Forwarded from Tauseef Alig
Arrange the reference of a book in a sequential order
Anonymous Poll
28%
Name of the author, place of publisher, place of publication and title of the book, publicationdate
25%
Place of the publisher nd publication, name of the author, publication date nd title of the book.
47%
Name of the author, publication date, title of the book, place of publication and publisher.
👍5
Forwarded from UGC NET/JRF December 2023
What should not be the motivation behind doing a researh
Anonymous Poll
24%
Desire to get aresear degree along with its consciquential benefits
34%
To get good salarey in future
11%
Desire to get respectability
30%
Desire to get intelectual joy of doing something creative work.
👌1
✅ Sarkari Yojana (Govt. Schemes)
▪️National Sports Talent Search Scheme (NSTSS)
◾️Ministry of Youth Affairs & Sports
◼️February 20, 2015
▪️Pandit Deendayal Upadhyay Shramev Jayate Yojana (PDUSJY)
◾️Ministry of Labour and Employment
◼️October 16, 2014
▪️Make in India (MI)
◾️Ministry of Commerce and Industry
◼️September 25, 2014
▪️Pradhan Mantri Jan Aushadhi Yojana (PMJAY)
◾️Department of Pharmaceuticals
◼️2008
▪️National Bal Swachhta (NBS)
◾️Ministry of Women and Child Development
◼️November 10, 2014
▪️Namami Gange (NG)
◾️Ministry of Water Resources
◼️July 10, 2014
▪️Swachh Bharat Abhiyan (SBA)
◾️Ministry of Housing and Urban Affairs
◼️October 2, 2014
▪️PM-Kisan Samman Nidhi Yojana
◾️Ministry of Agriculture and Farmers Welfare
◼️24th February 2019
▪️Pradhan Mantri Kisan Maan-Dhan Yojana (PM-KMY)
◾️Ministry of Agriculture & Farmers’ Welfare
◼️12th September 2019
▪️Pradhan Mantri Shram Yogi Maan Dhan (PM-SYM)
◾️Ministry of Labour and Employment
◼️15th February 2019
▪️Swachh Bharat Abhiyan
◾️Government of India
◾️September 25, 2019
▪️Saansad Adarsh Gram Yojana (SAGY)
◾️ Government of India
◼️11th October 2014
▪️Pradhan Mantri Mudra Yojana (PMMY)
◾️Ministry of Finance
◼️April 2015
▪️UJALA Scheme
◾️Government of India
◼️1st May 2015
▪️Pradhan Mantri Awas Yojana
◾️Ministry of Housing and Urban Affairs
◼️17 June 2015
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सभी से अनुरोध है कि शेयर की गई पोस्ट में से नोट्स बनाने की कोशिश करे। इससे आपके पास एग्जाम के दिन रिवीजन नोट्स रहेंगे।
प्रो माधव सावले
नेट सेट पीएचडी
प्रो माधव सावले
नेट सेट पीएचडी
👍4💯2
इंटरनेट का क्रमिक विकास............
______________________________________
1969 ई.: अमेरिकी रक्षा विभाग के एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (APRA) ने सं. रा. अमेरिका के चार विश्वविद्यालयों के कम्प्यूटरों की नेटवर्किंग करके इंटरनेट 'अप्रानेट' (APRANET) की शुरुआत की। इसका विकास, शोध, शिक्षा और सरकारी संस्थाओं के लिए किया गया था। इसका एक अन्य उद्देश्य था आपात स्थिति में जबकि संपर्क के सभी साधन निष्क्रिय हो चुके हों, आपस में सम्पर्क स्थापित किया जा सके। 1971 तक एपीआरए नेट लगभग 2 दर्जन कम्प्यूटरों को जोड़ चुका था।
