गंज पक्षी विहार (कोटा)2012
(10) जवाई बांध लेपर्ड (पाली) 2013
(11) बांसियाल-खेतड़ी (झुंझूनू ) 2017
(12) बांसियाल-खेतड़ी-बागोर (झुंझूनू)2018
(13) जवाई बांध लैपर्ड -II (पाली) 2018
(14) मनसा माता ( झुंझुनु )- 2019
(15) शाहबाद के जंगल (बारां (2021)
(16) रणखार (जालौर)- सबसे नवीनतम
🔷 नोट : 25 अप्रैल, 2022 को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 36 के तहत जालौर के चितलवाना क्षेत्र के रणखार (7288.61 हेक्टेयर) को राज्य का 16वाँ कन्जर्वेशन रिजर्व घोषित करने की अधिसूचना जारी की गई है ! 💕🙏
(1) बीसलपुर (टोंक ) 2008
(2) जोहड़बीड-गढ़वाल (बीकानेर) - 2008
(3) सुंधामाता(जालौर व सिरोही ) 2008
(4) गुढ़ा विश्नोई (जोधपुर) - 2011
(5) शाकम्भरी (सीकर व झुंझुनू )2012
(6) गोगेलाव(नागौर ) 2012
(7) बीड़ झुंझूनू(झुंझुनू) - 2012
(8) रोटू(नागौर)2012
(9) उम्मेद गंज पक्षी विहार (कोटा)2012
(10) जवाई बांध लेपर्ड (पाली) 2013
(11) बांसियाल-खेतड़ी (झुंझूनू ) 2017
(12) बांसियाल-खेतड़ी-बागोर (झुंझूनू)2018
(13) जवाई बांध लैपर्ड -II (पाली) 2018
(14) मनसा माता ( झुंझुनु )- 2019
(15) शाहबाद के जंगल (बारां (2021)
(16) रणखार (जालौर)- सबसे नवीनतम
🔷 नोट : 25 अप्रैल, 2022 को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 36 के तहत जालौर के चितलवाना क्षेत्र के रणखार (7288.61 हेक्टेयर) को राज्य का 16वाँ कन्जर्वेशन रिजर्व घोषित करने की अधिसूचना जारी की गई है ! 💕🙏
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राजस्थान के चारण साहित्य के प्रबंध काव्य
काव्य तथा लेखक :
1. वीरभायण : बादर ढाढी
2. अचलदास खींची री वचनिका : गाडन शिवदास
3. राव रिणमल रो रूपक : गाढण पसाइत
4. गुण जोधायण : गाढण पसाइत
5. कान्हड़दे प्रबंध : पद्मनाभ
6. राव हमीरदेव चौपाई : भाउंड व्यास
7. राव जैतसी रो पाछड़ी छन्द : बीठू सूजा
8. रावल माला रो गुण : बारहठ आसा
9. पृथ्वीराज रासो : चंदबरदाई
10. झूलणा महाराज रायसिंघजी रा : सांदू माला
काव्य तथा लेखक :
1. वीरभायण : बादर ढाढी
2. अचलदास खींची री वचनिका : गाडन शिवदास
3. राव रिणमल रो रूपक : गाढण पसाइत
4. गुण जोधायण : गाढण पसाइत
5. कान्हड़दे प्रबंध : पद्मनाभ
6. राव हमीरदेव चौपाई : भाउंड व्यास
7. राव जैतसी रो पाछड़ी छन्द : बीठू सूजा
8. रावल माला रो गुण : बारहठ आसा
9. पृथ्वीराज रासो : चंदबरदाई
10. झूलणा महाराज रायसिंघजी रा : सांदू माला
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🔻 मानगढ़ नरसंहार : 1500 आदिवासियों की मौत
▪️17 नवम्बर 1913 के दिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर गोविंद गुरु का जन्म दिन मनाने के लिए आदिवासी भक्तों की टोलियां मानगढ़ धाम के पहाड़ पर जुटी थी।
▪️इसी दिन खेरवाड़ा से ब्रिटिश बटालियन और गुजरात के दाहोद से अंग्रेजी सेना को बुलाया गया था।
▪️अंग्रेजों ने मानगढ़ धाम की सड़क के पार समांतर पहाड़ पर खच्चरों से मशीन गन और तोप पहुंचाए थे।
▪️मेजर हैमिल्टन और उनके तीन अफसरों ने हथियारबंद फौज के साथ मानगढ़ पहाड़ी को तीन ओर से घेर लिया था।
▪️खेरवाड़ा से आई अंग्रेजी सेना ने रात में पूरा सफर तय कर पहाड़ियों पर हथियार जमा दिए थे।
▪️अगली सुबह अंग्रेजी फौज के कर्नल शटन का आदेश मिलते ही सेना ने गोलीबारी करना शुरू कर दिया।
▪️आदिवासियों पर तोप और तत्कालीन मशीन गनों से हमला बोल दिया गया।
▪️इस हमले में 1500 आदिवासियों की मौत हो गई थी।
▪️17 नवम्बर 1913 के दिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर गोविंद गुरु का जन्म दिन मनाने के लिए आदिवासी भक्तों की टोलियां मानगढ़ धाम के पहाड़ पर जुटी थी।
▪️इसी दिन खेरवाड़ा से ब्रिटिश बटालियन और गुजरात के दाहोद से अंग्रेजी सेना को बुलाया गया था।
▪️अंग्रेजों ने मानगढ़ धाम की सड़क के पार समांतर पहाड़ पर खच्चरों से मशीन गन और तोप पहुंचाए थे।
▪️मेजर हैमिल्टन और उनके तीन अफसरों ने हथियारबंद फौज के साथ मानगढ़ पहाड़ी को तीन ओर से घेर लिया था।
▪️खेरवाड़ा से आई अंग्रेजी सेना ने रात में पूरा सफर तय कर पहाड़ियों पर हथियार जमा दिए थे।
▪️अगली सुबह अंग्रेजी फौज के कर्नल शटन का आदेश मिलते ही सेना ने गोलीबारी करना शुरू कर दिया।
▪️आदिवासियों पर तोप और तत्कालीन मशीन गनों से हमला बोल दिया गया।
▪️इस हमले में 1500 आदिवासियों की मौत हो गई थी।
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क्या आप जानते है ...... 🔲
✍✍ राजस्थान में स्थापित व प्रस्तावित सबसे बड़े सोलर पार्क -
1. भड़ला सोलर पार्क (जोधपुर) 2245MW
2. फतेहगढ़ पार्क, जैसलमेर (अडानी ग्रुप)- 1500 MW
3. पुंगल ,बीकानेर (कोल इंडिया) - 1190 MW
4. नोख सोलर पार्क (जैसलमेर) - 925MW
5. फलोदी- पोकरण सोलर पार्क-750MW
✍✍ राजस्थान में स्थापित व प्रस्तावित सबसे बड़े सोलर पार्क -
1. भड़ला सोलर पार्क (जोधपुर) 2245MW
2. फतेहगढ़ पार्क, जैसलमेर (अडानी ग्रुप)- 1500 MW
3. पुंगल ,बीकानेर (कोल इंडिया) - 1190 MW
4. नोख सोलर पार्क (जैसलमेर) - 925MW
5. फलोदी- पोकरण सोलर पार्क-750MW
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🔵 'संगीत नाटक अकादमी' (जोधपुर) द्वारा सुप्रसिद्ध अभिनेत्री एवं गायिका इला अरुण को "फैलोशिप सम्मान" देने की घोषणा।
🔵 राष्ट्रीय स्वच्छता विद्यालय पुरस्कार 2021-22
• राज. के दो स्कूल राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित
1. स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल, पनवाड़ा, टोंक
2. राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, गंगापुर, भीलवाड़ा
