𝐇𝐢𝐬𝐭𝐨𝐫𝐲 𝐒𝐭𝐮𝐝𝐲 𝐓𝐢𝐦𝐞 ᵁᵍᶜ ⁿᵉᵗ ᴿᵖˢᶜ ᶠⁱʳˢᵗ ᴳʳᵃᵈᵉ
पुस्तक ( मलयालम भाषा में )
🌿 माधव पाणिक्कर ..... भगवत् गीता
🌿 शंकर पाणिक्कर ..... भारतमाला , श्रीकृष्ण विजय
🌿 राम पाणिक्कर ..... रामायण , महाभारत , महाभागवत , शिवरात्रि महात्मयम
🌿 चेरूस्सेरी ..... कृष्णगाथा
🌿 माधव पाणिक्कर ..... भगवत् गीता
🌿 शंकर पाणिक्कर ..... भारतमाला , श्रीकृष्ण विजय
🌿 राम पाणिक्कर ..... रामायण , महाभारत , महाभागवत , शिवरात्रि महात्मयम
🌿 चेरूस्सेरी ..... कृष्णगाथा
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निमनलिखित में से कौन संगमकालीन पांड्यों के प्रमुख एवं पत्तन थे ?
A.) कोरकै B.) मदुरै C.) पुहार D.) उरैयूर
A.) कोरकै B.) मदुरै C.) पुहार D.) उरैयूर
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18%
1.) A और B
23%
2.) B और D
33%
3.) A , B और C
26%
4.) B , C और D
👍4
निम्नलिखित में से किस पुस्तक में अशोक को शिव का उपासक बताया गया है ?
Anonymous Quiz
15%
ललितविस्तार
24%
मुद्राराक्षस
15%
नीतिसार
38%
राजतरंगिणी
8%
महावंश
🔥1😱1
निम्न में से पुराणों में " द्विजर्षभ " किसे कहा गया है ?
Anonymous Quiz
25%
चंद्रगुप्त मौर्य
20%
अशोक
37%
चाणक्य
11%
पंतजलि
6%
समुद्रगुप्त
🔥3
कौटिल्य के अर्थशास्त्र में उल्लिखित " संस्था " शब्द का सम्बन्ध है ?
Anonymous Quiz
17%
वित्तीय प्रशासन से
58%
गुप्तचर व्यवस्था से
20%
न्याय प्रशासन से
5%
कर व्यवस्था से
निम्नलिखित में से मौर्य प्रशासन में " सन्निधता " किस विभाग का प्रभारी था ?
Anonymous Quiz
59%
कोषाध्यक्ष
17%
युद्ध विभाग का मंत्री
15%
सेना का संचालक
6%
वन विभाग का प्रधान
3%
दुर्गों का प्रबंधक
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Forwarded from पण्डित पुष्यमित्र शुंग
इतिहास दर्शन कथन
हम शायद एक ऐसे युग की दहलीज पर खड़े हैं जिसमें दुनिया के लिए इतिहास उतना ही महत्वपूर्ण होगा जितना कि 1600 और 1900 के बीच प्राकृतिक विज्ञान था
आर जी कोलिंगवुड
ऐतिहासिक तथ्य एक प्रकार का अनुमान होता है
एलन बुलाक
एक तथ्य साधारण सा स्वयं व्यवस्थित सिद्धांत होता है जिस की विश्वसनीयता के विषय में गंभीर संदेह ना हो।
प्रो वाल्श
सभी इतिहास विचारों का इतिहास है, अतएव तथ्य कुछ नहीं होते अपितु सब कुछ उनकी व्याख्या ही होती हैं।
आर जी कालिंगवुड़
इतिहासकार का इतिहास ही उसकी व्याख्या होती है।
जी आर एल्टन
मूल्यों के संदर्भ के बिना कारण कार्य संबंधों की खोज असंभव है, कारणों की खोज के पीछे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मूल्यों की खोज आवश्यक होती है।
मानेके
https://t.me/sumitpandey219
हम शायद एक ऐसे युग की दहलीज पर खड़े हैं जिसमें दुनिया के लिए इतिहास उतना ही महत्वपूर्ण होगा जितना कि 1600 और 1900 के बीच प्राकृतिक विज्ञान था
आर जी कोलिंगवुड
ऐतिहासिक तथ्य एक प्रकार का अनुमान होता है
एलन बुलाक
एक तथ्य साधारण सा स्वयं व्यवस्थित सिद्धांत होता है जिस की विश्वसनीयता के विषय में गंभीर संदेह ना हो।