1972 ई.: इलेक्ट्रॉनिक मेल अथवा ई-मेल की शुरुआत।
1973 ई.: ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल/ इंटरनेट प्रोटोकॉल (टीसीपी/आईपी) को डिजाइन किया गया। 1983 तक आते-आते यह इंटरनेट पर दो कम्प्यूटरों के बीच संचार का माध्यम बन गया। इसमें से एक प्रोटोकॉल, एफ टी पी (फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल) की सहायता से इंटरनेट प्रयोगकर्ता किसी भी कम्प्यूटर से जुड़कर फाइलें डाउनलोड कर सकता है।
1983 ई.: अप्रानेट के मिलेट्री हिस्से को मिलनेट (MILNET) में डाल दिया गया।
1986 ई.: यू. एस. नेशनल साइंस फाउंडेशन (NSF) ने एनएसएफनेट (NSFNET) लाँच किया। यह पहला बड़े पैमाने का नेटवर्क था, जिसमें इंटरनेट तकनीक का प्रयोग किया गया था।
1988 ई.: फिनलैंड के जाक्र्को ओकेरीनेने ने इंटरनेट चैटिंग का विकास किया।
1989 ई.: मैकगिल यूनीवर्सिटी, माँट्रियाल के पीटर ड्यूश ने प्रथम बार इंटरनेट का इंडेक्स (अनुक्रमणिका) बनाने का प्रयास किया। थिंकिंग मशीन कार्पोरेशन के ब्रिऊस्टर कहले ने एक अन्य इंडेक्सिंग सिक्सड, डब्ल्यू ए आई एस (वाइड एरिया इंफॉर्मेशन सर्वर) का विकास किया। सीईआरएन (यूरोपियन लेबोरेटरी फॉर पाटकल फिजिक्स) के बर्नर्स-ली ने इंटरनेट पर सूचना के वितरण की एक नई तकनीक का विकास किया, जिसे अंतत: वल्र्ड वाइड वेब कहा गया। यह वेब हाइपरटेक्स्ट पर आधारित है, जो कि किसी इंटरनेट प्रयोगकर्ता को इंटरनेट की विभिन्न साइट्स पर एक डाक्यूमेंट को दूसरे से जोड़ता है। यह कार्य हाइपरलिंक (विशेष रूप से प्रोग्राम किए गए शब्दों, बटन अथवा ग्राफिक्स) के माध्यम से होता है।
1991 ई.: प्रथम यूज़र फ्रेंडली इंटरफेस, गोफर का मिन्नेसोटा यूनिवर्सिटी (सं.रा. अमेरिका) में विकास। तब से गोफर सर्वाधिक विख्यात इंटरफेस बना हुआ है; एनएसएफनेट को कॉमॢशयल ट्रैफिक के लिए खोला गया।
1993 ई.: 'नेशनल सेंटर ऑफ सुपरकम्प्यूटिंग एप्लीकेशंसÓ के मार्क एंड्रीसन ने मोजेइक नामक नेवीगेटिंग सिस्टम का विकास किया। इस सॉफ्टवेयर के द्वारा इंटरनेट को मैगज़ीन फॉर्मेट में पेश किया जाने लगा। इस सॉफ्टवेयर से टेक्स्ट और ग्राफिक्स इंटरनेट पर उपलब्ध हो गए। आज भी यह वल्र्ड वाइड वेब के लिए मुख्य नेवीगेटिंग सिस्टम है।
1994 ई.: नेटस्केप कम्युनिकेशन और 1995 में माइक्रोसॉफ्ट ने अपने-अपने ब्राउज़र बाजार में उतारे। इन ब्राउज़रों से प्रयोगकर्ताओं के लिए इंटरनेट का प्रयोग अत्यन्त आसान हो गया।
1995 ई.: प्रारंभिक व्यावसायिक साइट्स को इंटरनेट पर लाँच किया गया। ई-मेल के द्वारा मास मार्केटिंग कैम्पेन चलाए जाने लगे।
1996 ई.: 1996 तक आते आते दुनिया भर में इंटरनेट को काफी लोकप्रियता हासिल हो गई। इंटरनेट प्रयोगकर्ताओं की संख्या 4.5 करोड़ पहुँची।
1999 ई.: ई-कॉमर्स की अवधारणा अत्यन्त तेजी से फैली, जिससे इंटरनेट के द्वारा खरीद-फरोख्त लोकप्रिय हो गई।
2003 ई.: न्यूजीलैण्ड में 'नियूइ' (NIUE) ने इंटरनेट में देशव्यापी 'वायरलेस एक्सेस' प्रणाली का प्रयोग आरंभ किया (इसमें ङ्खद्ब-स्नद्ब तकनीक का प्रयोग किया जाता है)।
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1969 ई.: अमेरिकी रक्षा विभाग के एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (APRA) ने सं. रा. अमेरिका के चार विश्वविद्यालयों के कम्प्यूटरों की नेटवर्किंग करके इंटरनेट 'अप्रानेट' (APRANET) की शुरुआत की। इसका विकास, शोध, शिक्षा और सरकारी संस्थाओं के लिए किया गया था। इसका एक अन्य उद्देश्य था आपात स्थिति में जबकि संपर्क के सभी साधन निष्क्रिय हो चुके हों, आपस में सम्पर्क स्थापित किया जा सके। 1971 तक एपीआरए नेट लगभग 2 दर्जन कम्प्यूटरों को जोड़ चुका था।