• राज. के दो स्कूल राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित
1. स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल, पनवाड़ा, टोंक
2. राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, गंगापुर, भीलवाड़ा
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जयपुर (गुलाबी नगर) के प्रमुख पर्यटक स्थल
हवामहल:-
बाहर की तरफ से भगवान कृष्ण के मुकुट जैसा दिखाई देने वाला यह महल अनूठा है। सन् 1799 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा बनवाया गया यह 5 मंजिला है तथा इसका डिजाइनर वास्तुकार लालचंद उस्ता द्वारा तैयार किया गया था। गुलाबी शहर का प्रतीक हवामहल, बलुआ पत्थर से बना राजस्थानी वास्तुकला और मुगल शैली का मिश्रण है। इसकी दीवारें सिर्फ डेढ़ फुट चौड़ी है तथा 953 बेहद सुंदर आकर्षक छोटे छोटे आकार के झरोखे है। इसे बनाने का मूल उद्देश्य था कि शहर में होने वाले मेले-त्योहारों और जुलूस को महारानियां इस महल के अंदर बैठकर देख सके। हवामहल गर्मी के मौसम में भी इन झरोखों के कारण वातानुकूलित रहता है।
आमेर महल:-
जयपुर से 11 किलोमीटर की दूरी पर कछवाहो की पुरानी राजधानी आमेर, अपने किले और स्थापत्य के लिए पर्यटकों का मुख्य आकर्षण है। यूनेस्को की ’विश्व धरोहर’ सूची में शामिल, पूर्व में कच्छवाहा राजपूतों की राजधानी आमेर महल ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यह हिंदू व मुगल शैली का सुंदर मिश्रण है। आमेर का महल सन् 1592 में राजा मानसिंह प्रथम ने दुश्मनों से मुकाबला और बचाव करने के लिए बनवाया था। आमेर महल का आंतरिक भाग, लाल बलुआ पत्थर तथा संगमर से बनाया गया तथा इसमें नक्ककाशी का कार्य बहुमूल्य पत्थरों की जड़ाई, मीनाकारी का काम, पच्चीकारी काम, जगह-जगह बड़े-बड़े दर्पण इसकी भव्यता को चार चांद लगाते हैं।
जंतर मंतर:-
जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा बनाई गई पांच खगोलीय वेधशालाओ में सबसे विशाल है, जयपुर की यह वैद्यशाला। इसे जंतर मंतर कहते हैं। यूनेस्को द्वारा इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। इसमें बनाएं गए जटिल यंत्र, समय को मापने, सूर्य की गति व कक्षाओं का निरीक्षण तथा आकाशीय पिंडों के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हैं।
जयगढ़ फोर्ट:-
सन् 1726 में, महाराजा जयसिंह द्वितीय द्वारा यह किला आमेर की सुरक्षा के लिए बनवाया गया था। इसमें बने शस्त्रागार, अनूठा शस्त्र संग्रहालय, तोपे बनाने का कारखाना तथा विश्व की सबसे बड़ी तोप ’जयबाण’ के कारण राजस्थान में आने वाला प्रत्येक पर्यटक, जयपुर आकर इस तोप को जरुर देखना चाहता है। इस तोप को एक बार चलाया गया था जिससे शहर से 35 किलोमीटर दूर एक गड्ढा बन गया था। जिसकी लंबाई 31 फीट 5 इंच है तथा वजन 50 टन है। इसके 8 मीटर लंबे बैरल में 100 किलो गन पाउडर भरा जाता था।
नाहरगढ़ किला:-
अंधेरी रात में, तारों की छांव में, नाहरगढ़ किले से जयपुर शहर का विहंगम, अभूतपूर्व, अद्भुत और मस्त मदमस्त नजारा, सारी दुनिया में और कहीं नहीं मिलेगा। शहर की रोशनी को देखकर लगता है, तारे जमीन पर उतर आए है। सन् 1734 में महाराजा जयसिंह के शासनकाल के दौरान इस किले का निर्माण किया गया, जो कि शहर का पहरेदार मालूम होता है। इस क़िले में बनाए गए माधवेंद्र भवन को ग्रीष्म काल में महाराजा के निवास के रूप में काम में लिया जाता था। रानियों के लिए आरामदेय बैठक तथा राजा के कक्षों का समूह, आलीशान दरवाजे, खिड़कियों और भित्तिचित्रों से सजाया गया, नाहरगढ़ अतीत की यादों को समेटे शान से खड़ा है। अभी हाल ही में एक महल में एक स्कल्पचर आर्ट गैलरी भी बनवाई गई है।
अल्बर्ट हॉल:- (सेंट्रल म्यूजियम)
सन् 1876 में प्रिंस वेल्स ने इसकी आधारशिला रखी थी। इसका नाम लंदन के अल्बर्ट संग्रहालय के नाम पर रखा गया था। सर सिवन्टन जैकब द्वारा इसका डिजाइन बनाया गया था तथा इंडो सोरसेनिक स्थापत्य शैली के आधार पर इसका निर्माण करवाया गया। रामनिवास बाग के बीच में अल्बर्ट हॉल की अभूतपूर्व और मनमोहक इमारत, हर मौसम में पर्यटकों को आकर्षित करती है। इसमें जयपुर कला विद्यालय, कोटा, बूंदी, किशनगढ और उदयपुर शैली के लघु चित्रों का बड़ा संग्रह है।
अल्बर्ट हॉल म्यूजियम राजस्थान का प्रथम संग्रहालय है।
गलताजी:-
गलता जी जयपुर एक प्राचीन तीर्थ स्थान है। यह गालव ऋषि की तपोस्थली है। गलता जी स्थित कुंड में स्नान धार्मिक महत्व है। तीर्थयात्री यहां पवित्र स्नान हेतु आते हैं। इस स्थान में मंदिर, मंडप और पवित्र कुंड है। गलता जी आने के लिए आगंतुक पहले रामगोपाल जी के मंदिर परिसर में आते हैं, जिसे स्थानीय लोगों द्वारा ’बंदर मंदिर’ कहा जाता है। इसे यह नाम हमारे यहां पाए जाने वाले ’बंदरों के एक बड़े समूह’ की वजह से मिला। हरियाली का खूबसूरत नजारा और उछलते कूदते बंदर क्षेत्र के खुशनुमा माहौल में इजाफा करते हैं। पहाड़ी की चोटी पर सूर्य देव को समर्पित एक छोटा मंदिर है, इसे ’सूर्यमंदिर’ कहा जाता है। दीवान कृपाराम द्वारा निर्मित यह मंदिर शहर के लोगों के लिए पूजनीय है।
हवामहल:-
बाहर की तरफ से भगवान कृष्ण के मुकुट जैसा दिखाई देने वाला यह महल अनूठा है। सन् 1799 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा बनवाया गया यह 5 मंजिला है तथा इसका डिजाइनर वास्तुकार लालचंद उस्ता द्वारा तैयार किया गया था। गुलाबी शहर का प्रतीक हवामहल, बलुआ पत्थर से बना राजस्थानी वास्तुकला और मुगल शैली का मिश्रण है। इसकी दीवारें सिर्फ डेढ़ फुट चौड़ी है तथा 953 बेहद सुंदर आकर्षक छोटे छोटे आकार के झरोखे है। इसे बनाने का मूल उद्देश्य था कि शहर में होने वाले मेले-त्योहारों और जुलूस को महारानियां इस महल के अंदर बैठकर देख सके। हवामहल गर्मी के मौसम में भी इन झरोखों के कारण वातानुकूलित रहता है।
