"#सफल_लोंगो_से_सीखिए_सफलता_के_गुर"
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#Guidance_For_MPPSC2019 By
#Ashish_Patel_Sir_DSP
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जंगल बचाओ, बाघ बचाओ !!!
जंगलों के कटने और अवैध शिकार के कारण भारत समेत दुनियाभर में बाघों की संख्या कम हो रही है। 2016 के आंकड़ों के अनुसार, पूरी दुनिया में करीब 6 हज़ार बाघ बचे हैं! इनमें 3891 बाघ भारत में हैं।
#SaveTiger
#InternationalTigerDay
जंगलों के कटने और अवैध शिकार के कारण भारत समेत दुनियाभर में बाघों की संख्या कम हो रही है। 2016 के आंकड़ों के अनुसार, पूरी दुनिया में करीब 6 हज़ार बाघ बचे हैं! इनमें 3891 बाघ भारत में हैं।
#SaveTiger
#InternationalTigerDay
#International_Tiger's_Day 2019: PM Modi Releases Report, India counts 2967 Tigers*....
Madhya Pradesh is now tiger state again 💓 with highest count (526)
.
न स्याद् वनमृते व्याघ्रान् व्याघ्रा न स्युर्ऋते वनम् ।
वनं हि रक्षते व्याघ्रैर्व्याघ्रान् रक्षति काननम् ।।
🐯🐯🐯🐯🐯
🐅🐅🐅🐅🐅🐅
Madhya Pradesh is now tiger state again 💓 with highest count (526)
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न स्याद् वनमृते व्याघ्रान् व्याघ्रा न स्युर्ऋते वनम् ।
वनं हि रक्षते व्याघ्रैर्व्याघ्रान् रक्षति काननम् ।।
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बचपन में सर्वहारा समाज की जिन कहानियों को पढ़कर हम बड़े हुए उन कहानियों के रचनाकार मुंशी प्रेमचंद जी की आज जयंती है।
साहित्यकार, आदर्श पत्रकार व आधुनिक हिंदी साहित्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले श्री #MunshiPremchand जी की जयंती पर सादर नमन!
साहित्यकार, आदर्श पत्रकार व आधुनिक हिंदी साहित्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले श्री #MunshiPremchand जी की जयंती पर सादर नमन!
#अनुच्छेद_35_ए क्या है?
संविधान के इस अनुच्छेद के ज़रिए जम्मू-कश्मीर के स्थायी (मूल) निवासियों को विशेष अधिकार दिए गए हैं. जम्मू-कश्मीर से बाहर के लोग यहां अचल संपत्ति नहीं ख़रीद सकते हैं और न ही उन्हें राज्य सरकार की योजनाओं का फ़ायदा मिल सकता है. इसके साथ ही प्रदेश में बाहरी लोगों को सरकारी नौकरी भी नहीं मिल सकती है.
1954 में भारत के राष्ट्रपति के आदेश पर अनुच्छेद 370 के साथ अनुच्छेद 35 ए को जोड़ा गया था. अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता है जबकि अनुच्छेद 35 ए प्रदेश सरकार को यह निर्धारित करने की शक्ति देता है कि कौन यहां का मूल या स्थायी नागरिक है और उन्हें क्या अधिकार मिले हुए हैं.
ये अनुच्छेद राज्य विषय सूची के उन क़ानूनों को संरक्षित करता है जो महाराजा के 1927 और 1932 में जारी शासनादेशों में पहले से ही परिभाषित किए गए थे.
राज्य के विषय क़ानून हर कश्मीरी पर लागू होते हैं चाहे वो जहां भी रह रहे हैं. यही नहीं ये संघर्ष विराम के बाद से निर्धारित सीमा के दोनों ओर भी लागू होते हैं.
अनुच्छेद 370 और 35ए को संविधान में 1954 में भारत के तत्तकालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और जम्मू-कश्मीर के प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला की बातचीत के बाद शामिल किया गया था.
1- अनुच्छेद 35-ए संविधान का वह आर्टिकल है जो जम्मू कश्मीर विधानसभा को लेकर प्रावधान करता है कि वह राज्य में स्थायी निवासियों को पारभाषित कर सके.
2- साल 1954 में 14 मई को राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था. इस आदेश के जरिए संविधान में एक नया अनुच्छेद 35 A जोड़ दिया गया. आर्टिकल 370 के तहत यह अधिकार दिया गया है.
3- साल 1956 में जम्मू कश्मीर का संविधान बना जिसमें स्थायी नागरिकता को परिभाषित किया गया.