1972 ई.: इलेक्ट्रॉनिक मेल अथवा ई-मेल की शुरुआत।
1973 ई.: ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल/ इंटरनेट प्रोटोकॉल (टीसीपी/आईपी) को डिजाइन किया गया। 1983 तक आते-आते यह इंटरनेट पर दो कम्प्यूटरों के बीच संचार का माध्यम बन गया। इसमें से एक प्रोटोकॉल, एफ टी पी (फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल) की सहायता से इंटरनेट प्रयोगकर्ता किसी भी कम्प्यूटर से जुड़कर फाइलें डाउनलोड कर सकता है।
1983 ई.: अप्रानेट के मिलेट्री हिस्से को मिलनेट (MILNET) में डाल दिया गया।
1986 ई.: यू. एस. नेशनल साइंस फाउंडेशन (NSF) ने एनएसएफनेट (NSFNET) लाँच किया। यह पहला बड़े पैमाने का नेटवर्क था, जिसमें इंटरनेट तकनीक का प्रयोग किया गया था।
1988 ई.: फिनलैंड के जाक्र्को ओकेरीनेने ने इंटरनेट चैटिंग का विकास किया।
1989 ई.: मैकगिल यूनीवर्सिटी, माँट्रियाल के पीटर ड्यूश ने प्रथम बार इंटरनेट का इंडेक्स (अनुक्रमणिका) बनाने का प्रयास किया। थिंकिंग मशीन कार्पोरेशन के ब्रिऊस्टर कहले ने एक अन्य इंडेक्सिंग सिक्सड, डब्ल्यू ए आई एस (वाइड एरिया इंफॉर्मेशन सर्वर) का विकास किया। सीईआरएन (यूरोपियन लेबोरेटरी फॉर पाटकल फिजिक्स) के बर्नर्स-ली ने इंटरनेट पर सूचना के वितरण की एक नई तकनीक का विकास किया, जिसे अंतत: वल्र्ड वाइड वेब कहा गया। यह वेब हाइपरटेक्स्ट पर आधारित है, जो कि किसी इंटरनेट प्रयोगकर्ता को इंटरनेट की विभिन्न साइट्स पर एक डाक्यूमेंट को दूसरे से जोड़ता है। यह कार्य हाइपरलिंक (विशेष रूप से प्रोग्राम किए गए शब्दों, बटन अथवा ग्राफिक्स) के माध्यम से होता है।
1991 ई.: प्रथम यूज़र फ्रेंडली इंटरफेस, गोफर का मिन्नेसोटा यूनिवर्सिटी (सं.रा. अमेरिका) में विकास। तब से गोफर सर्वाधिक विख्यात इंटरफेस बना हुआ है; एनएसएफनेट को कॉमॢशयल ट्रैफिक के लिए खोला गया।
1993 ई.: 'नेशनल सेंटर ऑफ सुपरकम्प्यूटिंग एप्लीकेशंसÓ के मार्क एंड्रीसन ने मोजेइक नामक नेवीगेटिंग सिस्टम का विकास किया। इस सॉफ्टवेयर के द्वारा इंटरनेट को मैगज़ीन फॉर्मेट में पेश किया जाने लगा। इस सॉफ्टवेयर से टेक्स्ट और ग्राफिक्स इंटरनेट पर उपलब्ध हो गए। आज भी यह वल्र्ड वाइड वेब के लिए मुख्य नेवीगेटिंग सिस्टम है।
1994 ई.: नेटस्केप कम्युनिकेशन और 1995 में माइक्रोसॉफ्ट ने अपने-अपने ब्राउज़र बाजार में उतारे। इन ब्राउज़रों से प्रयोगकर्ताओं के लिए इंटरनेट का प्रयोग अत्यन्त आसान हो गया।
1995 ई.: प्रारंभिक व्यावसायिक साइट्स को इंटरनेट पर लाँच किया गया। ई-मेल के द्वारा मास मार्केटिंग कैम्पेन चलाए जाने लगे।
1996 ई.: 1996 तक आते आते दुनिया भर में इंटरनेट को काफी लोकप्रियता हासिल हो गई। इंटरनेट प्रयोगकर्ताओं की संख्या 4.5 करोड़ पहुँची।
1999 ई.: ई-कॉमर्स की अवधारणा अत्यन्त तेजी से फैली, जिससे इंटरनेट के द्वारा खरीद-फरोख्त लोकप्रिय हो गई।
2003 ई.: न्यूजीलैण्ड में 'नियूइ' (NIUE) ने इंटरनेट में देशव्यापी 'वायरलेस एक्सेस' प्रणाली का प्रयोग आरंभ किया (इसमें ङ्खद्ब-स्नद्ब तकनीक का प्रयोग किया जाता है)।
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👍5👌1
कम्प्यूटर का परिचय......
