RAS Foundation Batch - 2 का कल होने वाला टेस्ट अब सोमवार को आयोजित किया जाएगा।
❤🔥2🏆1
Ras Foundation batch ,02 आपका अगला टेस्ट 08/09/25 को होगा।
📝 टेस्ट में शामिल पाठ्यक्रम:(Hindi)
शब्द शुद्धि
पेज नंबर 473से लेकर 480तक की सामग्री को अच्छे से याद कर लें।
📝 टेस्ट में शामिल पाठ्यक्रम:(Hindi)
शब्द शुद्धि
पेज नंबर 473से लेकर 480तक की सामग्री को अच्छे से याद कर लें।
👍5❤1🔥1
30/08/2025
‼️ Today class Schedule
◽Foundation RAS 02 Batch
⏰(08to01)
Static gk
polity
Hindi
History
🔥1😍1
30/8/2025
‼️ Today class Schedule
◽Foundation RAS 01 Batch
⏰(03to06)
Polity
Rajsthan history
👍1🏆1
कल RAS फाउंडेशन01, 02 बैच में अवकाश रहेगा ।
सभी विद्यार्थी लाइब्रेरी शुभारंभ अवसर पर सादर आमंत्रित हैं।।
TEAM IRA
सभी विद्यार्थी लाइब्रेरी शुभारंभ अवसर पर सादर आमंत्रित हैं।।
TEAM IRA
😍9👍4
01/09/2025
‼️ Today class Schedule
◽Foundation RAS 02 Batch
⏰(08to01)
Static gk
Test
Hindi
History
Forwarded from Inspire RAS Academy™(IRA)
आज बाड़मेर में एक नई पहल की शुरुआत विद्यार्थी हित में की गई....
PSI/RAS बैच विद्यार्थियों हेतु Dedicated लाइब्रेरी का शुभारंभ किया गया....
यह लाइब्रेरी मारवाड़ क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारियों की एक फौज तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगी।।
PSI/RAS बैच विद्यार्थियों हेतु Dedicated लाइब्रेरी का शुभारंभ किया गया....
यह लाइब्रेरी मारवाड़ क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारियों की एक फौज तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगी।।
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जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग प्रक्रिया शुरू
हाल ही में जस्टिस यशवंत वर्मा के विरुद्ध जले हुए नोटों की बोरियां मिलने के प्रकरण में उनको पद से हटाए जाने की प्रक्रिया का मुद्दा चर्चा में है। ध्यान रहे कि उक्त घटना के समय जस्टिस वर्मा दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश थे।
संवैधानिक प्रावधान
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद से हटाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान में अनुच्छेद 217(1)(ख) तथा अनुच्छेद 218 में दी गई है।
अनुच्छेद 217(ख) के अनुसार किसी न्यायाधीश को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए अनुच्छेद 124 के खंड (4) में उपबंधित रीति से उसके पद से राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकेगा।
अनुच्छेद 218 के अनुसार अनुच्छेद 124 के खंड (4) और खंड (5) के उपबंध, जहाँ-जहाँ उनमें उच्चतम न्यायालय के प्रति निर्देश है, वहाँ-वहाँ उच्च न्यायालय के प्रति निर्देश प्रतिस्थापित करके, उच्च न्यायालय के संबंध में वैसे ही लागू होंगे, जैसे वे उच्चतम न्यायालय के संबंध में लागू होते हैं।
इसका अर्थ है कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद से हटाने की प्रक्रिया भी वही है जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया है।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद से हटाने की प्रक्रिया का उल्लेख अनुच्छेद 124(4) और (5) में है।
अनुच्छेद 124(4) के अनुसार उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को उसके पद से तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर ऐसे हटाए जाने के लिए संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत द्वारा तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा समर्थित समावेदन, राष्ट्रपति के समक्ष उसी सत्र में रखे जाने पर राष्ट्रपति ने आदेश नहीं दे दिया है।
अनुच्छेद 124(5) के अनुसार संसद खंड (4) के अधीन किसी समावेदन के रखे जाने की तथा न्यायाधीश के कदाचार या असमर्थता के अन्वेषण और साबित करने की प्रक्रिया का विधि द्वारा विनियमन कर सकेगी।
अनुच्छेद 124(5) के उपबंध के तहत संसद ने इस दिशा में न्यायाधीश (जाँच) अधिनियम (The Judges Inquiry Act) 1968 पारित किया।
