पूर्व मध्यकालीन किसी साहित्यिक ग्रंथ से ज्ञात होता है कि तत्कालीन समय में धान की 50 से भी अधिक किस्मों की खेती होती थी ?
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17%
गरूङ पुराण
24%
शून्य पुराण
27%
ऋग्वेद
18%
मुद्राराक्षस
14%
दिव्यावदान
" किरातार्जुनीयम् " की कथावस्तु का आधारस्त्रोत है ?
Anonymous Quiz
11%
रामायण
51%
महाभारत
23%
आदि ग्रंथ
8%
दर्शन
7%
उपनिषद
👍6👏2
कौनसा स्थल है जहा से कंकाल तो मिले है लेकिन कोई भी कब्रिस्तान नहीं मिला है ?
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14%
लोथल
30%
रोजदी
23%
रोपड़
32%
मोहनजोदरो
👍4❤1
History.pdf
155.4 KB
❤3👍3
निम्नलिखित में से कौन - सी पुस्तक नाथमुनि की है ?
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15%
सिद्धित्रय
34%
न्यायतत्व
24%
श्रीभाष्य
19%
तत्त्वरत्नाकर
8%
चण्डीशत काव्य
🌿🌿 राष्ट्रवादी इतिहास लेखन से सम्बन्धित इतिहासकार -
🌿 रमेश चन्द्र दत्त
🌿 के .एम .पणिक्कर
🌿 आर .जी . भण्डाकर
🌿 के .पी .जायसवाल
🌿ए .सी . रायचौधरी
🌿गोविन्द सखाराम देसाई
🌿राधा कुमुद मुखर्जी
🌿के .एल .नीलकण्ड शास्त्री
🌿 एस .कृष्ण स्वामी आयंगर
🌿आर .सी .मजूमदार
🌿जदुनाथ सरकार
🌿 शफात अहमद खां
🌿 रमेश चन्द्र दत्त
🌿 के .एम .पणिक्कर
🌿 आर .जी . भण्डाकर
🌿 के .पी .जायसवाल
🌿ए .सी . रायचौधरी
🌿गोविन्द सखाराम देसाई
🌿राधा कुमुद मुखर्जी
🌿के .एल .नीलकण्ड शास्त्री
🌿 एस .कृष्ण स्वामी आयंगर
🌿आर .सी .मजूमदार
🌿जदुनाथ सरकार
🌿 शफात अहमद खां
👍9
निम्नलिखित में से कौन - से ग्रंथ तलाक की अनुमति देते है ?
A.) नारद स्मृति B.) मानव धर्मशास्त्र C.) अर्थशास्त्र D.) याज्ञवल्क्य स्मृति
A.) नारद स्मृति B.) मानव धर्मशास्त्र C.) अर्थशास्त्र D.) याज्ञवल्क्य स्मृति
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13%
1.) केवल A और B
31%
2.) केवल B और D
25%
C.) केवल C
32%
D.) उपरोक्त सभी
गुप्तकालीन " बोवर पाण्डुलिपि " सम्बन्धित है ?
Anonymous Quiz
8%
संगीत से
31%
नाट्यशास्त्र से
39%
आयुर्वेद से
9%
गणित से
12%
खगोलशास्त्र से
👍5❤4
निम्नलिखित में से किन धार्मिक पुस्तकों में बलि तथा भाग शब्दों का प्रयोग भूमि कर के लिए किया गया है ?
