🔻 राजस्थान के जिलों की आकृति 🔻
▪️राजस्थान की आकृति :- विषम कोणिय चतुर्भुज अथवा पतंगाकार
🔻 इसके बारे में सर्वप्रथम बताने वाला विद्वान टी. एच. हेण्डले था
▪️जैसलमेर जिले का आकार :- सात भुजाओं वाले अनियमित बहुभुज के जैसा
▪️जालौर जिले की आकृति :- समुद्र में गोता लगाती मछली(वहेल मछली) के जैसी
▪️उदयपुर जिले की आकृति :- ऑस्ट्रेलिया के जैसी
▪️उदयपुर संभाग की आकृति :- श्रीलंका के समान
▪️चितौड़ जिले की आकृति :- घोडे की नाल के जैसी
▪️चितौड़ के मुख्य भाग की आकृति :- ईल्ली के समान
▪️भीलवाडा की आकृति :- आयताकार
▪️धौलपुर व करौली जिले की आकृति :- बतख के समान
▪️भरतपुर जिले की आकृति :- गिलहरीनुमा
▪️सीकर जिले की आकृति :- अर्द्धचन्दाकार/प्याले नूमा/कटोरे नूमा
▪️हनुमानगढ जिले की आकृति :- कुर्सी/सोफे/अंग्रेजी के L अक्षर के जैसी
▪️जोधपुर की आकृति :- मयूर के समान
▪️राजसमंद जिले की आकृति :- तिलक के समान
▪️अजमेर जिले की आकृति :- त्रिभुजाकार
▪️अजमेर संभाग की आकृति :- जम्मू कश्मीर के समान
▪️टोंक जिले की आकृति :- सम चतुर्भुज अथवा पतंगाकार है जिसके पूर्वी तथा पश्चिमी किनारे अन्दर की ओर धसै हुए
▪️दौसा जिले की आकृति :- धनुषाकार
▪️राजस्थान की आकृति :- विषम कोणिय चतुर्भुज अथवा पतंगाकार
🔻 इसके बारे में सर्वप्रथम बताने वाला विद्वान टी. एच. हेण्डले था
▪️जैसलमेर जिले का आकार :- सात भुजाओं वाले अनियमित बहुभुज के जैसा
▪️जालौर जिले की आकृति :- समुद्र में गोता लगाती मछली(वहेल मछली) के जैसी
▪️उदयपुर जिले की आकृति :- ऑस्ट्रेलिया के जैसी
▪️उदयपुर संभाग की आकृति :- श्रीलंका के समान
▪️चितौड़ जिले की आकृति :- घोडे की नाल के जैसी
▪️चितौड़ के मुख्य भाग की आकृति :- ईल्ली के समान
▪️भीलवाडा की आकृति :- आयताकार
▪️धौलपुर व करौली जिले की आकृति :- बतख के समान
▪️भरतपुर जिले की आकृति :- गिलहरीनुमा
▪️सीकर जिले की आकृति :- अर्द्धचन्दाकार/प्याले नूमा/कटोरे नूमा
▪️हनुमानगढ जिले की आकृति :- कुर्सी/सोफे/अंग्रेजी के L अक्षर के जैसी
▪️जोधपुर की आकृति :- मयूर के समान
▪️राजसमंद जिले की आकृति :- तिलक के समान
▪️अजमेर जिले की आकृति :- त्रिभुजाकार
▪️अजमेर संभाग की आकृति :- जम्मू कश्मीर के समान
▪️टोंक जिले की आकृति :- सम चतुर्भुज अथवा पतंगाकार है जिसके पूर्वी तथा पश्चिमी किनारे अन्दर की ओर धसै हुए
▪️दौसा जिले की आकृति :- धनुषाकार
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🛑वर्तमान में राजस्थान में रोप-वे -
1. सुंधा माता जालोर - लंबाई 800 मी. ( 20 Dec. 2006 )
2. मंशापूर्ण करणीमाता उदयपुर – लंबाई 387 मी. ( 2008 )
3. सावित्री माता पुष्कर – लंबाई 700 मी. ( 2016 )
4. सामोद वीर हनुमान मंदिर चौमू(जयपुर) – 400 मी. ( 25 मई 2019 )
1. सुंधा माता जालोर - लंबाई 800 मी. ( 20 Dec. 2006 )
2. मंशापूर्ण करणीमाता उदयपुर – लंबाई 387 मी. ( 2008 )
3. सावित्री माता पुष्कर – लंबाई 700 मी. ( 2016 )
4. सामोद वीर हनुमान मंदिर चौमू(जयपुर) – 400 मी. ( 25 मई 2019 )