पद से हटाने के आधार:
संविधान में न्यायाधीश को पद से हटाने के लिए महाभियोग (Impeachment) शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। इस शब्द का प्रयोग संविधान में केवल राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए किया गया है।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को केवल दो आधारों पर हटाया जा सकता है—
1. सिद्ध दुर्व्यवहार (Proved Misbehaviour)
2. अक्षम्यता (Incapacity)
प्रक्रिया का आरंभ:
यह प्रक्रिया संसद के किसी भी सदन अर्थात् लोकसभा या राज्यसभा में शुरू की जा सकती है।
लोकसभा में यह कुल 100 या उससे अधिक सदस्यों द्वारा तथा राज्यसभा में यह कुल 50 या उससे अधिक सदस्यों द्वारा शुरू की जा सकती है।
इस संबंध में एक नोटिस स्पीकर/अध्यक्ष को दिया जाता है जिसमें हटाने का प्रस्ताव हो।
स्पीकर/अध्यक्ष की स्वीकृति:
यदि नोटिस वैध पाया जाता है तो स्पीकर (लोकसभा में) या सभापति (राज्यसभा में) इसे स्वीकार करते हैं। फिर वे एक जांच समिति (Inquiry Committee) का गठन करते हैं।
जांच समिति का गठन:
इस समिति में 3 सदस्य होते हैं:
1. सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश
2. किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
3. एक प्रतिष्ठित विधि विशेषज्ञ।
जस्टिस वर्मा के प्रकरण में इस तीन सदस्यीय जाँच समिति के सदस्य हैं-
1. जस्टिस अरविंद कुमार (सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश)
2. जस्टिस एम एम श्रीवास्तव (मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश)
3. बी वी आचार्य (वरिष्ठ वकील, कर्नाटक हाईकोर्ट)
जांच एवं रिपोर्ट:
समिति आरोपों की जांच करती है और रिपोर्ट सदन को देती है। यदि समिति आरोपों को सिद्ध पाती है, तभी अगला कदम उठाया जाता है।
विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित:
दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में प्रस्ताव को विशेष बहुमत से पारित करना आवश्यक है।
राष्ट्रपति का आदेश:
दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। राष्ट्रपति आदेश जारी करते हैं, जिसके बाद न्यायाधीश पद से हट जाता है।
अब तक सर्वोच्च न्यायालय के केवल एक न्यायाधीश जस्टिस वी रामास्वामी के विरुद्ध ऐसा प्रस्ताव 1992-93 में लाया गया था लेकिन यह प्रस्ताव संसद में कांग्रेस के वॉक आउट के कारण पारित नहीं हो पाया था। उच्च न्यायालय के कुछ न्यायाधीशों के विरुद्ध भी ऐसे कुछ प्रस्ताव संसद में लाए गए थे लेकिन उन पर कोई कार्रवाई होने से पहले ही उन न्यायाधीशों ने पद से त्यागपत्र दे दिया था।
यदि जस्टिस वर्मा त्यागपत्र ना दे तो संभवतः किसी न्यायाधीश को पद से हटाने का यह पहला मामला होता दिख रहा है।
हाल ही में जस्टिस यशवंत वर्मा के विरुद्ध जले हुए नोटों की बोरियां मिलने के प्रकरण में उनको पद से हटाए जाने की प्रक्रिया का मुद्दा चर्चा में है। ध्यान रहे कि उक्त घटना के समय जस्टिस वर्मा दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश थे।
संवैधानिक प्रावधान
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद से हटाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान में अनुच्छेद 217(1)(ख) तथा अनुच्छेद 218 में दी गई है।
अनुच्छेद 217(ख) के अनुसार किसी न्यायाधीश को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए अनुच्छेद 124 के खंड (4) में उपबंधित रीति से उसके पद से राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकेगा।
अनुच्छेद 218 के अनुसार अनुच्छेद 124 के खंड (4) और खंड (5) के उपबंध, जहाँ-जहाँ उनमें उच्चतम न्यायालय के प्रति निर्देश है, वहाँ-वहाँ उच्च न्यायालय के प्रति निर्देश प्रतिस्थापित करके, उच्च न्यायालय के संबंध में वैसे ही लागू होंगे, जैसे वे उच्चतम न्यायालय के संबंध में लागू होते हैं।
इसका अर्थ है कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद से हटाने की प्रक्रिया भी वही है जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया है।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद से हटाने की प्रक्रिया का उल्लेख अनुच्छेद 124(4) और (5) में है।