आमेर महल:-
जयपुर से 11 किलोमीटर की दूरी पर कछवाहो की पुरानी राजधानी आमेर, अपने किले और स्थापत्य के लिए पर्यटकों का मुख्य आकर्षण है। यूनेस्को की ’विश्व धरोहर’ सूची में शामिल, पूर्व में कच्छवाहा राजपूतों की राजधानी आमेर महल ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यह हिंदू व मुगल शैली का सुंदर मिश्रण है। आमेर का महल सन् 1592 में राजा मानसिंह प्रथम ने दुश्मनों से मुकाबला और बचाव करने के लिए बनवाया था। आमेर महल का आंतरिक भाग, लाल बलुआ पत्थर तथा संगमर से बनाया गया तथा इसमें नक्ककाशी का कार्य बहुमूल्य पत्थरों की जड़ाई, मीनाकारी का काम, पच्चीकारी काम, जगह-जगह बड़े-बड़े दर्पण इसकी भव्यता को चार चांद लगाते हैं।
जंतर मंतर:-
जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा बनाई गई पांच खगोलीय वेधशालाओ में सबसे विशाल है, जयपुर की यह वैद्यशाला। इसे जंतर मंतर कहते हैं। यूनेस्को द्वारा इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। इसमें बनाएं गए जटिल यंत्र, समय को मापने, सूर्य की गति व कक्षाओं का निरीक्षण तथा आकाशीय पिंडों के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हैं।
जयगढ़ फोर्ट:-
सन् 1726 में, महाराजा जयसिंह द्वितीय द्वारा यह किला आमेर की सुरक्षा के लिए बनवाया गया था। इसमें बने शस्त्रागार, अनूठा शस्त्र संग्रहालय, तोपे बनाने का कारखाना तथा विश्व की सबसे बड़ी तोप ’जयबाण’ के कारण राजस्थान में आने वाला प्रत्येक पर्यटक, जयपुर आकर इस तोप को जरुर देखना चाहता है। इस तोप को एक बार चलाया गया था जिससे शहर से 35 किलोमीटर दूर एक गड्ढा बन गया था। जिसकी लंबाई 31 फीट 5 इंच है तथा वजन 50 टन है। इसके 8 मीटर लंबे बैरल में 100 किलो गन पाउडर भरा जाता था।
नाहरगढ़ किला:-
अंधेरी रात में, तारों की छांव में, नाहरगढ़ किले से जयपुर शहर का विहंगम, अभूतपूर्व, अद्भुत और मस्त मदमस्त नजारा, सारी दुनिया में और कहीं नहीं मिलेगा। शहर की रोशनी को देखकर लगता है, तारे जमीन पर उतर आए है। सन् 1734 में महाराजा जयसिंह के शासनकाल के दौरान इस किले का निर्माण किया गया, जो कि शहर का पहरेदार मालूम होता है। इस क़िले में बनाए गए माधवेंद्र भवन को ग्रीष्म काल में महाराजा के निवास के रूप में काम में लिया जाता था। रानियों के लिए आरामदेय बैठक तथा राजा के कक्षों का समूह, आलीशान दरवाजे, खिड़कियों और भित्तिचित्रों से सजाया गया, नाहरगढ़ अतीत की यादों को समेटे शान से खड़ा है। अभी हाल ही में एक महल में एक स्कल्पचर आर्ट गैलरी भी बनवाई गई है।
अल्बर्ट हॉल:- (सेंट्रल म्यूजियम)
सन् 1876 में प्रिंस वेल्स ने इसकी आधारशिला रखी थी। इसका नाम लंदन के अल्बर्ट संग्रहालय के नाम पर रखा गया था। सर सिवन्टन जैकब द्वारा इसका डिजाइन बनाया गया था तथा इंडो सोरसेनिक स्थापत्य शैली के आधार पर इसका निर्माण करवाया गया। रामनिवास बाग के बीच में अल्बर्ट हॉल की अभूतपूर्व और मनमोहक इमारत, हर मौसम में पर्यटकों को आकर्षित करती है। इसमें जयपुर कला विद्यालय, कोटा, बूंदी, किशनगढ और उदयपुर शैली के लघु चित्रों का बड़ा संग्रह है।
अल्बर्ट हॉल म्यूजियम राजस्थान का प्रथम संग्रहालय है।
गलताजी:-
गलता जी जयपुर एक प्राचीन तीर्थ स्थान है। यह गालव ऋषि की तपोस्थली है। गलता जी स्थित कुंड में स्नान धार्मिक महत्व है। तीर्थयात्री यहां पवित्र स्नान हेतु आते हैं। इस स्थान में मंदिर, मंडप और पवित्र कुंड है। गलता जी आने के लिए आगंतुक पहले रामगोपाल जी के मंदिर परिसर में आते हैं, जिसे स्थानीय लोगों द्वारा ’बंदर मंदिर’ कहा जाता है। इसे यह नाम हमारे यहां पाए जाने वाले ’बंदरों के एक बड़े समूह’ की वजह से मिला। हरियाली का खूबसूरत नजारा और उछलते कूदते बंदर क्षेत्र के खुशनुमा माहौल में इजाफा करते हैं। पहाड़ी की चोटी पर सूर्य देव को समर्पित एक छोटा मंदिर है, इसे ’सूर्यमंदिर’ कहा जाता है। दीवान कृपाराम द्वारा निर्मित यह मंदिर शहर के लोगों के लिए पूजनीय है।
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ईसरलाट:- (सरगासूली)
शहर के बीचो बीच 60 फ़ीट ऊंची भव्य मीनार ईसरलाट को स्वर्ग भेदी मीनार ’सरगासूली’ भी कहते हैं। राजा ईश्वर सिंह ने 1749 ईस्वी में इस मीनार को एक शानदार जीत की स्मृति में बनवाया था। त्रिपोलिया गेट के निकट स्थित इस मीनार के अंदर की तरफ ऊपर तक जाने के लिए सीढ़ियां बनी है, जिनसे चढ़कर ऊपर से जयपुर का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
गोविंद देव जी मंदिर: -
श्री गोविंद देव जी की आकर्षक प्रतिमा सवाई जयसिंह वृंदावन से लाए थे, जो यहां पूरे सम्मान से शहर के परकोटे में स्थित श्री गोविंद जी के मंदिर में स्थापित की गई। शाही परिवार और स्थानीय लोगों द्वारा पूजनीय गोविंद देव जी में सात झांकियों के माध्यम से दर्शन की समुचित व्यवस्था है।
शहर के बीचो बीच 60 फ़ीट ऊंची भव्य मीनार ईसरलाट को स्वर्ग भेदी मीनार ’सरगासूली’ भी कहते हैं। राजा ईश्वर सिंह ने 1749 ईस्वी में इस मीनार को एक शानदार जीत की स्मृति में बनवाया था। त्रिपोलिया गेट के निकट स्थित इस मीनार के अंदर की तरफ ऊपर तक जाने के लिए सीढ़ियां बनी है, जिनसे चढ़कर ऊपर से जयपुर का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
गोविंद देव जी मंदिर: -
श्री गोविंद देव जी की आकर्षक प्रतिमा सवाई जयसिंह वृंदावन से लाए थे, जो यहां पूरे सम्मान से शहर के परकोटे में स्थित श्री गोविंद जी के मंदिर में स्थापित की गई। शाही परिवार और स्थानीय लोगों द्वारा पूजनीय गोविंद देव जी में सात झांकियों के माध्यम से दर्शन की समुचित व्यवस्था है।