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✨️राजस्थान के प्रमुख प्रथम गाँव
▪️प्रथम ODF+ गांव - जाहोता (जयपुर)
▪️प्रथम सेफ विलेज - बड़कोचर (ब्यावर)
▪️बेहत्तर जल प्रबन्धन - लापोडिया (दूदू,जयपुर )
▪️राष्ट्रीय स्तर पर हेल्दी विलेज - जवानपुरा ( जयपुर )
▪️प्रथम मिनी फूड पार्क - बांदरा (बाड़मेर)
▪️प्रथम मिनी एग्रो पार्क - चैनपुरा ( निवाई , टोंक)
◾️प्रथम सौर पम्म - कापडियावास (जयपुर )
◾️प्रथम सौर पैनल - भालोजी ( जयपुर )
▪️मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना में 100% पंजीकृत होने वाली प्रथम पंचायत - नरसाणा (जालोर)
▪️प्रथम सौर ऊर्जाकृत गांव - नयागांव , जयपुर
▪️प्रथम ODF+ गांव - जाहोता (जयपुर)
▪️प्रथम सेफ विलेज - बड़कोचर (ब्यावर)
▪️बेहत्तर जल प्रबन्धन - लापोडिया (दूदू,जयपुर )
▪️राष्ट्रीय स्तर पर हेल्दी विलेज - जवानपुरा ( जयपुर )
▪️प्रथम मिनी फूड पार्क - बांदरा (बाड़मेर)
▪️प्रथम मिनी एग्रो पार्क - चैनपुरा ( निवाई , टोंक)
◾️प्रथम सौर पम्म - कापडियावास (जयपुर )
◾️प्रथम सौर पैनल - भालोजी ( जयपुर )
▪️मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना में 100% पंजीकृत होने वाली प्रथम पंचायत - नरसाणा (जालोर)
▪️प्रथम सौर ऊर्जाकृत गांव - नयागांव , जयपुर
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▪ राजस्थान के कुछ महत्वपूर्ण महोत्सव
- ग्रीष्म महोत्सव - माउंट आबू, सिरोही
- थार महोत्सव - बाड़मेर
- डीग महोत्सव - भरतपुर
- मारवाड़ महोत्सव - जोधपुर
- मरु महोत्सव - जैसलमेर
- मत्स्य महोत्सव - अलवर
- हाथी महोत्सव - जयपुर
- ऊंट महोत्सव - बीकानेर
- मीरा महोत्सव - चित्तौड़गढ़
- बैलून महोत्सव - बाड़मेर
- शरद महोत्सव - माउंट आबू, सिरोही
- ग्रीष्म महोत्सव - माउंट आबू, सिरोही
- थार महोत्सव - बाड़मेर
- डीग महोत्सव - भरतपुर
- मारवाड़ महोत्सव - जोधपुर
- मरु महोत्सव - जैसलमेर
- मत्स्य महोत्सव - अलवर
- हाथी महोत्सव - जयपुर
- ऊंट महोत्सव - बीकानेर
- मीरा महोत्सव - चित्तौड़गढ़
- बैलून महोत्सव - बाड़मेर
- शरद महोत्सव - माउंट आबू, सिरोही
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🛫 राजस्थान के प्रमुख हवाई अड्डे 🛩
🔻 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: यह जयपुर से 10 किमी की दूरी पर स्थित है।
1. सांगानेर हवाई अड्डा - जयपुर
2. नल हवाई अड्डा - बीकानेर
3. कोटा हवाई अड्डा - कोटा
4. जैसलमेर हवाई अड्डा - जैसलमेर
5. रातानाडा हवाई अड्डा - जोधपुर
6. डबोक हवाई अड्डा - उदयपुर
📚Share जरूर करें....
🔻 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: यह जयपुर से 10 किमी की दूरी पर स्थित है।
1. सांगानेर हवाई अड्डा - जयपुर
2. नल हवाई अड्डा - बीकानेर
3. कोटा हवाई अड्डा - कोटा
4. जैसलमेर हवाई अड्डा - जैसलमेर
5. रातानाडा हवाई अड्डा - जोधपुर
6. डबोक हवाई अड्डा - उदयपुर
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ओमप्रकाश मिठारवाल
☞इन्हें वर्ष 2022 में अर्जुन पुरस्कार प्राप्त हुआ है !