_____________________________________
कम्प्यूटर एक डाटा प्रोसेसिंग उपकरण होता है जो पढ़ व लिख सकता है, गणना और तुलना कर सकता है, डाटा की भारी मात्रा को उच्च गति, सटीकता और विश्वसनीयता के साथ स्टोर व प्रोसेस कर सकता है।
यह दिए हुए निर्देशों पर कार्य करता है।
एक बार डाटा और निर्देशों का समुच्चय इसकी मेमोरी में फीड कर दिया जाता है तो यह निर्देशों का अनुपालन करता है, डाटा पर निर्देशानुसार कार्य करता है और परिणाम देता है।
इसकी कार्यप्रणाली स्वचालित होती है।
यह इलेक्ट्रॉनिक अवयवों का प्रयोग करता है; ट्रांजिस्टर, रेजिस्टर, डायोड और सर्किट।
इनपुट (Input) :::::: डाटा को इकठ्ठा करके कम्प्यूटर में डाला जाता है। इसे इनपुट प्रोसेस कहते हैं।
भंडारण (Storage) ::::::::: जो भी डाटा कम्प्यूटर के अंदर पहुँचता है वह उसकी मेमोरी में स्टोर हो जाता है जिसे कम्प्यूटर की फिजि़कल मेमोरी (Physical Memory) कहते हैं। फिजि़कल मेमोरी की एक सहायक मेमोरी ऑक्ज़ीलरी मेमोरी (auxilary memory) भी होती है।
प्रोसेसिंग (Processing) :::::: कम्प्यूटर की फिजि़कल मेमोरी में स्टोर डाटा पर इच्छित परिणाम पाने के लिए कार्य किया जाता है, जिसे प्रोसेसिंग कहते हैं। परिणाम फिर से फिजि़कल मेमोरी में स्टोर हो जाते हैं।
आउटपुट (output) :::::: फिजि़कल मेमोरी से स्टोर डाटा को निकालने की प्रक्रिया को आउटपुट कहते हैं।
कम्प्यूटर का आर्किटेक्चर (Architecture Of Computer) किसी भी पारम्परिक कम्प्यूटर के निम्नलिखित अवयव होते हैं ::::::::::
इनपुट उपकरण (Input device) :::::::::
इस उपकरण का उपयोग मनुष्य से मशीन के बीच सँचार के लिए किया जाता है। जिस डाटा की कम्प्यूटर में प्रोसेसिंग की जानी है उसे इसी उपकरण के द्वारा डाला जाता है, उदाहरणस्वरूप की-बोर्ड, ऑप्टिकल कैरेक्टर रीडर, मार्क रीडर, मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रीडर।
आउटपुट उपकरण (Output Device) ::::
इस उपकरण का प्रयोग मशीन से मनुष्य के बीच संचार के लिए किया जाता है। प्रोसेस्ड परिणामों को इन उपकरणों के द्वारा कम्प्यूटर प्रणाली से निकाला जाता है, उदाहरणस्वरूप, वीडियो डिस्प्ले यूनिट, प्रिंटर्स, प्लॉटर्स इत्यादि।
सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU)
(Central Processing Unit) :::::::::::
सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट कम्प्यूटर के सभी ऑपरेशनों का समन्वय एवँ संगठन करके सम्पूर्ण प्रणाली को नियंत्रित करती है। यह की-बोर्ड जैसे विभिन्न इनपुट उपकरणों द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन करती है और प्रिंटर जैसे विभिन्न पैरीफेरल उपकरणों के लिए आउटपुट का इंतजाम करती है। यह प्राइमरी स्टोरेज में स्टोर निर्देशों को लाने के लिए जिम्मेदार होती है, उनकी व्याख्या करती है और उन सभी हार्डवेयर यूनिटों को निर्देश जारी करती है जो उन निर्देशों पर कार्य करने के लिए उत्तरदायी होते हैं।
ए एल यू (ALU) :::::::::
यह उपकरण कम्प्यूटर की सभी गणितीय और तार्किक ऑपरेशनों को करने के लिए जिम्मेवार होता है। गणितीय ऑपरेशनों का प्रयोग सँख्याओं की तुलना और 'लेस दैन' ( Less Than), 'इक्वल टू' (Equal to) और 'ग्रेटर देन' (Greater than) इत्यादि निरूपित करने में किया जाता है। ए एल यू टेक्स्ट व सँख्याओं दोनों को ही सँभाल सकता है। कभी-कभी कम्प्यूटर में गणितीय को- प्रोसेसर लगा होता है जो कि दूसरा माइक्रोप्रोसेसर होता है जो गणितीय कार्य के लिए ही होता है। को-प्रोसेसर का मुख्य लाभ गणना की बढ़ी हुई गति होती है।
मेमोरी यूनिट (Memory unit) ::::::::
इसका प्रयोग डाटा और प्रोग्राम को स्टोर करने के लिए किया जाता है। सम्पूर्ण मेमोरी को दो भागों में बाँटा जाता है। एक भाग में भारी सँख्या में लेबल्ड बॉक्स होते हैं- इसका अर्थ है एक बॉक्स प्रति डाटा आइटम। दूसरा भाग विधि-विशेष (Algorithm) को स्टोर करता है। मेमोरी के बॉक्स में स्थित डेटम (Datum) को बॉक्स के नाम अथवा लेबल से निर्दिष्टï करने पर प्राप्त किया जा सकता है। जब किसी डेटम का प्रयोग बॉक्स से किया जाता है तो ऐसे में डेटम की एक कॉपी का ही प्रयोग किया जाता है, वास्तविक डेटम नष्टï नहीं होता है। जब किसी डेटम को मेमोरी में लिखते हैं तो यह एक विशेष बॉक्स में स्टोर हो जाता है और बॉक्स की पुरानी विषयवस्तु नष्ट हो जाती है।
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कम्प्यूटर एक डाटा प्रोसेसिंग उपकरण होता है जो पढ़ व लिख सकता है, गणना और तुलना कर सकता है, डाटा की भारी मात्रा को उच्च गति, सटीकता और विश्वसनीयता के साथ स्टोर व प्रोसेस कर सकता है।
यह दिए हुए निर्देशों पर कार्य करता है।
