𝐇𝐢𝐬𝐭𝐨𝐫𝐲 𝐒𝐭𝐮𝐝𝐲 𝐓𝐢𝐦𝐞 ᵁᵍᶜ ⁿᵉᵗ ᴿᵖˢᶜ ᶠⁱʳˢᵗ ᴳʳᵃᵈᵉ
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🇮🇳इस ग्रुप का उद्देश्य आपको इतिहास विषय से विभिन्न एग्जाम यथा UGC NET,SET,NVS,KVS,EMRS, Ass. Professor,PGT, RPSC ,UPPSC,MPSC ,DSSSB
आदि में सफलता प्राप्त करने में मदद करना एवम इतिहास विषय के ज्ञान से अवगत कराना है ।
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कवि हरिषेण निम्नलिखित में से कौन - सा / से पद को धारण किए हुए थे -

1.) महादंडनायक 2.) कुमारामात्य 3.) संधि - विग्रहिक
Anonymous Quiz
5%
A.) केवल 1
21%
B.) केवल 1 और 2
25%
C.) केवल 2 और 3
49%
D.) उपर्युक्त सभी
❤4😁2👍1
निम्न में से महावीर स्वामी ने " चतुर्विध संघ " की स्थापना कहां की थी ?
Anonymous Quiz
13%
पाटलिपुत्र
23%
पावा
39%
वल्लभी
23%
वैशाली
2%
वाराणसी
👍5
Forwarded from इतिहास ज्ञान गंगा (पण्डित पुष्यमित्र शुंग)
Fact 📄

मधुबन तथा बाँसखेड़ा लेख, नालन्दा मुहर तथा सोनीप्त मुद्र में हर्ष को 'परममहेश्वर' (शिव का भक्त) कहा गया है।

हर्षचरित के अनुसार- शशांक के विरुद्ध अभियान से पूर्व इसने 'नीललोहित' (शिव) की पूजा की थी। हर्ष की स्वर्ण मुद्रा (फर्रूखाबाद से प्राप्त) पर शिव-पार्वती के चित्र अंकित है।
राजतंरगिणी के अनुसार "बौद्ध धर्म" अपनाने से पूर्व हर्ष शैव था। अतः हर्ष का व्यक्तिगत धर्म शैव ही प्रतीत होता है।।.......

बाँसखेड़ा का ताम्र लेख (628 ईस्वी) उत्तरप्रदेश के शाहजहाँपुर जिले से (1894) में प्राप्त। इसमें हर्ष द्वारा अहिच्छत्र भुक्ति के मर्कटसागर नामक गाँव को बालचन्द्र तथा भट्टस्वामी नामक भारद्वाजगोत्रीय ब्राह्मणों को दान देने का विवरण है। इसमें हर्ष के वंश के मूलपुरुष पुष्यभूति की चर्चा नहीं हैं किन्तु 'नरवर्धन से लेकर राज्यवर्धन द्वितीय तक की सम्पूर्ण वंशावली राजमाताओं के नाम सहित दी गई है। राज्यवर्धन द्वारा मालवराज देवगुप्त पर विजय तथा गौड़ नरेश शंशाक द्वारा उसकी हत्या का विवरण भी दिया गया है। यह हर्षकालीन प्रथम अभिलेख है। इसमें हर्ष के 'हस्ताक्षर' मिलते है तथा हर्ष को 'महाराजाधिराज' कहा गया है।


https://t.me/+bqS2kyNkG6I4ZWVl
👍3❤1
महावंश में लिखा है कि निगरोध( एक नाम सुमनरो भी) ने राजा को क्षणिकता का सिद्धांत समझाया क्योंकि निग्रोध राजा अशोक निग्रोध के राजा के सिंहासन पर बैठने से व्याकुल हो गए थे इससे प्रश्न होकर राजा अशोक ने 60 हजार बौद्ध भिक्षुओं का दान नियत किया जो पहले ब्राह्मणों को दिया जाता था इस घटना से एक रात्रि पूर्व सम्राट अशोक एक स्वप्न देखा था जो इस प्रकार था कि धर्म से इतर कार्य करने पर कालाशोक को लोटोकुंबिया नरक में देखते है तथा उनकी बहन आनंदी उनको बौद्ध के बारे में बतलाती है । ये संपूर्ण घटना महावन विहार की है। अभिषेक के चौथे वर्ष इसी समय ही संघमित्रा और सुमन व उपगुप्त तीशय ने बौद्ध धर्म किया था
वहीं महावंश में अद्वितीय महकोला नागराज का प्रकरण भी आता है जिसने चार बुद्धों के दर्शन किए थे उनके द्वारा बुद्ध की प्रतिकृति उत्पन्न की जिससे अशोक ने सर्वप्रथम बुध को देखा और 7 दिवस तक जश्न मनाया (ये प्रमाण भी है अशोक के काल में बुद्ध की मूर्ति बनाने का) यह घटना 260bc के पूर्व की प्रतीत होती है

