कृषि क्रांतियां 👌 रट लो अक्सर एग्जाम में आते हैं :)
हरित क्रांति -- खाद्यान्न उत्पादन
श्वेत क्रांति -- दुग्ध उत्पादन
नीली क्रांति -- मत्स्य उत्पादन
भूरी क्रांति -- उर्वरक उत्पादन
रजत क्रांति -- अंडा उत्पादन
पीली क्रांति -- तिलहन उत्पादन
कृष्ण क्रांति -- बायोडीजल उत्पादन
लाल क्रांति -- टमाटर/मांस उत्पादन
गुलाबी क्रांति -- झींगा मछली उत्पादन
बादामी क्रांति -- मासाला उत्पादन
सुनहरी क्रांति -- फल उत्पादन
अमृत क्रांति -- नदी जोड़ो परियोजनाएं
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श्वेत क्रांति -- दुग्ध उत्पादन
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1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना
►-1885 ई.
2. बंग-भंग आंदोलन(स्वदेशी आंदोलन)
►-1905 ई.
3. मुस्लिम लीग की स्थापना
►-1906 ई.
4.कांग्रेस का बंटवारा
►-1907 ई.
5. होमरूल आंदोलन
1916 ई.
6. लखनऊ पैक्ट
►-दिसंबर 1916 ई.
7. मांटेग्यू घोषणा
►-20 अगस्त 1917 ई.
8. रौलेट एक्ट
►-19 मार्च 1919 ई.
9. जालियांवाला बाग हत्याकांड
►-13 अप्रैल 1919 ई.
10. खिलाफत आंदोलन
►-1919 ई.
11. हंटर कमिटी की रिपोर्ट प्रकाशित
►-18 मई 1920 ई.
12. कांग्रेस का नागपुर अधिवेशन
►-दिसंबर 1920 ई.
13. असहयोग आंदोलन की शुरुआत
►-1 अगस्त 1920 ई.
14. चौरी-चौरा कांड
►-5 फरवरी 1922 ई.
15. स्वराज्य पार्टी की स्थापना
►-1 जनवरी 1923 ई.
16. हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन
►-अक्टूबर 1924 ई.
17. साइमन कमीशन की नियुक्ति
►-8 नवंबर 1927 ई.
18. साइमन कमीशन का भारत आगमन
►-3 फरवरी 1928 ई.
19. नेहरू रिपोर्ट
►-अगस्त 1928 ई.
20. बारदौली सत्याग्रह
►-अक्टूबर 1928 ई.
21. लाहौर पड्यंत्र केस
►-8 अप्रैल 1929 ई.
22. कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन
दिसंबर 1929 ई.
23. स्वाधीनता दिवस की घोषणा
►-2 जनवरी 1930 ई.
24. नमक सत्याग्रह
►-12 मार्च 1930 ई. से 5 अप्रैल 1930 ई. तक
25. सविनय अवज्ञा आंदोलन
►-6 अप्रैल 1930 ई.
26. प्रथम गोलमेज आंदोलन
►-12 नवंबर 1930 ई.
27. गांधी-इरविन समझौता
►-8 मार्च 1931 ई.
28.द्वितीय गोलमेज सम्मेलन
►-7 सितंबर 1931 ई.
29. कम्युनल अवार्ड (साम्प्रदायिक पंचाट)
►-16 अगस्त 1932 ई.
30.पूना पैक्ट
►-सितंबर 1932 ई.
31. तृतीय गोलमेज सम्मेलन
►-17 नवंबर 1932 ई.
32. कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का गठन
►-मई 1934 ई.
33. फॉरवर्ड ब्लाक का गठन
►-1 मई 1939 ई.
34. मुक्ति दिवस
►-22 दिसंबर 1939 ई.
35. पाकिस्तान की मांग
►-24 मार्च 1940 ई.
36. अगस्त प्रस्ताव
►-8 अगस्त 1940 ई.