अनुच्छेद 124(4) के अनुसार उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को उसके पद से तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर ऐसे हटाए जाने के लिए संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत द्वारा तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा समर्थित समावेदन, राष्ट्रपति के समक्ष उसी सत्र में रखे जाने पर राष्ट्रपति ने आदेश नहीं दे दिया है।
अनुच्छेद 124(5) के अनुसार संसद खंड (4) के अधीन किसी समावेदन के रखे जाने की तथा न्यायाधीश के कदाचार या असमर्थता के अन्वेषण और साबित करने की प्रक्रिया का विधि द्वारा विनियमन कर सकेगी।
अनुच्छेद 124(5) के उपबंध के तहत संसद ने इस दिशा में न्यायाधीश (जाँच) अधिनियम (The Judges Inquiry Act) 1968 पारित किया।
पद से हटाने के आधार:
संविधान में न्यायाधीश को पद से हटाने के लिए महाभियोग (Impeachment) शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। इस शब्द का प्रयोग संविधान में केवल राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए किया गया है।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को केवल दो आधारों पर हटाया जा सकता है—
1. सिद्ध दुर्व्यवहार (Proved Misbehaviour)
2. अक्षम्यता (Incapacity)
प्रक्रिया का आरंभ:
यह प्रक्रिया संसद के किसी भी सदन अर्थात् लोकसभा या राज्यसभा में शुरू की जा सकती है।
लोकसभा में यह कुल 100 या उससे अधिक सदस्यों द्वारा तथा राज्यसभा में यह कुल 50 या उससे अधिक सदस्यों द्वारा शुरू की जा सकती है।
इस संबंध में एक नोटिस स्पीकर/अध्यक्ष को दिया जाता है जिसमें हटाने का प्रस्ताव हो।
स्पीकर/अध्यक्ष की स्वीकृति:
यदि नोटिस वैध पाया जाता है तो स्पीकर (लोकसभा में) या सभापति (राज्यसभा में) इसे स्वीकार करते हैं। फिर वे एक जांच समिति (Inquiry Committee) का गठन करते हैं।
जांच समिति का गठन:
इस समिति में 3 सदस्य होते हैं:
1. सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश
2. किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
3. एक प्रतिष्ठित विधि विशेषज्ञ।
जस्टिस वर्मा के प्रकरण में इस तीन सदस्यीय जाँच समिति के सदस्य हैं-
1. जस्टिस अरविंद कुमार (सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश)
2. जस्टिस एम एम श्रीवास्तव (मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश)
3. बी वी आचार्य (वरिष्ठ वकील, कर्नाटक हाईकोर्ट)
जांच एवं रिपोर्ट:
समिति आरोपों की जांच करती है और रिपोर्ट सदन को देती है। यदि समिति आरोपों को सिद्ध पाती है, तभी अगला कदम उठाया जाता है।
विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित:
दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में प्रस्ताव को विशेष बहुमत से पारित करना आवश्यक है।
राष्ट्रपति का आदेश:
दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। राष्ट्रपति आदेश जारी करते हैं, जिसके बाद न्यायाधीश पद से हट जाता है।
अब तक सर्वोच्च न्यायालय के केवल एक न्यायाधीश जस्टिस वी रामास्वामी के विरुद्ध ऐसा प्रस्ताव 1992-93 में लाया गया था लेकिन यह प्रस्ताव संसद में कांग्रेस के वॉक आउट के कारण पारित नहीं हो पाया था। उच्च न्यायालय के कुछ न्यायाधीशों के विरुद्ध भी ऐसे कुछ प्रस्ताव संसद में लाए गए थे लेकिन उन पर कोई कार्रवाई होने से पहले ही उन न्यायाधीशों ने पद से त्यागपत्र दे दिया था।
यदि जस्टिस वर्मा त्यागपत्र ना दे तो संभवतः किसी न्यायाधीश को पद से हटाने का यह पहला मामला होता दिख रहा है।
🙏3❤2🏆1
01/09/2025
‼️ Today class Schedule
◽Foundation RAS 01 Batch
⏰(03to06)
Polity
Rajsthan history
👍1
02/09/2025
‼️ Today class Schedule
◽Foundation RAS 02 Batch
⏰(08to01)
Static gk
Polity
Hindi
History
02/09/2025
‼️ Today class Schedule
◽Foundation RAS 01 Batch
⏰(03to08)
Test
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