𝐇𝐢𝐬𝐭𝐨𝐫𝐲 𝐒𝐭𝐮𝐝𝐲 𝐓𝐢𝐦𝐞 ᵁᵍᶜ ⁿᵉᵗ ᴿᵖˢᶜ ᶠⁱʳˢᵗ ᴳʳᵃᵈᵉ
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🇮🇳इस ग्रुप का उद्देश्य आपको इतिहास विषय से विभिन्न एग्जाम यथा UGC NET,SET,NVS,KVS,EMRS, Ass. Professor,PGT, RPSC ,UPPSC,MPSC ,DSSSB
आदि में सफलता प्राप्त करने में मदद करना एवम इतिहास विषय के ज्ञान से अवगत कराना है ।
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कार्ल मार्क्स का ऐतिहासिक भौतिकवाद या वैज्ञानिक भौतिकवाद का सिद्धांत एक मार्क्सवादी दर्शन है जो भौतिक स्थितियों के आधार पर मानव इतिहास और विकास की व्याख्या करता है :
सामग्री की स्थिति
मार्क्स का मानना ​​था कि मानवीय क्रियाएं उस दुनिया की भौतिक स्थितियों पर निर्भर करती हैं जिसमें वे रहते हैं। उनका मानना ​​था कि सबसे महत्वपूर्ण मानवीय गतिविधि श्रम के माध्यम से उत्पादन है।
आर्थिक विकास
मार्क्स का मानना ​​था कि समाज का आर्थिक विकास ही मानव इतिहास का अंतिम कारण है। उनका मानना ​​था कि इतिहास के पाठ्यक्रम को उत्पादन और विनिमय के तरीकों में परिवर्तन के द्वारा समझाया जा सकता है।
सामाजिक संस्थाएं
मार्क्स का मानना ​​था कि विचार और सामाजिक संस्थाएं आर्थिक आधार पर स्थापित एक अधिरचना के रूप में विकसित होती हैं। उनका मानना ​​था कि मानव समाज की सभी संस्थाएं, जैसे सरकार और धर्म, आर्थिक गतिविधि का परिणाम हैं।
वर्ग संघर्ष
मार्क्स का मानना ​​था कि मानव का उत्पादक श्रम वर्ग संघर्ष को जन्म देता है। उनका मानना ​​था कि मानव इतिहास की दिशा एक साम्यवादी समाज की ओर इशारा करती है जहां श्रम विभाजन और वर्ग संघर्ष समाप्त हो जाएगा।
द्वंद्वात्मक भौतिकवाद
मार्क्स और उनके सहयोगी फ्रेडरिक एंगेल्स के द्वंद्वात्मक भौतिकवाद के दर्शन का मानना ​​है कि सभी चीजें भौतिक विरोधाभासों के माध्यम से विकसित होती हैं।
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कितनी वेदिकाये सोहन संस्कृति स्थल से मिली है ?
Anonymous Quiz
7%
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34%
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निम्नलिखित किस विचारक ने " द न्यू इंस्टूमेंट " की रचना की एवं कहा कि " ज्ञान ही शक्ति है । "
Anonymous Quiz
20%
फ्रांसिस बेकन
29%
कालिंगवुड
33%
टाॅयनबी
13%
हीगल
5%
स्पेंगलर
कई दिनों से मै स्वयं इस उलझन में था कि ASI के लोगों पर "प्रत्नकीर्त्तिमपावृणु" शब्द का अर्थ क्या है ? क्योंकि कही भी इसका अर्थ नहीं मिलता।
"प्रत्नकीर्त्तिमपावृणु" संस्कृत का एक शब्द है
प्रत्नकीर्त्तिमपावृणु का संधि-विच्छेद इस प्रकार है:

प्रत्न + कीर्ति + अ + पा + वृणु

* प्रत्न: प्राचीन, पुराना
* कीर्ति: यश, प्रसिद्धि, कीर्ति
* अपा: गर्व,अहम
* वृणु: उजागर करना,स्पष्ट करना

