नीरो बांसुरी नहीं फिडिल बजा रहा था?
उपरिलिखित तथ्य के अनेकों उदाहरणों में से एक रोमन सम्राट नीरो से सम्बन्धित है जो ई० पू० कई सदी में रोमन साम्राज्य का शासक था । एक के बाद दूसरे इतिहासकारों ने लिखा है कि एक ओर रोम नगर जल रहा था और दूसरी और नीरो फिडिल (Fiddle) बजाने में मग्न था और जलते हुए रोम को देखकरखुश हो रहा था। यह कथन असत्य है, प्रथम इसलिए कि 16 वीं सदी के पहले संसार में फिडिल का अस्तित्व ही न था और दूसरे इसलिये कि जिस समय रोम जल रहा था उस समय नीरो उस नगर से लगभग 50 मील की दूरी पर अपने एक अन्य महल में था। यह सही है कि नीरो व्यसनी और व्यभिचारी था तथा उसमें और दुर्गुण भी थे, कदाचित इसी कारण उस पर यह आरोप भी लगा दिया गया । आरोप की सत्यता पर लेखकों को सन्देह इसी कारण नहीं हुआ चरित्रहीन नीरो द्वारा इस प्रकार अपनी खुशी का इजहार करना स्वाभाविक बात हो सकती थी। परन्तु ये आरोप वास्तविक रूप से ज्यादा मुहावरे के रूप में विकसित हुआ लगता है कि नीरो ने अवनति के समय कोई कारगर उपाय नहीं किए ।
Dinesh k Prajapat
(JRF &Phd scholor)
उपरिलिखित तथ्य के अनेकों उदाहरणों में से एक रोमन सम्राट नीरो से सम्बन्धित है जो ई० पू० कई सदी में रोमन साम्राज्य का शासक था । एक के बाद दूसरे इतिहासकारों ने लिखा है कि एक ओर रोम नगर जल रहा था और दूसरी और नीरो फिडिल (Fiddle) बजाने में मग्न था और जलते हुए रोम को देखकरखुश हो रहा था। यह कथन असत्य है, प्रथम इसलिए कि 16 वीं सदी के पहले संसार में फिडिल का अस्तित्व ही न था और दूसरे इसलिये कि जिस समय रोम जल रहा था उस समय नीरो उस नगर से लगभग 50 मील की दूरी पर अपने एक अन्य महल में था। यह सही है कि नीरो व्यसनी और व्यभिचारी था तथा उसमें और दुर्गुण भी थे, कदाचित इसी कारण उस पर यह आरोप भी लगा दिया गया । आरोप की सत्यता पर लेखकों को सन्देह इसी कारण नहीं हुआ चरित्रहीन नीरो द्वारा इस प्रकार अपनी खुशी का इजहार करना स्वाभाविक बात हो सकती थी। परन्तु ये आरोप वास्तविक रूप से ज्यादा मुहावरे के रूप में विकसित हुआ लगता है कि नीरो ने अवनति के समय कोई कारगर उपाय नहीं किए ।
Dinesh k Prajapat
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निम्नलिखित में से किस नवपाषाणिक पुरास्थल से काष्ठश्म के औजार का साक्ष्य प्राप्त हुआ है ?
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10%
हल्लूर
25%
चिरांद
30%
महागढ़ा
31%
दोओजली हेडिंग
4%
रोपङ
कवि हरिषेण निम्नलिखित में से कौन - सा / से पद को धारण किए हुए थे -
1.) महादंडनायक 2.) कुमारामात्य 3.) संधि - विग्रहिक
1.) महादंडनायक 2.) कुमारामात्य 3.) संधि - विग्रहिक
Anonymous Quiz
5%
A.) केवल 1
21%
B.) केवल 1 और 2
25%
C.) केवल 2 और 3
49%
D.) उपर्युक्त सभी
❤4😁2👍1
निम्न में से महावीर स्वामी ने " चतुर्विध संघ " की स्थापना कहां की थी ?
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13%
पाटलिपुत्र
23%
पावा
39%
वल्लभी
23%
वैशाली
2%
वाराणसी
👍5
निम्न में से " काव्यालंकार " के लेखक कौन थे ?