4- जम्मू कश्मीर के संविधान के मुताबिक, स्थायी नागरिक वह व्यक्ति है जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या फिर उससे पहले के 10 सालों से राज्य में रह रहा हो, और उसने वहां संपत्ति हासिल की हो.
आर्टिकल 35A के विरोध में दलील
- यहां बसे कुछ लोगों को कोई अधिकार नहीं
- 1947 में जम्मू में बसे हिंदू परिवार अब तक शरणार्थी
- ये शरणार्थी सरकारी नौकरी हासिल नहीं कर सकते
- सरकारी शिक्षण संस्थान में दाख़िला नहीं
- निकाय, पंचायत चुनाव में वोटिंग राइट नहीं
- संसद के द्वारा नहीं, राष्ट्रपति के आदेश से जोड़ा गया आर्टिकल 35A
संविधान के इस अनुच्छेद के ज़रिए जम्मू-कश्मीर के स्थायी (मूल) निवासियों को विशेष अधिकार दिए गए हैं. जम्मू-कश्मीर से बाहर के लोग यहां अचल संपत्ति नहीं ख़रीद सकते हैं और न ही उन्हें राज्य सरकार की योजनाओं का फ़ायदा मिल सकता है. इसके साथ ही प्रदेश में बाहरी लोगों को सरकारी नौकरी भी नहीं मिल सकती है.
1954 में भारत के राष्ट्रपति के आदेश पर अनुच्छेद 370 के साथ अनुच्छेद 35 ए को जोड़ा गया था. अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता है जबकि अनुच्छेद 35 ए प्रदेश सरकार को यह निर्धारित करने की शक्ति देता है कि कौन यहां का मूल या स्थायी नागरिक है और उन्हें क्या अधिकार मिले हुए हैं.
ये अनुच्छेद राज्य विषय सूची के उन क़ानूनों को संरक्षित करता है जो महाराजा के 1927 और 1932 में जारी शासनादेशों में पहले से ही परिभाषित किए गए थे.
राज्य के विषय क़ानून हर कश्मीरी पर लागू होते हैं चाहे वो जहां भी रह रहे हैं. यही नहीं ये संघर्ष विराम के बाद से निर्धारित सीमा के दोनों ओर भी लागू होते हैं.
अनुच्छेद 370 और 35ए को संविधान में 1954 में भारत के तत्तकालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और जम्मू-कश्मीर के प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला की बातचीत के बाद शामिल किया गया था.
1- अनुच्छेद 35-ए संविधान का वह आर्टिकल है जो जम्मू कश्मीर विधानसभा को लेकर प्रावधान करता है कि वह राज्य में स्थायी निवासियों को पारभाषित कर सके.
2- साल 1954 में 14 मई को राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था. इस आदेश के जरिए संविधान में एक नया अनुच्छेद 35 A जोड़ दिया गया. आर्टिकल 370 के तहत यह अधिकार दिया गया है.
3- साल 1956 में जम्मू कश्मीर का संविधान बना जिसमें स्थायी नागरिकता को परिभाषित किया गया.
4- जम्मू कश्मीर के संविधान के मुताबिक, स्थायी नागरिक वह व्यक्ति है जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या फिर उससे पहले के 10 सालों से राज्य में रह रहा हो, और उसने वहां संपत्ति हासिल की हो.
आर्टिकल 35A के विरोध में दलील
- यहां बसे कुछ लोगों को कोई अधिकार नहीं
- 1947 में जम्मू में बसे हिंदू परिवार अब तक शरणार्थी
- ये शरणार्थी सरकारी नौकरी हासिल नहीं कर सकते
- सरकारी शिक्षण संस्थान में दाख़िला नहीं
- निकाय, पंचायत चुनाव में वोटिंग राइट नहीं
- संसद के द्वारा नहीं, राष्ट्रपति के आदेश से जोड़ा गया आर्टिकल 35A
#जम्मू_कश्मीर_और_लद्दाख_दो_अलग_केंद्र_शासित_प्रदेश_घोषित, #अनुच्छेद_370_हटाने_की_घोषणा
गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की घोषणा की. उनके द्वारा की गई घोषणा के अनुसार अनुच्छेद 370 का केवल खंड-1 ही बचा रहेगा बाकी सभी खंड समाप्त हो जायेंगे.गृह मंत्री अमित शाह द्वारा की गई सिफारिश को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा मंजूरी दे दी गई है. परिणामस्वरूप, जम्मू-कश्मीर एक अलग केन्द्रीय शासित प्रदेश होगा जबकि लद्दाख को भी एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बन जायेगा.
