selected candidates for ignou-rf.pdf
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► सोनार :- इसका उपयोग समुद्र के भीतर छिपी वस्तुओ का पता लगाने में किया जाता है |
► एनीमोमीटर :- इसका उपयोग वायु की गति मापने में किया जाता है |
► पाइरोमीटर :- उच्च ताप की माप के लिए उपयोग मे लाया जाता है |
► बैरोमीटर:- वायुमंडलीय दाब मापने में इसका उपयोग किया जाता है |
► हाइड्रोमीटर :- इसका उपयोग जल का घनत्व नापने के लिए किया जाता है |
► हाइग्रोमीटर :- हवा की आर्द्रता नापने के लिए इसका उपयोग किया जाता है |
► लेक्टोमीटर - दूध का घनत्व मापने के लिए इसका उपयोग किया जाता है |
► स्टेथोस्कोप : इससे हृदय की धड़कन को सुना जाता है |
► स्फिग्नोमेनोमीटर: इससे Blood Pressure (BP) मापते है |
► केरेटमीटर : सोने की शुद्धता का पता लगाने में इसका उपयोग किया जाता है
► लक्समीटर : प्रकाश की तीव्रता को मापने में उपयोग मे लाया जाता है
► रडार - रेडिओ तरंगो द्वारा वस्तुओ की स्थिति ज्ञात करना |
► सिस्मोग्राफ - इससे भूकंप की तीव्रता मापी जाती है |
► फेदोमीटर : समुद्र की गहराई मापने में इसका उपयोग किया जाता है |
► पोलीग्राफ़ : झूठ पता लगाने का यंत्र |
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► एनीमोमीटर :- इसका उपयोग वायु की गति मापने में किया जाता है |
► पाइरोमीटर :- उच्च ताप की माप के लिए उपयोग मे लाया जाता है |
► बैरोमीटर:- वायुमंडलीय दाब मापने में इसका उपयोग किया जाता है |
► हाइड्रोमीटर :- इसका उपयोग जल का घनत्व नापने के लिए किया जाता है |
► हाइग्रोमीटर :- हवा की आर्द्रता नापने के लिए इसका उपयोग किया जाता है |
► लेक्टोमीटर - दूध का घनत्व मापने के लिए इसका उपयोग किया जाता है |
► स्टेथोस्कोप : इससे हृदय की धड़कन को सुना जाता है |
► स्फिग्नोमेनोमीटर: इससे Blood Pressure (BP) मापते है |
► केरेटमीटर : सोने की शुद्धता का पता लगाने में इसका उपयोग किया जाता है
► लक्समीटर : प्रकाश की तीव्रता को मापने में उपयोग मे लाया जाता है
► रडार - रेडिओ तरंगो द्वारा वस्तुओ की स्थिति ज्ञात करना |
► सिस्मोग्राफ - इससे भूकंप की तीव्रता मापी जाती है |
► फेदोमीटर : समुद्र की गहराई मापने में इसका उपयोग किया जाता है |
► पोलीग्राफ़ : झूठ पता लगाने का यंत्र |
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सीमाएं
रेखा का नाम – डूरंड रेखा (Durand Line)
Between – पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान
रेखा का नाम – मैकमाहोन रेखा (Macmahon Line)
Between – भारत तथा चीन
रेखा का नाम – रेडक्लिफ रेखा (Radcliffe Line)
Between – भारत तथा पाकिस्तान
रेखा का नाम – 17 वीं समानांतर रेखा (17th Parallel)
Between – उत्तरी वियतनाम तथा द. वियतनाम
रेखा का नाम – 24 वीं समानांतर रेखा (24th Parallel)
Between – भारत तथा पाकिस्तान
रेखा का नाम – 38 वीं समानांतर रेखा (38th Parallel)
Between – उत्तर कोरिया तथा दक्षिण कोरिया
रेखा का नाम – 49 वीं समानांतर रेखा (49th Parallel)
Between – अमेरिका तथा कनाडा
रेखा का नाम – हिंडनबर्ग रेखा (Hindenburg Line)
Between– जर्मनी तथा पोलैंड
रेखा का नाम – ओडरनास रेखा (Order-Neisse Line)
Between – जर्मनी तथा पोलैंड
रेखा का नाम – मैगिनाट रेखा (Maginot Line)
Between – जर्मनी तथा फ्रांस
रेखा का नाम – सीजफ्राइड रेखा (Seigfrid Line)
Between – जर्मनी तथा फ्रांस
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रेखा का नाम – डूरंड रेखा (Durand Line)