☞ इनका संबंध राजस्थान के सीकर जिले से है!
☞ ओमप्रकाश मिठारवाल का संबंध निशानेबाजी से है!
☞ 2018 में चांगवान में आयोजित विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप में 50 मीटर पिस्टल में स्वर्ण पदक प्राप्त किया था!
☞ 2018 में गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक प्राप्त किया!
करणी सिंह (बीकानेर) :-
☞ करणी सिंह प्रथम अर्जुन पुरस्कार विजेता राजस्थानी थे !
☞ इन्हें 1961 में निशानेबाजी खेल में अर्जुन पुरस्कार प्राप्त हुआ!
✿अर्जुन पुरस्कार: शुरुआत :- 1961
☞ सबसे पुराना खेल पुरस्कार है !!
पुरस्कार राशि - 15 लाख रूपये
☞इन्हें वर्ष 2022 में अर्जुन पुरस्कार प्राप्त हुआ है !
☞ इनका संबंध राजस्थान के सीकर जिले से है!
☞ ओमप्रकाश मिठारवाल का संबंध निशानेबाजी से है!
☞ 2018 में चांगवान में आयोजित विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप में 50 मीटर पिस्टल में स्वर्ण पदक प्राप्त किया था!
☞ 2018 में गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक प्राप्त किया!
करणी सिंह (बीकानेर) :-
☞ करणी सिंह प्रथम अर्जुन पुरस्कार विजेता राजस्थानी थे !
☞ इन्हें 1961 में निशानेबाजी खेल में अर्जुन पुरस्कार प्राप्त हुआ!
✿अर्जुन पुरस्कार: शुरुआत :- 1961
☞ सबसे पुराना खेल पुरस्कार है !!
पुरस्कार राशि - 15 लाख रूपये
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🔻 वर्तमान में राजस्थान के 16 कंजर्वेशन रिजर्व की सूची-
(1) बीसलपुर (टोंक ) 2008
(2) जोहड़बीड-गढ़वाल (बीकानेर) - 2008
(3) सुंधामाता(जालौर व सिरोही ) 2008
(4) गुढ़ा विश्नोई (जोधपुर) - 2011
(5) शाकम्भरी (सीकर व झुंझुनू )2012
(6) गोगेलाव(नागौर ) 2012
(7) बीड़ झुंझूनू(झुंझुनू) - 2012
(8) रोटू(नागौर)2012
(9) उम्मेद गंज पक्षी विहार (कोटा)2012
(10) जवाई बांध लेपर्ड (पाली) 2013
(11) बांसियाल-खेतड़ी (झुंझूनू ) 2017
(12) बांसियाल-खेतड़ी-बागोर (झुंझूनू)2018
(13) जवाई बांध लैपर्ड -II (पाली) 2018
(14) मनसा माता ( झुंझुनु )- 2019
(15) शाहबाद के जंगल (बारां (2021)
(16) रणखार (जालौर)- सबसे नवीनतम
🔷 नोट : 25 अप्रैल, 2022 को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 36 के तहत जालौर के चितलवाना क्षेत्र के रणखार (7288.61 हेक्टेयर) को राज्य का 16वाँ कन्जर्वेशन रिजर्व घोषित करने की अधिसूचना जारी की गई है ! 💕🙏
(1) बीसलपुर (टोंक ) 2008
(2) जोहड़बीड-गढ़वाल (बीकानेर) - 2008
(3) सुंधामाता(जालौर व सिरोही ) 2008
(4) गुढ़ा विश्नोई (जोधपुर) - 2011
(5) शाकम्भरी (सीकर व झुंझुनू )2012
(6) गोगेलाव(नागौर ) 2012
(7) बीड़ झुंझूनू(झुंझुनू) - 2012
(8) रोटू(नागौर)2012
(9) उम्मेद गंज पक्षी विहार (कोटा)2012
(10) जवाई बांध लेपर्ड (पाली) 2013
(11) बांसियाल-खेतड़ी (झुंझूनू ) 2017
(12) बांसियाल-खेतड़ी-बागोर (झुंझूनू)2018
(13) जवाई बांध लैपर्ड -II (पाली) 2018
(14) मनसा माता ( झुंझुनु )- 2019
(15) शाहबाद के जंगल (बारां (2021)
(16) रणखार (जालौर)- सबसे नवीनतम
🔷 नोट : 25 अप्रैल, 2022 को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 36 के तहत जालौर के चितलवाना क्षेत्र के रणखार (7288.61 हेक्टेयर) को राज्य का 16वाँ कन्जर्वेशन रिजर्व घोषित करने की अधिसूचना जारी की गई है ! 💕🙏
