🌿🌿 राष्ट्रवादी इतिहास लेखन से सम्बन्धित प्रमुख इतिहासकार -
आर . जी . भण्डारकर , के .एम. पणिक्कर , रमेशचन्द्र दत्त , के . पी . जायसवाल , ए . सी . रायचौधरी , गोविन्द सखाराम सरदेसाई , राधा कुमुद मुखर्जी , एस . कृष्णस्वामी आयंगर , के . ए . नीलकण्ड शास्त्री , आर . सी . मजूमदार , जदुनाथ सरकार , शफ़ात अहमद खां
🌿🌿 माकर्सवादी परम्परा के इतिहासकार -
डी . डी . कौशाम्बी , रामशरण शर्मा , बी . एन . दत्त , रोमिला थापर , रजनी पाम दत्त , एम . एन . राय , ए . आर . देसाई , के . एन . पणिक्कर , हरबंस मुखिया , बिपिन चन्द्र , इरफ़ान हबीब , रामचन्द्र गुहा
🌿🌿 सबाल्टर्न स्टडीज / उपाश्रयवादी के इतिहासकार -
रामचन्द्र गुहा ( बाद में अलग हो गये ) , स्टीफन हेनिंगहैम , इन्द्राणी चटर्जी , अरविंद्र दास , तनिका सरकार , रंजीत गुहा , डेविड हार्डिमन , शशी थाक , गायत्री चक्रवर्ती , गौतम भद्रा , पार्थ चटर्जी , डेविड अर्नोल्ड , ज्ञानेन्द्र पाण्डेय , शाहिद अमीन , ज्ञान प्रकाश , दीपेश चक्रवर्ती , निरंजना , एन . के . चन्दा , एडवर्ड शहीद
आर . जी . भण्डारकर , के .एम. पणिक्कर , रमेशचन्द्र दत्त , के . पी . जायसवाल , ए . सी . रायचौधरी , गोविन्द सखाराम सरदेसाई , राधा कुमुद मुखर्जी , एस . कृष्णस्वामी आयंगर , के . ए . नीलकण्ड शास्त्री , आर . सी . मजूमदार , जदुनाथ सरकार , शफ़ात अहमद खां
🌿🌿 माकर्सवादी परम्परा के इतिहासकार -
डी . डी . कौशाम्बी , रामशरण शर्मा , बी . एन . दत्त , रोमिला थापर , रजनी पाम दत्त , एम . एन . राय , ए . आर . देसाई , के . एन . पणिक्कर , हरबंस मुखिया , बिपिन चन्द्र , इरफ़ान हबीब , रामचन्द्र गुहा
🌿🌿 सबाल्टर्न स्टडीज / उपाश्रयवादी के इतिहासकार -
रामचन्द्र गुहा ( बाद में अलग हो गये ) , स्टीफन हेनिंगहैम , इन्द्राणी चटर्जी , अरविंद्र दास , तनिका सरकार , रंजीत गुहा , डेविड हार्डिमन , शशी थाक , गायत्री चक्रवर्ती , गौतम भद्रा , पार्थ चटर्जी , डेविड अर्नोल्ड , ज्ञानेन्द्र पाण्डेय , शाहिद अमीन , ज्ञान प्रकाश , दीपेश चक्रवर्ती , निरंजना , एन . के . चन्दा , एडवर्ड शहीद
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किसने कहा ," इतिहास न केवल ज्ञान की एक विशेष शाखा है , बल्कि किसी विशेष प्रणाली और अन्य विषयों में ज्ञान की पद्धति है ?