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🔷 राजस्थान की मीठे पानी की झीले 🔷
🔶 TRICK- "फाँफ सी उन जयराज के पीछे बालपुष्प आना" 🔶
💠 फाँ - फाँयसागर , अजमेर
💠 फ - फतेहसागर , उदयपुर
💠 सी - सीलीसेढ़ , अलवर
💠 उ - उदयसागर , उदयपुर
💠 न - नक्की , सिरोही
💠 जय - जयसमंद ,उदयपुर
💠 राज - राजसमंद , काकंरोली राजसमंद
💠 के - कोलायत , बीकानेर
💠 पीछे - पिछौला , उदयपुर
💠 बाल -बालसमंद , जोधपुर
💠 पुष्प -पुष्कर , अजमेर
💠 आना - आनासागर, अजमेर
🔶 TRICK- "फाँफ सी उन जयराज के पीछे बालपुष्प आना" 🔶
💠 फाँ - फाँयसागर , अजमेर
💠 फ - फतेहसागर , उदयपुर
💠 सी - सीलीसेढ़ , अलवर
💠 उ - उदयसागर , उदयपुर
💠 न - नक्की , सिरोही
💠 जय - जयसमंद ,उदयपुर
💠 राज - राजसमंद , काकंरोली राजसमंद
💠 के - कोलायत , बीकानेर
💠 पीछे - पिछौला , उदयपुर
💠 बाल -बालसमंद , जोधपुर
💠 पुष्प -पुष्कर , अजमेर
💠 आना - आनासागर, अजमेर
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🔻 राजस्थान की प्रमुख महिला व्यक्तित्व
🔷 लक्ष्मी कुमारी चुण्डावत
▪️ इन्हे रानी जी नाम से भी जाना जाता है । इनका जन्म 1916 में मेवाड़ के देवगढ़ ठिकाने में हुआ। इनका विवाह रावतसर के तेजसिंह के साथ हुआ। इनका कला, साहित्य व संस्कृति में विशेष योगदान रहा है ।
▪️ इन्होने अपने जीवनकाल में 35 पुस्तकों का प्रणयन (विमोचन) किया जिनमें प्रमुख पाबूजी री वातां, हुँकार दो सा, टाबरां री वातां, लव स्टोरी ऑफ राजस्थान, अमलोक वातां, मूमल, के रे चकवा बात आदि प्रमुख है ।
▪️ इनका राजनैतिक क्षेत्र में 11 वर्ष तक राज्य विधान सभा सदस्य तथा 1972 से 1978 तक राज्य सभा सदस्य के रूप में बनी रही ।
▪️नोट :- लक्ष्मी कुमारी चुण्डावत ने 1978 में न्यूयॉर्क में आयोजित निःशस्त्रीकरण सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
🔷 नारायणी देवी वर्मा
▪️ इनका जन्म 1902 में मध्यप्रदेश में हुआ। इनका विवाह माणिक्य लाल वर्मा के साथ हुआ । माणिक्य लाल वर्मा बिजौलिया ठिकाने में नौकरी करते थे ।
▪️ सन् 1934 में खाण्डलाई आश्रम डूंगरपुर में स्थापित किया ।
▪️ सन् 1939 में इन्होने मेवाड़ प्रजामण्डल में सक्रिय रूप से भाग लिया । इनको गिरफ्तार कर लिया गया । इन्होने 6 माह से अधिक अपनी पुत्री स्नेहलता वर्मा के साथ जेल में बिताये ।
▪️ सन् 1943 में इन्होने भीलवाड़ा में एक महिला आश्रम स्थापित किया । 12 मार्च 1947 को इनका निधन हो गया ।
🔷 रत्ना शास्त्री
▪️ इनका जन्म 1912 में मध्यप्रदेश में हुआ। इनका विवाह हीरा लाल शास्त्री के साथ हुआ । इनकी प्रारम्भिक शिक्षा – रतलाम में हुई ।
▪️ इन्होने जयपुर प्रजामण्डल में सक्रिय भूमिका अदा की ।
नोट :- इन्होने बिहार के प्रसिद्ध क्रान्तिकारी जगलाल चौधरी को शरण प्रदान की थी ।
▪️ स्वतन्त्रता के उपरान्त इन्हे पद्मश्री, पदम् विभूषण तथा जमना लाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।
▪️ इन्होने अपनी पुत्री शान्ता बाई की मृत्यु पर शान्ता बाई जीवन कुटीर नामक संस्था की स्थापना की इसे वर्तमान में वनस्थली विद्यापीठ (टोंक) के नाम से जाना जाता है ।
🔷 झलकारी बाई
▪️ राजस्थान का कोली समाज की बालिका ने सन् 1857 की क्रान्ति के समय रानी लक्ष्मी बाई के स्थान पर उसका वेश धारण करके युद्ध किया ।
🔷 हाड़ी रानी जसवन्त दे
▪️ जोधपुर शासक जसवन्त सिंह की पत्नी हाड़ी रानी जसवन्त दे ने जब राजा जसवन्त सिंह धरमत के युद्ध में घायल होकर लौटे तो उनकी पत्नी जसवन्त दे ने दुर्ग के दरवाजे नही खोले । जसवन्त सिंह द्वारा यह कहने पर कि हम विजयी होकर लोटे है इसी के उपरान्त रानी ने दरवाजे खोले तथा जसवन्त दे ने जसवन्त सिंह को चांदी के बर्तनों के स्थान पर लकड़ी के बर्तनों में भोजन कराया। जसवन्त दे का कथन है कि “राजपूत युद्ध में या तो विजयी होकर लौटते है, या मरकर” ।
🔷 धीर बाई
▪️ जैसलमेर के भाटी राजवंश की पुत्री धीर बाई जिसे इतिहास में भटीयाणी रानी के नाम से जाना जाता है के विवाह मेवाड़ के शासक उदय सिंह के साथ हुआ था । उदय सिंह ने अपनी इसी रानी के प्रभाव में आकर महाराणा प्रताप के स्थान पर जगमाल को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया ।
🔷 हाड़ी रानी
▪️ इसका मूल नाम सलह कंवर था । इनका जन्म बूंदी के जागीरदार संग्रामसिंह के घर में हुआ तथा इनका विवाह सलुम्बर के ठाकुर रतन सिंह चुण्डावत से हुआ । रतन सिंह मेवाड के तत्कालीन शासक राजसिंह की सेना में थे, जब औरंगजेब की सेना द्वारा मेवाड़ पर आक्रमण का खतरा मंडरा रहा था ऐसे समय में राजसिंह ने रतन सिंह को बुलावा भेजा ।
▪️ हाड़ी रानी ने युद्ध भूमि में जाते समय रतन सिंह चुण्डावत द्वारा निशानी मांगे जाने पर अपना शीश काटकर दे दिया था ।
🔷 नोट :- मेघराज मुकूल ने हाड़ीरानी पर “सेनाणी” नामक कविता लिखी है । जिसका शीर्षक है “चुण्डावत मांगी सेनाणी, सिर काट दियो क्षत्राणी”
🔷 गुलाब राय
▪️ जोधपुर महाराजा विजय सिंह की पासवान रानी गुलाबराय को कविराज श्यामल दास ने अपने ग्रन्थ “वीर विनोद” में “मारवाड़ की नूरजहाँ” नाम से संबोधित किया है ।
🔷 इन्दुमति गोयनका
▪️यह राजस्थान की मूल निवासी है, वर्तमान में कलकत्ता में है ।
▪️ सन् 1930 में सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौरान गिरफ्तार होने वाली राजस्थान की प्रथम महिला है, इन्हे बंगाल से गिरफ्तार किया गया था ।
🔷 यशोदा देवी
▪️ यह राजस्थान विधानसभा की प्रथम महिला सदस्य है । सन् 1953 में बांसवाड़ा विधानसभा उपचुनाव के दौरान विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुई!