37. क्रिप्स मिशन का प्रस्ताव
►-मार्च 1942 ई.
38. भारत छोड़ो प्रस्ताव
►-8 अगस्त 1942 ई.
39. शिमला सम्मेलन
►-25 जून 1945 ई.
40. नौसेना का विद्रोह
►-19 फरवरी 1946 ई.
41. प्रधानमंत्री एटली की घोषणा
►-15 मार्च 1946 ई
42. कैबिनेट मिशन का आगमन
►-24 मार्च 1942 ई.
43. प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस
►-16 अगस्त 1946 ई.
44. अंतरिम सरकार की स्थापना
►-2 सितंबर 1946 ई.
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►-1885 ई.
2. बंग-भंग आंदोलन(स्वदेशी आंदोलन)
►-1905 ई.
3. मुस्लिम लीग की स्थापना
►-1906 ई.
4.कांग्रेस का बंटवारा
►-1907 ई.
5. होमरूल आंदोलन
1916 ई.
6. लखनऊ पैक्ट
►-दिसंबर 1916 ई.
7. मांटेग्यू घोषणा
►-20 अगस्त 1917 ई.
8. रौलेट एक्ट
►-19 मार्च 1919 ई.
9. जालियांवाला बाग हत्याकांड
►-13 अप्रैल 1919 ई.
10. खिलाफत आंदोलन
►-1919 ई.
11. हंटर कमिटी की रिपोर्ट प्रकाशित
►-18 मई 1920 ई.
12. कांग्रेस का नागपुर अधिवेशन
►-दिसंबर 1920 ई.
13. असहयोग आंदोलन की शुरुआत
►-1 अगस्त 1920 ई.
14. चौरी-चौरा कांड
►-5 फरवरी 1922 ई.
15. स्वराज्य पार्टी की स्थापना
►-1 जनवरी 1923 ई.
16. हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन
►-अक्टूबर 1924 ई.
17. साइमन कमीशन की नियुक्ति
►-8 नवंबर 1927 ई.
18. साइमन कमीशन का भारत आगमन
►-3 फरवरी 1928 ई.
19. नेहरू रिपोर्ट
►-अगस्त 1928 ई.
20. बारदौली सत्याग्रह
►-अक्टूबर 1928 ई.
21. लाहौर पड्यंत्र केस
►-8 अप्रैल 1929 ई.
22. कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन
दिसंबर 1929 ई.
23. स्वाधीनता दिवस की घोषणा
►-2 जनवरी 1930 ई.
24. नमक सत्याग्रह
►-12 मार्च 1930 ई. से 5 अप्रैल 1930 ई. तक
25. सविनय अवज्ञा आंदोलन
►-6 अप्रैल 1930 ई.
26. प्रथम गोलमेज आंदोलन
►-12 नवंबर 1930 ई.
27. गांधी-इरविन समझौता
►-8 मार्च 1931 ई.
28.द्वितीय गोलमेज सम्मेलन
►-7 सितंबर 1931 ई.
29. कम्युनल अवार्ड (साम्प्रदायिक पंचाट)
►-16 अगस्त 1932 ई.
30.पूना पैक्ट
►-सितंबर 1932 ई.
31. तृतीय गोलमेज सम्मेलन
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►-1 मई 1939 ई.
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►-24 मार्च 1940 ई.
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►-8 अगस्त 1940 ई.
37. क्रिप्स मिशन का प्रस्ताव
►-मार्च 1942 ई.
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►-8 अगस्त 1942 ई.
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►-25 जून 1945 ई.
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►-19 फरवरी 1946 ई.