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राजस्थान के चारण साहित्य के प्रबंध काव्य
काव्य तथा लेखक :
1. वीरभायण : बादर ढाढी
2. अचलदास खींची री वचनिका : गाडन शिवदास
3. राव रिणमल रो रूपक : गाढण पसाइत
4. गुण जोधायण : गाढण पसाइत
5. कान्हड़दे प्रबंध : पद्मनाभ
6. राव हमीरदेव चौपाई : भाउंड व्यास
7. राव जैतसी रो पाछड़ी छन्द : बीठू सूजा
8. रावल माला रो गुण : बारहठ आसा
9. पृथ्वीराज रासो : चंदबरदाई
10. झूलणा महाराज रायसिंघजी रा : सांदू माला
काव्य तथा लेखक :
1. वीरभायण : बादर ढाढी
2. अचलदास खींची री वचनिका : गाडन शिवदास
3. राव रिणमल रो रूपक : गाढण पसाइत
4. गुण जोधायण : गाढण पसाइत
5. कान्हड़दे प्रबंध : पद्मनाभ
6. राव हमीरदेव चौपाई : भाउंड व्यास
7. राव जैतसी रो पाछड़ी छन्द : बीठू सूजा
8. रावल माला रो गुण : बारहठ आसा
9. पृथ्वीराज रासो : चंदबरदाई
10. झूलणा महाराज रायसिंघजी रा : सांदू माला
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🔻 मानगढ़ नरसंहार : 1500 आदिवासियों की मौत
▪️17 नवम्बर 1913 के दिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर गोविंद गुरु का जन्म दिन मनाने के लिए आदिवासी भक्तों की टोलियां मानगढ़ धाम के पहाड़ पर जुटी थी।
▪️इसी दिन खेरवाड़ा से ब्रिटिश बटालियन और गुजरात के दाहोद से अंग्रेजी सेना को बुलाया गया था।
▪️अंग्रेजों ने मानगढ़ धाम की सड़क के पार समांतर पहाड़ पर खच्चरों से मशीन गन और तोप पहुंचाए थे।
▪️मेजर हैमिल्टन और उनके तीन अफसरों ने हथियारबंद फौज के साथ मानगढ़ पहाड़ी को तीन ओर से घेर लिया था।
▪️खेरवाड़ा से आई अंग्रेजी सेना ने रात में पूरा सफर तय कर पहाड़ियों पर हथियार जमा दिए थे।
▪️अगली सुबह अंग्रेजी फौज के कर्नल शटन का आदेश मिलते ही सेना ने गोलीबारी करना शुरू कर दिया।
▪️आदिवासियों पर तोप और तत्कालीन मशीन गनों से हमला बोल दिया गया।
▪️इस हमले में 1500 आदिवासियों की मौत हो गई थी।
▪️17 नवम्बर 1913 के दिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर गोविंद गुरु का जन्म दिन मनाने के लिए आदिवासी भक्तों की टोलियां मानगढ़ धाम के पहाड़ पर जुटी थी।
▪️इसी दिन खेरवाड़ा से ब्रिटिश बटालियन और गुजरात के दाहोद से अंग्रेजी सेना को बुलाया गया था।
▪️अंग्रेजों ने मानगढ़ धाम की सड़क के पार समांतर पहाड़ पर खच्चरों से मशीन गन और तोप पहुंचाए थे।
▪️मेजर हैमिल्टन और उनके तीन अफसरों ने हथियारबंद फौज के साथ मानगढ़ पहाड़ी को तीन ओर से घेर लिया था।
▪️खेरवाड़ा से आई अंग्रेजी सेना ने रात में पूरा सफर तय कर पहाड़ियों पर हथियार जमा दिए थे।
▪️अगली सुबह अंग्रेजी फौज के कर्नल शटन का आदेश मिलते ही सेना ने गोलीबारी करना शुरू कर दिया।
▪️आदिवासियों पर तोप और तत्कालीन मशीन गनों से हमला बोल दिया गया।
▪️इस हमले में 1500 आदिवासियों की मौत हो गई थी।
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क्या आप जानते है ...... 🔲
✍✍ राजस्थान में स्थापित व प्रस्तावित सबसे बड़े सोलर पार्क -
1. भड़ला सोलर पार्क (जोधपुर) 2245MW
2. फतेहगढ़ पार्क, जैसलमेर (अडानी ग्रुप)- 1500 MW
3. पुंगल ,बीकानेर (कोल इंडिया) - 1190 MW
