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As I lay on the cot with my newborn daughter, a group of policemen suddenly stormed in. They forcibly pulled me out of the room and did the same to my husband. Then, they stepped on my infant daughter’s head, killing her. This is a brutal murder, and I demand justice.
Razida Khan, the grieving mother, shared with The Times of India.
जब मैं अपनी नवजात बेटी के साथ खाट पर सो रही थी. अचानक कई पुलिसकर्मी आए, मुझे खींचकर कमरे से बाहर भेज दिया, उन्होंने मेरे पति को भी बाहर निकाला. उन्होंने मेरी नवजात बेटी के सिर पर पैर रखा और उसे मार डाला. यह हत्या है और मुझे न्याय चाहिए।
बच्ची की मां रजीदा खान ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया
भोपाल, मध्य प्रदेश।
22 साल का अदनान नमाज पढ़ने मस्जिद गया था। ईशा की नमाज पढ़कर जब वह लौट रहा था, तब #हिंदुत्व #आतंकवादियों - शुभम सोलंकी, राज सोलंकी और लक्की सोलंकी - ने उस पर हमला किया। इन हिंदू आतंकवादियों ने अदनान को बेरहमी से चाकू मारकर शहीद कर दिया। 3 मार्च 2025 की रात अली इस घटना के बाद भी, सरकार का ढोंग और दोगलापन साफ दिखता है - पुलिस अभी तक आरोपियों को नहीं पकड़ पाई और इसे व्यक्तिगत दुश्मनी बताकर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि परिवार और समुदाय सांप्रदायिक मंशा की बात उठा रहे हैं।
#JusticeForAdnan की मांग जोर पकड़ रही है, लेकिन सरकार और प्रशासन का रवैया इस दुखदायी घटना के प्रति उदासीन और पक्षपाती बना हुआ है।
22 साल का अदनान नमाज पढ़ने मस्जिद गया था। ईशा की नमाज पढ़कर जब वह लौट रहा था, तब #हिंदुत्व #आतंकवादियों - शुभम सोलंकी, राज सोलंकी और लक्की सोलंकी - ने उस पर हमला किया। इन हिंदू आतंकवादियों ने अदनान को बेरहमी से चाकू मारकर शहीद कर दिया। 3 मार्च 2025 की रात अली इस घटना के बाद भी, सरकार का ढोंग और दोगलापन साफ दिखता है - पुलिस अभी तक आरोपियों को नहीं पकड़ पाई और इसे व्यक्तिगत दुश्मनी बताकर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि परिवार और समुदाय सांप्रदायिक मंशा की बात उठा रहे हैं।
#JusticeForAdnan की मांग जोर पकड़ रही है, लेकिन सरकार और प्रशासन का रवैया इस दुखदायी घटना के प्रति उदासीन और पक्षपाती बना हुआ है।
मुजफ्फरनगर के मुस्तफाबाद गांव में मुस्लिम समुदाय लंबे समय से शांतिपूर्वक निवास कर रहा था। लेकिन जब बात इबादत की आई, तो उन्हें अपने ही गांव में एक मस्जिद की कमी महसूस हुई। समुदाय ने मेहनत से धन एकत्र किया, जमीन खरीदी, और मस्जिद के निर्माण की शुरुआत की। यह एक आशा भरा कदम था, जिससे लोग अपनी धार्मिक प्रार्थनाएं बिना किसी बाधा के अदा कर सकें।
लेकिन निर्माण कार्य शुरू होते ही विरोध की आवाजें उठने लगीं। स्थानीय हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई, काम रुकवा दिया, और इसे एक विवाद का रूप दे दिया। जैसे एक मस्जिद का निर्माण सांप्रदायिक सौहार्द को खतरे में डाल देगा। सवाल यह है कि धार्मिक स्वतंत्रता, जो संविधान में समान रूप से सभी के लिए सुनिश्चित की गई थी, क्या वह वास्तव में सभी नागरिकों के लिए लागू होती है?
आज, जब देश धार्मिक समावेशिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करता है, तब ऐसी घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या धार्मिक आजादी हर नागरिक का समान अधिकार है, या इसे किसी विशेष समुदाय तक सीमित कर दिया गया है?
और अब इन दोगले हिंदुओं की असलियत देखो—ये वही लोग हैं जो विदेशों में जाकर "हमारा सम्मान, हमारे हक" का भोंपू बजाते हैं। वहां मंदिर खड़े करते हैं, "फ्रीडम ऑफ रिलिजन" की दुहाई देते हैं, सरकारों से टैक्स में रियायत मांगते हैं। लेकिन यहां? यहां मुसलमान की एक मस्जिद की नींव भी पड़ जाए तो इनका "हिंदुत्व का गुंडाराज" जाग जाता है। "धर्म खतरे में है" का शोर मचाते हैं, जैसे उनकी आस्था का ठेका सिर्फ मुसलमानों को दबाने से ही चलता हो। वाह रे हिंदू, विदेश में "मानवाधिकार" का नाटक, और अपने देश में "मजहब का मजाक"—तेरे इस दोगलेपन की तो सारी हदें टूट गईं, फिर भी तेरे मुंह से ढोंग की गंगा बहती रहती है!
