अशोक के आदेश पर लिखा गया , लगभग 2250 वर्ष पुराना अभिलेख वर्तमान अफगानिस्तान के कंधार से प्राप्त हुआ । इस अभिलेख में कौन - कौन सी लिपियों / भाषाओं का प्रयोग किया गया है ?
1.) यूनानी 2.) प्राकृत 3.) अरामेइक 4.) ब्राह्मी
1.) यूनानी 2.) प्राकृत 3.) अरामेइक 4.) ब्राह्मी
Anonymous Quiz
6%
A.) केवल 1 और 2
47%
B.) केवल 1 और 3
27%
C.) केवल 1 , 3 , 4
20%
D.) उपर्युक्त सभी
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समुद्रगुप्त नीतियों कौनसा सही सुमेलित नहीं है-
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11%
आर्यावर्त(उत्तर भारत)नीति - प्रसभोद्धरण
19%
दक्षिणापथ नीति- ग्रहणमोक्षनुग्रह
30%
आटविक राज्यनीति - परचारिकीकृत
40%
विदेशी राज्यनीति - सर्वकरदानाज्ञाकरण प्रणामागमन
❤1
प्रयाग प्रशस्ति कि किन पंक्तियों में समुद्र गुप्त की दक्षिणापथ की विजयो का उल्लेख मिलता है?
Anonymous Quiz
13%
13,14
32%
17,18
42%
19,20
14%
20,21
👌5
दक्षिणापथ के 12 राज्य और उनके राजा क्रमश -----------------------🌿🌿🌿🌿🌿 1 कोसल (महेंद्र) 2 महाकांतार (व्याघ्रराज) 3 कौराल (मंटराज) 4 पिष्टपुर (महिंद्रगिरी) 5 कोट्टूर (स्वामीदत्त ) 6 एरण्डपल्ल (दमन) 7 कांची (विष्णुगोप ) 8 अवमुक्त (नीलराज ) 9 वेंगी ( हस्तीवर्मा शालकायन वंश ) 10 पालक्क ( उग्रसेन ) 11 देवराष्ट्र ( कुबेर) 12 कुशस्थलपुर ( धनंजय) अंतिम दक्षिण पल्लव शासक विष्णुगोप था 💐💐
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इतिहासकारों का निराशावादी दृष्टिकोण -
सभ्यता एक नदी के समान है कि जिसके दोनों ओर किनारे हैं। यह नदी कभी-कभी लोगों द्वारा मारकाट, ईर्षा, द्वेष, घृणा आदि के रक्त से भर जाती है जिसे इतिहासकार आम तौर पर लिपिबद्ध करते हैं किन्तु उसके किनारों पर लोग आवास बनाते हैं, सन्तान उत्पन्न करते हैं, एक दूसरे से स्नेह करते हैं, गायन करते हैं, कविता लिखते हैं, मूर्तियाँ बनाते हैं। किनारों पर हुई बातों की कथा सभ्यता का इतिहास है। इतिहासकार केवल नदी को देखते हैं तथा किनारों की उपेक्षा कर देते हैं। अतः वह निराशावादी होते हैं और उनके इतिहास में यही बात लक्षित होती है ।
उक्त कथन विख्यात पत्रकार तथा इतिहासज्ञ विल डूरन्ट के निम्न उद्धरण पर आधारित है-
"Civilisationl is a stream with banks. The stream is sometimes filled with blood from people killing, stealing,shouting and doing the things historians usually record, while on the banks, unnoticed, people build homes, make love, raise children, sing songs, write poetry and even carve statues. The story of civilization is the story of what happened on the banks. Historians are pessimists because they ignore the banks for the river. - Will Durant
Dinesh k Prajapat
सभ्यता एक नदी के समान है कि जिसके दोनों ओर किनारे हैं। यह नदी कभी-कभी लोगों द्वारा मारकाट, ईर्षा, द्वेष, घृणा आदि के रक्त से भर जाती है जिसे इतिहासकार आम तौर पर लिपिबद्ध करते हैं किन्तु उसके किनारों पर लोग आवास बनाते हैं, सन्तान उत्पन्न करते हैं, एक दूसरे से स्नेह करते हैं, गायन करते हैं, कविता लिखते हैं, मूर्तियाँ बनाते हैं। किनारों पर हुई बातों की कथा सभ्यता का इतिहास है। इतिहासकार केवल नदी को देखते हैं तथा किनारों की उपेक्षा कर देते हैं। अतः वह निराशावादी होते हैं और उनके इतिहास में यही बात लक्षित होती है ।
उक्त कथन विख्यात पत्रकार तथा इतिहासज्ञ विल डूरन्ट के निम्न उद्धरण पर आधारित है-
"Civilisationl is a stream with banks. The stream is sometimes filled with blood from people killing, stealing,shouting and doing the things historians usually record, while on the banks, unnoticed, people build homes, make love, raise children, sing songs, write poetry and even carve statues. The story of civilization is the story of what happened on the banks. Historians are pessimists because they ignore the banks for the river. - Will Durant
Dinesh k Prajapat
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नीरो बांसुरी नहीं फिडिल बजा रहा था?