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23%
वामन
17%
कालीदास
26%
अमर सिंह
23%
सुबन्धु
11%
वाग्भट्ट
👍3
Forwarded from इतिहास ज्ञान गंगा (पण्डित पुष्यमित्र शुंग)
Fact 📄
मधुबन तथा बाँसखेड़ा लेख, नालन्दा मुहर तथा सोनीप्त मुद्र में हर्ष को 'परममहेश्वर' (शिव का भक्त) कहा गया है।
हर्षचरित के अनुसार- शशांक के विरुद्ध अभियान से पूर्व इसने 'नीललोहित' (शिव) की पूजा की थी। हर्ष की स्वर्ण मुद्रा (फर्रूखाबाद से प्राप्त) पर शिव-पार्वती के चित्र अंकित है।
राजतंरगिणी के अनुसार "बौद्ध धर्म" अपनाने से पूर्व हर्ष शैव था। अतः हर्ष का व्यक्तिगत धर्म शैव ही प्रतीत होता है।।.......
बाँसखेड़ा का ताम्र लेख (628 ईस्वी) उत्तरप्रदेश के शाहजहाँपुर जिले से (1894) में प्राप्त। इसमें हर्ष द्वारा अहिच्छत्र भुक्ति के मर्कटसागर नामक गाँव को बालचन्द्र तथा भट्टस्वामी नामक भारद्वाजगोत्रीय ब्राह्मणों को दान देने का विवरण है। इसमें हर्ष के वंश के मूलपुरुष पुष्यभूति की चर्चा नहीं हैं किन्तु 'नरवर्धन से लेकर राज्यवर्धन द्वितीय तक की सम्पूर्ण वंशावली राजमाताओं के नाम सहित दी गई है। राज्यवर्धन द्वारा मालवराज देवगुप्त पर विजय तथा गौड़ नरेश शंशाक द्वारा उसकी हत्या का विवरण भी दिया गया है। यह हर्षकालीन प्रथम अभिलेख है। इसमें हर्ष के 'हस्ताक्षर' मिलते है तथा हर्ष को 'महाराजाधिराज' कहा गया है।
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मधुबन तथा बाँसखेड़ा लेख, नालन्दा मुहर तथा सोनीप्त मुद्र में हर्ष को 'परममहेश्वर' (शिव का भक्त) कहा गया है।
हर्षचरित के अनुसार- शशांक के विरुद्ध अभियान से पूर्व इसने 'नीललोहित' (शिव) की पूजा की थी। हर्ष की स्वर्ण मुद्रा (फर्रूखाबाद से प्राप्त) पर शिव-पार्वती के चित्र अंकित है।
राजतंरगिणी के अनुसार "बौद्ध धर्म" अपनाने से पूर्व हर्ष शैव था। अतः हर्ष का व्यक्तिगत धर्म शैव ही प्रतीत होता है।।.......
बाँसखेड़ा का ताम्र लेख (628 ईस्वी) उत्तरप्रदेश के शाहजहाँपुर जिले से (1894) में प्राप्त। इसमें हर्ष द्वारा अहिच्छत्र भुक्ति के मर्कटसागर नामक गाँव को बालचन्द्र तथा भट्टस्वामी नामक भारद्वाजगोत्रीय ब्राह्मणों को दान देने का विवरण है। इसमें हर्ष के वंश के मूलपुरुष पुष्यभूति की चर्चा नहीं हैं किन्तु 'नरवर्धन से लेकर राज्यवर्धन द्वितीय तक की सम्पूर्ण वंशावली राजमाताओं के नाम सहित दी गई है। राज्यवर्धन द्वारा मालवराज देवगुप्त पर विजय तथा गौड़ नरेश शंशाक द्वारा उसकी हत्या का विवरण भी दिया गया है। यह हर्षकालीन प्रथम अभिलेख है। इसमें हर्ष के 'हस्ताक्षर' मिलते है तथा हर्ष को 'महाराजाधिराज' कहा गया है।
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UGC NET. इतिहास
इतिहास की महत्त्वपूर्ण पुस्तकें (UGC NET/ PGT/TGT)
💐प्राचीन भारत–के सी श्रीवास्तव, पप्पू सिंह प्रजापत, सौरभ चौबे।
💐मध्यकालीन भारत–सौरभ चौबे, पप्पू सिंह प्रजापत।
💐आधुनिक भारत–परिक्षावाणी, अरविंद भास्कर।
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💐प्राचीन भारत–के सी श्रीवास्तव, पप्पू सिंह प्रजापत, सौरभ चौबे।
