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News, messages, and statements from Ayatullah Khamenei, Iran's Supreme Leader

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📷 ईरान के राष्ट्रीय प्रसारण केन्द्र आईआरआईबी के कान्फ़्रेंस हॉल में, "हम और पश्चिम" शीर्षक के तहत कान्फ़्रेंस जारी

▪️यह कान्फ़्रेंस पिछले साल इसी महीने में शुरू हुयी थी और साल भर जारी रही। इस कान्फ्रेंस में रिसर्च स्कॉलर और बुद्धिजीवी भाग ले रहे हैं। यह कान्फ़्रेंस आज 10 नवम्बर 2025 को संपन्न होगी।

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📖 क़ुरआन की रौशनी मेंः तौहीद के अक़ीदे का मतलब है,तौहीद पर आधारित समाज को वजूद में लाना

पैग़म्बरों का अभियान व कोशिश तौहीद के लिए है... तौहीद का अक़ीदा, वर्ल्ड व्यू की बुनियाद है जो ज़िन्दगी बनाती है। तौहीद के अक़ीदे का मतलब, तौहीद पर आधारित समाज बनाना, वह समाज जो तौहीद की बुनियाद पर वजूद में आया हो और चल रहा हो। तौहीद का अक़ीदा यह है, अगर यह न होता तो पैग़म्बरों से दुश्मनी भी वजूद में न आतीः “और इसी तरह हमने हर नबी के लिए इंसानों और जिनों में से शैतानों को दुश्मन क़रार दिया है जो एक दूसरे को धोखा व फ़रेब देने के लिए बनावटी बातों की सरगोशी करते हैं।” (सूरए अनाम, आयत-112) ये दुश्मनियां इसलिए हैं कि पैग़म्बर आए। उन्होंने समाज के ढांचे का विरोध किया और इंसान की जीवन शैली के लिए एक नई शक्ल और एक नया ढांचा पेश किया। वह जीवन शैली ही पाक ज़िन्दगी है।

इमाम ख़ामेनेई
28/08/2017

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🎥 पहलवी दौर, ईरानी समकालीन इतिहास में सरेडंर होने का सबसे काला दौर


पहलवी दौर का ईरान, ग़ुलामों की तरह पश्चिम का अनुसरण करता था। ब्रिटेन और अमरीका के दूत, आए दिन शाह के साथ बैठक करते और उसे निर्देश देते थे। इंक़ेलाब होने की एक वजह, पश्चिम की ओर से अपमान किया जाना था जिसे महान ईरानी राष्ट्र बर्दाश्त न कर सका।

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🇮🇷 ईरानी आग, ज़ायोनी राख

जून 2025 में ज़ायोनी सरकार के अग्रेशन के जवाब में ईरान ने वाइज़मैन इंस्टिट्यूट सहित मक़बूज़ा इलाक़ों के अनेक अहम ठिकानों को निशाना बनाया।

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💠 दरस-ए-अख़लाक़ः अल्लाह के दर पर जाना चाहिएताकि दूसरों के सामने गिड़गिड़ाना न पड़े

इंसान सिर से पांव तक ज़रूरतमंद है, इन ज़रूरतों से छुटकारा पाने और इन ज़रूरतों की पूर्ति के लिए किससे कहें? अल्लाह से; क्योंकि वह हमारी ज़रूरतों को जानता है, अल्लाह जानता है कि आप क्या चाहते हैं, क्या ज़रूरी है; और कौन सी चीज़ आप उससे मांग रहे हैं और सवाल कर रहे हैं तो अपने अल्लाह से मांगिए। अल्लाह फ़रमाता हैः मुझसे दुआ करो। यानी मुझको पुकारो मैं तुमको जवाब देता हूं, अलबत्ता यह जवाब देना, ज़रूरत पूरी कर देने के मानी में नहीं है, फ़रमाता हैः मैं तुमको जवाब देता हूं और लब्बैक कहता हूं। “मैं तुम्हारी दुआ क़ुबूल करुंगा” निश्चित तौर पर अल्लाह की तरफ़ से जवाब बहुत से मौक़ों पर हाजत पूरी होने और जो कुछ आपने अल्लाह से चाहा है उसके पूरे होने के साथ है। (अल्लाह अपने बंदों को दूसरों का मोहताज देखना पसंद नहीं करता)

इमाम ख़ामेनेई
17/2/1995

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🎥 पश्चिम के वर्चस्ववाद के मुक़ाबले में ईरानी क़ौम की स्वाधीनता और रेज़िस्टेंस

पश्चिम का राजनैतिक और सुरक्षा वर्चस्व जमाने का स्वभाव है कि जिसकी जड़ें कई सदी पुरानी हैं। इस्लामी इंक़ेलाब की बुनियाद ही इस वर्चस्व को उखाड़ने के लिए पड़ी। अमरीका के मौजूदा राष्ट्रपति, दूसरे मुल्कों की स्वाधीनता के सबसे बड़े दुश्मन हैं।

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🇵🇸 आज फ़िलिस्तीन का नाम पहले से ज़्यादा उज्जवल

फ़िलिस्तीन के मसले को भुला दिए जाने की साम्राज्यावादियों और ज़ायोनी सरकार के समर्थकों की कोशिशों के बावजूद,आज फ़िलिस्तीन का नाम पहले से ज़्यादा उज्जवल है।

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🏡 इस्लामी घरानाः मियां-बीवी मोहब्बत से रहें

