Think about the person you couldn't find even after praying in the temple ,how wrong a person you chose........🙏🙏🌺🌺
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पागल पन की हद तक मेहनत करो
देवांश का सपना था , एक बड़ी परीक्षा पास करना , पर उसके तरीके देखकर लोग उसे पागल कहते | सुबह चार बजे उठना , दिन में सोलह सोलह घंटे पढ़ाई करना , त्योहारों सदियों में भी न जाना , दोस्त रिश्तेदार सब हैरान थे
इतना पागलपन ठीक नहीं , तोड़ा आराम भी कर , लोग समझाते पर देवांश जानता था , की आम तरीके से आम नतीजे ही मिलते हैं , अगर कुछ बड़ा हासिल करना है तो मेहनत भी असाधारण करनी होगी उसने अपनी हर आदत, हर आराम को सपने के लिए कुर्बान कर दिया
गर्मी हो या सर्दी, बीमार हो या थका, उसने अपना रूटीन कभी नहीं तोड़ा, नीद कम ली, मनोरंंजन छोड़ा, दोस्तो से दूरी बना ली, बस एक ही धुन सवार थी , मंजिल तक पहुंचना,
लोग उसे पागल कहकर हंसते रहे, पर देवांश की यही पागल पन जैसी, मेहनत रंग लाई,
आख़िरकार वह परीक्षा पास कर गया, जिसे पाने का सपना बहुत कम लोग देख पाते है,
देवांश कहता है, दुनिया के नज़रो में जो पागल दिखता है, वही असल में बड़े सपनों की कीमत होती हैं,
सीख ___ बड़ा हासिल करने के लिए कभी कभी सामान्य से हटकर, दीवानगी की हद तक मेहनत करनी पड़ती हैं
देवांश का सपना था , एक बड़ी परीक्षा पास करना , पर उसके तरीके देखकर लोग उसे पागल कहते | सुबह चार बजे उठना , दिन में सोलह सोलह घंटे पढ़ाई करना , त्योहारों सदियों में भी न जाना , दोस्त रिश्तेदार सब हैरान थे
इतना पागलपन ठीक नहीं , तोड़ा आराम भी कर , लोग समझाते पर देवांश जानता था , की आम तरीके से आम नतीजे ही मिलते हैं , अगर कुछ बड़ा हासिल करना है तो मेहनत भी असाधारण करनी होगी उसने अपनी हर आदत, हर आराम को सपने के लिए कुर्बान कर दिया
गर्मी हो या सर्दी, बीमार हो या थका, उसने अपना रूटीन कभी नहीं तोड़ा, नीद कम ली, मनोरंंजन छोड़ा, दोस्तो से दूरी बना ली, बस एक ही धुन सवार थी , मंजिल तक पहुंचना,
लोग उसे पागल कहकर हंसते रहे, पर देवांश की यही पागल पन जैसी, मेहनत रंग लाई,
आख़िरकार वह परीक्षा पास कर गया, जिसे पाने का सपना बहुत कम लोग देख पाते है,
देवांश कहता है, दुनिया के नज़रो में जो पागल दिखता है, वही असल में बड़े सपनों की कीमत होती हैं,
सीख ___ बड़ा हासिल करने के लिए कभी कभी सामान्य से हटकर, दीवानगी की हद तक मेहनत करनी पड़ती हैं
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मुझे सब्र करने की नसीहत ना दीजिए,
मेरी जगह आइए और सह कर
दिखाइये...
मेरी जगह आइए और सह कर
दिखाइये...