Between – पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान
रेखा का नाम – मैकमाहोन रेखा (Macmahon Line)
Between – भारत तथा चीन
रेखा का नाम – रेडक्लिफ रेखा (Radcliffe Line)
Between – भारत तथा पाकिस्तान
रेखा का नाम – 17 वीं समानांतर रेखा (17th Parallel)
Between – उत्तरी वियतनाम तथा द. वियतनाम
रेखा का नाम – 24 वीं समानांतर रेखा (24th Parallel)
Between – भारत तथा पाकिस्तान
रेखा का नाम – 38 वीं समानांतर रेखा (38th Parallel)
Between – उत्तर कोरिया तथा दक्षिण कोरिया
रेखा का नाम – 49 वीं समानांतर रेखा (49th Parallel)
Between – अमेरिका तथा कनाडा
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Between– जर्मनी तथा पोलैंड
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Between – जर्मनी तथा पोलैंड
रेखा का नाम – मैगिनाट रेखा (Maginot Line)
Between – जर्मनी तथा फ्रांस
रेखा का नाम – सीजफ्राइड रेखा (Seigfrid Line)
Between – जर्मनी तथा फ्रांस
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💥 कुछ राज्यों के प्रमुख त्योहार
♦️ फ्लेमिंगो महोत्सव -- आंध्र प्रदेश
♦️ धानू यात्रा महोत्सव -- ओडिशा
♦️ नूआखाई महोत्सव -- ओडिशा
♦️ अंतः प्रगणय महोत्सव -- तेलंगाना
♦️ बोनालू उत्सव -- तेलंगाना
♦️ बुधकम्मा उत्सव -- तेलंगाना
♦️ लाई हरोबा त्योहार -- त्रिपुरा
♦️ लोसार त्योहार -- हिमाचल प्रदेश
♦️ फागली महोत्सव -- हिमाचल प्रदेश
♦️ देव सूर्य महोत्सव -- बिहार
♦️ चापचार कूट महोत्सव -- मिजोरम
♦️ फुलदेई त्यौहार -- उत्तराखंड
♦️ मिर्च महोत्सव -- मध्य प्रदेश
♦️ शिरुई लिली -- मणिपुर
♦️ आदि महोत्सव -- लेह ,लद्दाख
♦️ लोसार महोत्सव -- लद्दाख
♦️ हॉर्नबिल फेस्टिवल -- नागालैंड
♦️ मांडू महोत्सव -- मध्य प्रदेश
♦️ अंतरराष्ट्रीय चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल - मेघालय
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♦️ फ्लेमिंगो महोत्सव -- आंध्र प्रदेश
♦️ धानू यात्रा महोत्सव -- ओडिशा
♦️ नूआखाई महोत्सव -- ओडिशा
♦️ अंतः प्रगणय महोत्सव -- तेलंगाना
♦️ बोनालू उत्सव -- तेलंगाना
♦️ बुधकम्मा उत्सव -- तेलंगाना
♦️ लाई हरोबा त्योहार -- त्रिपुरा
♦️ लोसार त्योहार -- हिमाचल प्रदेश
♦️ फागली महोत्सव -- हिमाचल प्रदेश
♦️ देव सूर्य महोत्सव -- बिहार
♦️ चापचार कूट महोत्सव -- मिजोरम
♦️ फुलदेई त्यौहार -- उत्तराखंड
♦️ मिर्च महोत्सव -- मध्य प्रदेश
♦️ शिरुई लिली -- मणिपुर
♦️ आदि महोत्सव -- लेह ,लद्दाख
♦️ लोसार महोत्सव -- लद्दाख
♦️ हॉर्नबिल फेस्टिवल -- नागालैंड
♦️ मांडू महोत्सव -- मध्य प्रदेश
♦️ अंतरराष्ट्रीय चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल - मेघालय
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🔲भारत के 7 पड़ोसी देश के साथ सीमाओं की लम्बाई🔲
🔲बांग्लादेश - 4096.7 किमी.
🔳(असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा व पश्चिम बंगाल)
🔲चीन - 3488 किमी.
🔳(जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम एंव अरूणाचल प्रदेश)
🔲पाकिस्तान - 3323 किमी.
🔳(गुजरात, राजस्थान, पंजाब एवं जम्मू कश्मीर
🔲नेपाल - 1751 किमी.
🔳(उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, व उत्तराखंड
🔲मयांमार - 1643 किमी.
🔳(अरूणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम, व मणिपुर)
🔲भूटान - 699 किमी.
🔳(सिक्किम, असम, व पश्चिम बंगाल, अरूणाचल प्रदेश)
🔲अफगानिस्तान -106 किमी Pok
🔳(जम्मू-कश्मीर, (पाक अधिकृत))
🔲बांग्लादेश - 4096.7 किमी.