ज़्यादातर फ़ैमिली के बिखरने की वजह एक दूसरे का ख़याल न रखना है। शौहर को बीवी का ख़याल रखना नहीं आता, बीवी समझदारी नहीं दिखा पाती। वह हद से ज़्यादा सख़्ती और ग़ुस्से से काम लेता है, ये बेसब्री दिखाती है। हर बात पर एतेराज़ व विरोध होता है। अगर कभी कोई ग़लती हो गयी तो वो फ़ौरन ग़ुस्से में न आए, यह नाफ़रमानी न करे। एक दूसरे से संबंध बनाए रखें तो कोई भी घर बिखरेगा नहीं और फ़ैमिली सुरक्षित रहेगी।

इमाम ख़ामेनेई
8/02/1997

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🎥 अमरीका और ज़ायोनी शासन,इस वक़्त जनमत की निगाह में सबसे ज़्यादा घृणित

आज क़ौमों में अमरीका से नफ़रत हज़ारों गुना बढ़ चुकी है। उनकी हालिया करतूतों ने उनकी साम्राज्यवादी प्रवृत्ति को उजागर कर दिया है।

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🎥 आदरणीय ईरानी क़ौम इस्लामी इंक़ेलाब के ताक़तवर नेतृत्व के साथ अमरीकी-ज़ायोनी ज़ुल्म के ख़िलाफ़ डट गयी

इस्लामी इंक़ेलाब के नेता, जंग के मोर्चे का पल पल नेतृत्व कर रहे थे और ज़रूरी आदेश जारी कर रहे थे, यहाँ तक कि क़रीब क़रीब पूरे वक़्त वे जंग और अवाम की ज़रूरतों को पूरा करने में लगे रहे।

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🇮🇷 वह मर्द, जो जानता ही नहीं था कि मायूसी क्या चीज़ है

ईरान के मिज़ाईल उद्योग के जनक ब्रिगेडियर जनरल शहीद हसन तेहरानी मुक़द्दम, दोस्तो! हमने सीखा है कि बड़े कामों और कठिन रास्तों को इरादे, दृढ़ता और फ़ौलादी संकल्प से जीता जाता है। हमें, इस्लामी इंक़ेलाब के नेता के बाज़ुओं की ताक़त बनना है।

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▪️हेजाब को एक धार्मिक, इस्लामी, फ़ातेमी औरज़ैनबी मसला समझें

🔸अपनी प्यारी बेटियों से, सभा में मौजूद महिलाओं से कहना चाहता हूं कि जो लोग आपके आस-पास हैं उन्हें ध्यान दिलाइये कि हेजाब को एक धार्मिक, इस्लामी, फ़ातेमी और ज़ैनबी मसला समझें।

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🎥 अमरीका से इन शर्तों पर संबंध बहाल कर सकता है ईरान

अगर (अमरीका) ज़ायोनी शासन का सपोर्ट करना पूरी तरह छोड़ दे, यहाँ (क्षेत्र) से अपनी सैन्य छावनियों को ख़त्म कर दे, इस इलाक़े में हस्तक्षेप न करे, उस वक़्त इस मसले की समीक्षा की जा सकती है।

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📖 क़ुरआन की रौशनी में: पैग़म्बरे इस्लाम सल्लललाहोअलैहि वआलेही वसल्लम आदर्श हैं

इस आयत पर अमल करें जिसमें अल्लाह ने फ़रमाया है, “बेशक तुम्हारे लिए पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम के वजूद में (पैरवी के लिए) बेहतरीन नमूना मौजूद है। हर उस शख़्स के लिए जो अल्लाह (की बारगाह में हाज़िरी) और क़यामत (के आने) की उम्मीद रखता है और अल्लाह को बहुत याद करता है” (सूरए अहज़ाब, आयत-21) पैग़म्बरे इस्लाम बेहतरीन नमूना हैं यह बात क़ुरआन ने साफ़ लफ़्ज़ों में कही है। “उसवा” हैं! इसका क्या मतलब है? यानी एक नमूना हैं और हमको इस नमूने की पैरवी करनी चाहिए। वह एक ऊंची चोटी पर हैं और हमको जो इस घाटी में हैं उस चोटी पर पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए। क़दम बढ़ाना चाहिए, इंसान जहाँ तक भी जा सकता है आगे बढ़े, उस चोटी की ओर बढ़ता जाए “उसवा” का मतलब यह है।

इमाम ख़ामेनेई
4/10/2022

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ईरानी आग, ज़ायोनी राख

🔸 जून 2025 में ज़ायोनी सरकार के अग्रेशन के जवाब में ईरान ने मक़बूज़ा फ़िलिस्तीन में ज़ायोनी फ़ौज के कमांड सेंटर किरया सहित अनेक अहम ठिकानों को निशाना बनाया।

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💠 दरस-ए-अख़लाक़: दुआ से अल्लाह की याद दिल में ज़िन्दा रहती है

रिवायत में दुआ को इबादत का निचोड़ कहा गया है। इबादत की जान, दुआ है। दुआ का क्या मतलब है? मतलब है अल्लाह से बातें करना। अस्ल में अल्लाह को अपने पास महसूस करना और अपने मन की बात उसके सामने रखना... दिल में अल्लाह की याद ताज़ा व ज़िन्दा रखने से ग़फ़लत व लापरवाही ख़त्म होती है जो सभी गुमराहियों व भटकाव तथा इंसान की ख़राबियों की जड़ है। दुआ ग़फ़लत के पर्दे हटा देती है, दुआ इंसान के दिल से ग़फ़लत को दूर कर देती है और इंसान को अल्लाह की याद में लगा देती है और अल्लाह की याद दिल में जगाए रखती है। दुआ से वंचित लोगों को जो सबसे बड़ा नुक़सान उठाना पड़ता है वो यह है कि अल्लाह की याद उनके दिल से निकल जाती है। अल्लाह से ग़फ़लत इंसान के लिए बहुत बड़ा नुक़सान है।

इमाम ख़ामेनेई
30/10/1998

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