इनमें से किस शासक ने " सिजदा प्रथा " को समाप्त कर उसके स्थान पर " चहार - तस्लीम " की प्रथा प्रारम्भ की ?
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6%
हुमायूं
25%
औरंगज़ेब
22%
अकबर
38%
शाहजहां
9%
जहांगीर
👍3👌2
निम्न में से मुगल बादशाह हुमायूं ने किस स्थल का नाम " जन्नताबाद " रखा था ?
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8%
चुनार
30%
गौङ
30%
कालिंजर
27%
जौनपुर
5%
उज्जैन
👍3🔥2
फिरोज़शाह दिल्ली सल्तनत का प्रथम सुल्तान था , जिसने " हक - ए - शर्ब " नामक सिंचाई कर लगाया था , जो कुल उपज का कितना प्रतिशत भाग था ?
Anonymous Quiz
8%
1/8
31%
1/6
51%
1/10
6%
2/5
3%
3/4
👍6👏3
निम्न में से " द वेब ऑफ इण्डियन लाइफ " नामक पुस्तक किसकी रचना है ?
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10%
स्वामी विवेकानंद
17%
जवाहर लाल नेहरू
51%
सिस्टर निवेदिता
17%
श्री अरबिंदो
5%
चिदम्बरम पिल्लई
🎉2❤1
Forwarded from ✍ इतिहास की जिज्ञासा
देवगढ़ का दशावतार मंदिर - यह मंदिर उत्तर प्रदेश के ललितपुर में बेतवा नदी के तट पर स्थित है
यह मंदिर पंचायतन शैली में बना हुआ है
देवगढ़ का दशावतार मंदिर गुप्त काल का पहला शिखर युक्त मंदिर माना जाता है
यह मंदिर पंचायतन शैली में बना हुआ है
देवगढ़ का दशावतार मंदिर गुप्त काल का पहला शिखर युक्त मंदिर माना जाता है
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Forwarded from Priyanka Patra
द वेब ऑफ़ इंडियन लाइफ़ किताब सिस्टर निवेदिता ने लिखी थी. यह किताब निबंधों का एक संग्रह है और साल 1904 में पहली बार प्रकाशित हुई थी. इस किताब की भूमिका रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखी थी.
इस किताब में भारतीय समाज, संस्कृति, और आध्यात्मिकता का विश्लेषण किया गया है. इस किताब में भारतीय जीवन के कई पहलुओं पर चर्चा की गई है, जैसे कि:
जाति व्यवस्था
महिलाओं की भूमिका
शिक्षा का महत्व
ब्रिटिश उपनिवेशवाद का असर
हिंदू, बौद्ध, और जैन धर्म की शिक्षाएं
इस किताब में सिस्टर निवेदिता ने हिंदू धर्म और संस्कृति का विश्लेषण किया है. इस किताब को पढ़ने के बाद भी सदी गुज़र जाने के बाद भी इससे प्रेरणा मिलती है.
इस किताब में भारतीय समाज, संस्कृति, और आध्यात्मिकता का विश्लेषण किया गया है. इस किताब में भारतीय जीवन के कई पहलुओं पर चर्चा की गई है, जैसे कि:
जाति व्यवस्था
महिलाओं की भूमिका
शिक्षा का महत्व
ब्रिटिश उपनिवेशवाद का असर
हिंदू, बौद्ध, और जैन धर्म की शिक्षाएं
इस किताब में सिस्टर निवेदिता ने हिंदू धर्म और संस्कृति का विश्लेषण किया है. इस किताब को पढ़ने के बाद भी सदी गुज़र जाने के बाद भी इससे प्रेरणा मिलती है.
👌5👍3
" इंडियन ऱिफाॅर्म एसोसिएशन " की स्थापना केशव चंद्र सेन के द्वारा किस वर्ष की गई थी ?
Anonymous Quiz
14%
1868
22%
1870
39%
1872
16%
1875
9%
1878
🔥5
निम्न में से " भवानी मंदिर " पुस्तक किस वर्ष प्रकाशित हुई थी ?
Anonymous Quiz
7%
1802
42%
1905
36%
1890
12%
1915
2%
1920
👌6👍1
दक्षिण भारत में चिश्ती सिलसिला की नींव रखने का श्रेय शेख बुरहानुद्दीन गरीब को दिया जाता है. वे निज़ामुद्दीन औलिया के शिष्य थे. उन्होंने दौलताबाद को अपने प्रचार-प्रसार का केंद्र बनाया था.
चिश्ती सिलसिला की स्थापना भारत में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने की थी:
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का जन्म 536 एएच (1141 ई.) के आस-पास पूर्वी फ़ारस के सिलिस्तान प्रांत में हुआ था.
वे एक सैय्यद परिवार से थे और खुद को मुहम्मद का वंशज बताते थे.
वे 1192 ईस्वी में मुहम्मद गोरी की सेना के साथ भारत आए थे.
उन्होंने अजमेर को अपना केंद्र बनाया था.
13वीं शताब्दी तक यह भारत में सबसे लोकप्रिय इस्लामी रहस्यवादी संप्रदायों में से एक बन गया.
क़ादिरिय्या तरीक़ा की स्थापना अब्दुल क़ादिर जीलानी ने की थी. यह दक्षिण भारत के मुसलमानों में लोकप्रिय है.
चिश्ती सिलसिला की स्थापना भारत में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने की थी:
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का जन्म 536 एएच (1141 ई.) के आस-पास पूर्वी फ़ारस के सिलिस्तान प्रांत में हुआ था.