उपरिलिखित तथ्य के अनेकों उदाहरणों में से एक रोमन सम्राट नीरो से सम्बन्धित है जो ई० पू० कई सदी में रोमन साम्राज्य का शासक था । एक के बाद दूसरे इतिहासकारों ने लिखा है कि एक ओर रोम नगर जल रहा था और दूसरी और नीरो फिडिल (Fiddle) बजाने में मग्न था और जलते हुए रोम को देखकरखुश हो रहा था। यह कथन असत्य है, प्रथम इसलिए कि 16 वीं सदी के पहले संसार में फिडिल का अस्तित्व ही न था और दूसरे इसलिये कि जिस समय रोम जल रहा था उस समय नीरो उस नगर से लगभग 50 मील की दूरी पर अपने एक अन्य महल में था। यह सही है कि नीरो व्यसनी और व्यभिचारी था तथा उसमें और दुर्गुण भी थे, कदाचित इसी कारण उस पर यह आरोप भी लगा दिया गया । आरोप की सत्यता पर लेखकों को सन्देह इसी कारण नहीं हुआ चरित्रहीन नीरो द्वारा इस प्रकार अपनी खुशी का इजहार करना स्वाभाविक बात हो सकती थी। परन्तु ये आरोप वास्तविक रूप से ज्यादा मुहावरे के रूप में विकसित हुआ लगता है कि नीरो ने अवनति के समय कोई कारगर उपाय नहीं किए ।
Dinesh k Prajapat
(JRF &Phd scholor)
उपरिलिखित तथ्य के अनेकों उदाहरणों में से एक रोमन सम्राट नीरो से सम्बन्धित है जो ई० पू० कई सदी में रोमन साम्राज्य का शासक था । एक के बाद दूसरे इतिहासकारों ने लिखा है कि एक ओर रोम नगर जल रहा था और दूसरी और नीरो फिडिल (Fiddle) बजाने में मग्न था और जलते हुए रोम को देखकरखुश हो रहा था। यह कथन असत्य है, प्रथम इसलिए कि 16 वीं सदी के पहले संसार में फिडिल का अस्तित्व ही न था और दूसरे इसलिये कि जिस समय रोम जल रहा था उस समय नीरो उस नगर से लगभग 50 मील की दूरी पर अपने एक अन्य महल में था। यह सही है कि नीरो व्यसनी और व्यभिचारी था तथा उसमें और दुर्गुण भी थे, कदाचित इसी कारण उस पर यह आरोप भी लगा दिया गया । आरोप की सत्यता पर लेखकों को सन्देह इसी कारण नहीं हुआ चरित्रहीन नीरो द्वारा इस प्रकार अपनी खुशी का इजहार करना स्वाभाविक बात हो सकती थी। परन्तु ये आरोप वास्तविक रूप से ज्यादा मुहावरे के रूप में विकसित हुआ लगता है कि नीरो ने अवनति के समय कोई कारगर उपाय नहीं किए ।
Dinesh k Prajapat
(JRF &Phd scholor)
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निम्नलिखित में से किस नवपाषाणिक पुरास्थल से काष्ठश्म के औजार का साक्ष्य प्राप्त हुआ है ?
Anonymous Quiz
10%
हल्लूर
25%
चिरांद
30%
महागढ़ा
31%
दोओजली हेडिंग
4%
रोपङ
कवि हरिषेण निम्नलिखित में से कौन - सा / से पद को धारण किए हुए थे -
1.) महादंडनायक 2.) कुमारामात्य 3.) संधि - विग्रहिक
1.) महादंडनायक 2.) कुमारामात्य 3.) संधि - विग्रहिक
Anonymous Quiz
5%
A.) केवल 1
21%
B.) केवल 1 और 2
25%
C.) केवल 2 और 3
49%
D.) उपर्युक्त सभी
❤4😁2👍1
निम्न में से महावीर स्वामी ने " चतुर्विध संघ " की स्थापना कहां की थी ?
Anonymous Quiz
13%
पाटलिपुत्र
23%
पावा
39%
वल्लभी
23%
वैशाली
2%
वाराणसी
👍5
निम्न में से " काव्यालंकार " के लेखक कौन थे ?