प्रो वाल्श
सभी इतिहास विचारों का इतिहास है, अतएव तथ्य कुछ नहीं होते अपितु सब कुछ उनकी व्याख्या ही होती हैं।
आर जी कालिंगवुड़
इतिहासकार का इतिहास ही उसकी व्याख्या होती है।
जी आर एल्टन
मूल्यों के संदर्भ के बिना कारण कार्य संबंधों की खोज असंभव है, कारणों की खोज के पीछे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मूल्यों की खोज आवश्यक होती है।
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इतिहास ज्ञान गंगा
💐 PGT/TGT/UGC NET/UPSC इतिहास की तैयारी करने वाले सभी चैनल को ज्वाइन करे।
💐इतिहास विषय के पिछले वर्षों में आए प्रश्न शेयर किए जाएंगे।
owner – @Sumit219
https://t.me/+bqS2kyNkG6I4ZWVl
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✍"
हिन्दू समाज एक ऐसी मीनार के समान है जिसमें अनेक मंजिले है;पर उनमें प्रवेश के लिए कोई द्वार नहीं है। व्यक्ति उसी मंजिल में दम तोड़ेगा जिसमें वह पैदा हुआ।"
उपरोक्त कथन है?
हिन्दू समाज एक ऐसी मीनार के समान है जिसमें अनेक मंजिले है;पर उनमें प्रवेश के लिए कोई द्वार नहीं है। व्यक्ति उसी मंजिल में दम तोड़ेगा जिसमें वह पैदा हुआ।"
उपरोक्त कथन है?
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ऋग्वेद की शब्दावली 🌿🌿 गाविष्टी -युद्ध ,गोमत - धनी व्यक्ति , गोधूलि -संध्या/समय की माप , संगव -प्रातःकाल, गवेषणा -गायों की खोज, गोजित -जन का नायक, गवयतु -दूरी की माप ☘️☘️
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भगवान राम और पुना ताम्र पत्र
लेख में प्रभावती स्वयं को अभय कुलंकार तथा भगवत भक्ता कहती है। वाकाटक नरेश शिवभक्त था जबकि प्रभावती वैष्णव धर्मानुयायी थी। लेख में कहा गया है कि महारानी प्रभावती रामगिरि पर प्रतिष्ठापित, जिसकी पहचान वर्तमान रामटेक से की गई है, रामचन्द्रजी की पादुका की बड़ी भक्त थी। इसी कारण से उसने उङ्गुण नामक ग्राम भगवद् भक्त आचार्य चनालस्वामी को दान में प्रदान किया था। यह वाकाटक महारानी द्वारा जारी की गई भूमिदान सनद नन्दिवर्धन से अभिभूत हुई है। नन्दिवर्धन की पहचान संतोषजनक न की जा सकी है जोकि वाकाटकों की राजधानी थी और जहाँ से प्रभावती गुप्ता अपने पुत्र दिवाकरसेन के बाल्यकाल में उसकी ओर से शासन भार सम्भालती थी। यह ग्रामदान भगवत भक्ताचार्य चनालस्वामी के पक्ष में अग्रहार दान की प्रचलित शर्तों के अनुसार किया गया था। ग्राम, जोकि आचार्य को दानस्वरूप दिया गया था, का नाम युंगुण या गंगुणग्राम था जोकि सुप्रतिष्ठित आहार विषय में स्थित था। यह सनद शासन वर्ष 13 में दिनांकित है जोकि सम्भवतः रुद्रसेन के शासनवर्ष को सूचित करती है।
Dinesh k Prajapat
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निम्न में से मौर्य काल में " एग्रोनोमोई " नामक अधिकारी का क्या कार्य था ?
Anonymous Quiz
26%
नगर की सुरक्षा
38%
सङक निर्माण
23%
राजस्व प्रबंधन
5%
जासूसी
7%
चारागाह प्रभारी
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