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43. प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस
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Topic नृत्य
कथक
कथक नृत्य (उत्तर प्रदेश) में कथक शब्द संस्कृत के वैदिक शब्द कथा से आया है जिसका अर्थ है "कहानी" और कथाकर का अर्थ है "वह जो कहानी सुनाता है" या "कहानियों से संबंधित"। राधा और कृष्ण की कहानी कथक का प्रमुख विषय है।
यह मुगलों के शासनकाल में लोकप्रिय हुआ। इस नृत्य का स्वर्ण युग वाजिद अली शाह (अवध के अंतिम नवाब) के संरक्षण में आया था।
कथक नृत्य के तीन मुख्य भाग हैं मंगलाचरण और 'नाट्य शास्त्र' में वर्णित 'नृत्ता' और 'नृत्य'।
प्रसिद्ध नर्तकः पंडित बिरजू महाराज, लच्छू महाराज, शंभू महाराज, शोवना नारायण, कुमारी कमला, सुनन्या हजारीलाल अग्रवाल, पंडित दुर्गालाल, प्रेरणा श्रीमाला, रानी कर्णा, सितारा देवी, रूपा रानी दास बोरा आदि।
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Topic नृत्य
कथक
कथक नृत्य (उत्तर प्रदेश) में कथक शब्द संस्कृत के वैदिक शब्द कथा से आया है जिसका अर्थ है "कहानी" और कथाकर का अर्थ है "वह जो कहानी सुनाता है" या "कहानियों से संबंधित"। राधा और कृष्ण की कहानी कथक का प्रमुख विषय है।
यह मुगलों के शासनकाल में लोकप्रिय हुआ। इस नृत्य का स्वर्ण युग वाजिद अली शाह (अवध के अंतिम नवाब) के संरक्षण में आया था।
कथक नृत्य के तीन मुख्य भाग हैं मंगलाचरण और 'नाट्य शास्त्र' में वर्णित 'नृत्ता' और 'नृत्य'।
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मिडल क्लास लौंडे बेचारे...
पढ़ना कुछ और चाहते हैं , पढ़ाया कुछ और जाता है , बन कुछ और जाते हैं !
पसन्द किसी और को करते हैं, प्यार किसी और का मिलता है शादी किसी और से हो जाती है !
चाय बना लेते हैं, कर्ज़ लेने और देने में जरा सी भी देरी नही करते ! रिश्तेदारों को शहर घुमाने की जिम्मेदारी यही निभाते हैं !
4जी फोन लेने में इन्हें साल भर लगता है ! गैस भरवाने की जिम्मेदारी , सुबह दूध और शाम की सब्जी लाने जैसा कठिन और दर्दनाक काम भी यही करते हैं !
खुद की प्रेमिका की शादी में 'नागिन डांस' करने का गौरव केवलः इन्हें ही प्राप्त है ! आइसक्रीम की टेस्ट से इन्हें शादी में हुए खर्चों का अंदाजा लग जाता है !
लुसेंट इनकी जिंदगी में उस गर्लफ्रेंड की तरह होती है जो साथ तो रहती है लेकिन समझ कभी नही आती !
रीजनिंग के प्रश्न चुटकी में हल कर देने वाले ये मिडल क्लास लौंडे खुद की जिंदगी की समस्याओं में उलझे रह जाते हैं !
घर और अपनी 'जान' से किसी लायक बनने का वादा करके निकले ये मिडल क्लास लौंडे जब तक लायक हो के घर लौटते हैं तब तक उनकी जान 'दो चार जानो' की 'जननी' बन चुकी होती है !
पापा की बेइज्जती इन्हें कतई पसन्द नही आती,पापा से खूब फटती भी है ! मम्मी से अक्सर रुडली बात करने के बावजूद माँ के गोद मे सर रख कर रोने वाले ये लौंडे बहुत कमजोर भी होते हैं !
जिम्मेदारियां जल्दी निभाना सीख जाते हैं , रिश्तेदारों के तमाम अड़ंगों के बावजूद मां-बाप का विश्वास कैसे बनाये रखना है इन्हें बखूबी आता है !
चीटिंग कभी कर नही पाते क्योंकि मौका ही नही मिलता !
