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Android Emergency SOS: How To Customize & Avoid Mishaps?
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These days, many ex-Muslims and Hindus are creating fake accounts under the name "Ex-Muslim" and misleading common Muslims. Unfortunately, many of our Muslim brothers and sisters fall for this trap. To tackle this fitna, we need to strengthen ourselves in IT and actively engage with these ex-Muslims by countering their arguments with strong knowledge. This responsibility now lies upon us. We must educate our family, friends, and relatives, and if anyone has doubts related to Islam or Muslims, we need to address them. Otherwise, people can easily fall into the trap of disbelief and apostasy, and ex-Muslims can manipulate them.
To counter this, we need to read more about Islam and spread its knowledge. We must also become strong in the IT field to be able to challenge them effectively at every platform. Our religious leaders, imams, and scholars may not be as active on social media, so it's up to us to take action. We can even challenge ex-Muslims who pose as ex-Hindus. Proper use of all social media platforms—like YouTube, Facebook, Twitter, Instagram, Telegram, TikTok—is essential. Furthermore, we should support those Muslim brothers who are already working in this field, so they can continue to improve their efforts.
To counter this, we need to read more about Islam and spread its knowledge. We must also become strong in the IT field to be able to challenge them effectively at every platform. Our religious leaders, imams, and scholars may not be as active on social media, so it's up to us to take action. We can even challenge ex-Muslims who pose as ex-Hindus. Proper use of all social media platforms—like YouTube, Facebook, Twitter, Instagram, Telegram, TikTok—is essential. Furthermore, we should support those Muslim brothers who are already working in this field, so they can continue to improve their efforts.
Forwarded from Palestine Urdu
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As I lay on the cot with my newborn daughter, a group of policemen suddenly stormed in. They forcibly pulled me out of the room and did the same to my husband. Then, they stepped on my infant daughter’s head, killing her. This is a brutal murder, and I demand justice.
Razida Khan, the grieving mother, shared with The Times of India.
जब मैं अपनी नवजात बेटी के साथ खाट पर सो रही थी. अचानक कई पुलिसकर्मी आए, मुझे खींचकर कमरे से बाहर भेज दिया, उन्होंने मेरे पति को भी बाहर निकाला. उन्होंने मेरी नवजात बेटी के सिर पर पैर रखा और उसे मार डाला. यह हत्या है और मुझे न्याय चाहिए।
बच्ची की मां रजीदा खान ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया
भोपाल, मध्य प्रदेश।
22 साल का अदनान नमाज पढ़ने मस्जिद गया था। ईशा की नमाज पढ़कर जब वह लौट रहा था, तब #हिंदुत्व #आतंकवादियों - शुभम सोलंकी, राज सोलंकी और लक्की सोलंकी - ने उस पर हमला किया। इन हिंदू आतंकवादियों ने अदनान को बेरहमी से चाकू मारकर शहीद कर दिया। 3 मार्च 2025 की रात अली इस घटना के बाद भी, सरकार का ढोंग और दोगलापन साफ दिखता है - पुलिस अभी तक आरोपियों को नहीं पकड़ पाई और इसे व्यक्तिगत दुश्मनी बताकर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि परिवार और समुदाय सांप्रदायिक मंशा की बात उठा रहे हैं।
#JusticeForAdnan की मांग जोर पकड़ रही है, लेकिन सरकार और प्रशासन का रवैया इस दुखदायी घटना के प्रति उदासीन और पक्षपाती बना हुआ है।
22 साल का अदनान नमाज पढ़ने मस्जिद गया था। ईशा की नमाज पढ़कर जब वह लौट रहा था, तब #हिंदुत्व #आतंकवादियों - शुभम सोलंकी, राज सोलंकी और लक्की सोलंकी - ने उस पर हमला किया। इन हिंदू आतंकवादियों ने अदनान को बेरहमी से चाकू मारकर शहीद कर दिया। 3 मार्च 2025 की रात अली इस घटना के बाद भी, सरकार का ढोंग और दोगलापन साफ दिखता है - पुलिस अभी तक आरोपियों को नहीं पकड़ पाई और इसे व्यक्तिगत दुश्मनी बताकर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि परिवार और समुदाय सांप्रदायिक मंशा की बात उठा रहे हैं।
#JusticeForAdnan की मांग जोर पकड़ रही है, लेकिन सरकार और प्रशासन का रवैया इस दुखदायी घटना के प्रति उदासीन और पक्षपाती बना हुआ है।
मुजफ्फरनगर के मुस्तफाबाद गांव में मुस्लिम समुदाय लंबे समय से शांतिपूर्वक निवास कर रहा था। लेकिन जब बात इबादत की आई, तो उन्हें अपने ही गांव में एक मस्जिद की कमी महसूस हुई। समुदाय ने मेहनत से धन एकत्र किया, जमीन खरीदी, और मस्जिद के निर्माण की शुरुआत की। यह एक आशा भरा कदम था, जिससे लोग अपनी धार्मिक प्रार्थनाएं बिना किसी बाधा के अदा कर सकें।
लेकिन निर्माण कार्य शुरू होते ही विरोध की आवाजें उठने लगीं। स्थानीय हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई, काम रुकवा दिया, और इसे एक विवाद का रूप दे दिया। जैसे एक मस्जिद का निर्माण सांप्रदायिक सौहार्द को खतरे में डाल देगा। सवाल यह है कि धार्मिक स्वतंत्रता, जो संविधान में समान रूप से सभी के लिए सुनिश्चित की गई थी, क्या वह वास्तव में सभी नागरिकों के लिए लागू होती है?