लेकिन निर्माण कार्य शुरू होते ही विरोध की आवाजें उठने लगीं। स्थानीय हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई, काम रुकवा दिया, और इसे एक विवाद का रूप दे दिया। जैसे एक मस्जिद का निर्माण सांप्रदायिक सौहार्द को खतरे में डाल देगा। सवाल यह है कि धार्मिक स्वतंत्रता, जो संविधान में समान रूप से सभी के लिए सुनिश्चित की गई थी, क्या वह वास्तव में सभी नागरिकों के लिए लागू होती है?
आज, जब देश धार्मिक समावेशिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करता है, तब ऐसी घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या धार्मिक आजादी हर नागरिक का समान अधिकार है, या इसे किसी विशेष समुदाय तक सीमित कर दिया गया है?
और अब इन दोगले हिंदुओं की असलियत देखो—ये वही लोग हैं जो विदेशों में जाकर "हमारा सम्मान, हमारे हक" का भोंपू बजाते हैं। वहां मंदिर खड़े करते हैं, "फ्रीडम ऑफ रिलिजन" की दुहाई देते हैं, सरकारों से टैक्स में रियायत मांगते हैं। लेकिन यहां? यहां मुसलमान की एक मस्जिद की नींव भी पड़ जाए तो इनका "हिंदुत्व का गुंडाराज" जाग जाता है। "धर्म खतरे में है" का शोर मचाते हैं, जैसे उनकी आस्था का ठेका सिर्फ मुसलमानों को दबाने से ही चलता हो। वाह रे हिंदू, विदेश में "मानवाधिकार" का नाटक, और अपने देश में "मजहब का मजाक"—तेरे इस दोगलेपन की तो सारी हदें टूट गईं, फिर भी तेरे मुंह से ढोंग की गंगा बहती रहती है!
घुटनों के बल बैठे युवकों के नाम सुशांत, गौरव, आशुतोष, सचिन , आयुष्मान हैं। ये लोग छावा देखने गए थे। मूवी खत्म हुई तो ये हंसने लगे। बस फिर क्या था! कुंठित गैंग ने देखा तो गुस्सा हो गए और उन्हें पकड़कर पीटा, फिर उन्हें घुटनों पर बैठाकर सबके सामने माफी मंगवाई। जॉम्बी गैंग और करता भी क्या!
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Indian Hindu community leader Balesh Dhankhar gets 40 yrs jail (30 yrs non-parole) for drugging & sexually assaulting 5 women in Sydney, per report. #Sydney@IndMin
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क्या गजब का दोहरा रवैया है इस काफिर हिंदू कौम का मुसलमानों के प्रति, और फिर मुसलमानों को भावनात्मक चोट पहुँचाने का खेल! संभल, यूपी में मस्जिद से अज़ान के लिए लाउडस्पीकर बजाने पर इमाम साहब पर FIR ठोक दी गई। पुलिस ने तो हद कर दी मस्जिद का लाउडस्पीकर भी जबरन उतरवा दिया! मगर लाउडस्पीकर पर DJ की धूम, गंदे गाने, और धार्मिक जगहों के सामने मुज़रे ये सब तो खुलेआम चल रहा है, इसके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं?