4. नोख सोलर पार्क (जैसलमेर) - 925MW
5. फलोदी- पोकरण सोलर पार्क-750MW
✍✍ राजस्थान में स्थापित व प्रस्तावित सबसे बड़े सोलर पार्क -
1. भड़ला सोलर पार्क (जोधपुर) 2245MW
2. फतेहगढ़ पार्क, जैसलमेर (अडानी ग्रुप)- 1500 MW
3. पुंगल ,बीकानेर (कोल इंडिया) - 1190 MW
4. नोख सोलर पार्क (जैसलमेर) - 925MW
5. फलोदी- पोकरण सोलर पार्क-750MW
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🔵 'संगीत नाटक अकादमी' (जोधपुर) द्वारा सुप्रसिद्ध अभिनेत्री एवं गायिका इला अरुण को "फैलोशिप सम्मान" देने की घोषणा।
🔵 राष्ट्रीय स्वच्छता विद्यालय पुरस्कार 2021-22
• राज. के दो स्कूल राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित
1. स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल, पनवाड़ा, टोंक
2. राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, गंगापुर, भीलवाड़ा
• राज. के दो स्कूल राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित
1. स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल, पनवाड़ा, टोंक
2. राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, गंगापुर, भीलवाड़ा
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जयपुर (गुलाबी नगर) के प्रमुख पर्यटक स्थल
हवामहल:-
बाहर की तरफ से भगवान कृष्ण के मुकुट जैसा दिखाई देने वाला यह महल अनूठा है। सन् 1799 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा बनवाया गया यह 5 मंजिला है तथा इसका डिजाइनर वास्तुकार लालचंद उस्ता द्वारा तैयार किया गया था। गुलाबी शहर का प्रतीक हवामहल, बलुआ पत्थर से बना राजस्थानी वास्तुकला और मुगल शैली का मिश्रण है। इसकी दीवारें सिर्फ डेढ़ फुट चौड़ी है तथा 953 बेहद सुंदर आकर्षक छोटे छोटे आकार के झरोखे है। इसे बनाने का मूल उद्देश्य था कि शहर में होने वाले मेले-त्योहारों और जुलूस को महारानियां इस महल के अंदर बैठकर देख सके। हवामहल गर्मी के मौसम में भी इन झरोखों के कारण वातानुकूलित रहता है।
आमेर महल:-
जयपुर से 11 किलोमीटर की दूरी पर कछवाहो की पुरानी राजधानी आमेर, अपने किले और स्थापत्य के लिए पर्यटकों का मुख्य आकर्षण है। यूनेस्को की ’विश्व धरोहर’ सूची में शामिल, पूर्व में कच्छवाहा राजपूतों की राजधानी आमेर महल ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यह हिंदू व मुगल शैली का सुंदर मिश्रण है। आमेर का महल सन् 1592 में राजा मानसिंह प्रथम ने दुश्मनों से मुकाबला और बचाव करने के लिए बनवाया था। आमेर महल का आंतरिक भाग, लाल बलुआ पत्थर तथा संगमर से बनाया गया तथा इसमें नक्ककाशी का कार्य बहुमूल्य पत्थरों की जड़ाई, मीनाकारी का काम, पच्चीकारी काम, जगह-जगह बड़े-बड़े दर्पण इसकी भव्यता को चार चांद लगाते हैं।
जंतर मंतर:-
जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा बनाई गई पांच खगोलीय वेधशालाओ में सबसे विशाल है, जयपुर की यह वैद्यशाला। इसे जंतर मंतर कहते हैं। यूनेस्को द्वारा इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। इसमें बनाएं गए जटिल यंत्र, समय को मापने, सूर्य की गति व कक्षाओं का निरीक्षण तथा आकाशीय पिंडों के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हैं।