आज, जब देश धार्मिक समावेशिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करता है, तब ऐसी घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या धार्मिक आजादी हर नागरिक का समान अधिकार है, या इसे किसी विशेष समुदाय तक सीमित कर दिया गया है?
और अब इन दोगले हिंदुओं की असलियत देखो—ये वही लोग हैं जो विदेशों में जाकर "हमारा सम्मान, हमारे हक" का भोंपू बजाते हैं। वहां मंदिर खड़े करते हैं, "फ्रीडम ऑफ रिलिजन" की दुहाई देते हैं, सरकारों से टैक्स में रियायत मांगते हैं। लेकिन यहां? यहां मुसलमान की एक मस्जिद की नींव भी पड़ जाए तो इनका "हिंदुत्व का गुंडाराज" जाग जाता है। "धर्म खतरे में है" का शोर मचाते हैं, जैसे उनकी आस्था का ठेका सिर्फ मुसलमानों को दबाने से ही चलता हो। वाह रे हिंदू, विदेश में "मानवाधिकार" का नाटक, और अपने देश में "मजहब का मजाक"—तेरे इस दोगलेपन की तो सारी हदें टूट गईं, फिर भी तेरे मुंह से ढोंग की गंगा बहती रहती है!
लेकिन निर्माण कार्य शुरू होते ही विरोध की आवाजें उठने लगीं। स्थानीय हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई, काम रुकवा दिया, और इसे एक विवाद का रूप दे दिया। जैसे एक मस्जिद का निर्माण सांप्रदायिक सौहार्द को खतरे में डाल देगा। सवाल यह है कि धार्मिक स्वतंत्रता, जो संविधान में समान रूप से सभी के लिए सुनिश्चित की गई थी, क्या वह वास्तव में सभी नागरिकों के लिए लागू होती है?
आज, जब देश धार्मिक समावेशिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करता है, तब ऐसी घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या धार्मिक आजादी हर नागरिक का समान अधिकार है, या इसे किसी विशेष समुदाय तक सीमित कर दिया गया है?
और अब इन दोगले हिंदुओं की असलियत देखो—ये वही लोग हैं जो विदेशों में जाकर "हमारा सम्मान, हमारे हक" का भोंपू बजाते हैं। वहां मंदिर खड़े करते हैं, "फ्रीडम ऑफ रिलिजन" की दुहाई देते हैं, सरकारों से टैक्स में रियायत मांगते हैं। लेकिन यहां? यहां मुसलमान की एक मस्जिद की नींव भी पड़ जाए तो इनका "हिंदुत्व का गुंडाराज" जाग जाता है। "धर्म खतरे में है" का शोर मचाते हैं, जैसे उनकी आस्था का ठेका सिर्फ मुसलमानों को दबाने से ही चलता हो। वाह रे हिंदू, विदेश में "मानवाधिकार" का नाटक, और अपने देश में "मजहब का मजाक"—तेरे इस दोगलेपन की तो सारी हदें टूट गईं, फिर भी तेरे मुंह से ढोंग की गंगा बहती रहती है!
घुटनों के बल बैठे युवकों के नाम सुशांत, गौरव, आशुतोष, सचिन , आयुष्मान हैं। ये लोग छावा देखने गए थे। मूवी खत्म हुई तो ये हंसने लगे। बस फिर क्या था! कुंठित गैंग ने देखा तो गुस्सा हो गए और उन्हें पकड़कर पीटा, फिर उन्हें घुटनों पर बैठाकर सबके सामने माफी मंगवाई। जॉम्बी गैंग और करता भी क्या!
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Indian Hindu community leader Balesh Dhankhar gets 40 yrs jail (30 yrs non-parole) for drugging & sexually assaulting 5 women in Sydney, per report. #Sydney@IndMin