Anonymous Quiz
10%
थाॅमस फुलर
39%
ई. एच. कार
22%
ऐक्टन
22%
काॅलिंगवुड
7%
टाॅयनबी
👍6
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कुदरत का सबसे बेहतरीन उपहार है पिताजी का हमारे जीवन में होना❤️
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ओसवाल्ड स्पेंगलर का इतिहास का चक्रीय सिद्धांत एक सिद्धांत है कि सभ्यताएं ऋतुओं के समान एक प्राकृतिक जीवन चक्र से गुजरती हैं, जिसमें जन्म, विकास, गिरावट और मृत्यु शामिल हैं :
चरणों
किसी सभ्यता के जीवन चक्र के चरणों में पूर्वसंस्कृति, प्रारंभिक संस्कृतियाँ, परवर्ती संस्कृतियाँ और सभ्यता शामिल हैं।
नमूना
सिद्धांत यह सुझाव देता है कि सभ्यताओं का उत्थान और पतन एक पूर्वनिर्धारित पैटर्न में होता है।
आलोचना
स्पेंगलर का सिद्धांत निरंतर प्रगति की धारणा की आलोचना करता है तथा तर्क देता है कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विकास अपरिहार्य चक्रों से बंधे होते हैं।
स्पेंगलर के सिद्धांत को उनकी पुस्तक द डिक्लाइन ऑफ़ द वेस्ट में विस्तार से बताया गया है। उनका मानना था कि हर समाज जन्म लेता है, परिपक्व होता है, क्षय होता है और अंततः मर जाता है। उदाहरण के लिए, उनका मानना था कि रोमन साम्राज्य शक्तिशाली हुआ और फिर धीरे-धीरे ढह गया, और ब्रिटिश साम्राज्य मजबूत हुआ और फिर बिगड़ गया।
स्पेंगलर का सिद्धांत एकरेखीय सिद्धांत का ही एक रूप है। अन्य इतिहासकारों और समाजशास्त्रियों में जिन्होंने सामाजिक परिवर्तन के चक्रीय सिद्धांत विकसित किए, उनमें अर्नोल्ड जे. टॉयनबी शामिल हैं।
चरणों
किसी सभ्यता के जीवन चक्र के चरणों में पूर्वसंस्कृति, प्रारंभिक संस्कृतियाँ, परवर्ती संस्कृतियाँ और सभ्यता शामिल हैं।
नमूना
सिद्धांत यह सुझाव देता है कि सभ्यताओं का उत्थान और पतन एक पूर्वनिर्धारित पैटर्न में होता है।
आलोचना
स्पेंगलर का सिद्धांत निरंतर प्रगति की धारणा की आलोचना करता है तथा तर्क देता है कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विकास अपरिहार्य चक्रों से बंधे होते हैं।
स्पेंगलर के सिद्धांत को उनकी पुस्तक द डिक्लाइन ऑफ़ द वेस्ट में विस्तार से बताया गया है। उनका मानना था कि हर समाज जन्म लेता है, परिपक्व होता है, क्षय होता है और अंततः मर जाता है। उदाहरण के लिए, उनका मानना था कि रोमन साम्राज्य शक्तिशाली हुआ और फिर धीरे-धीरे ढह गया, और ब्रिटिश साम्राज्य मजबूत हुआ और फिर बिगड़ गया।
स्पेंगलर का सिद्धांत एकरेखीय सिद्धांत का ही एक रूप है। अन्य इतिहासकारों और समाजशास्त्रियों में जिन्होंने सामाजिक परिवर्तन के चक्रीय सिद्धांत विकसित किए, उनमें अर्नोल्ड जे. टॉयनबी शामिल हैं।
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कार्ल मार्क्स का ऐतिहासिक भौतिकवाद या वैज्ञानिक भौतिकवाद का सिद्धांत एक मार्क्सवादी दर्शन है जो भौतिक स्थितियों के आधार पर मानव इतिहास और विकास की व्याख्या करता है :
सामग्री की स्थिति
मार्क्स का मानना था कि मानवीय क्रियाएं उस दुनिया की भौतिक स्थितियों पर निर्भर करती हैं जिसमें वे रहते हैं। उनका मानना था कि सबसे महत्वपूर्ण मानवीय गतिविधि श्रम के माध्यम से उत्पादन है।
आर्थिक विकास
मार्क्स का मानना था कि समाज का आर्थिक विकास ही मानव इतिहास का अंतिम कारण है। उनका मानना था कि इतिहास के पाठ्यक्रम को उत्पादन और विनिमय के तरीकों में परिवर्तन के द्वारा समझाया जा सकता है।