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कुछ बच्चे उम्र से पहले बड़े हो जाते हैं,
हँसते तो हैं, मगर अंदर से खामोश हो जाते हैं।
चेहरे पर मुस्कान, आँखों में सवाल रखते हैं,
न जाने कितने दर्द अपने भीतर छिपाकर रखते हैं।
उन्हें भी किसी के अपने होने का एहसास चाहिए,
बिना कुछ कहे समझ लेने वाला कोई खास चाहिए।
वो भी चाहते हैं कोई उन्हें सबसे पहले चुने,
उनकी छोटी-सी खुशी के लिए अपने पल बुने।
कभी-कभी सब कुछ होकर भी कुछ अधूरा रह जाता है,
इंसान अपनों के बीच भी खुद को अकेला पाता है।
हर कमी आँसुओं से बयाँ नहीं होती,
हर मुस्कान के पीछे खुशी नहीं होती।
कुछ दिल बस इतना चाहते हैं इस ज़माने से,
कोई उन्हें भी चाहे… बिना किसी बहाने से। 🥀❤️
हँसते तो हैं, मगर अंदर से खामोश हो जाते हैं।
चेहरे पर मुस्कान, आँखों में सवाल रखते हैं,
न जाने कितने दर्द अपने भीतर छिपाकर रखते हैं।
उन्हें भी किसी के अपने होने का एहसास चाहिए,
बिना कुछ कहे समझ लेने वाला कोई खास चाहिए।
वो भी चाहते हैं कोई उन्हें सबसे पहले चुने,
उनकी छोटी-सी खुशी के लिए अपने पल बुने।
कभी-कभी सब कुछ होकर भी कुछ अधूरा रह जाता है,
इंसान अपनों के बीच भी खुद को अकेला पाता है।
हर कमी आँसुओं से बयाँ नहीं होती,
हर मुस्कान के पीछे खुशी नहीं होती।
कुछ दिल बस इतना चाहते हैं इस ज़माने से,
कोई उन्हें भी चाहे… बिना किसी बहाने से। 🥀❤️
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सुनो...तुम्हारा भविष्य, तुम्हारी अपनी रणनीति और मेहनत तय करेगी।
सभी की सिचुएशन उनकी रणनीति तय करती है....जरूरी नहीं है कि जो स्ट्रेटजी किसी के सफल हो, आपके लिए भी हो।
इसलिए अपनी स्ट्रेंथ एंड वीकनेस के अनुसार अपनी स्ट्रेटजी बनाकर फॉलो करें।
अभी तक जो किए सो किए...अब अंडरग्राउंड हो जाओ यारों... वरना बहुत लेट कर दोगे।
सभी की सिचुएशन उनकी रणनीति तय करती है....जरूरी नहीं है कि जो स्ट्रेटजी किसी के सफल हो, आपके लिए भी हो।
इसलिए अपनी स्ट्रेंथ एंड वीकनेस के अनुसार अपनी स्ट्रेटजी बनाकर फॉलो करें।
अभी तक जो किए सो किए...अब अंडरग्राउंड हो जाओ यारों... वरना बहुत लेट कर दोगे।
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⭕️ भारतीय संविधान से संबंधित अति-महत्त्वपूर्ण अनुच्छेद
52 — भारत के राष्ट्रपति
54 — राष्ट्रपति का निर्वाचन
61 — राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया
63 — भारत का उप-राष्ट्रपति
66 — उप-राष्ट्रपति का निर्वाचन
74 — राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद
75 — मंत्रियों के बारे में अन्य उपबंध
76 — भारत का महान्यायवादी
79 — संसद का गठन
80 — राज्य सभा की संरचना
81 — लोक सभा की संरचना
52 — भारत के राष्ट्रपति
54 — राष्ट्रपति का निर्वाचन
61 — राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया
63 — भारत का उप-राष्ट्रपति
66 — उप-राष्ट्रपति का निर्वाचन
74 — राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद
75 — मंत्रियों के बारे में अन्य उपबंध
76 — भारत का महान्यायवादी
79 — संसद का गठन
80 — राज्य सभा की संरचना
81 — लोक सभा की संरचना
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दूसरों को कब तक हँसाते
और मानते रहोगे,
कभी खुद से पूछो हाल कैसा है। ❤️🩹🙈
और मानते रहोगे,
कभी खुद से पूछो हाल कैसा है। ❤️🩹🙈