दंगाई और पत्थर बाज तो कट्टरपंथी हिंदू आतंकवादी हैं।
मस्जिद के सामने तेरी बहन जाती है नाचने? जब मस्जिद दिखे तो पूरी हिंदू आतंकवादी कौम मस्जिद के सामने नाचना शुरू कर देती है।
जब चर्च दिखे तो वहाँ नाचना शुरू कर देते हैं, अभी लखनऊ के चर्च में जब ईसाई समुदाय के लोग प्रार्थना कर रहे थे तो ये सूअर हिंदू कौम वहाँ जाकर अपना भजन शुरू कर दिया। ये बोलने लगा कि जीसस के फादर नहीं हैं तो कृष्ण ही जीसस का फादर है।बिहार में बौद्ध धर्म के मंदिर को इन हिंदुओं ने छीन लिया और अब वो बौद्ध धर्म के अनुयायी अपने मंदिर की माँग कर रहे हैं।
मणिपुर में ईसाइयों के खिलाफ दंगा हुआ, पुलिस ने औरतों को नंगे कर दिया।सिखों को खालिस्तानी कहकर दिल्ली की ट्रेन में उनके सिर से पगड़ी उतार दी।
और इसके बाद भी ये उम्मीद रखते हैं कि हम मस्जिद के सामने जाकर नाचें और हमें कोई मारे भी नहीं? ये दोगलापन सिर्फ और सिर्फ इस आतंकवादी हिंदू में है और किसी में नहीं।तुम वही हिंदू हो जिसने आज से पहले जब मुगल नहीं थे, तो ये दलितों के साथ वेद भाव करता था। उसे पानी तक नहीं पीने देता था अपने कल से, अपने साथ नहीं रहने देता था, शादी में घोड़े पर नहीं बैठने देता था, स्तन खोलकर रखवाता था और अगर स्तन बड़ी होती थी तो टैक्स ज्यादा लेता था और छोटी होती थी तो कम टैक्स लेता था। बच्चों को मारकर बलि चढ़ा देता था और पति के मरने के बाद उसकी पत्नी को भी साथ में जिंदा जला देता था, जिसको सती प्रथा कहा जाता है।और तुम मुसलमानों को पत्थर बाज बोल रहे हो? अरे सूअर कहीं के, हिंदू ही दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी है, जाकर पढ़ अपने बाप-दादा का इतिहास, फिर मालूम पड़ेगा।आज जुल्म बर्दाश्त कर रहे हैं जब तक कर सकते हैं, लेकिन याद रखना जिस दिन ये भारत का मुसलमान अगर हथियार उठा लिया ना तो उस दिन तुम अपनी मौत की भीख माँगते फिरोगे, लेकिन तुम्हें नहीं मिलेगा।
जब कुम्भ मेला हिन्दू को जरूरत हुआ तो मुस्लिम ने ही खाना दिया, रहने के लिए मंदिर में जगह दी और सोने के लिए कम्बल दिया। ये भूल गया क्या रे? हाँ, भूल गया होगा, नमक हराम और गद्दार कौम हो तुम लोग।
सूअर कहीं के, निकल यहाँ से।
मस्जिद के सामने तेरी बहन जाती है नाचने? जब मस्जिद दिखे तो पूरी हिंदू आतंकवादी कौम मस्जिद के सामने नाचना शुरू कर देती है।
जब चर्च दिखे तो वहाँ नाचना शुरू कर देते हैं, अभी लखनऊ के चर्च में जब ईसाई समुदाय के लोग प्रार्थना कर रहे थे तो ये सूअर हिंदू कौम वहाँ जाकर अपना भजन शुरू कर दिया। ये बोलने लगा कि जीसस के फादर नहीं हैं तो कृष्ण ही जीसस का फादर है।बिहार में बौद्ध धर्म के मंदिर को इन हिंदुओं ने छीन लिया और अब वो बौद्ध धर्म के अनुयायी अपने मंदिर की माँग कर रहे हैं।
मणिपुर में ईसाइयों के खिलाफ दंगा हुआ, पुलिस ने औरतों को नंगे कर दिया।सिखों को खालिस्तानी कहकर दिल्ली की ट्रेन में उनके सिर से पगड़ी उतार दी।
और इसके बाद भी ये उम्मीद रखते हैं कि हम मस्जिद के सामने जाकर नाचें और हमें कोई मारे भी नहीं? ये दोगलापन सिर्फ और सिर्फ इस आतंकवादी हिंदू में है और किसी में नहीं।तुम वही हिंदू हो जिसने आज से पहले जब मुगल नहीं थे, तो ये दलितों के साथ वेद भाव करता था। उसे पानी तक नहीं पीने देता था अपने कल से, अपने साथ नहीं रहने देता था, शादी में घोड़े पर नहीं बैठने देता था, स्तन खोलकर रखवाता था और अगर स्तन बड़ी होती थी तो टैक्स ज्यादा लेता था और छोटी होती थी तो कम टैक्स लेता था। बच्चों को मारकर बलि चढ़ा देता था और पति के मरने के बाद उसकी पत्नी को भी साथ में जिंदा जला देता था, जिसको सती प्रथा कहा जाता है।और तुम मुसलमानों को पत्थर बाज बोल रहे हो? अरे सूअर कहीं के, हिंदू ही दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी है, जाकर पढ़ अपने बाप-दादा का इतिहास, फिर मालूम पड़ेगा।आज जुल्म बर्दाश्त कर रहे हैं जब तक कर सकते हैं, लेकिन याद रखना जिस दिन ये भारत का मुसलमान अगर हथियार उठा लिया ना तो उस दिन तुम अपनी मौत की भीख माँगते फिरोगे, लेकिन तुम्हें नहीं मिलेगा।
जब कुम्भ मेला हिन्दू को जरूरत हुआ तो मुस्लिम ने ही खाना दिया, रहने के लिए मंदिर में जगह दी और सोने के लिए कम्बल दिया। ये भूल गया क्या रे? हाँ, भूल गया होगा, नमक हराम और गद्दार कौम हो तुम लोग।
सूअर कहीं के, निकल यहाँ से।