Mains test 09 GS - 3 (FLT) indore bhopal merge.pdf
648.8 KB
Mains test 09 GS - 3 (FLT) indore bhopal merge.pdf
21 मार्च विश्व वन दिवस...
देखो हमारे पूर्वज प्रकृति से कितना प्रेंम करते थे,
पहाड़ी महिला गौरा देवी के “#चिपको_आंदोलन“ की पहल । मानव जीवन में वनों की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाने के उद्देश्य से दुनियाभर में हर वर्ष 21 मार्च को विश्व वन दिवस का आयोजन किया जाता है। पेड़ों की कटाई को रोकने और वनों की रक्षा के लिए 26 मार्च, 1974 ई. को उत्तराखण्ड (तब उत्तर प्रदेश का भाग) के जिला चमोली के रैंणी गाँव की साधारण गृहणी गौरा देवी ने महिला मंगलदल के माध्यम से २१ महिला साथियों के साथ पेड़ों से चिपककर वन विभाग के अधिकारियों और पेड़ काटने वाले ठेकेदार को ललकार के कहा कि इन पेड़ों पर हमारा परम्परागत अधिकार है , पहले हमें काटो फिर इन पेड़ों को हाथ लगाना। जिसका परिणाम यह हुआ कि रैंणी गाँव का जंगल नहीं काटा गया । यहाँ से विश्व प्रसिद्ध चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई और यही आंदोलन वनों की रक्षा के लिए विश्व पटल पर स्थापित हुआ ।
क्या हैं जंगल के उपकार,
मिट्टी, पानी और बयार ।
मिट्टी, पानी और बयार,
जिन्दा रहने के आधार ।
देखो हमारे पूर्वज प्रकृति से कितना प्रेंम करते थे,
पहाड़ी महिला गौरा देवी के “#चिपको_आंदोलन“ की पहल । मानव जीवन में वनों की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाने के उद्देश्य से दुनियाभर में हर वर्ष 21 मार्च को विश्व वन दिवस का आयोजन किया जाता है। पेड़ों की कटाई को रोकने और वनों की रक्षा के लिए 26 मार्च, 1974 ई. को उत्तराखण्ड (तब उत्तर प्रदेश का भाग) के जिला चमोली के रैंणी गाँव की साधारण गृहणी गौरा देवी ने महिला मंगलदल के माध्यम से २१ महिला साथियों के साथ पेड़ों से चिपककर वन विभाग के अधिकारियों और पेड़ काटने वाले ठेकेदार को ललकार के कहा कि इन पेड़ों पर हमारा परम्परागत अधिकार है , पहले हमें काटो फिर इन पेड़ों को हाथ लगाना। जिसका परिणाम यह हुआ कि रैंणी गाँव का जंगल नहीं काटा गया । यहाँ से विश्व प्रसिद्ध चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई और यही आंदोलन वनों की रक्षा के लिए विश्व पटल पर स्थापित हुआ ।
क्या हैं जंगल के उपकार,
मिट्टी, पानी और बयार ।
मिट्टी, पानी और बयार,
जिन्दा रहने के आधार ।