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🔷 लक्ष्मी कुमारी चुण्डावत
▪️ इन्हे रानी जी नाम से भी जाना जाता है । इनका जन्म 1916 में मेवाड़ के देवगढ़ ठिकाने में हुआ। इनका विवाह रावतसर के तेजसिंह के साथ हुआ। इनका कला, साहित्य व संस्कृति में विशेष योगदान रहा है ।
▪️ इन्होने अपने जीवनकाल में 35 पुस्तकों का प्रणयन (विमोचन) किया जिनमें प्रमुख पाबूजी री वातां, हुँकार दो सा, टाबरां री वातां, लव स्टोरी ऑफ राजस्थान, अमलोक वातां, मूमल, के रे चकवा बात आदि प्रमुख है ।
▪️ इनका राजनैतिक क्षेत्र में 11 वर्ष तक राज्य विधान सभा सदस्य तथा 1972 से 1978 तक राज्य सभा सदस्य के रूप में बनी रही ।
▪️नोट :- लक्ष्मी कुमारी चुण्डावत ने 1978 में न्यूयॉर्क में आयोजित निःशस्त्रीकरण सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
🔷 नारायणी देवी वर्मा
▪️ इनका जन्म 1902 में मध्यप्रदेश में हुआ। इनका विवाह माणिक्य लाल वर्मा के साथ हुआ । माणिक्य लाल वर्मा बिजौलिया ठिकाने में नौकरी करते थे ।
▪️ सन् 1934 में खाण्डलाई आश्रम डूंगरपुर में स्थापित किया ।
▪️ सन् 1939 में इन्होने मेवाड़ प्रजामण्डल में सक्रिय रूप से भाग लिया । इनको गिरफ्तार कर लिया गया । इन्होने 6 माह से अधिक अपनी पुत्री स्नेहलता वर्मा के साथ जेल में बिताये ।
▪️ सन् 1943 में इन्होने भीलवाड़ा में एक महिला आश्रम स्थापित किया । 12 मार्च 1947 को इनका निधन हो गया ।
🔷 रत्ना शास्त्री
▪️ इनका जन्म 1912 में मध्यप्रदेश में हुआ। इनका विवाह हीरा लाल शास्त्री के साथ हुआ । इनकी प्रारम्भिक शिक्षा – रतलाम में हुई ।
▪️ इन्होने जयपुर प्रजामण्डल में सक्रिय भूमिका अदा की ।
नोट :- इन्होने बिहार के प्रसिद्ध क्रान्तिकारी जगलाल चौधरी को शरण प्रदान की थी ।
▪️ स्वतन्त्रता के उपरान्त इन्हे पद्मश्री, पदम् विभूषण तथा जमना लाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।
▪️ इन्होने अपनी पुत्री शान्ता बाई की मृत्यु पर शान्ता बाई जीवन कुटीर नामक संस्था की स्थापना की इसे वर्तमान में वनस्थली विद्यापीठ (टोंक) के नाम से जाना जाता है ।
🔷 झलकारी बाई
▪️ राजस्थान का कोली समाज की बालिका ने सन् 1857 की क्रान्ति के समय रानी लक्ष्मी बाई के स्थान पर उसका वेश धारण करके युद्ध किया ।
🔷 हाड़ी रानी जसवन्त दे
▪️ जोधपुर शासक जसवन्त सिंह की पत्नी हाड़ी रानी जसवन्त दे ने जब राजा जसवन्त सिंह धरमत के युद्ध में घायल होकर लौटे तो उनकी पत्नी जसवन्त दे ने दुर्ग के दरवाजे नही खोले । जसवन्त सिंह द्वारा यह कहने पर कि हम विजयी होकर लोटे है इसी के उपरान्त रानी ने दरवाजे खोले तथा जसवन्त दे ने जसवन्त सिंह को चांदी के बर्तनों के स्थान पर लकड़ी के बर्तनों में भोजन कराया। जसवन्त दे का कथन है कि “राजपूत युद्ध में या तो विजयी होकर लौटते है, या मरकर” ।
🔷 धीर बाई
▪️ जैसलमेर के भाटी राजवंश की पुत्री धीर बाई जिसे इतिहास में भटीयाणी रानी के नाम से जाना जाता है के विवाह मेवाड़ के शासक उदय सिंह के साथ हुआ था । उदय सिंह ने अपनी इसी रानी के प्रभाव में आकर महाराणा प्रताप के स्थान पर जगमाल को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया ।
🔷 हाड़ी रानी
▪️ इसका मूल नाम सलह कंवर था । इनका जन्म बूंदी के जागीरदार संग्रामसिंह के घर में हुआ तथा इनका विवाह सलुम्बर के ठाकुर रतन सिंह चुण्डावत से हुआ । रतन सिंह मेवाड के तत्कालीन शासक राजसिंह की सेना में थे, जब औरंगजेब की सेना द्वारा मेवाड़ पर आक्रमण का खतरा मंडरा रहा था ऐसे समय में राजसिंह ने रतन सिंह को बुलावा भेजा ।
▪️ हाड़ी रानी ने युद्ध भूमि में जाते समय रतन सिंह चुण्डावत द्वारा निशानी मांगे जाने पर अपना शीश काटकर दे दिया था ।
🔷 नोट :- मेघराज मुकूल ने हाड़ीरानी पर “सेनाणी” नामक कविता लिखी है । जिसका शीर्षक है “चुण्डावत मांगी सेनाणी, सिर काट दियो क्षत्राणी”
🔷 गुलाब राय
▪️ जोधपुर महाराजा विजय सिंह की पासवान रानी गुलाबराय को कविराज श्यामल दास ने अपने ग्रन्थ “वीर विनोद” में “मारवाड़ की नूरजहाँ” नाम से संबोधित किया है ।
🔷 इन्दुमति गोयनका
▪️यह राजस्थान की मूल निवासी है, वर्तमान में कलकत्ता में है ।
▪️ सन् 1930 में सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौरान गिरफ्तार होने वाली राजस्थान की प्रथम महिला है, इन्हे बंगाल से गिरफ्तार किया गया था ।
🔷 यशोदा देवी
▪️ यह राजस्थान विधानसभा की प्रथम महिला सदस्य है । सन् 1953 में बांसवाड़ा विधानसभा उपचुनाव के दौरान विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुई!