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UPSC polity important topics
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इतना पढ़ ही लेंगे तो PCS ही बन जाएंगे RO क्यों बनना!!😂😁😳
ये PCS में FAIL होने वालों के लिए एक बैकअप प्लान बनाया गया है और कुछ नहीं!!👍❤️
ये PCS में FAIL होने वालों के लिए एक बैकअप प्लान बनाया गया है और कुछ नहीं!!👍❤️
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⭕️ ईस्ट इंडिया कंपनी के आगमन से संबंधित प्रमुख घटनाएँ
1486 — पुर्तगाली यात्री बार्थालोम्योडियाज का केप ऑफ गुडहोप (उत्तम आशा अंतरीप) तक पहुंचना
1498 — पुर्तगाली नाविक यात्री वास्को डी गामा का भारत के कालीकट बंदरगाह में आगमन (गुजराती पथ-प्रदर्शक अहमद इब्न मजीद की सहायता से भारत के पश्चिमी तट पर स्थित कालीकट पर 20 मई, 1498 ई. को पहुंचा)। कालीकट के तत्कालीन शासक जमोरिन ने वास्कोडिगामा का स्वागत किया।
1500 — पेड्रो अल्वारेज केब्रेल पुर्तगाली यात्री भारत पहुंचा
1501 — वॉस्को डी गामा की दूसरी भारत-यात्रा
1509 — पुर्तगाली गवर्नर अलफांसो डि अलबुकर्क का भारत में आगमन
1510 — अल्बुकर्क ने गोवा को बीजापुर से छीना
1530 — नीनू डा कुन्हा – पुर्तगाली गवर्नर, जिसने राजधानी-परिवर्तन कोचीन से गोवा में किया था।
1534 — पुर्तगालियों को नीनू डा कुन्हा के नेतृत्व में गुजरात के बहादुरशाह से दियू और बेसिन की प्राप्ति
1486 — पुर्तगाली यात्री बार्थालोम्योडियाज का केप ऑफ गुडहोप (उत्तम आशा अंतरीप) तक पहुंचना
1498 — पुर्तगाली नाविक यात्री वास्को डी गामा का भारत के कालीकट बंदरगाह में आगमन (गुजराती पथ-प्रदर्शक अहमद इब्न मजीद की सहायता से भारत के पश्चिमी तट पर स्थित कालीकट पर 20 मई, 1498 ई. को पहुंचा)। कालीकट के तत्कालीन शासक जमोरिन ने वास्कोडिगामा का स्वागत किया।
1500 — पेड्रो अल्वारेज केब्रेल पुर्तगाली यात्री भारत पहुंचा
1501 — वॉस्को डी गामा की दूसरी भारत-यात्रा
1509 — पुर्तगाली गवर्नर अलफांसो डि अलबुकर्क का भारत में आगमन
1510 — अल्बुकर्क ने गोवा को बीजापुर से छीना
1530 — नीनू डा कुन्हा – पुर्तगाली गवर्नर, जिसने राजधानी-परिवर्तन कोचीन से गोवा में किया था।
1534 — पुर्तगालियों को नीनू डा कुन्हा के नेतृत्व में गुजरात के बहादुरशाह से दियू और बेसिन की प्राप्ति
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दिन में भटक रहे हैं जो मंज़िल की राह से........
ये लोग क्या करेंगे अगर रात हो गई ।।
अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहे, लगातार लगे रहे।।
ये लोग क्या करेंगे अगर रात हो गई ।।
अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहे, लगातार लगे रहे।।
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कुछ लोग उम्र से नहीं, हालातों से बड़े हो जाते हैं,
जिनके अपने नहीं होते, वो ख़ुद के सहारे जीना सीख जाते हैं।
चेहरे पर मुस्कान रखकर हर दर्द छुपा लेते हैं,
और दुनिया पूछती है सब ठीक है ना, तो बस हाँ कह जाते हैं। 🥀😔🙈
जिनके अपने नहीं होते, वो ख़ुद के सहारे जीना सीख जाते हैं।
चेहरे पर मुस्कान रखकर हर दर्द छुपा लेते हैं,
और दुनिया पूछती है सब ठीक है ना, तो बस हाँ कह जाते हैं। 🥀😔🙈
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कुछ एहसास कभी लफ़्ज़ों में ढल नहीं पाए,
कुछ अपने होकर भी अपने न कहलाए।
हम ख़ामोशी से उन्हें चाहते रहे,