इश्क़ करने की औकात ही नही क्योंकि रिजेक्शन झेलने की हिम्मत नही ! कोई इनपर 'यु आर चीप' का आरोप नही लगाता क्योंकि ये किसी भी लड़की के साथ सोए नही होते हैं ! अजी सोना छोड़िए, ये किसी लड़की के साथ जागे तक नही होते हैं !
इनकी शादियाँ अक्सर अरेंज्ड ही होती हैं, ऑफकोर्स रिश्तेदारों द्वारा...
इनका इश्क़ अक्सर अधूरा रह जाता है, इनके सपने, इनकी जिंदगी सब अधूरी....
पर ये बेहया लौंडे किसी को एहसास तक नही होने देते..
पहले पापा-मां के सपने फिर सोशायटी मेंटेन करना और उसके बाद अरेंज्ड मैरिज वाली बीबी की एक्सपेक्टेशंस पूरी करते हैं ये अधूरे लौंडे !
सबको पूरा करने के चक्कर मे अधूरे रह जाते हैं ये मिडल क्लास लौंडे !❤️🖤
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पढ़ना कुछ और चाहते हैं , पढ़ाया कुछ और जाता है , बन कुछ और जाते हैं !
पसन्द किसी और को करते हैं, प्यार किसी और का मिलता है शादी किसी और से हो जाती है !
चाय बना लेते हैं, कर्ज़ लेने और देने में जरा सी भी देरी नही करते ! रिश्तेदारों को शहर घुमाने की जिम्मेदारी यही निभाते हैं !
4जी फोन लेने में इन्हें साल भर लगता है ! गैस भरवाने की जिम्मेदारी , सुबह दूध और शाम की सब्जी लाने जैसा कठिन और दर्दनाक काम भी यही करते हैं !
खुद की प्रेमिका की शादी में 'नागिन डांस' करने का गौरव केवलः इन्हें ही प्राप्त है ! आइसक्रीम की टेस्ट से इन्हें शादी में हुए खर्चों का अंदाजा लग जाता है !
लुसेंट इनकी जिंदगी में उस गर्लफ्रेंड की तरह होती है जो साथ तो रहती है लेकिन समझ कभी नही आती !
रीजनिंग के प्रश्न चुटकी में हल कर देने वाले ये मिडल क्लास लौंडे खुद की जिंदगी की समस्याओं में उलझे रह जाते हैं !
घर और अपनी 'जान' से किसी लायक बनने का वादा करके निकले ये मिडल क्लास लौंडे जब तक लायक हो के घर लौटते हैं तब तक उनकी जान 'दो चार जानो' की 'जननी' बन चुकी होती है !
पापा की बेइज्जती इन्हें कतई पसन्द नही आती,पापा से खूब फटती भी है ! मम्मी से अक्सर रुडली बात करने के बावजूद माँ के गोद मे सर रख कर रोने वाले ये लौंडे बहुत कमजोर भी होते हैं !
जिम्मेदारियां जल्दी निभाना सीख जाते हैं , रिश्तेदारों के तमाम अड़ंगों के बावजूद मां-बाप का विश्वास कैसे बनाये रखना है इन्हें बखूबी आता है !
चीटिंग कभी कर नही पाते क्योंकि मौका ही नही मिलता !
इश्क़ करने की औकात ही नही क्योंकि रिजेक्शन झेलने की हिम्मत नही ! कोई इनपर 'यु आर चीप' का आरोप नही लगाता क्योंकि ये किसी भी लड़की के साथ सोए नही होते हैं ! अजी सोना छोड़िए, ये किसी लड़की के साथ जागे तक नही होते हैं !
इनकी शादियाँ अक्सर अरेंज्ड ही होती हैं, ऑफकोर्स रिश्तेदारों द्वारा...
इनका इश्क़ अक्सर अधूरा रह जाता है, इनके सपने, इनकी जिंदगी सब अधूरी....
पर ये बेहया लौंडे किसी को एहसास तक नही होने देते..