इसलिए, संपूर्ण वाक्य का अर्थ होता है किसी प्राचीन यश या कीर्ति के गर्व को अनावृत या उजागर करना
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𝐇𝐢𝐬𝐭𝐨𝐫𝐲 𝐒𝐭𝐮𝐝𝐲 𝐓𝐢𝐦𝐞 ᵁᵍᶜ ⁿᵉᵗ ᴿᵖˢᶜ ᶠⁱʳˢᵗ ᴳʳᵃᵈᵉ
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21वीं सदी में भारत अतीत की युद्धभूमि है। एक अनोखे भय, सामाजिक विभाजन और अजनबीपन से मानवता फिर घिर गई है। अतीत की खाइयों में आई इस रौनक को कहीं पुनर्जागरण कहा गया है, कहीं विपर्यय। इसका ज्यादा असर कलाओं, इतिहासबोध और मानवीय संवेदनशीलता पर है। इस परिघटना को समझने के लिए न सिर्फ उत्तर-आधुनिक विमर्शों पर पुनर्विचार जरूरी है, बल्कि आधुनिक महा-आख्यानों से भी आगे बढ़कर सोचना समय की मांग है। हमें नए विचारों की जरूरत है। समाज में 'संवेदनशीलता का संकट' आज चरम पर है। यह उत्तर-आधुनिक वैचारिक खोखलेपन की देन है। अब वे क्षमतावान हैं जो उदार न होकर पोस्ट-मॉडर्न हैं। सभी रंगों के उत्तर-आधुनिक विमर्श, जिनमें नव-धार्मिक विमर्श भी हैं, कट्टर पोस्ट-मॉडर्न हैं। इनमें आधुनिकता के प्रमुख तत्वों-बुद्धिपरकता, समावेशी राष्ट्रीयता, लोकतांत्रिक चेतना और प्रगतिशील सोच का ही विरोध नहीं है, मानवीय मूल्यों से भी किनाराकशी है। अपनी दृष्टि के स्तर पर आधुनिक हुए बिना उत्तर-आधुनिक होने का अर्थ समाज को पुरानी कट्टरताओं के अखाड़े में बदलना है। ऐसी घड़ियों में 'बहुलता' की प्रतिष्ठा न्यायपूर्ण सामंजस्य में न होकर निर्बुद्धिपरक अंतर्शत्रुताओं में होती है और एक सांस्कृतिक गृहयुद्ध की स्थिति आ जाती है, जिसकी कोई भी परिणति हो सकती है। इसमें कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं है, यदि 'एलीट बुद्धिजीवी' और 'लोक' आज विपरीत ध्रुव पर हैं। लोकतंत्र के दुरुपयोग और अति-राजनीतिकरण का इससे भिन्न नतीजा नहीं हो सकता कि लोग बड़े पैमाने पर 'आधुनिक प्रिमिटिविज्म' की ओर आकर्षित हों। लोग सोचने लगे हैं कि अब नागरिक समाज नहीं, उनका धार्मिक, जातिवादी या प्रांतीय समुदाय उनके लिए छत है। साहित्य किसी युग में सत्ता के पीछे नहीं चला है। ज्ञान की दुनिया में यह उसकी विशिष्टता है। वस्तुतः साहित्यिक श्रेष्ठता और बौद्धिक स्वतंत्रता के बीच गहरा संबंध है । साहित्य का काम है मनुष्य के दृष्टिकोण, सौंदर्यबोध और भाव जगत का प्रसार करना । उसमें कृत्रिम 'पर’ के लिए जगह नहीं होती । स्थानीयता और अखंडता के बीच अंतर्विरोध नहीं होता। यही वजह है कि साहित्य किसी एक इतिहास का होकर भी उस इतिहास का, एक संस्कृति का होकर भी उस संस्कृति का और किसी खास राजनीति का होकर भी उस राजनीति का अतिक्रमण करता है। उसमें निश्छल असहमति होती है। वह 'पोस्ट-टुथ' जैसी चीजों का जवाब तभी बन पाता है। वह ताकत की भाषाओं द्वारा दवाई गई मनुष्यता की आवाज भी तभी बनता है। साहित्य वफादार मस्तिष्क की जगह विद्रोही मस्तिष्क की रचना है।
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ये रात और ये समय अवश्य ही आपको थोड़ा भारी लग रहा होगा परंतु कल आपके जीवन का सबसे खास दिन होने वाला है कल का सूर्य नई उम्मीद और नई आशाओं के साथ उदय होगा ।
आप के मन में हजार तरह के सवाल आ रहे होंगे कि हमने क्या पढ़ा कितना पढ़ा ये रह गया वो रह गया परंतु यकीन मानिए युद्ध भूमि के समक्ष आकर अपनी पूर्व तैयारी पर विचार करके दुखी होना कायरो का काम है.... स्वयं के आत्म विश्वास को जगाओ अपने मन को दृढ़ करो स्वयं में संकल्प लो जैसे ही युद्ध का शंखनाद होगा मै इस रणक्षेत्र में सबसे उत्तम योद्धा बनकर उभरूंगा ।
याद रखिए सीमित हथियारो का सही उपयोग भी युद्ध में विजय दिल देता है अर्थात कम मेहनत का सही उपयोग भी अक्सर सफलता दिला देता है अतः बिना किसी डर के एग्जाम में जाए मन को कठोर बनाए की चाहे मैने एक दिन भी किताब न उठाई पर मैं इस एग्जाम में सफलता प्राप्त करूंगा ही करूंगा ।
याद रखिए सकारात्मकता जीवन में बेहद जरूरी है अतः उसको सदैव आत्मविश्वास के साथ बनाए रखें । सब का मंगल होगा