सामाजिक संस्थाएं
मार्क्स का मानना था कि विचार और सामाजिक संस्थाएं आर्थिक आधार पर स्थापित एक अधिरचना के रूप में विकसित होती हैं। उनका मानना था कि मानव समाज की सभी संस्थाएं, जैसे सरकार और धर्म, आर्थिक गतिविधि का परिणाम हैं।
वर्ग संघर्ष
मार्क्स का मानना था कि मानव का उत्पादक श्रम वर्ग संघर्ष को जन्म देता है। उनका मानना था कि मानव इतिहास की दिशा एक साम्यवादी समाज की ओर इशारा करती है जहां श्रम विभाजन और वर्ग संघर्ष समाप्त हो जाएगा।
द्वंद्वात्मक भौतिकवाद
मार्क्स और उनके सहयोगी फ्रेडरिक एंगेल्स के द्वंद्वात्मक भौतिकवाद के दर्शन का मानना है कि सभी चीजें भौतिक विरोधाभासों के माध्यम से विकसित होती हैं।
सामग्री की स्थिति
मार्क्स का मानना था कि मानवीय क्रियाएं उस दुनिया की भौतिक स्थितियों पर निर्भर करती हैं जिसमें वे रहते हैं। उनका मानना था कि सबसे महत्वपूर्ण मानवीय गतिविधि श्रम के माध्यम से उत्पादन है।
आर्थिक विकास
मार्क्स का मानना था कि समाज का आर्थिक विकास ही मानव इतिहास का अंतिम कारण है। उनका मानना था कि इतिहास के पाठ्यक्रम को उत्पादन और विनिमय के तरीकों में परिवर्तन के द्वारा समझाया जा सकता है।
सामाजिक संस्थाएं
मार्क्स का मानना था कि विचार और सामाजिक संस्थाएं आर्थिक आधार पर स्थापित एक अधिरचना के रूप में विकसित होती हैं। उनका मानना था कि मानव समाज की सभी संस्थाएं, जैसे सरकार और धर्म, आर्थिक गतिविधि का परिणाम हैं।
वर्ग संघर्ष
मार्क्स का मानना था कि मानव का उत्पादक श्रम वर्ग संघर्ष को जन्म देता है। उनका मानना था कि मानव इतिहास की दिशा एक साम्यवादी समाज की ओर इशारा करती है जहां श्रम विभाजन और वर्ग संघर्ष समाप्त हो जाएगा।
द्वंद्वात्मक भौतिकवाद
मार्क्स और उनके सहयोगी फ्रेडरिक एंगेल्स के द्वंद्वात्मक भौतिकवाद के दर्शन का मानना है कि सभी चीजें भौतिक विरोधाभासों के माध्यम से विकसित होती हैं।
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निम्नलिखित किस विचारक ने " द न्यू इंस्टूमेंट " की रचना की एवं कहा कि " ज्ञान ही शक्ति है । "
Anonymous Quiz
20%
फ्रांसिस बेकन
29%
कालिंगवुड
33%
टाॅयनबी
13%
हीगल
5%
स्पेंगलर
कई दिनों से मै स्वयं इस उलझन में था कि ASI के लोगों पर "प्रत्नकीर्त्तिमपावृणु" शब्द का अर्थ क्या है ? क्योंकि कही भी इसका अर्थ नहीं मिलता।
"प्रत्नकीर्त्तिमपावृणु" संस्कृत का एक शब्द है
प्रत्नकीर्त्तिमपावृणु का संधि-विच्छेद इस प्रकार है:
प्रत्न + कीर्ति + अ + पा + वृणु
* प्रत्न: प्राचीन, पुराना
* कीर्ति: यश, प्रसिद्धि, कीर्ति
* अपा: गर्व,अहम
* वृणु: उजागर करना,स्पष्ट करना
इसलिए, संपूर्ण वाक्य का अर्थ होता है किसी प्राचीन यश या कीर्ति के गर्व को अनावृत या उजागर करना
"प्रत्नकीर्त्तिमपावृणु" संस्कृत का एक शब्द है
प्रत्नकीर्त्तिमपावृणु का संधि-विच्छेद इस प्रकार है:
प्रत्न + कीर्ति + अ + पा + वृणु
* प्रत्न: प्राचीन, पुराना
* कीर्ति: यश, प्रसिद्धि, कीर्ति
* अपा: गर्व,अहम
* वृणु: उजागर करना,स्पष्ट करना
इसलिए, संपूर्ण वाक्य का अर्थ होता है किसी प्राचीन यश या कीर्ति के गर्व को अनावृत या उजागर करना
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