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📚राजस्थान कि प्रमुख छतरियां
✏देवी कुण्ड की छतरी -बीकानेर
✏महाराजा गंगासिंह की छतरियाँ -बीकानेर
✏सार्दुल सिंह की छतरियाँ -बीकानेर
✏बीकाजी की छतरी -बीकानेर
✏राव कल्याणमल की छतरी -बीकानेर
✏पालीवालों की छतरी -जैसलमेर
✏बडा बाग छतरी -जैसलमेर
✏बाबा गफुर की मजार -उदयपुर
✏महाराणा उदयसिंह की छतरी - गोगुन्दा
✏राणा प्रताप की छतरी -,बड़ौली (उदयपुर)
✏आहड़ छतरियां -उदयपुर
✏अमरगढ़ की छतरियां -भीलवाड़ा
✏गंगा बाई की छतरी -गंगापुर (भीलवाड़ा)
✏महाराणा कुंभा की छतरी - कुम्भलगढ
✏राणा सांगा की 8 खंभों की छतरी -मांडलगढ़ (भीलवाड़ा)
✏पीपाली की छतरी -चित्तौड़गढ़
✏रैदास की 8 खंभों की छतरी -चितौड़गढ
✏रावजी की 8 छतरियां -बेगूं (चित्तौड़गढ)
✏जयमल राठौड़ व कल्ला राठौड़ की छतरी -चितौड़गढ दुर्ग
✏क्षार बाग की छतरी -कोटा
✏पीपा जी की छतरी -गागरोन (झालावाड)
✏गैटोर की छतरियां -जयपुर
✏सवाई ईश्वरी सिंह की छतरी -सिटी पैलेस (जयपुर)
✏गुसाइयों की छतरियाँ -विराट नगर (जयपुर)
✏80 खम्भी की छतरी/मूसी महारानी की छतरी -अलवर
✏टेलिग्राम चैनल - RAS Desire
✏टहला/नैडा़ की छतरियां -अलवर
✏फतेह गुम्बद छतरी -अलवर
✏राजा बख्तावर सिंह की छतरी -अलवर
✏32 खम्भों की छतरी(जैत्रसिंह कि छतरी ) -रणथम्भौर सवाई माधोपुर
✏एक खंभे की छतरी/कुत्ते की छतरी -रणथम्भौर दुर्ग सवाई माधोपुर
✏राव शेखा की छतरी -परशुरामपुरा (झुंझुनू)
✏जोगीदास की छतरी -झुंझुनूं
✏मण्डोर को छतरियां -जोधपुर
✏गोरा-धाय की छत्तरियां -जोधपुर
✏बीस खम्भों की छतरी/सिंघवियों की छतरियां -जोधपुर
✏जोधपुर रानियों की छतरियां - पंचकुण्ड ,जोधपुर
✏सिंघवियों की छतरी -जोधपुर
✏अहाड़ा हिंगोला की छतरी -जोधपुर
✏जैसलमेर रानी की छतरी -जोधपुर
✏ब्राह्मण देवता की छतरी -(मण्डोर) जोधपुर
✏राजाओं के देवल -मण्डोर (जोधपुर)
✏महामंदिर छतरी -जोधपुर
✏अमरसिंह राठौड़ की 16 खंभों की छतरी- नागौर
✏लाछा गूजरी की छतरी -नागौर
✏मामा भान्जा(धन्ना-भींवा) की छतरी -जोधपुर
✏करोडों के कीर्ति धनी की छतरी -जोधपुर
✏सेनापति की छतरी -जोधपुर
✏कागा की छतरी -जोधपुर
✏चेतक की छतरी -बलीचा(हल्दीघाटी राजसमंद)
✏12 खंभों की छतरी(पृथ्वीराज सिसोदिया की) -कुंभलगढ़ दुर्ग (राजसमन्द)
✏कुंवर पृथ्वीराज की छतरी -कुंम्भलगढ दुर्ग (राजसमंद )
✏केसरबाग की छतरियां -बूंदी
✏84 खम्भों की छतरी -बूंदी
✏बन्जारों की छतरी -लालसोट, दौसा
✏गोपालसिंह की छतरी -करौली
✏बोहरा की छतरी - करौली
✏अकबर की छतरी -भरतपुर
✏खाण्डेराव की छतरी - गागर सौली भरतपुर
✏राव जैतसी की छतरी -हनुमानगढ
✏रसिया छतरी -टोंक
✏राजा जोधसिंह की छतरी -बदनौर ,भीलवाड़ा
✏अढाई दिन का झौपड़ा -अजमेर
✏आँतेड़ की छतरी -अजमेर
✏घास-फूस की छतरी:-बूंदी
✏रामगोपाल पोद्दार की छतरी - रामगढ़ सीकर
✏ जगन्नाथ कछवाहा कि छतरी (32 खंभों की छतरी) :-मांडलगढ़(भीलवाड़ा)
✏ थानेदार नाथूसिंह की छतरी - शाहबाद (बारां)
✏ अप्पाजी सिंधिया की छतरी – ताऊसर, नागौर
✏वीर दुर्गादास की छतरी :- उज्जैन (मध्य प्रदेश)
✏रूठी रानी की छतरी :- अजमेर
✏नाथों की छतरियां- जालौर
✏मिश्रजी की छतरियां- अलवर
✏ मानसिंह प्रथम की छतरी- आमेर (जयपुर)
✏देवी कुण्ड की छतरी -बीकानेर
✏महाराजा गंगासिंह की छतरियाँ -बीकानेर
✏सार्दुल सिंह की छतरियाँ -बीकानेर
✏बीकाजी की छतरी -बीकानेर
✏राव कल्याणमल की छतरी -बीकानेर
✏पालीवालों की छतरी -जैसलमेर
✏बडा बाग छतरी -जैसलमेर
✏बाबा गफुर की मजार -उदयपुर
✏महाराणा उदयसिंह की छतरी - गोगुन्दा
✏राणा प्रताप की छतरी -,बड़ौली (उदयपुर)
✏आहड़ छतरियां -उदयपुर
✏अमरगढ़ की छतरियां -भीलवाड़ा
✏गंगा बाई की छतरी -गंगापुर (भीलवाड़ा)
✏महाराणा कुंभा की छतरी - कुम्भलगढ
✏राणा सांगा की 8 खंभों की छतरी -मांडलगढ़ (भीलवाड़ा)
✏पीपाली की छतरी -चित्तौड़गढ़
✏रैदास की 8 खंभों की छतरी -चितौड़गढ
✏रावजी की 8 छतरियां -बेगूं (चित्तौड़गढ)
✏जयमल राठौड़ व कल्ला राठौड़ की छतरी -चितौड़गढ दुर्ग
✏क्षार बाग की छतरी -कोटा
✏पीपा जी की छतरी -गागरोन (झालावाड)
✏गैटोर की छतरियां -जयपुर
✏सवाई ईश्वरी सिंह की छतरी -सिटी पैलेस (जयपुर)
✏गुसाइयों की छतरियाँ -विराट नगर (जयपुर)
✏80 खम्भी की छतरी/मूसी महारानी की छतरी -अलवर
✏टेलिग्राम चैनल - RAS Desire
✏टहला/नैडा़ की छतरियां -अलवर
✏फतेह गुम्बद छतरी -अलवर
✏राजा बख्तावर सिंह की छतरी -अलवर
✏32 खम्भों की छतरी(जैत्रसिंह कि छतरी ) -रणथम्भौर सवाई माधोपुर
✏एक खंभे की छतरी/कुत्ते की छतरी -रणथम्भौर दुर्ग सवाई माधोपुर
✏राव शेखा की छतरी -परशुरामपुरा (झुंझुनू)
✏जोगीदास की छतरी -झुंझुनूं
✏मण्डोर को छतरियां -जोधपुर
✏गोरा-धाय की छत्तरियां -जोधपुर
✏बीस खम्भों की छतरी/सिंघवियों की छतरियां -जोधपुर
✏जोधपुर रानियों की छतरियां - पंचकुण्ड ,जोधपुर
✏सिंघवियों की छतरी -जोधपुर
✏अहाड़ा हिंगोला की छतरी -जोधपुर
✏जैसलमेर रानी की छतरी -जोधपुर
✏ब्राह्मण देवता की छतरी -(मण्डोर) जोधपुर
✏राजाओं के देवल -मण्डोर (जोधपुर)
✏महामंदिर छतरी -जोधपुर
✏अमरसिंह राठौड़ की 16 खंभों की छतरी- नागौर
✏लाछा गूजरी की छतरी -नागौर
✏मामा भान्जा(धन्ना-भींवा) की छतरी -जोधपुर
✏करोडों के कीर्ति धनी की छतरी -जोधपुर
✏सेनापति की छतरी -जोधपुर
✏कागा की छतरी -जोधपुर
✏चेतक की छतरी -बलीचा(हल्दीघाटी राजसमंद)
✏12 खंभों की छतरी(पृथ्वीराज सिसोदिया की) -कुंभलगढ़ दुर्ग (राजसमन्द)
✏कुंवर पृथ्वीराज की छतरी -कुंम्भलगढ दुर्ग (राजसमंद )
✏केसरबाग की छतरियां -बूंदी
✏84 खम्भों की छतरी -बूंदी
✏बन्जारों की छतरी -लालसोट, दौसा
✏गोपालसिंह की छतरी -करौली
✏बोहरा की छतरी - करौली
✏अकबर की छतरी -भरतपुर
✏खाण्डेराव की छतरी - गागर सौली भरतपुर
✏राव जैतसी की छतरी -हनुमानगढ
✏रसिया छतरी -टोंक
✏राजा जोधसिंह की छतरी -बदनौर ,भीलवाड़ा
✏अढाई दिन का झौपड़ा -अजमेर