जयगढ़ फोर्ट:-
सन् 1726 में, महाराजा जयसिंह द्वितीय द्वारा यह किला आमेर की सुरक्षा के लिए बनवाया गया था। इसमें बने शस्त्रागार, अनूठा शस्त्र संग्रहालय, तोपे बनाने का कारखाना तथा विश्व की सबसे बड़ी तोप ’जयबाण’ के कारण राजस्थान में आने वाला प्रत्येक पर्यटक, जयपुर आकर इस तोप को जरुर देखना चाहता है। इस तोप को एक बार चलाया गया था जिससे शहर से 35 किलोमीटर दूर एक गड्ढा बन गया था। जिसकी लंबाई 31 फीट 5 इंच है तथा वजन 50 टन है। इसके 8 मीटर लंबे बैरल में 100 किलो गन पाउडर भरा जाता था।
नाहरगढ़ किला:-
अंधेरी रात में, तारों की छांव में, नाहरगढ़ किले से जयपुर शहर का विहंगम, अभूतपूर्व, अद्भुत और मस्त मदमस्त नजारा, सारी दुनिया में और कहीं नहीं मिलेगा। शहर की रोशनी को देखकर लगता है, तारे जमीन पर उतर आए है। सन् 1734 में महाराजा जयसिंह के शासनकाल के दौरान इस किले का निर्माण किया गया, जो कि शहर का पहरेदार मालूम होता है। इस क़िले में बनाए गए माधवेंद्र भवन को ग्रीष्म काल में महाराजा के निवास के रूप में काम में लिया जाता था। रानियों के लिए आरामदेय बैठक तथा राजा के कक्षों का समूह, आलीशान दरवाजे, खिड़कियों और भित्तिचित्रों से सजाया गया, नाहरगढ़ अतीत की यादों को समेटे शान से खड़ा है। अभी हाल ही में एक महल में एक स्कल्पचर आर्ट गैलरी भी बनवाई गई है।
अल्बर्ट हॉल:- (सेंट्रल म्यूजियम)
सन् 1876 में प्रिंस वेल्स ने इसकी आधारशिला रखी थी। इसका नाम लंदन के अल्बर्ट संग्रहालय के नाम पर रखा गया था। सर सिवन्टन जैकब द्वारा इसका डिजाइन बनाया गया था तथा इंडो सोरसेनिक स्थापत्य शैली के आधार पर इसका निर्माण करवाया गया। रामनिवास बाग के बीच में अल्बर्ट हॉल की अभूतपूर्व और मनमोहक इमारत, हर मौसम में पर्यटकों को आकर्षित करती है। इसमें जयपुर कला विद्यालय, कोटा, बूंदी, किशनगढ और उदयपुर शैली के लघु चित्रों का बड़ा संग्रह है।
अल्बर्ट हॉल म्यूजियम राजस्थान का प्रथम संग्रहालय है।
गलताजी:-
गलता जी जयपुर एक प्राचीन तीर्थ स्थान है। यह गालव ऋषि की तपोस्थली है। गलता जी स्थित कुंड में स्नान धार्मिक महत्व है। तीर्थयात्री यहां पवित्र स्नान हेतु आते हैं। इस स्थान में मंदिर, मंडप और पवित्र कुंड है। गलता जी आने के लिए आगंतुक पहले रामगोपाल जी के मंदिर परिसर में आते हैं, जिसे स्थानीय लोगों द्वारा ’बंदर मंदिर’ कहा जाता है। इसे यह नाम हमारे यहां पाए जाने वाले ’बंदरों के एक बड़े समूह’ की वजह से मिला। हरियाली का खूबसूरत नजारा और उछलते कूदते बंदर क्षेत्र के खुशनुमा माहौल में इजाफा करते हैं। पहाड़ी की चोटी पर सूर्य देव को समर्पित एक छोटा मंदिर है, इसे ’सूर्यमंदिर’ कहा जाता है। दीवान कृपाराम द्वारा निर्मित यह मंदिर शहर के लोगों के लिए पूजनीय है।
हवामहल:-
बाहर की तरफ से भगवान कृष्ण के मुकुट जैसा दिखाई देने वाला यह महल अनूठा है। सन् 1799 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा बनवाया गया यह 5 मंजिला है तथा इसका डिजाइनर वास्तुकार लालचंद उस्ता द्वारा तैयार किया गया था। गुलाबी शहर का प्रतीक हवामहल, बलुआ पत्थर से बना राजस्थानी वास्तुकला और मुगल शैली का मिश्रण है। इसकी दीवारें सिर्फ डेढ़ फुट चौड़ी है तथा 953 बेहद सुंदर आकर्षक छोटे छोटे आकार के झरोखे है। इसे बनाने का मूल उद्देश्य था कि शहर में होने वाले मेले-त्योहारों और जुलूस को महारानियां इस महल के अंदर बैठकर देख सके। हवामहल गर्मी के मौसम में भी इन झरोखों के कारण वातानुकूलित रहता है।