Anonymous Quiz
23%
वामन
17%
कालीदास
26%
अमर सिंह
23%
सुबन्धु
11%
वाग्भट्ट
👍3
Forwarded from इतिहास ज्ञान गंगा (पण्डित पुष्यमित्र शुंग)
Fact 📄
मधुबन तथा बाँसखेड़ा लेख, नालन्दा मुहर तथा सोनीप्त मुद्र में हर्ष को 'परममहेश्वर' (शिव का भक्त) कहा गया है।
हर्षचरित के अनुसार- शशांक के विरुद्ध अभियान से पूर्व इसने 'नीललोहित' (शिव) की पूजा की थी। हर्ष की स्वर्ण मुद्रा (फर्रूखाबाद से प्राप्त) पर शिव-पार्वती के चित्र अंकित है।
राजतंरगिणी के अनुसार "बौद्ध धर्म" अपनाने से पूर्व हर्ष शैव था। अतः हर्ष का व्यक्तिगत धर्म शैव ही प्रतीत होता है।।.......
बाँसखेड़ा का ताम्र लेख (628 ईस्वी) उत्तरप्रदेश के शाहजहाँपुर जिले से (1894) में प्राप्त। इसमें हर्ष द्वारा अहिच्छत्र भुक्ति के मर्कटसागर नामक गाँव को बालचन्द्र तथा भट्टस्वामी नामक भारद्वाजगोत्रीय ब्राह्मणों को दान देने का विवरण है। इसमें हर्ष के वंश के मूलपुरुष पुष्यभूति की चर्चा नहीं हैं किन्तु 'नरवर्धन से लेकर राज्यवर्धन द्वितीय तक की सम्पूर्ण वंशावली राजमाताओं के नाम सहित दी गई है। राज्यवर्धन द्वारा मालवराज देवगुप्त पर विजय तथा गौड़ नरेश शंशाक द्वारा उसकी हत्या का विवरण भी दिया गया है। यह हर्षकालीन प्रथम अभिलेख है। इसमें हर्ष के 'हस्ताक्षर' मिलते है तथा हर्ष को 'महाराजाधिराज' कहा गया है।
https://t.me/+bqS2kyNkG6I4ZWVl
मधुबन तथा बाँसखेड़ा लेख, नालन्दा मुहर तथा सोनीप्त मुद्र में हर्ष को 'परममहेश्वर' (शिव का भक्त) कहा गया है।
हर्षचरित के अनुसार- शशांक के विरुद्ध अभियान से पूर्व इसने 'नीललोहित' (शिव) की पूजा की थी। हर्ष की स्वर्ण मुद्रा (फर्रूखाबाद से प्राप्त) पर शिव-पार्वती के चित्र अंकित है।
राजतंरगिणी के अनुसार "बौद्ध धर्म" अपनाने से पूर्व हर्ष शैव था। अतः हर्ष का व्यक्तिगत धर्म शैव ही प्रतीत होता है।।.......
बाँसखेड़ा का ताम्र लेख (628 ईस्वी) उत्तरप्रदेश के शाहजहाँपुर जिले से (1894) में प्राप्त। इसमें हर्ष द्वारा अहिच्छत्र भुक्ति के मर्कटसागर नामक गाँव को बालचन्द्र तथा भट्टस्वामी नामक भारद्वाजगोत्रीय ब्राह्मणों को दान देने का विवरण है। इसमें हर्ष के वंश के मूलपुरुष पुष्यभूति की चर्चा नहीं हैं किन्तु 'नरवर्धन से लेकर राज्यवर्धन द्वितीय तक की सम्पूर्ण वंशावली राजमाताओं के नाम सहित दी गई है। राज्यवर्धन द्वारा मालवराज देवगुप्त पर विजय तथा गौड़ नरेश शंशाक द्वारा उसकी हत्या का विवरण भी दिया गया है। यह हर्षकालीन प्रथम अभिलेख है। इसमें हर्ष के 'हस्ताक्षर' मिलते है तथा हर्ष को 'महाराजाधिराज' कहा गया है।
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UGC NET. इतिहास
इतिहास की महत्त्वपूर्ण पुस्तकें (UGC NET/ PGT/TGT)
💐प्राचीन भारत–के सी श्रीवास्तव, पप्पू सिंह प्रजापत, सौरभ चौबे।
💐मध्यकालीन भारत–सौरभ चौबे, पप्पू सिंह प्रजापत।
💐आधुनिक भारत–परिक्षावाणी, अरविंद भास्कर।
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💐मध्यकालीन भारत–सौरभ चौबे, पप्पू सिंह प्रजापत।