एक बार डाटा और निर्देशों का समुच्चय इसकी मेमोरी में फीड कर दिया जाता है तो यह निर्देशों का अनुपालन करता है, डाटा पर निर्देशानुसार कार्य करता है और परिणाम देता है।
इसकी कार्यप्रणाली स्वचालित होती है।
यह इलेक्ट्रॉनिक अवयवों का प्रयोग करता है; ट्रांजिस्टर, रेजिस्टर, डायोड और सर्किट।
इनपुट (Input) :::::: डाटा को इकठ्ठा करके कम्प्यूटर में डाला जाता है। इसे इनपुट प्रोसेस कहते हैं।
भंडारण (Storage) ::::::::: जो भी डाटा कम्प्यूटर के अंदर पहुँचता है वह उसकी मेमोरी में स्टोर हो जाता है जिसे कम्प्यूटर की फिजि़कल मेमोरी (Physical Memory) कहते हैं। फिजि़कल मेमोरी की एक सहायक मेमोरी ऑक्ज़ीलरी मेमोरी (auxilary memory) भी होती है।
प्रोसेसिंग (Processing) :::::: कम्प्यूटर की फिजि़कल मेमोरी में स्टोर डाटा पर इच्छित परिणाम पाने के लिए कार्य किया जाता है, जिसे प्रोसेसिंग कहते हैं। परिणाम फिर से फिजि़कल मेमोरी में स्टोर हो जाते हैं।
आउटपुट (output) :::::: फिजि़कल मेमोरी से स्टोर डाटा को निकालने की प्रक्रिया को आउटपुट कहते हैं।
कम्प्यूटर का आर्किटेक्चर (Architecture Of Computer) किसी भी पारम्परिक कम्प्यूटर के निम्नलिखित अवयव होते हैं ::::::::::
इनपुट उपकरण (Input device) :::::::::
इस उपकरण का उपयोग मनुष्य से मशीन के बीच सँचार के लिए किया जाता है। जिस डाटा की कम्प्यूटर में प्रोसेसिंग की जानी है उसे इसी उपकरण के द्वारा डाला जाता है, उदाहरणस्वरूप की-बोर्ड, ऑप्टिकल कैरेक्टर रीडर, मार्क रीडर, मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रीडर।
आउटपुट उपकरण (Output Device) ::::
इस उपकरण का प्रयोग मशीन से मनुष्य के बीच संचार के लिए किया जाता है। प्रोसेस्ड परिणामों को इन उपकरणों के द्वारा कम्प्यूटर प्रणाली से निकाला जाता है, उदाहरणस्वरूप, वीडियो डिस्प्ले यूनिट, प्रिंटर्स, प्लॉटर्स इत्यादि।
सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU)
(Central Processing Unit) :::::::::::
सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट कम्प्यूटर के सभी ऑपरेशनों का समन्वय एवँ संगठन करके सम्पूर्ण प्रणाली को नियंत्रित करती है। यह की-बोर्ड जैसे विभिन्न इनपुट उपकरणों द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन करती है और प्रिंटर जैसे विभिन्न पैरीफेरल उपकरणों के लिए आउटपुट का इंतजाम करती है। यह प्राइमरी स्टोरेज में स्टोर निर्देशों को लाने के लिए जिम्मेदार होती है, उनकी व्याख्या करती है और उन सभी हार्डवेयर यूनिटों को निर्देश जारी करती है जो उन निर्देशों पर कार्य करने के लिए उत्तरदायी होते हैं।
ए एल यू (ALU) :::::::::
यह उपकरण कम्प्यूटर की सभी गणितीय और तार्किक ऑपरेशनों को करने के लिए जिम्मेवार होता है। गणितीय ऑपरेशनों का प्रयोग सँख्याओं की तुलना और 'लेस दैन' ( Less Than), 'इक्वल टू' (Equal to) और 'ग्रेटर देन' (Greater than) इत्यादि निरूपित करने में किया जाता है। ए एल यू टेक्स्ट व सँख्याओं दोनों को ही सँभाल सकता है। कभी-कभी कम्प्यूटर में गणितीय को- प्रोसेसर लगा होता है जो कि दूसरा माइक्रोप्रोसेसर होता है जो गणितीय कार्य के लिए ही होता है। को-प्रोसेसर का मुख्य लाभ गणना की बढ़ी हुई गति होती है।
मेमोरी यूनिट (Memory unit) ::::::::
इसका प्रयोग डाटा और प्रोग्राम को स्टोर करने के लिए किया जाता है। सम्पूर्ण मेमोरी को दो भागों में बाँटा जाता है। एक भाग में भारी सँख्या में लेबल्ड बॉक्स होते हैं- इसका अर्थ है एक बॉक्स प्रति डाटा आइटम। दूसरा भाग विधि-विशेष (Algorithm) को स्टोर करता है। मेमोरी के बॉक्स में स्थित डेटम (Datum) को बॉक्स के नाम अथवा लेबल से निर्दिष्टï करने पर प्राप्त किया जा सकता है। जब किसी डेटम का प्रयोग बॉक्स से किया जाता है तो ऐसे में डेटम की एक कॉपी का ही प्रयोग किया जाता है, वास्तविक डेटम नष्टï नहीं होता है। जब किसी डेटम को मेमोरी में लिखते हैं तो यह एक विशेष बॉक्स में स्टोर हो जाता है और बॉक्स की पुरानी विषयवस्तु नष्ट हो जाती है।
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👍3🙏2
🔶Development of Education 🔶
✅1781: Calcutta Madrasah ( Warren Hastings)
✅1791: Sanskrit College, Benaras ( Jonathan Duncan)
✅1800: Fort William College ( Lord Wellesley)
✅ Serampur missionaries were very enthusiastic about spread of education
▪️1813: Charter Act
✅Sanction of 1 lakhs annually
✅ Amount not made available till 1823
✅ Grant sanctioned for Calcutta College ( 1817- Rammohun Roy)
▪️ 1835: Lord Macaulay's Minute
✅Settled the debate in favour of Anglicists- limited govt resources to be devoted to teaching western sciences and literature through medium of English language alone