पहले पापा-मां के सपने फिर सोशायटी मेंटेन करना और उसके बाद अरेंज्ड मैरिज वाली बीबी की एक्सपेक्टेशंस पूरी करते हैं ये अधूरे लौंडे !
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Topic नृत्य
कथकली
कथकली (केरल) में कथकली शब्द कथा (संस्कृत) से लिया गया है जिसका अर्थ है "कहानी या बातचीत या पारंपरिक कहानी", और काली (कला से) जिसका अर्थ है "प्रदर्शन और कला" । महाभारत और रामायण पर आधारित 'कृष्णनाट्टम' और रामनाट्टम नामक नृत्य-नाटक कला 'कथकली' के पूर्ववर्ती हैं।
इस नृत्य के पात्रों को व्यापक रूप से सात्विक (कृष्ण और राम जैसे महान चरित्र), राजसिका (बुरे चरित्र) और तमसिका (दाढ़ी वाले चरित्र) में विभाजित किया गया है। यह केरल के पारंपरिक सोपना संगीत का अनुसरण करता है।
कथकली का प्रदर्शन "केलिकोट्टु" से शुरू होता है, जो दर्शकों का ध्यान आकर्षित करता है और उसके बाद "थोडयम" होता है। "केलिकोट्टु" शाम को किए जाने वाले कथकली नृत्य की औपचारिक घोषणा है जब आंगन में थोड़ी देर के लिए ढोल और झांझ बजाए जाते हैं।
इसके बाद संगीतकार और ढोल वादक "मेलप्पादम" में अपने कौशल की प्रदर्शनी के साथ मंच संभालते हैं। प्रदर्शन का अंत "धनसी" नामक शुद्ध नृत्य के प्रदर्शन से होता है। "तिरानोक्कू", "पाचा" या "मिनुक्कू" के अलावा अन्य सभी पात्रों की मंच पर प्रथम फिल्म है।
प्रसिद्ध नर्तकः कलामंडलम गोपी, हरिप्रिया नंबूदिरी, कलामंडलम कृष्ण प्रसाद, कोट्टाकल शिवरामन, कलामंडलम रमनकुट्टी नायर, कलामंडलम वासु पिशारोडी, कबुंगल चाथुन्नी पणिक्कर।
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Topic नृत्य
कथकली
कथकली (केरल) में कथकली शब्द कथा (संस्कृत) से लिया गया है जिसका अर्थ है "कहानी या बातचीत या पारंपरिक कहानी", और काली (कला से) जिसका अर्थ है "प्रदर्शन और कला" । महाभारत और रामायण पर आधारित 'कृष्णनाट्टम' और रामनाट्टम नामक नृत्य-नाटक कला 'कथकली' के पूर्ववर्ती हैं।
इस नृत्य के पात्रों को व्यापक रूप से सात्विक (कृष्ण और राम जैसे महान चरित्र), राजसिका (बुरे चरित्र) और तमसिका (दाढ़ी वाले चरित्र) में विभाजित किया गया है। यह केरल के पारंपरिक सोपना संगीत का अनुसरण करता है।
कथकली का प्रदर्शन "केलिकोट्टु" से शुरू होता है, जो दर्शकों का ध्यान आकर्षित करता है और उसके बाद "थोडयम" होता है। "केलिकोट्टु" शाम को किए जाने वाले कथकली नृत्य की औपचारिक घोषणा है जब आंगन में थोड़ी देर के लिए ढोल और झांझ बजाए जाते हैं।
इसके बाद संगीतकार और ढोल वादक "मेलप्पादम" में अपने कौशल की प्रदर्शनी के साथ मंच संभालते हैं। प्रदर्शन का अंत "धनसी" नामक शुद्ध नृत्य के प्रदर्शन से होता है। "तिरानोक्कू", "पाचा" या "मिनुक्कू" के अलावा अन्य सभी पात्रों की मंच पर प्रथम फिल्म है।
प्रसिद्ध नर्तकः कलामंडलम गोपी, हरिप्रिया नंबूदिरी, कलामंडलम कृष्ण प्रसाद, कोट्टाकल शिवरामन, कलामंडलम रमनकुट्टी नायर, कलामंडलम वासु पिशारोडी, कबुंगल चाथुन्नी पणिक्कर।
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सभी शासकीय नृत्य पूरे करवा दिए गए है With Details आप लोग react ❤️ करके बताए कैसे लगे और search 🔍 करने के लिए ऊपर search 🔍 बार में #static_gk डाले सभी मिल जायेंगे ।