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महावंश में लिखा है कि निगरोध( एक नाम सुमनरो भी) ने राजा को क्षणिकता का सिद्धांत समझाया क्योंकि निग्रोध राजा अशोक निग्रोध के राजा के सिंहासन पर बैठने से व्याकुल हो गए थे इससे प्रश्न होकर राजा अशोक ने 60 हजार बौद्ध भिक्षुओं का दान नियत किया जो पहले ब्राह्मणों को दिया जाता था इस घटना से एक रात्रि पूर्व सम्राट अशोक एक स्वप्न देखा था जो इस प्रकार था कि धर्म से इतर कार्य करने पर कालाशोक को लोटोकुंबिया नरक में देखते है तथा उनकी बहन आनंदी उनको बौद्ध के बारे में बतलाती है । ये संपूर्ण घटना महावन विहार की है। अभिषेक के चौथे वर्ष इसी समय ही संघमित्रा और सुमन व उपगुप्त तीशय ने बौद्ध धर्म किया था
वहीं महावंश में अद्वितीय महकोला नागराज का प्रकरण भी आता है जिसने चार बुद्धों के दर्शन किए थे उनके द्वारा बुद्ध की प्रतिकृति उत्पन्न की जिससे अशोक ने सर्वप्रथम बुध को देखा और 7 दिवस तक जश्न मनाया (ये प्रमाण भी है अशोक के काल में बुद्ध की मूर्ति बनाने का) यह घटना 260bc के पूर्व की प्रतीत होती है
वहीं दिव्यदान के अनुसार राजा लुंबिनी पहुंचा साथ में उपगुप्त भी थे वहां सम्राट पूर्णरूपेण बौद्ध हुए
इसी द्विवदान में भिक्षु बाल्पाणिदित्य (एक नाम समुद्र भी) के प्रभाव से बौद्ध धर्म में दीक्षित हुए मेरी निजी राय में ये निग्रोध व बाल्पाणिदित्य एक ही व्यक्ति प्रतीत होते है क्योंकि ये दोनों ही बालक बताए गए है )
वहीं आगे वर्णन आता है कि उपगुप्त को गुरु बनाकर बौद्ध धर्मों की तीर्थ यात्रा की यहां गौर करने वाली बात ये है कि उपगुप्त भी पूर्ण संघ को समर्पित या राजकीय पद को त्याग नहीं पाए थे परंतु निग्रोध पूर्ण रूपेण बौद्ध थे
Dinesh k Prajapat
(JRF & Phd Scholor)
वहीं महावंश में अद्वितीय महकोला नागराज का प्रकरण भी आता है जिसने चार बुद्धों के दर्शन किए थे उनके द्वारा बुद्ध की प्रतिकृति उत्पन्न की जिससे अशोक ने सर्वप्रथम बुध को देखा और 7 दिवस तक जश्न मनाया (ये प्रमाण भी है अशोक के काल में बुद्ध की मूर्ति बनाने का) यह घटना 260bc के पूर्व की प्रतीत होती है
वहीं दिव्यदान के अनुसार राजा लुंबिनी पहुंचा साथ में उपगुप्त भी थे वहां सम्राट पूर्णरूपेण बौद्ध हुए
इसी द्विवदान में भिक्षु बाल्पाणिदित्य (एक नाम समुद्र भी) के प्रभाव से बौद्ध धर्म में दीक्षित हुए मेरी निजी राय में ये निग्रोध व बाल्पाणिदित्य एक ही व्यक्ति प्रतीत होते है क्योंकि ये दोनों ही बालक बताए गए है )
वहीं आगे वर्णन आता है कि उपगुप्त को गुरु बनाकर बौद्ध धर्मों की तीर्थ यात्रा की यहां गौर करने वाली बात ये है कि उपगुप्त भी पूर्ण संघ को समर्पित या राजकीय पद को त्याग नहीं पाए थे परंतु निग्रोध पूर्ण रूपेण बौद्ध थे
Dinesh k Prajapat
(JRF & Phd Scholor)
❤5👍2🔥2👏1😱1🙏1
मेगस्थनीज ने मौर्य प्रशासन में सैनिक गतिविधियों के संचालन के लिए कितनी उप - समितियों का उल्लेख किया है ?
Anonymous Quiz
7%
4
52%
6
28%
8
8%
10
5%
12
❤4
निम्न में से " बाघ में उत्कीर्ण गुफाओं " की संख्या कितनी है ?
Anonymous Quiz
9%
6
36%
9
39%
13
11%
15
5%
20
👍7