✅Neglected mass education
✅Downward filtration theory
✅ 1835: Medical college in Calcutta
▪️1843-53: James Thomson ( LG of NW Province)
✅Developed comprehensive scheme of village education through the medium of vernacular languages
✅Purpose was to train personnel for newly set up Revenue and Public works dept.
✅1844: Applicants for govt employment should possess knowledge of English
▪️1854: Wood's Despatch ( Magna Carta of English education in India)
✅Responsibility of educating mass and rebuked downward filtration theory
✅Vernacular at school, English in higher studies
✅Stress on female and vocational education and teacher training
✅Education in govt institutions to be secular
✅System of grants-in-aid to encourage private enterprise
▪️Developments:
🔸1857: universities at Calcutta, Bombay and Madras
🔸1849: Bethune School, Calcutta ( JED Bethune)- Education for women
✅ Agriculture Institute at Pusa, Bihar
✅Engineering Institute at Roorkee (1847)
🔸 1856: Calcutta college of engineering
🔸1858: Overseers' school at Poona ( Poona college of engineering)
🔸1882-83: Hunter Education Commission (Ripon)
✅Confined its recommendations to primary and secondary education
✅ Primary education in vernacular
✅ Transfer of control of primary education to district and municipal boards
✅ High school should have two divisions
✅ Literary- leading to university
✅ Vocational- commercial careers
✅ Attention towards inadequate facilities for female education
🔸1882: Punjab university
🔸1887: Allahabad university
🔸 1902: Raleigh Commission
✅Go into conditions and prospects of universities in India
✅ Based on recommendations of Raleigh, Indian Universities Act
🔸1904: Indian Universities Act
✅Govt veto in universities senate regulations
✅5 lakh rupees to be sanctioned per annum for five years
🔸1906: State of Baroda introduced compulsory education throughout its territories
🔸1913: Resolution on education policy - govt refused to take responsibility of compulsory education
🔸1917-19: Saddler University Commission
✅ Study and report on problems of Calcutta university
✅Reviewed entire field from school education to university education
✅School course should be 12 yrs. Entry into university after intermediate stage for 3 yrs course.
course
🔸1919: Education shifted to provincial ministries so govt stopped taking direct interest in education
matters.
▪️1929: Hartog Committee
✅ To report on development of education
✅Average students should be diverted to vocational courses after 8th
✅ Admission should be restricted
▪️1937: Wardha scheme of basic education
✅ Congress organised a National Conference on Education in Wardha
✅Zakir hussain committee- detailed national scheme for basic education
✅ Learning through activity
✅ Based on Gandhi's weekly Harijan
✅ English only after Class 8
▪️1944: Sergeant Plan of Education
✅Pre-primary education for 3-6 yrs age group
✅Free, universal and compulsory elementary education for 6-11 yrs age group
✅Abolition of intermediate course
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✅1781: Calcutta Madrasah ( Warren Hastings)
✅1791: Sanskrit College, Benaras ( Jonathan Duncan)
✅1800: Fort William College ( Lord Wellesley)
✅ Serampur missionaries were very enthusiastic about spread of education
▪️1813: Charter Act
✅Sanction of 1 lakhs annually
✅ Amount not made available till 1823
✅ Grant sanctioned for Calcutta College ( 1817- Rammohun Roy)
▪️ 1835: Lord Macaulay's Minute
✅Settled the debate in favour of Anglicists- limited govt resources to be devoted to teaching western sciences and literature through medium of English language alone
✅Neglected mass education
✅Downward filtration theory
✅ 1835: Medical college in Calcutta
▪️1843-53: James Thomson ( LG of NW Province)
✅Developed comprehensive scheme of village education through the medium of vernacular languages
✅Purpose was to train personnel for newly set up Revenue and Public works dept.