आमेर महल:-
जयपुर से 11 किलोमीटर की दूरी पर कछवाहो की पुरानी राजधानी आमेर, अपने किले और स्थापत्य के लिए पर्यटकों का मुख्य आकर्षण है। यूनेस्को की ’विश्व धरोहर’ सूची में शामिल, पूर्व में कच्छवाहा राजपूतों की राजधानी आमेर महल ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यह हिंदू व मुगल शैली का सुंदर मिश्रण है। आमेर का महल सन् 1592 में राजा मानसिंह प्रथम ने दुश्मनों से मुकाबला और बचाव करने के लिए बनवाया था। आमेर महल का आंतरिक भाग, लाल बलुआ पत्थर तथा संगमर से बनाया गया तथा इसमें नक्ककाशी का कार्य बहुमूल्य पत्थरों की जड़ाई, मीनाकारी का काम, पच्चीकारी काम, जगह-जगह बड़े-बड़े दर्पण इसकी भव्यता को चार चांद लगाते हैं।
जंतर मंतर:-
जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा बनाई गई पांच खगोलीय वेधशालाओ में सबसे विशाल है, जयपुर की यह वैद्यशाला। इसे जंतर मंतर कहते हैं। यूनेस्को द्वारा इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। इसमें बनाएं गए जटिल यंत्र, समय को मापने, सूर्य की गति व कक्षाओं का निरीक्षण तथा आकाशीय पिंडों के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हैं।
जयगढ़ फोर्ट:-
सन् 1726 में, महाराजा जयसिंह द्वितीय द्वारा यह किला आमेर की सुरक्षा के लिए बनवाया गया था। इसमें बने शस्त्रागार, अनूठा शस्त्र संग्रहालय, तोपे बनाने का कारखाना तथा विश्व की सबसे बड़ी तोप ’जयबाण’ के कारण राजस्थान में आने वाला प्रत्येक पर्यटक, जयपुर आकर इस तोप को जरुर देखना चाहता है। इस तोप को एक बार चलाया गया था जिससे शहर से 35 किलोमीटर दूर एक गड्ढा बन गया था। जिसकी लंबाई 31 फीट 5 इंच है तथा वजन 50 टन है। इसके 8 मीटर लंबे बैरल में 100 किलो गन पाउडर भरा जाता था।
नाहरगढ़ किला:-
अंधेरी रात में, तारों की छांव में, नाहरगढ़ किले से जयपुर शहर का विहंगम, अभूतपूर्व, अद्भुत और मस्त मदमस्त नजारा, सारी दुनिया में और कहीं नहीं मिलेगा। शहर की रोशनी को देखकर लगता है, तारे जमीन पर उतर आए है। सन् 1734 में महाराजा जयसिंह के शासनकाल के दौरान इस किले का निर्माण किया गया, जो कि शहर का पहरेदार मालूम होता है। इस क़िले में बनाए गए माधवेंद्र भवन को ग्रीष्म काल में महाराजा के निवास के रूप में काम में लिया जाता था। रानियों के लिए आरामदेय बैठक तथा राजा के कक्षों का समूह, आलीशान दरवाजे, खिड़कियों और भित्तिचित्रों से सजाया गया, नाहरगढ़ अतीत की यादों को समेटे शान से खड़ा है। अभी हाल ही में एक महल में एक स्कल्पचर आर्ट गैलरी भी बनवाई गई है।
अल्बर्ट हॉल:- (सेंट्रल म्यूजियम)
सन् 1876 में प्रिंस वेल्स ने इसकी आधारशिला रखी थी। इसका नाम लंदन के अल्बर्ट संग्रहालय के नाम पर रखा गया था। सर सिवन्टन जैकब द्वारा इसका डिजाइन बनाया गया था तथा इंडो सोरसेनिक स्थापत्य शैली के आधार पर इसका निर्माण करवाया गया। रामनिवास बाग के बीच में अल्बर्ट हॉल की अभूतपूर्व और मनमोहक इमारत, हर मौसम में पर्यटकों को आकर्षित करती है। इसमें जयपुर कला विद्यालय, कोटा, बूंदी, किशनगढ और उदयपुर शैली के लघु चित्रों का बड़ा संग्रह है।