वे एक सैय्यद परिवार से थे और खुद को मुहम्मद का वंशज बताते थे.
वे 1192 ईस्वी में मुहम्मद गोरी की सेना के साथ भारत आए थे.
उन्होंने अजमेर को अपना केंद्र बनाया था.
13वीं शताब्दी तक यह भारत में सबसे लोकप्रिय इस्लामी रहस्यवादी संप्रदायों में से एक बन गया.
क़ादिरिय्या तरीक़ा की स्थापना अब्दुल क़ादिर जीलानी ने की थी. यह दक्षिण भारत के मुसलमानों में लोकप्रिय है.
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मराठों का मैग्नाकार्टा, रानी की उद्घोषणा (1858) को कहा जाता है. इस उद्घोषणा ने भारत में कंपनी शासन और ब्रिटिश क्राउन के बीच संबंधों में बदलाव किया था. इस उद्घोषणा के कुछ प्रमुख बिंदु ये रहे:
सरकारी सेवाओं में जाति, पंथ, और रंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा.
भारत में ब्रिटिश क्षेत्रों का विस्तार नहीं होगा.
द ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा की गई सभी संधियों और समझौतों को ब्रिटिश क्राउन मान्यता देगा.
सरकारी सेवाओं में जाति, पंथ, और रंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा.
भारत में ब्रिटिश क्षेत्रों का विस्तार नहीं होगा.
द ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा की गई सभी संधियों और समझौतों को ब्रिटिश क्राउन मान्यता देगा.
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साइमन कमीशन के अध्यक्ष सर जॉन साइमन ब्रिटेन की उदारवादी पार्टी से संबंधित थे. साइमन कमीशन, ब्रिटिश सरकार द्वारा नियुक्त एक समूह था. इसकी स्थापना नवंबर, 1927 में हुई थी. इस आयोग को भारतीय सांविधिक आयोग के नाम से भी जाना जाता था.
साइमन कमीशन से जुड़ी कुछ और बातेंः
साइमन कमीशन के बारे में कुछ खास बातेंः
साइमन कमीशन के सभी सदस्य अंग्रेज़ थे और इसमें कोई भारतीय सदस्य शामिल नहीं था.
साइमन कमीशन को भारतीय संविधान के कामकाज पर रिपोर्ट देने के लिए नियुक्त किया गया था.
साइमन कमीशन को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अन्य भारतीय राजनीतिक दलों ने विरोध किया था.
साइमन कमीशन के आगमन के समय लॉर्ड इरविन भारत के वायसराय थे.
साइमन कमीशन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के दौरान लाला लाजपत राय शहीद हो गए.
साइमन कमीशन से जुड़ी कुछ और बातेंः
साइमन कमीशन के बारे में कुछ खास बातेंः
साइमन कमीशन के सभी सदस्य अंग्रेज़ थे और इसमें कोई भारतीय सदस्य शामिल नहीं था.
साइमन कमीशन को भारतीय संविधान के कामकाज पर रिपोर्ट देने के लिए नियुक्त किया गया था.
साइमन कमीशन को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अन्य भारतीय राजनीतिक दलों ने विरोध किया था.
साइमन कमीशन के आगमन के समय लॉर्ड इरविन भारत के वायसराय थे.
साइमन कमीशन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के दौरान लाला लाजपत राय शहीद हो गए.
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चौसठ योगिनी मंदिर के निर्माता के बारे में अलग-अलग जानकारी है:
मितावली के चौसठ योगिनी मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण कच्छपघाट राजवंश के शासनकाल में 9वीं शताब्दी के अंत में हुआ था. किले के अंदर मौजूद शिलालेखों के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण महाराज देवपाल ने करवाया था.
भेड़ाघाट के चौसठ योगिनी मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी के शुरुआत में त्रिपुरी के कलचुरी वंश के राजा युवराज द्वितीय ने करवाया था. उनका शासनकाल 975-1025 ईस्वी था.
हीरापुर के चौसठ योगिनी मंदिर की स्थापना 9वीं शताब्दी में भौम वंश की रानी हीरादेवी ने की थी.
खजुराहो के चौसठ योगिनी मंदिर का निर्माण चंदेलों या उनके सामंतों ने करवाया था. यह मंदिर चंदेल कला की पहली कृति है.
भारत में चार चौसठ योगिनी मंदिर हैं, जिनमें से दो ओडिशा में और दो मध्य प्रदेश में हैं. मुरैना ज़िले के मितावली गांव में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक घोषित किया है.
मितावली के चौसठ योगिनी मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण कच्छपघाट राजवंश के शासनकाल में 9वीं शताब्दी के अंत में हुआ था. किले के अंदर मौजूद शिलालेखों के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण महाराज देवपाल ने करवाया था.
भेड़ाघाट के चौसठ योगिनी मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी के शुरुआत में त्रिपुरी के कलचुरी वंश के राजा युवराज द्वितीय ने करवाया था. उनका शासनकाल 975-1025 ईस्वी था.
हीरापुर के चौसठ योगिनी मंदिर की स्थापना 9वीं शताब्दी में भौम वंश की रानी हीरादेवी ने की थी.
खजुराहो के चौसठ योगिनी मंदिर का निर्माण चंदेलों या उनके सामंतों ने करवाया था. यह मंदिर चंदेल कला की पहली कृति है.
भारत में चार चौसठ योगिनी मंदिर हैं, जिनमें से दो ओडिशा में और दो मध्य प्रदेश में हैं. मुरैना ज़िले के मितावली गांव में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक घोषित किया है.
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