✅1844: Applicants for govt employment should possess knowledge of English
▪️1854: Wood's Despatch ( Magna Carta of English education in India)
✅Responsibility of educating mass and rebuked downward filtration theory
✅Vernacular at school, English in higher studies
✅Stress on female and vocational education and teacher training
✅Education in govt institutions to be secular
✅System of grants-in-aid to encourage private enterprise
▪️Developments:
🔸1857: universities at Calcutta, Bombay and Madras
🔸1849: Bethune School, Calcutta ( JED Bethune)- Education for women
✅ Agriculture Institute at Pusa, Bihar
✅Engineering Institute at Roorkee (1847)
🔸 1856: Calcutta college of engineering
🔸1858: Overseers' school at Poona ( Poona college of engineering)
🔸1882-83: Hunter Education Commission (Ripon)
✅Confined its recommendations to primary and secondary education
✅ Primary education in vernacular
✅ Transfer of control of primary education to district and municipal boards
✅ High school should have two divisions
✅ Literary- leading to university
✅ Vocational- commercial careers
✅ Attention towards inadequate facilities for female education
🔸1882: Punjab university
🔸1887: Allahabad university
🔸 1902: Raleigh Commission
✅Go into conditions and prospects of universities in India
✅ Based on recommendations of Raleigh, Indian Universities Act
🔸1904: Indian Universities Act
✅Govt veto in universities senate regulations
✅5 lakh rupees to be sanctioned per annum for five years
🔸1906: State of Baroda introduced compulsory education throughout its territories
🔸1913: Resolution on education policy - govt refused to take responsibility of compulsory education
🔸1917-19: Saddler University Commission
✅ Study and report on problems of Calcutta university
✅Reviewed entire field from school education to university education
✅School course should be 12 yrs. Entry into university after intermediate stage for 3 yrs course.
course
🔸1919: Education shifted to provincial ministries so govt stopped taking direct interest in education
matters.
▪️1929: Hartog Committee
✅ To report on development of education
✅Average students should be diverted to vocational courses after 8th
✅ Admission should be restricted
▪️1937: Wardha scheme of basic education
✅ Congress organised a National Conference on Education in Wardha
✅Zakir hussain committee- detailed national scheme for basic education
✅ Learning through activity
✅ Based on Gandhi's weekly Harijan
✅ English only after Class 8
▪️1944: Sergeant Plan of Education
✅Pre-primary education for 3-6 yrs age group
✅Free, universal and compulsory elementary education for 6-11 yrs age group
✅Abolition of intermediate course
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चंद्रयान-3 के बारे में अतिमहत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी तथ्य ..... #ugc #net #set
भारत के तीसरे चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-3’ (Chandrayaan-3) को लॉन्च कर दिया गया है। चंद्रयान-3 ने दोपहर 2:35 बजे चंद्रमा की ओर उड़ान भरा। इसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से छोड़ा गया है। 615 करोड़ की लागत से तैयार हुआ यह मिशन करीब 50 दिन की यात्रा के बाद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंड करेगा। ‘चंद्रयान-3’ को भेजने के लिए LVM-3 लॉन्चर का इस्तेमाल किया गया है। अगर दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिग होती है, तो भारत दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला विश्व का पहला देश बन जाएगा। चंद्रयान-3 एक लैंडर, एक रोवर और एक प्रोपल्शन मॉड्यूल से लैस है। इसका वजन करीब 3,900 किलोग्राम है।
चंद्रयान-3 के बारे में 1️⃣0️⃣ रोचक तथ्य:
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की तरफ से इस लॉन्चिंग को लेकर बताया गया कि तीसरा चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-3’ साल 2019 के ‘चंद्रयान-2’ का अनुवर्ती मिशन है। भारत के इस तीसरे चंद्र मिशन में भी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का लक्ष्य चंद्रमा की सतह पर लैंडर की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का है।
‘चंद्रयान-2’ मिशन के दौरान अंतिम पलों में लैंडर ‘विक्रम’ पथ विचलन के चलते ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने में सफल नहीं हुआ था। इसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग और भारत की क्षमता का प्रदर्शन करना है। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 उच्च स्तर पर काम करेगा।
चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान ISRO द्वारा नियोजित तीसरा चंद्र अन्वेषण मिशन (lunar exploration mission) है। यह चंद्रयान-2 मिशन की निरंतरता (continuation of the Chandrayaan-2 ) के रूप में कार्य करता है और इसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग और घूमने की पूरी क्षमता का प्रदर्शन करना है।
चंद्रयान -3 में एक लैंडर और रोवर कॉन्फिगरेशन शामिल है और इसे श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) SHAR से LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क 3) द्वारा लॉन्च कर दिया गया है।