🔳(असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा व पश्चिम बंगाल)
🔲चीन - 3488 किमी.
🔳(जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम एंव अरूणाचल प्रदेश)
🔲पाकिस्तान - 3323 किमी.
🔳(गुजरात, राजस्थान, पंजाब एवं जम्मू कश्मीर
🔲नेपाल - 1751 किमी.
🔳(उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, व उत्तराखंड
🔲मयांमार - 1643 किमी.
🔳(अरूणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम, व मणिपुर)
🔲भूटान - 699 किमी.
🔳(सिक्किम, असम, व पश्चिम बंगाल, अरूणाचल प्रदेश)
🔲अफगानिस्तान -106 किमी Pok
🔳(जम्मू-कश्मीर, (पाक अधिकृत))
Sbhi ko namste hmari team IGNOU media aapko ek bar fir se suchit kar rahi hai ki ki ham IGNOU se Jude sabhi bacchon ki kaksha shuru kar rahe hain ham chahte Hain ki aap bhi vah kaksha jOIN karo bilkul free mein aap sabse anurodh hai ki IGNOU MEDIA YouTube channel ko subscribe karo
IGNOU MEDIA YouTube channel link :- https://www.youtube.com/channel/UCRBWM9MJ52v0nUff1gymh0w
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LearnWithIGNOU
4_5881111075033711200-Converted.pdf
IGNOU STUDENTS All NEW UPDATE
आप सभी को एक बार फिर से सूचित किया जाता है कि इग्नू मीडिया यूट्यूब टीम आप सबके लिए इग्नू से जुड़े हर प्रोग्राम की क्लास शुरु कर रही है आप सब से अनुरोध है कि इग्नू मीडिया यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब कीजिए और हर रोज कुछ नया सीखे इग्नू मीडिया टीम के साथ आप सब का बहुत-बहुत धन्यवाद
IGNOU Media YouTube Channel Link :-
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चीन समेत 15 देशों ने सबसे बड़े व्यापार समझौते पर किए हस्ताक्षर, जानें विस्तार से
आसियान के सदस्य देशों और चीन समेत कुल 15 देशों ने 15 नवंबर 2020 को विश्व के सबसे बड़े व्यापार समझौते क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) का गठन करने पर वर्चुअल तौर पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके दायरे में विश्वभर की लगभग एक तिहाई आर्थिक गतिविधियां आएंगी.
इस समझौते को चीन के लिए एक बड़ा गेमचेंजर के तौर पर देखा जा रहा है. कई एशियाई देशों को उम्मीद है कि इस समझौते के बाद से कोरोना वायरस महामारी की आर्थिक मार से तेजी से उबरने में सहायता मिलेगी. इस क्षेत्रीय साझेदारी के जरिए चीन की कोशिश एशियाई बाजारों एवं व्यापार में अपना दबदबा बढ़ाना है.
शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता
विशेषज्ञों के अनुसार, क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP)- जिसमें चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के साथ दस दक्षिण पूर्व एशियाई अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं. जीडीपी के संदर्भ में दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है. वियतनाम के प्रधानमंत्री ने चौथे क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की.
पहली बार 2012 में समझौता
पहली बार 2012 में प्रस्तावित, इस सौदे पर आखिरकार दक्षिण-पूर्व एशियाई शिखर सम्मेलन (आसियान सम्मेलन) के अंत में मुहर लगा दी गई थी क्योंकि सदस्य देशों के नेता महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए इसे कारगर मान रहे हैं.
समझौते से संबंधित तथ्य
समझौते के तहत सदस्य देश टैरिफ कम करेंगे और व्यापार सेवा के रास्ते खोलेंगे. इस समझौते में अमेरिका को शामिल नहीं किया गया है. लिहाजा, इसे चीन के नेतृत्व में एक वैकल्पिक व्यापार समझौता समझा जा रहा है. इस समझौते में आसियान के 10 सदस्य देशों के अलावा चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं.
क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP): एक नजर में
आसियान समूह के दस देशों को लेकर इस साझेदारी पर चर्चा की शुरुआत सबसे पहले साल 2012 में हुई थी. इनमें चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल हैं. भारत को भी क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) पर हस्ताक्षर करना था लेकिन उसने पिछले साल खुद को इस साझेदारी से अलग कर लिया था. RCEP का लक्ष्य कंपनियों की लागत और समय में कमी लाना भी है.