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महावंश में लिखा है कि निगरोध( एक नाम सुमनरो भी) ने राजा को क्षणिकता का सिद्धांत समझाया क्योंकि निग्रोध राजा अशोक निग्रोध के राजा के सिंहासन पर बैठने से व्याकुल हो गए थे इससे प्रश्न होकर राजा अशोक ने 60 हजार बौद्ध भिक्षुओं का दान नियत किया जो पहले ब्राह्मणों को दिया जाता था इस घटना से एक रात्रि पूर्व सम्राट अशोक एक स्वप्न देखा था जो इस प्रकार था कि धर्म से इतर कार्य करने पर कालाशोक को लोटोकुंबिया नरक में देखते है तथा उनकी बहन आनंदी उनको बौद्ध के बारे में बतलाती है । ये संपूर्ण घटना महावन विहार की है। अभिषेक के चौथे वर्ष इसी समय ही संघमित्रा और सुमन व उपगुप्त तीशय ने बौद्ध धर्म किया था
वहीं महावंश में अद्वितीय महकोला नागराज का प्रकरण भी आता है जिसने चार बुद्धों के दर्शन किए थे उनके द्वारा बुद्ध की प्रतिकृति उत्पन्न की जिससे अशोक ने सर्वप्रथम बुध को देखा और 7 दिवस तक जश्न मनाया (ये प्रमाण भी है अशोक के काल में बुद्ध की मूर्ति बनाने का) यह घटना 260bc के पूर्व की प्रतीत होती है
वहीं दिव्यदान के अनुसार राजा लुंबिनी पहुंचा साथ में उपगुप्त भी थे वहां सम्राट पूर्णरूपेण बौद्ध हुए
इसी द्विवदान में भिक्षु बाल्पाणिदित्य (एक नाम समुद्र भी) के प्रभाव से बौद्ध धर्म में दीक्षित हुए मेरी निजी राय में ये निग्रोध व बाल्पाणिदित्य एक ही व्यक्ति प्रतीत होते है क्योंकि ये दोनों ही बालक बताए गए है )
वहीं आगे वर्णन आता है कि उपगुप्त को गुरु बनाकर बौद्ध धर्मों की तीर्थ यात्रा की यहां गौर करने वाली बात ये है कि उपगुप्त भी पूर्ण संघ को समर्पित या राजकीय पद को त्याग नहीं पाए थे परंतु निग्रोध पूर्ण रूपेण बौद्ध थे
Dinesh k Prajapat
(JRF & Phd Scholor)
वहीं महावंश में अद्वितीय महकोला नागराज का प्रकरण भी आता है जिसने चार बुद्धों के दर्शन किए थे उनके द्वारा बुद्ध की प्रतिकृति उत्पन्न की जिससे अशोक ने सर्वप्रथम बुध को देखा और 7 दिवस तक जश्न मनाया (ये प्रमाण भी है अशोक के काल में बुद्ध की मूर्ति बनाने का) यह घटना 260bc के पूर्व की प्रतीत होती है
वहीं दिव्यदान के अनुसार राजा लुंबिनी पहुंचा साथ में उपगुप्त भी थे वहां सम्राट पूर्णरूपेण बौद्ध हुए
इसी द्विवदान में भिक्षु बाल्पाणिदित्य (एक नाम समुद्र भी) के प्रभाव से बौद्ध धर्म में दीक्षित हुए मेरी निजी राय में ये निग्रोध व बाल्पाणिदित्य एक ही व्यक्ति प्रतीत होते है क्योंकि ये दोनों ही बालक बताए गए है )
वहीं आगे वर्णन आता है कि उपगुप्त को गुरु बनाकर बौद्ध धर्मों की तीर्थ यात्रा की यहां गौर करने वाली बात ये है कि उपगुप्त भी पूर्ण संघ को समर्पित या राजकीय पद को त्याग नहीं पाए थे परंतु निग्रोध पूर्ण रूपेण बौद्ध थे
Dinesh k Prajapat
(JRF & Phd Scholor)
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मेगस्थनीज ने मौर्य प्रशासन में सैनिक गतिविधियों के संचालन के लिए कितनी उप - समितियों का उल्लेख किया है ?
Anonymous Quiz
7%
4
52%
6
28%
8
8%
10
5%
12
❤4
निम्न में से " बाघ में उत्कीर्ण गुफाओं " की संख्या कितनी है ?
Anonymous Quiz
9%
6
36%
9
39%
13
11%
15
5%
20
👍7
हाथी पर सवार सम्राट का चित्र किस गुप्त शासक के सिक्के पर मिलता है ?
Anonymous Quiz
18%
चंद्रगुप्त 2
43%
कुमारगुप्त 1
33%
स्कंदगुप्त
6%
पुरुगुप्त
👍3