✏आँतेड़ की छतरी -अजमेर
✏घास-फूस की छतरी:-बूंदी
✏रामगोपाल पोद्दार की छतरी - रामगढ़ सीकर
✏ जगन्नाथ कछवाहा कि छतरी (32 खंभों की छतरी) :-मांडलगढ़(भीलवाड़ा)
✏ थानेदार नाथूसिंह की छतरी - शाहबाद (बारां)
✏ अप्पाजी सिंधिया की छतरी – ताऊसर, नागौर
✏वीर दुर्गादास की छतरी :- उज्जैन (मध्य प्रदेश)
✏रूठी रानी की छतरी :- अजमेर
✏नाथों की छतरियां- जालौर
✏मिश्रजी की छतरियां- अलवर
✏ मानसिंह प्रथम की छतरी- आमेर (जयपुर)
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✅ थार विशेष (अति महत्वपूर्ण)🔰
🟥 थार का घड़ा - चंदन नलकूप
🟧 थार का लाल- स्वरूप खां मांगणियार
🟨 थार की कला - उस्ता कला
🟩 थार का कल्पवृक्ष- खेजड़ी
🟦 थार होटल- बाड़मेर
🟪 थार महोत्सव- बाड़मेर
⬛️ थार की गंगा- लूणी
⬜️ थार की बाई- गवरी बाई
🟫 थार की वैष्णो- तनोट माता
⬜️ थार की गायिका- मांड
🟪 थार/रेगिस्तान का जल महल- बाटाडू कुआं
🟥 थार का सागवान - रोहिड़ा
🟧 थार का चीता - गोडावण
🟨 थार का लता - रूक्मा देवी
🟥 थार का घड़ा - चंदन नलकूप
🟧 थार का लाल- स्वरूप खां मांगणियार
🟨 थार की कला - उस्ता कला
🟩 थार का कल्पवृक्ष- खेजड़ी
🟦 थार होटल- बाड़मेर
🟪 थार महोत्सव- बाड़मेर
⬛️ थार की गंगा- लूणी
⬜️ थार की बाई- गवरी बाई
🟫 थार की वैष्णो- तनोट माता
⬜️ थार की गायिका- मांड
🟪 थार/रेगिस्तान का जल महल- बाटाडू कुआं
🟥 थार का सागवान - रोहिड़ा
🟧 थार का चीता - गोडावण
🟨 थार का लता - रूक्मा देवी
👍4👌4😁2
राजस्थान की जलवायु
भारतीय मानसून एवं जलवायु की सर्वप्रथम व्याख्या अरबी यात्री अलमसूदी ने की थी।
जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक
1. अक्षांशीय स्थिति
2. अरावली पर्वतमाला की स्थिति
3. थार का मरूस्थल
4. समुद्र से दूरी -
5. स्थान की समुद्र तल या धरातल से ऊँचाई
6. महासागरीय धारा
7. स्थायी पवन
8. प्राकृतिक वनस्पति
9. तापमान
10. वर्षा और आर्द्रता
राजस्थान के जलवायु प्रदेश (भारतीय मौसम विभाग )
1. शुष्क जलवायु प्रदेश (औसत वार्षिक वर्षा 10-20 सेमी.) विस्तार क्षेत्र - शुष्क रेतीला मैदान बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, दक्षिणी श्रीगंगानगर, पश्चिमी जोधपुर (प्रतिनिधि नगर- जैसलमेर) विशेषता- मरुद्भिद वनस्पति (जीरोफाइट्स), ग्रीष्म ऋतु में लू व धूल भरी आंधियाँ, दैनिक तथा वार्षिक तापान्तर उच्च
2. अर्द्ध शुष्क जलवायु प्रदेश- (औसत वार्षिक वर्षा 20-40 सेमी.)विस्तार क्षेत्र - अरावली के पश्चिम में श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, सीकर, झुंझुनूँ, चूरू, नागौर, जोधपुर, पाली, जालोर जिले । (प्रतिनिधि नगर जोधपुर ) विशेषता स्टेपी तुल्य वनस्पति
3. उप आर्द्र जलवायु प्रदेश (औसत वार्षिक वर्षा 40-60 सेमी.) विस्तार क्षेत्र - अरावली के समान्तर वाले जिले- जयपुर, दौसा, अलवर, टोंक, अजमेर, भीलवाड़ा, सिरोही। (प्रतिनिधि नगर - जयपुर)
4. आर्द्र जलवायु प्रदेश (औसत वार्षिक वर्षा 60-80 सेमी.)विस्तार क्षेत्र - भरतपुर, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर, बूँदी, राजसमंद,चित्तौड़गढ़ (प्रतिनिधि नगर- सवाई माधोपुर)
5. अति आर्द्र प्रदेश (औसत वार्षिक वर्षा 80-100 सेमी. या अधिक) विस्तार क्षेत्र - झालावाड़, कोटा, बारों, प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, माउंट आबू। (प्रतिनिधि नगर- झालावाड़) विशेषता - सवाना तुल्य वनस्पति, सबसे छोटा जलवायु प्रदेश
• कोपेन के अनुसार राजस्थान के जलवायु प्रदेश
1. Aw - उष्ण कटिबन्धीय आर्द्र जलवायु प्रदेश- बाँसवाड़ा सवाना तुल्य - वनस्पति
2. BShw - उष्ण कटिबंधीय अर्द्ध शुष्क जलवायु प्रदेश नागौर स्टेपी तुल्य वनस्पति
3. BWhw - उष्ण कटिबंधीय शुष्क जलवायु प्रदेश- बीकानेर मरुद्भिद वनस्पति (जीरोफाइट्स)
4. Cwg - उपआर्द्र जलवायु प्रदेश-टोंक
राजस्थान में ऋतुएँ
1. ग्रीष्म ऋतु - ( अवधि मार्च से मध्य जून)
राजस्थान में सबसे गर्म महीना - जून राजस्थान में सबसे गर्म जिला- चूरू
राजस्थान में सबसे गर्म स्थान- फलौदी राजस्थान में सर्वाधिक आंधियों - श्रीगंगानगर (27 दिन), हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर व अजमेर
राज्य में न्यूनतम आंधियों वाला जिला- झालावाड़ (3 दिन), कोटा।
लू - ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली गर्म एवं शुष्क स्थानीय पवन
भभूल्या - आकस्मिक आने वाला वायु का चक्रवात
2. वर्षा ऋतु - (अवधि मध्य जून से सितम्बर) राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दो शाखाएँ प्रवेश करती हैं।
(i) अरब सागरीय मानसून शाखा
(ii) बंगाल की खाड़ी का मानसून शाखा
(i) अरब सागरीय मानसून शाखा
अरब सागरीय मानसूनी शाखा राजस्थान में सर्वप्रथम बाँसवाड़ा जिले में प्रवेश करती है। (बांसवाड़ा को राजस्थान का मानसून प्रवेश द्वार कहा जाता है।)
इस शाखा से राजस्थान के बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर तथा सिरोही में 10% वर्षा होती है।
अरब सागरीय मानसून का सर्वाधिक ठहराव तथा सर्वाधिक सक्रियता सिरोही जिले में होती है।
अरब सागरीय मानसून की राजस्थान में दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व रहती है।
अरब सागरीय मानसून से पश्चिमी राजस्थान में वर्षा नहीं होती है। इसका प्रमुख कारण अरावली की दिक स्थिति।
(ii) बंगाल की खाड़ी मानसून शाखा
दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी को स्थानीय भाषा में 'पुरवाइयाँ' कहा जाता है।
बंगाल की खाड़ी शाखा राजस्थान के झालावाड़ जिले से प्रवेश करती है राजस्थान के अधिकांश जिलों में लगभग 90% मानूसनी वर्षा करती है। इस मानसून की राजस्थान में दिशा दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम है।
इस शाखा से थार के मरुस्थल में वर्षा कम होती है। इसका प्रमुख कारण अरावली का 'वृष्टि छाया' प्रदेश का होना है। राजस्थान में वर्षा का वार्षिक औसत 57.51 सेमी. है।