भारत ने क्यों खुद को अलग किया
भारत ने इस साझेदारी के तहत मार्केट एक्सेस का मुद्दा उठाया था और इस बात की आशंका जतायी थी कि देश के बाजार में अगर चीन के सस्ते सामानों का दबदबा हो जाएगा तो भारत के घरेलू उत्पादकों एवं विनिर्माताओं पर बहुत अधिक असर पड़ेगा. विशेषकर टेक्सटाइल, डेयरी और कृषि सेक्टर को लेकर यह आशंका जाहिर की गई थी.
आसियान (ASEAN) के बारे में
आसियान (ASEAN) का पूरा नाम Association of Southeast Asian Nations है. दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन एक क्षेत्रीय संगठन है जो एशिया-प्रशांत के उपनिवेशी राष्ट्रों के बढ़ते तनाव के बीच राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिये स्थापित किया गया था. आसियान के दस देशों में इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया है.
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आसियान के सदस्य देशों और चीन समेत कुल 15 देशों ने 15 नवंबर 2020 को विश्व के सबसे बड़े व्यापार समझौते क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) का गठन करने पर वर्चुअल तौर पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके दायरे में विश्वभर की लगभग एक तिहाई आर्थिक गतिविधियां आएंगी.
इस समझौते को चीन के लिए एक बड़ा गेमचेंजर के तौर पर देखा जा रहा है. कई एशियाई देशों को उम्मीद है कि इस समझौते के बाद से कोरोना वायरस महामारी की आर्थिक मार से तेजी से उबरने में सहायता मिलेगी. इस क्षेत्रीय साझेदारी के जरिए चीन की कोशिश एशियाई बाजारों एवं व्यापार में अपना दबदबा बढ़ाना है.
शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता
विशेषज्ञों के अनुसार, क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP)- जिसमें चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के साथ दस दक्षिण पूर्व एशियाई अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं. जीडीपी के संदर्भ में दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है. वियतनाम के प्रधानमंत्री ने चौथे क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की.
पहली बार 2012 में समझौता
पहली बार 2012 में प्रस्तावित, इस सौदे पर आखिरकार दक्षिण-पूर्व एशियाई शिखर सम्मेलन (आसियान सम्मेलन) के अंत में मुहर लगा दी गई थी क्योंकि सदस्य देशों के नेता महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए इसे कारगर मान रहे हैं.
समझौते से संबंधित तथ्य
समझौते के तहत सदस्य देश टैरिफ कम करेंगे और व्यापार सेवा के रास्ते खोलेंगे. इस समझौते में अमेरिका को शामिल नहीं किया गया है. लिहाजा, इसे चीन के नेतृत्व में एक वैकल्पिक व्यापार समझौता समझा जा रहा है. इस समझौते में आसियान के 10 सदस्य देशों के अलावा चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं.
क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP): एक नजर में
आसियान समूह के दस देशों को लेकर इस साझेदारी पर चर्चा की शुरुआत सबसे पहले साल 2012 में हुई थी. इनमें चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल हैं. भारत को भी क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) पर हस्ताक्षर करना था लेकिन उसने पिछले साल खुद को इस साझेदारी से अलग कर लिया था. RCEP का लक्ष्य कंपनियों की लागत और समय में कमी लाना भी है.
भारत ने क्यों खुद को अलग किया
भारत ने इस साझेदारी के तहत मार्केट एक्सेस का मुद्दा उठाया था और इस बात की आशंका जतायी थी कि देश के बाजार में अगर चीन के सस्ते सामानों का दबदबा हो जाएगा तो भारत के घरेलू उत्पादकों एवं विनिर्माताओं पर बहुत अधिक असर पड़ेगा. विशेषकर टेक्सटाइल, डेयरी और कृषि सेक्टर को लेकर यह आशंका जाहिर की गई थी.
आसियान (ASEAN) के बारे में
आसियान (ASEAN) का पूरा नाम Association of Southeast Asian Nations है. दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन एक क्षेत्रीय संगठन है जो एशिया-प्रशांत के उपनिवेशी राष्ट्रों के बढ़ते तनाव के बीच राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिये स्थापित किया गया था. आसियान के दस देशों में इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया है.
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RT The Institute of Company Secretaries of India: #ICSI signs MOU for Academic Collaborations with #IGNOU in the benign presence of Shri V. Muraleedha...
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#ICSI signs MOU for Academic Collaborations with #IGNOU in the benign presence of Shri V. Muraleedharan, Hon'ble Union Minister of State for External Affairs & Parliamentary Affairs, Govt. of India
Revaluation Results - JUNE 2020 3rd Update - https://studentservices.ignou.ac.in/RE_Result/RevalJun20/revalJun20.asp