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VDO डीवी 7 से 15 कार्यदिवस में समाप्त हो जायेगी
आपकी डीवी नोटिस पे काम चल रहा हैं कंप्लीट होते ही अपलोड हो जायेगी
#VDO
अमन रस्तोगी
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आपकी डीवी नोटिस पे काम चल रहा हैं कंप्लीट होते ही अपलोड हो जायेगी
#VDO
अमन रस्तोगी
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कुछ चैनल और यूट्यूब द्वारा सेविका भर्ती कैंसल होगी ऐसी सूचना दी जा रही हैं
जॉब अलर्ट चैनल ऐसी अफवाहों का खण्डन करता हैं ऐसा कुछ नहीं है
आप लोग ऐसी अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें
जॉब अलर्ट रखें हमेशा आपको अलर्ट
अमन रस्तोगी
#sevika
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जॉब अलर्ट चैनल ऐसी अफवाहों का खण्डन करता हैं ऐसा कुछ नहीं है
आप लोग ऐसी अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें
जॉब अलर्ट रखें हमेशा आपको अलर्ट
अमन रस्तोगी
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Topic मेले
असम
अम्बुबाची मेला कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी में आयोजित किया जाता है। यह जून के मध्य में आयोजित किया जाता है।
जोन बील मेला असम के मोरीगांव जिले के राजमार्ग शहर जगीरोड के पास असमिया कैलेंडर के माघ (जनवरी के मध्य) में आयोजित किया जाता है।
बिहार
सोनपुर पशु मेला एशिया के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक है, जो दो नदियों, गंगा और गंडक के संगम पर आयोजित किया जाता है। यह प्रतिवर्ष नवंबर माह में कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित किया जाता है।
वैशाली मेला महावीर के जन्मदिन के अवसर पर चित्रा त्रयोदशी को वैशाली में आयोजित किया जाता है। यह मूल रूप से एक जैन त्योहार है, जिसे दिगंबर और श्वेतांबर दोनों जैन समुदायों द्वारा मनाया जाता है।
बौंसी (बांका) मेला मंदार क्षेत्र के ग्रामीण जीवन को दर्शाता है। यह मेला प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी (मकर संक्रांति के दिन) से शुरू होता है और एक महीने तक चलता है।
मलमास मेला गर्म कुंड (हॉट स्प्रिंग्स) में स्नान करने के लिए राजगीर में आयोजित किया जाता है।
बक्सर मेला का आयोजन चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी (रामनवमी) को होता है।
सिमरिया मेला बेगुसराय के सिमरिया गांव में आयोजित किया जाता है। यह वर्ष में दो बार गंगा स्नान और बाद में दान देने के लिए आयोजित किया जाता है।
सहोदरा मेला पश्चिमी चंपारण जिले के सहोदरा में मां सुभद्रा के पुराने मंदिर में थारूओं द्वारा आयोजित किया जाता है।
पितृपक्ष मेला सितंबर माह में गया में आयोजित होता है।
छत्तीसगढ
राजिम माघी पुन्नी मेला (छत्तीसगढ़ का कुंभ मेला) छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी धार्मिक सभाओं में से एक है जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। मध्य रात्रि को की जाने वाली विशेष पूजा में भाग लेने के लिए भक्त एक दिन पहले राजिम पहुंचते हैं और तीन पवित्र नदियों अर्थात् महानदी, पैरी और सोंदूर नदियों के संगम 'त्रिवेणी संगम' में पवित्र डुबकी लगाते हैं।
नारायणपुर मेला बस्तर जिले में आयोजित किया जाता है। यह छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की परंपराओं और रीति-रिवाजों से जुड़ा एक उत्सव है।