अल्बर्ट हॉल म्यूजियम राजस्थान का प्रथम संग्रहालय है।
गलताजी:-
गलता जी जयपुर एक प्राचीन तीर्थ स्थान है। यह गालव ऋषि की तपोस्थली है। गलता जी स्थित कुंड में स्नान धार्मिक महत्व है। तीर्थयात्री यहां पवित्र स्नान हेतु आते हैं। इस स्थान में मंदिर, मंडप और पवित्र कुंड है। गलता जी आने के लिए आगंतुक पहले रामगोपाल जी के मंदिर परिसर में आते हैं, जिसे स्थानीय लोगों द्वारा ’बंदर मंदिर’ कहा जाता है। इसे यह नाम हमारे यहां पाए जाने वाले ’बंदरों के एक बड़े समूह’ की वजह से मिला। हरियाली का खूबसूरत नजारा और उछलते कूदते बंदर क्षेत्र के खुशनुमा माहौल में इजाफा करते हैं। पहाड़ी की चोटी पर सूर्य देव को समर्पित एक छोटा मंदिर है, इसे ’सूर्यमंदिर’ कहा जाता है। दीवान कृपाराम द्वारा निर्मित यह मंदिर शहर के लोगों के लिए पूजनीय है।
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ईसरलाट:- (सरगासूली)
शहर के बीचो बीच 60 फ़ीट ऊंची भव्य मीनार ईसरलाट को स्वर्ग भेदी मीनार ’सरगासूली’ भी कहते हैं। राजा ईश्वर सिंह ने 1749 ईस्वी में इस मीनार को एक शानदार जीत की स्मृति में बनवाया था। त्रिपोलिया गेट के निकट स्थित इस मीनार के अंदर की तरफ ऊपर तक जाने के लिए सीढ़ियां बनी है, जिनसे चढ़कर ऊपर से जयपुर का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
गोविंद देव जी मंदिर: -
श्री गोविंद देव जी की आकर्षक प्रतिमा सवाई जयसिंह वृंदावन से लाए थे, जो यहां पूरे सम्मान से शहर के परकोटे में स्थित श्री गोविंद जी के मंदिर में स्थापित की गई। शाही परिवार और स्थानीय लोगों द्वारा पूजनीय गोविंद देव जी में सात झांकियों के माध्यम से दर्शन की समुचित व्यवस्था है।
शहर के बीचो बीच 60 फ़ीट ऊंची भव्य मीनार ईसरलाट को स्वर्ग भेदी मीनार ’सरगासूली’ भी कहते हैं। राजा ईश्वर सिंह ने 1749 ईस्वी में इस मीनार को एक शानदार जीत की स्मृति में बनवाया था। त्रिपोलिया गेट के निकट स्थित इस मीनार के अंदर की तरफ ऊपर तक जाने के लिए सीढ़ियां बनी है, जिनसे चढ़कर ऊपर से जयपुर का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
गोविंद देव जी मंदिर: -
श्री गोविंद देव जी की आकर्षक प्रतिमा सवाई जयसिंह वृंदावन से लाए थे, जो यहां पूरे सम्मान से शहर के परकोटे में स्थित श्री गोविंद जी के मंदिर में स्थापित की गई। शाही परिवार और स्थानीय लोगों द्वारा पूजनीय गोविंद देव जी में सात झांकियों के माध्यम से दर्शन की समुचित व्यवस्था है।
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🔷 राजस्थान की मीठे पानी की झीले 🔷
🔶 TRICK- "फाँफ सी उन जयराज के पीछे बालपुष्प आना" 🔶
💠 फाँ - फाँयसागर , अजमेर
💠 फ - फतेहसागर , उदयपुर
💠 सी - सीलीसेढ़ , अलवर
💠 उ - उदयसागर , उदयपुर
💠 न - नक्की , सिरोही
💠 जय - जयसमंद ,उदयपुर
💠 राज - राजसमंद , काकंरोली राजसमंद
💠 के - कोलायत , बीकानेर
💠 पीछे - पिछौला , उदयपुर
💠 बाल -बालसमंद , जोधपुर
💠 पुष्प -पुष्कर , अजमेर
💠 आना - आनासागर, अजमेर
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