वहीं दिव्यदान के अनुसार राजा लुंबिनी पहुंचा साथ में उपगुप्त भी थे वहां सम्राट पूर्णरूपेण बौद्ध हुए
इसी द्विवदान में भिक्षु बाल्पाणिदित्य (एक नाम समुद्र भी) के प्रभाव से बौद्ध धर्म में दीक्षित हुए मेरी निजी राय में ये निग्रोध व बाल्पाणिदित्य एक ही व्यक्ति प्रतीत होते है क्योंकि ये दोनों ही बालक बताए गए है )
वहीं आगे वर्णन आता है कि उपगुप्त को गुरु बनाकर बौद्ध धर्मों की तीर्थ यात्रा की यहां गौर करने वाली बात ये है कि उपगुप्त भी पूर्ण संघ को समर्पित या राजकीय पद को त्याग नहीं पाए थे परंतु निग्रोध पूर्ण रूपेण बौद्ध थे

Dinesh k Prajapat
(JRF & Phd Scholor)
❤5👍2🔥2👏1😱1🙏1
मेगस्थनीज ने मौर्य प्रशासन में सैनिक गतिविधियों के संचालन के लिए कितनी उप - समितियों का उल्लेख किया है ?
Anonymous Quiz
7%
4
52%
6
28%
8
8%
10
5%
12
❤4
निम्न में से " बाघ में उत्कीर्ण गुफाओं " की संख्या कितनी है ?
Anonymous Quiz
9%
6
36%
9
39%
13
11%
15
5%
20
👍7
"इश्क़ की इंतहा का आलम तो देखो,
किसी ने अपने इश्क को पत्थर में नाज ओ अदा कर दिया "

Dinesh k Prajapat
❤14👍4🔥2
हाथी पर सवार सम्राट का चित्र किस गुप्त शासक के सिक्के पर मिलता है ?
Anonymous Quiz
18%
चंद्रगुप्त 2
43%
कुमारगुप्त 1
33%
स्कंदगुप्त
6%
पुरुगुप्त
👍3
Forwarded from ✍ इतिहास की जिज्ञासा
कुम्भ मेला का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य✍👇


इलाहाबाद कुंभ मेला, माघ मेले को बड़ा और स्थायी रूप देने के लिए प्रयागवाल पुरोहितों द्वारा विकसित किया गया।

जेम्स लोचफेल्ड के अनुसार प्रारंभ में केवल हरिद्वार मेला 'कुंभ मेला' कहलाता था।

18वीं सदी: हरिद्वार मेले के बाद इलाहाबाद के माघ मेले तथा नासिक और उज्जैन के सिंहस्थ मेलों को जोड़ा गया।

कुंभ मेले का धार्मिक और आर्थिक महत्व बढ़ाने तथा इसे चारों शहरों (हरिद्वार, इलाहाबाद, नासिक और उज्जैन) में विस्तार देने में हिन्दू अखाड़ों की भूमिका प्रमुख थी।

इलाहाबाद: 19वीं सदी के अंत तक 'क्वीन ऑफ नॉर्थ'


हाईकोर्ट (1867), मुइर सेंट्रल कॉलेज (1877), और इलाहाबाद विश्वविद्यालय (1887) की स्थापना हुई।

ब्रिटिश हस्तक्षेप न होने की नीति के कारण कुंभ मेले का उपयोग राष्ट्रवादी गतिविधियों के लिए किया गया।

19वीं सदी: इलाहाबाद 1857 के विद्रोह के बाद प्रशासन और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बना।

राष्ट्रीय आंदोलन में कुंभ मेला


1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद (मालवीय पार्क) में लॉर्ड कैनिंग ने ब्रिटिश महारानी की घोषणा पढ़ी, जिसमें धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का वादा था।

स्वतंत्रता सेनानी मदन मोहन मालवीय ने इसे भारतीयों के लिए 'मैग्ना कार्टा' कहा।

1907 कुंभ मेला: बाल गंगाधर तिलक ने मेले में स्वदेशी का प्रचार किया।

साधुओं ने स्वदेशी और राष्ट्रवाद का संदेश फैलाया।

गोपाल कृष्ण गोखले ने भी मेले में भाग लिया।

1920: तिलक की मृत्यु के बाद उनकी अस्थियां संगम में विसर्जित की गईं।
1930: कांग्रेस ने कुंभ और माघ मेलों में स्थायी शिविर लगाए।
साधुओं ने विदेशी वस्तुओं और नशे के बहिष्कार के लिए प्रचार किया।
1936 अर्धकुंभ: स्वदेशी लीग ने भारत माता की प्रतिमा प्रदर्शित की।

सामाजिक सुधार और कुंभ मेला


1930 मेला: ब्रिटिश सरकार ने शारदा विवाह अधिनियम (1929) का प्रचार किया।
1998: कुंभ मेले में एंटी-डौरी प्रचार, टीकाकरण अभियान, और कृषि जागरूकता के प्रयास देखे गए।
👍10❤2👌1
पल्लव शासकों के अनुदान अभिलेखों व सिक्कों पर निम्नलिखित में से किसका अंकन नही है ?
Anonymous Quiz
25%
लिंग
31%
वृषभ
30%
मत्स्य
13%
सिंह
❤2👍1🔥1👌1