कल के लिए आपको ढेरो शुभकामनाएं सभी JRF लेके आना ।
नहीं भी कुछ हुआ तो मत घबराना हम फिर से कर लेंगे क्योंकि कोई हो न हो मै आपके साथ सदैव खड़ा हु
शुभ रात्रि❤️😊

आपका अपना
Dinesh k Prajapat
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Indian History Question Bank - Hindi PDF.pdf
53.4 MB
भारतीय इतिहास-300+ प्रश्न विस्तृत व्याख्या सहित
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निम्न में से गुरू नानक देव जी की मृत्यु किस वर्ष हुई ?
Anonymous Quiz
14%
1574 ई.
12%
1716 ई.
69%
1539 ई.
6%
1582 ई.
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15 वीं शताब्दी का स्वर्ण से निर्मित सबसे प्रसिद्ध सिक्का " वराह " किस साम्राज्य से संबंधित है ?
Anonymous Quiz
16%
चोल साम्राज्य
51%
विजयनगर साम्राज्य
26%
राष्ट्रकूट साम्राज्य
5%
दिल्ली साम्राज्य
2%
अनुत्तरित प्रश्न
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विजयनगर साम्राज्य के संदर्भ में " कुदिरई चेट्टी " शब्द का संबंध निम्नलिखित में से किससे है ?
Anonymous Quiz
23%
कीमती रत्न विक्रेताओं से
10%
सूफी सन्तों से
33%
भू - राजस्व से
14%
दक्कन स्थापत्य से
20%
घोङे के व्यापारियों से
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ब्राह्मण एक हिंदू जाति है जिसका पूरे भारत के इतिहास में उच्च सामाजिक दर्जा और राजनीतिक प्रभाव रहा है। माना जाता है कि वे सबसे अधिक धार्मिक रूप से शुद्ध जाति हैं और पवित्र ज्ञान को पढ़ाने और संरक्षित करने के लिए जिम्मेदार हैं।   
प्रारंभिक इतिहास
ब्राह्मणों का उच्च स्थान उत्तर वैदिक काल से ही चला आ रहा है   
ब्राह्मण संभवतः पुजारी, शिक्षक और शासक थे   
ब्राह्मणों के पुरोहिती कर्तव्य और जाति संभवतः समय के साथ धीरे-धीरे विकसित हुई   
ब्राह्मण पवित्र ग्रंथों के अध्ययन और पाठ के लिए जिम्मेदार थे   
ऐतिहासिक भूमिकाएँ
ब्राह्मण प्रायः शासक सरदारों के सलाहकार और मंत्री होते थे   
ब्राह्मण कृषक, योद्धा, व्यापारी और कारीगर भी थे   
ब्रिटिश उपनिवेशवाद से पहले, ब्रिटिश राज के दौरान और स्वतंत्रता के बाद ब्राह्मण राजनीतिक रूप से प्रभावशाली थे   
उल्लेखनीय ब्राह्मण
जवाहरलाल नेहरू : स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री   
चाणक्य : एक प्राचीन भारतीय बहुश्रुत जिन्होंने मौर्य साम्राज्य की स्थापना में मदद की   
हेमाडपंत : एक देशस्थ ऋग्वेदी ब्राह्मण जिन्होंने सेउना यादव राजवंश में प्रधान मंत्री के रूप में कार्य किया   
अन्य जातियां   
क्षत्रिय : योद्धाओं और राजकुमारों की जाति
वैश्य : किसानों और व्यापारियों की जाति
शूद्र : नौकरों और बटाईदारों की जाति
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