वर्षा की मात्रा दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की और कम होती जाती है। राज्य में सर्वाधिक आर्द्रता वाला महीना अगस्त
राज्य में सबसे कम आर्द्रता वाला महीना- अप्रैल
राज्य में सर्वाधिक आर्द्रता वाला जिला- झालावाड़
राज्य में सबसे कम आर्द्रता वाला जिला - जैसलमेर
राज्य में सर्वाधिक आर्द्रता वाला स्थान- माउण्ट आबू (सिरोही) राज्य में सबसे कम आर्द्रता वाला स्थान फलोदी (जोधपुर)
3. शीत ऋतु - ( अवधि मध्य नवम्बर से फरवरी)
राजस्थान का सबसे ठण्डा महीना - जनवरी
सबसे ठण्डा जिला - चूरू
सबसे ठण्डा स्थान - माउण्ट आबू
भारतीय मानसून एवं जलवायु की सर्वप्रथम व्याख्या अरबी यात्री अलमसूदी ने की थी।
जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक
1. अक्षांशीय स्थिति
2. अरावली पर्वतमाला की स्थिति
3. थार का मरूस्थल
4. समुद्र से दूरी -
5. स्थान की समुद्र तल या धरातल से ऊँचाई
6. महासागरीय धारा
7. स्थायी पवन
8. प्राकृतिक वनस्पति
9. तापमान
10. वर्षा और आर्द्रता
राजस्थान के जलवायु प्रदेश (भारतीय मौसम विभाग )
1. शुष्क जलवायु प्रदेश (औसत वार्षिक वर्षा 10-20 सेमी.) विस्तार क्षेत्र - शुष्क रेतीला मैदान बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, दक्षिणी श्रीगंगानगर, पश्चिमी जोधपुर (प्रतिनिधि नगर- जैसलमेर) विशेषता- मरुद्भिद वनस्पति (जीरोफाइट्स), ग्रीष्म ऋतु में लू व धूल भरी आंधियाँ, दैनिक तथा वार्षिक तापान्तर उच्च
2. अर्द्ध शुष्क जलवायु प्रदेश- (औसत वार्षिक वर्षा 20-40 सेमी.)विस्तार क्षेत्र - अरावली के पश्चिम में श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, सीकर, झुंझुनूँ, चूरू, नागौर, जोधपुर, पाली, जालोर जिले । (प्रतिनिधि नगर जोधपुर ) विशेषता स्टेपी तुल्य वनस्पति
3. उप आर्द्र जलवायु प्रदेश (औसत वार्षिक वर्षा 40-60 सेमी.) विस्तार क्षेत्र - अरावली के समान्तर वाले जिले- जयपुर, दौसा, अलवर, टोंक, अजमेर, भीलवाड़ा, सिरोही। (प्रतिनिधि नगर - जयपुर)
4. आर्द्र जलवायु प्रदेश (औसत वार्षिक वर्षा 60-80 सेमी.)विस्तार क्षेत्र - भरतपुर, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर, बूँदी, राजसमंद,चित्तौड़गढ़ (प्रतिनिधि नगर- सवाई माधोपुर)
5. अति आर्द्र प्रदेश (औसत वार्षिक वर्षा 80-100 सेमी. या अधिक) विस्तार क्षेत्र - झालावाड़, कोटा, बारों, प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, माउंट आबू। (प्रतिनिधि नगर- झालावाड़) विशेषता - सवाना तुल्य वनस्पति, सबसे छोटा जलवायु प्रदेश
• कोपेन के अनुसार राजस्थान के जलवायु प्रदेश
1. Aw - उष्ण कटिबन्धीय आर्द्र जलवायु प्रदेश- बाँसवाड़ा सवाना तुल्य - वनस्पति
2. BShw - उष्ण कटिबंधीय अर्द्ध शुष्क जलवायु प्रदेश नागौर स्टेपी तुल्य वनस्पति
3. BWhw - उष्ण कटिबंधीय शुष्क जलवायु प्रदेश- बीकानेर मरुद्भिद वनस्पति (जीरोफाइट्स)
4. Cwg - उपआर्द्र जलवायु प्रदेश-टोंक
राजस्थान में ऋतुएँ
1. ग्रीष्म ऋतु - ( अवधि मार्च से मध्य जून)
राजस्थान में सबसे गर्म महीना - जून राजस्थान में सबसे गर्म जिला- चूरू
राजस्थान में सबसे गर्म स्थान- फलौदी राजस्थान में सर्वाधिक आंधियों - श्रीगंगानगर (27 दिन), हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर व अजमेर
राज्य में न्यूनतम आंधियों वाला जिला- झालावाड़ (3 दिन), कोटा।
लू - ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली गर्म एवं शुष्क स्थानीय पवन
भभूल्या - आकस्मिक आने वाला वायु का चक्रवात
2. वर्षा ऋतु - (अवधि मध्य जून से सितम्बर) राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दो शाखाएँ प्रवेश करती हैं।
(i) अरब सागरीय मानसून शाखा
(ii) बंगाल की खाड़ी का मानसून शाखा
(i) अरब सागरीय मानसून शाखा
अरब सागरीय मानसूनी शाखा राजस्थान में सर्वप्रथम बाँसवाड़ा जिले में प्रवेश करती है। (बांसवाड़ा को राजस्थान का मानसून प्रवेश द्वार कहा जाता है।)
इस शाखा से राजस्थान के बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर तथा सिरोही में 10% वर्षा होती है।
अरब सागरीय मानसून का सर्वाधिक ठहराव तथा सर्वाधिक सक्रियता सिरोही जिले में होती है।
अरब सागरीय मानसून की राजस्थान में दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व रहती है।
अरब सागरीय मानसून से पश्चिमी राजस्थान में वर्षा नहीं होती है। इसका प्रमुख कारण अरावली की दिक स्थिति।
(ii) बंगाल की खाड़ी मानसून शाखा
दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी को स्थानीय भाषा में 'पुरवाइयाँ' कहा जाता है।
बंगाल की खाड़ी शाखा राजस्थान के झालावाड़ जिले से प्रवेश करती है राजस्थान के अधिकांश जिलों में लगभग 90% मानूसनी वर्षा करती है। इस मानसून की राजस्थान में दिशा दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम है।
इस शाखा से थार के मरुस्थल में वर्षा कम होती है। इसका प्रमुख कारण अरावली का 'वृष्टि छाया' प्रदेश का होना है। राजस्थान में वर्षा का वार्षिक औसत 57.51 सेमी. है।
वर्षा की मात्रा दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की और कम होती जाती है। राज्य में सर्वाधिक आर्द्रता वाला महीना अगस्त
राज्य में सबसे कम आर्द्रता वाला महीना- अप्रैल
राज्य में सर्वाधिक आर्द्रता वाला जिला- झालावाड़
राज्य में सबसे कम आर्द्रता वाला जिला - जैसलमेर
राज्य में सर्वाधिक आर्द्रता वाला स्थान- माउण्ट आबू (सिरोही) राज्य में सबसे कम आर्द्रता वाला स्थान फलोदी (जोधपुर)
3. शीत ऋतु - ( अवधि मध्य नवम्बर से फरवरी)
राजस्थान का सबसे ठण्डा महीना - जनवरी
सबसे ठण्डा जिला - चूरू
सबसे ठण्डा स्थान - माउण्ट आबू
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