और वो हमें अजनबी समझकर गुज़र गए। 🥀
कुछ अपने होकर भी अपने न कहलाए।
हम ख़ामोशी से उन्हें चाहते रहे,
और वो हमें अजनबी समझकर गुज़र गए। 🥀
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जीवन के उतार चढ़ाव में बहुत से लोग मिलते बिछड़ते हैं।
कई बार ऐसा वक्त आता है जब कोई इंसान भावनाओं के प्रति बहुत नकारात्मक बहुत पत्थर सा बन जाता है फिर सभी उससे केवल यही शिकायत करते है कि तुम कितने नकारात्मक हो लेकिन कभी कोई उस नकारात्मक होने के पहले के उस सकारात्मक और रेशम सा संवेदनशील इंसान को नहीं जानना चाहता।
कि किन हालातों में ये ऐसा हुआ।
कई बार लोग सवाल करते है उसके स्वहत्या पर लेकिन कोई ये नहीं समझना चाहता कि कोई इंसान किस हद तक टूटा होगा जब उसे लगता है कि अब खुद को संभाल पाना मेरे खुद के हाथों में भी नहीं।
लेकिन ऐसे इंसान में कई बार ठहराव ऐसा होगा कि किसी का मौत भी इन्हें विचलित ना करे।
और कई बार ऐसे अस्थिर कि एक पल के हज़ारवे हिस्से मात्र के अकेलेपन से ताउम्र की उलझने जीवित कर ले।
इनके एहसासों को क्या नाम दिया जाना चाहिए ( एहसासों का कूड़ाघर) क्योंकि ये बीते वक्त का कुछ नहीं याद करना चाहते लेकिन कुछ भी भूल नहीं पाते।
खुद से एक कशमकश में लगे रहते हैं अकेलेपन में कुछ नए एहसास संजोने की कशमकश।
इसी सब उतार चढ़ाव के बीच एक quote लिखा मैंने कि
"सबसे बेहतरीन झूठ वहीं बोलते है, जो सच बोल कर हर बार टूटे हैं।"
"इसी तरह कोई पत्थर सा बनने से पहले रेशम सा कोमल रहा होगा।"
"कोई नफ़रत करने से पहले अथाह प्रेम किया होगा।"
"कोई कहकहे लगा कर हंसने से पहले बंद कमरे में बहुत रोया होगा।"
"कोई निडर होने से पहले सबसे कीमती कुछ खोया होगा।"
फ़िलहाल आज के लिए इतना ही मिलूंगी दुबारा कुछ उलझे एहसासों को अल्फ़ाज़ बनाने के सफ़र में ।
कई बार ऐसा वक्त आता है जब कोई इंसान भावनाओं के प्रति बहुत नकारात्मक बहुत पत्थर सा बन जाता है फिर सभी उससे केवल यही शिकायत करते है कि तुम कितने नकारात्मक हो लेकिन कभी कोई उस नकारात्मक होने के पहले के उस सकारात्मक और रेशम सा संवेदनशील इंसान को नहीं जानना चाहता।
कि किन हालातों में ये ऐसा हुआ।
कई बार लोग सवाल करते है उसके स्वहत्या पर लेकिन कोई ये नहीं समझना चाहता कि कोई इंसान किस हद तक टूटा होगा जब उसे लगता है कि अब खुद को संभाल पाना मेरे खुद के हाथों में भी नहीं।
लेकिन ऐसे इंसान में कई बार ठहराव ऐसा होगा कि किसी का मौत भी इन्हें विचलित ना करे।
और कई बार ऐसे अस्थिर कि एक पल के हज़ारवे हिस्से मात्र के अकेलेपन से ताउम्र की उलझने जीवित कर ले।
इनके एहसासों को क्या नाम दिया जाना चाहिए ( एहसासों का कूड़ाघर) क्योंकि ये बीते वक्त का कुछ नहीं याद करना चाहते लेकिन कुछ भी भूल नहीं पाते।
खुद से एक कशमकश में लगे रहते हैं अकेलेपन में कुछ नए एहसास संजोने की कशमकश।
इसी सब उतार चढ़ाव के बीच एक quote लिखा मैंने कि
"सबसे बेहतरीन झूठ वहीं बोलते है, जो सच बोल कर हर बार टूटे हैं।"
"इसी तरह कोई पत्थर सा बनने से पहले रेशम सा कोमल रहा होगा।"
"कोई नफ़रत करने से पहले अथाह प्रेम किया होगा।"
"कोई कहकहे लगा कर हंसने से पहले बंद कमरे में बहुत रोया होगा।"
"कोई निडर होने से पहले सबसे कीमती कुछ खोया होगा।"
फ़िलहाल आज के लिए इतना ही मिलूंगी दुबारा कुछ उलझे एहसासों को अल्फ़ाज़ बनाने के सफ़र में ।
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