चंद्रयान-3 में चंद्रयान-2 की तरह ऑर्बिटर के बिना एक रोवर और लैंडर शामिल है। मिशन का लक्ष्य चंद्रमा की सतह का पता लगाना है। खास कर उन क्षेत्रों का पता लगाना जहां अरबों वर्षों से सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंच पाया है। वैज्ञानिकों और खगोलविदों (Scientists and astronomers) को इन अंधेरे क्षेत्रों में बर्फ और मूल्यवान खनिज संसाधनों की उपस्थिति पर संदेह है।
चंद्रयान-3 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा। इस मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए इसमें कई अतिरिक्त सेंसर को जोड़ा गया है। इसकी गति को मापने के लिए इसमें एक ‘लेजर डॉपलर वेलोसीमीटर’ सिस्टम लगाया है।
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग भारत की तकनीकी कौशल और अंतरिक्ष अन्वेषण की महत्वाकांक्षी खोज को प्रदर्शित करेगी। चंद्रयान-3 पृथ्वी से परे मानव उपस्थिति का विस्तार करने और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए रास्ता साफ करने के बड़े लक्ष्यों में योगदान देता है।
चंद्रयान-3 द्वारा दक्षिणी ध्रुव की खोज अमेरिका के आर्टेमिस-III मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप है। जिसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मनुष्यों को उतारना है। चंद्रयान-3 द्वारा जुटाया गया डेटा भविष्य के आर्टेमिस मिशनों के लिए मूल्यवान जानकारी और समर्थन प्रदान करेगा।
चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला मिशन होगा। यह इलाका अपने स्थायी रूप से छाया वाले क्षेत्रों के कारण विशेष रुचि रखता है, जहां पानी की बर्फ के मौजूद होने का अनुमान है। मिशन का लक्ष्य इस अज्ञात क्षेत्र की अद्वितीय भूविज्ञान और संरचना का अध्ययन करना है।
चंद्रयान-3 को दूसरे ग्रहों के मिशनों के लिए जरूरी नई तकनीकों को विकसित करने और प्रदर्शित करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह अंतरिक्ष यान इंजीनियरिंग, लैंडिंग सिस्टम और आकाशीय पिंडों पर गतिशीलता क्षमताओं में प्रगति में योगदान देगा।
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भारत के तीसरे चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-3’ (Chandrayaan-3) को लॉन्च कर दिया गया है। चंद्रयान-3 ने दोपहर 2:35 बजे चंद्रमा की ओर उड़ान भरा। इसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से छोड़ा गया है। 615 करोड़ की लागत से तैयार हुआ यह मिशन करीब 50 दिन की यात्रा के बाद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंड करेगा। ‘चंद्रयान-3’ को भेजने के लिए LVM-3 लॉन्चर का इस्तेमाल किया गया है। अगर दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिग होती है, तो भारत दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला विश्व का पहला देश बन जाएगा। चंद्रयान-3 एक लैंडर, एक रोवर और एक प्रोपल्शन मॉड्यूल से लैस है। इसका वजन करीब 3,900 किलोग्राम है।
चंद्रयान-3 के बारे में 1️⃣0️⃣ रोचक तथ्य:
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की तरफ से इस लॉन्चिंग को लेकर बताया गया कि तीसरा चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-3’ साल 2019 के ‘चंद्रयान-2’ का अनुवर्ती मिशन है। भारत के इस तीसरे चंद्र मिशन में भी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का लक्ष्य चंद्रमा की सतह पर लैंडर की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का है।
‘चंद्रयान-2’ मिशन के दौरान अंतिम पलों में लैंडर ‘विक्रम’ पथ विचलन के चलते ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने में सफल नहीं हुआ था। इसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग और भारत की क्षमता का प्रदर्शन करना है। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 उच्च स्तर पर काम करेगा।
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चंद्रयान -3 में एक लैंडर और रोवर कॉन्फिगरेशन शामिल है और इसे श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) SHAR से LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क 3) द्वारा लॉन्च कर दिया गया है।
चंद्रयान-3 में चंद्रयान-2 की तरह ऑर्बिटर के बिना एक रोवर और लैंडर शामिल है। मिशन का लक्ष्य चंद्रमा की सतह का पता लगाना है। खास कर उन क्षेत्रों का पता लगाना जहां अरबों वर्षों से सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंच पाया है। वैज्ञानिकों और खगोलविदों (Scientists and astronomers) को इन अंधेरे क्षेत्रों में बर्फ और मूल्यवान खनिज संसाधनों की उपस्थिति पर संदेह है।
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Leader
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Most important task in teaching is
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Making monthly reports
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Making assignment
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Directing student development
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None of the above
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Which if the following is meant for information collection
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Schedule
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Report
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Plan
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A competebt teacher must have a sound knowledge in right order
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Concept, theory, practice and research
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