#अमित_शाह_का_बयान
अमित शाह द्वारा जारी जानकारी में कहा गया है कि क्षेत्रफल के हिसाब से लद्दाख जम्मू-कश्मीर का एक बड़ा क्षेत्र है. काफी लंबे समय से स्थानीय लोग लद्दाख को केंद्र-शासित प्रदेश का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे थे. वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए इसे जम्मू-कश्मीर से अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है.
#राष्ट्रपति_द्वारा_दी_गई_मंजूरी
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राज्यसभा में की गई घोषणा के अनुसार राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की ओर से जारी संवैधानिक आदेश में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने की घोषणा की गई.
गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की घोषणा की. उनके द्वारा की गई घोषणा के अनुसार अनुच्छेद 370 का केवल खंड-1 ही बचा रहेगा बाकी सभी खंड समाप्त हो जायेंगे.गृह मंत्री अमित शाह द्वारा की गई सिफारिश को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा मंजूरी दे दी गई है. परिणामस्वरूप, जम्मू-कश्मीर एक अलग केन्द्रीय शासित प्रदेश होगा जबकि लद्दाख को भी एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बन जायेगा.
#अमित_शाह_का_बयान
अमित शाह द्वारा जारी जानकारी में कहा गया है कि क्षेत्रफल के हिसाब से लद्दाख जम्मू-कश्मीर का एक बड़ा क्षेत्र है. काफी लंबे समय से स्थानीय लोग लद्दाख को केंद्र-शासित प्रदेश का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे थे. वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए इसे जम्मू-कश्मीर से अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है.
#राष्ट्रपति_द्वारा_दी_गई_मंजूरी
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राज्यसभा में की गई घोषणा के अनुसार राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की ओर से जारी संवैधानिक आदेश में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने की घोषणा की गई.
जनसंघ के नेता ऋषितुल्य स्व. श्री #नानाजी_देशमुख जी को '#भारत_रत्न' से सम्मानित किया गया हैं। गायक एवं संगीतकार स्व. #श्री_भूपेन_हजारिकाजी के अलावा #पूर्व_राष्ट्रपति_श्री_प्रणब_मुखर्जी जी को भी #BharatRatna सम्मान से सम्मानित किया गया हैं।
#मूल_निवासी / #आदिवासी_दिवस
#23_दिसम्बर_1994 को इस बात की घोषणा संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा द्वारा किया गया की हर वर्ष 9 अगस्त को मूल निवासी / स्थानीय निवासी दिवस / आदिवासी दिवस मनाया जाएगा। 9 अगस्त के ही दिन 1982 को पहली बैठक मूलनिवासी / आदिवासियों पर आयोजित की गई थी।
#मूलनिवासी_के_बारे_आगे #यूएनओ कहता है कि
"मूल निवासी /आदिवासी प्राचीन विरासत , अद्वितीय संस्कृतियों और लोग और पर्यावरण से संबंध के जुड़ाव के वाहक हैं। उन्होंने सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक विशेषताओं को बरकरार रखा है जो उन्हें प्रमुख/ बहुसंख्यक समाजों से अलग करता है , जिनमें वे रहते हैं। अपने सांस्कृतिक भिन्नताओं के बावजूद, दुनिया भर के मूलनिवासी /आदिवशियो से संबंधित समस्याए समान है ."
#वर्ष_2019_का_थीम_है_यूएनओ द्वारा #_Indigenous_Languages"
आइये अपनी भाषाओं को बचाते है। कुछ नया करते है।
#MGICS
#WorldDomicileDay
#23_दिसम्बर_1994 को इस बात की घोषणा संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा द्वारा किया गया की हर वर्ष 9 अगस्त को मूल निवासी / स्थानीय निवासी दिवस / आदिवासी दिवस मनाया जाएगा। 9 अगस्त के ही दिन 1982 को पहली बैठक मूलनिवासी / आदिवासियों पर आयोजित की गई थी।
#मूलनिवासी_के_बारे_आगे #यूएनओ कहता है कि
"मूल निवासी /आदिवासी प्राचीन विरासत , अद्वितीय संस्कृतियों और लोग और पर्यावरण से संबंध के जुड़ाव के वाहक हैं। उन्होंने सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक विशेषताओं को बरकरार रखा है जो उन्हें प्रमुख/ बहुसंख्यक समाजों से अलग करता है , जिनमें वे रहते हैं। अपने सांस्कृतिक भिन्नताओं के बावजूद, दुनिया भर के मूलनिवासी /आदिवशियो से संबंधित समस्याए समान है ."
#वर्ष_2019_का_थीम_है_यूएनओ द्वारा #_Indigenous_Languages"
आइये अपनी भाषाओं को बचाते है। कुछ नया करते है।
#MGICS
#WorldDomicileDay