चंपारण मेला प्रत्येक वर्ष रायपुर में 'माघ' महीने में जनवरी से फरवरी तक आयोजित किया जाता है।
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Topic मेले
असम
अम्बुबाची मेला कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी में आयोजित किया जाता है। यह जून के मध्य में आयोजित किया जाता है।
जोन बील मेला असम के मोरीगांव जिले के राजमार्ग शहर जगीरोड के पास असमिया कैलेंडर के माघ (जनवरी के मध्य) में आयोजित किया जाता है।
बिहार
सोनपुर पशु मेला एशिया के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक है, जो दो नदियों, गंगा और गंडक के संगम पर आयोजित किया जाता है। यह प्रतिवर्ष नवंबर माह में कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित किया जाता है।
वैशाली मेला महावीर के जन्मदिन के अवसर पर चित्रा त्रयोदशी को वैशाली में आयोजित किया जाता है। यह मूल रूप से एक जैन त्योहार है, जिसे दिगंबर और श्वेतांबर दोनों जैन समुदायों द्वारा मनाया जाता है।
बौंसी (बांका) मेला मंदार क्षेत्र के ग्रामीण जीवन को दर्शाता है। यह मेला प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी (मकर संक्रांति के दिन) से शुरू होता है और एक महीने तक चलता है।
मलमास मेला गर्म कुंड (हॉट स्प्रिंग्स) में स्नान करने के लिए राजगीर में आयोजित किया जाता है।
बक्सर मेला का आयोजन चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी (रामनवमी) को होता है।
सिमरिया मेला बेगुसराय के सिमरिया गांव में आयोजित किया जाता है। यह वर्ष में दो बार गंगा स्नान और बाद में दान देने के लिए आयोजित किया जाता है।
सहोदरा मेला पश्चिमी चंपारण जिले के सहोदरा में मां सुभद्रा के पुराने मंदिर में थारूओं द्वारा आयोजित किया जाता है।
पितृपक्ष मेला सितंबर माह में गया में आयोजित होता है।
छत्तीसगढ
राजिम माघी पुन्नी मेला (छत्तीसगढ़ का कुंभ मेला) छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी धार्मिक सभाओं में से एक है जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। मध्य रात्रि को की जाने वाली विशेष पूजा में भाग लेने के लिए भक्त एक दिन पहले राजिम पहुंचते हैं और तीन पवित्र नदियों अर्थात् महानदी, पैरी और सोंदूर नदियों के संगम 'त्रिवेणी संगम' में पवित्र डुबकी लगाते हैं।
नारायणपुर मेला बस्तर जिले में आयोजित किया जाता है। यह छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की परंपराओं और रीति-रिवाजों से जुड़ा एक उत्सव है।
चंपारण मेला प्रत्येक वर्ष रायपुर में 'माघ' महीने में जनवरी से फरवरी तक आयोजित किया जाता है।
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JOB ALERT
VDO डीवी 7 से 15 कार्यदिवस में समाप्त हो जायेगी आपकी डीवी नोटिस पे काम चल रहा हैं कंप्लीट होते ही अपलोड हो जायेगी #VDO अमन रस्तोगी JOIN @JOBALERT143
7 से 15 कार्यदिवस का मतलब समझ गए रहें होंगे आप लोग ❤️❤️❤️
नही समझे होंगे तो डीवी नोटिस आएगी तब देख लेना इसका mtlb क्या था
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नही समझे होंगे तो डीवी नोटिस आएगी तब देख लेना इसका mtlb क्या था
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