Anonymous Quiz
6%
जैन साहित्य
21%
बौद्ध साहित्य
47%
शतपथ ब्राह्मण
20%
ऐतरेय ब्राह्मण
6%
इनमें से एक से अधिक
👍4
भरोसा रख तू खुद पर
खुदा भी मेहरबान होगा,
जीत की महफ़िल मिलेगी
हर जगह तेरा नाम होगा।
किस्मत भी तेरे आगे
इज्ज़त से सर झुकाएगी,
तेरे कोशिशों के आगे वो
अपने पैंतरे ना आजमाएगी।
हताश होकर ना बैठना कभी
बस लक्ष्य पर निगाहें रखना,
धनुष की प्रत्यंचा पर तुम
बाण को सजाए रखना।
बार बार कोशिशों से तो
चिड़ियां भी दाना चुगे,
हम तो ठहरे इंसान यारों
फिर जीत क्यों हमको ना मिले।
मेहनत के बाद सफलता का
अंदाज़ भी कुछ अलग होगा,
अखबारों के पन्नों में
बस तेरा ही अल्फ़ाज़ होगा।
भरोसा रख तू खुद पर
खुदा भी मेहरबान होगा,
जीत की महफ़िल मिलेगी
हर जगह तेरा नाम होगा।
खुदा भी मेहरबान होगा,
जीत की महफ़िल मिलेगी
हर जगह तेरा नाम होगा।
किस्मत भी तेरे आगे
इज्ज़त से सर झुकाएगी,
तेरे कोशिशों के आगे वो
अपने पैंतरे ना आजमाएगी।
हताश होकर ना बैठना कभी
बस लक्ष्य पर निगाहें रखना,
धनुष की प्रत्यंचा पर तुम
बाण को सजाए रखना।
बार बार कोशिशों से तो
चिड़ियां भी दाना चुगे,
हम तो ठहरे इंसान यारों
फिर जीत क्यों हमको ना मिले।
मेहनत के बाद सफलता का
अंदाज़ भी कुछ अलग होगा,
अखबारों के पन्नों में
बस तेरा ही अल्फ़ाज़ होगा।
भरोसा रख तू खुद पर
खुदा भी मेहरबान होगा,
जीत की महफ़िल मिलेगी
हर जगह तेरा नाम होगा।
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Forwarded from गुरुकुल इतिहास सूरतगढ़ History for Rpsc 🇮🇳
*हेलीबरी व्यवस्था*
1805 ई. में इंग्लैंड में हेलीबरी नामक काॅलेज स्थापित किया गया था।
इस काॅलेज में 'भारतीय सिविल सर्विस' (भारतीय प्रशासनिक सेवा) में नौकरी के लिए मनोनीत युवकों को प्रशिक्षित किया जाता था,प्रत्येक प्रशिक्षार्थी को इसमें दो वर्ष का प्रशिक्षण दिया जाता था, जहाँ उसे सामान्य शिक्षा, भारतीय भाषा, क़ानून एवं इतिहास का ज्ञान कराया जाता था।
प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद उसे भारतीय सिविल सर्विस में नौकरी पर भेज दिया जाता था।
इस कॉलेज में केवल मनोनीत युवक ही प्रशिक्षण के लिए भेजे जाते थे, अत: उत्तीर्ण या अनुत्तीर्ण जैसा तो कोई प्रश्न ही नहीं था।
इसलिए ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन ने इस हेलीबरी व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की।
इसके पश्चात् 1853 के एक्ट में भारतीय सिविल सर्विसेज के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन का प्रावधान किया गया और 1855 ई. में भारतीय सिविल सर्विस में प्रतियोगिता परीक्षा आरम्भ हो जाने पर उक्त कॉलेज समाप्त कर दिया गया था।
1805 ई. में इंग्लैंड में हेलीबरी नामक काॅलेज स्थापित किया गया था।
इस काॅलेज में 'भारतीय सिविल सर्विस' (भारतीय प्रशासनिक सेवा) में नौकरी के लिए मनोनीत युवकों को प्रशिक्षित किया जाता था,प्रत्येक प्रशिक्षार्थी को इसमें दो वर्ष का प्रशिक्षण दिया जाता था, जहाँ उसे सामान्य शिक्षा, भारतीय भाषा, क़ानून एवं इतिहास का ज्ञान कराया जाता था।
प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद उसे भारतीय सिविल सर्विस में नौकरी पर भेज दिया जाता था।
इस कॉलेज में केवल मनोनीत युवक ही प्रशिक्षण के लिए भेजे जाते थे, अत: उत्तीर्ण या अनुत्तीर्ण जैसा तो कोई प्रश्न ही नहीं था।
इसलिए ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन ने इस हेलीबरी व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की।
इसके पश्चात् 1853 के एक्ट में भारतीय सिविल सर्विसेज के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन का प्रावधान किया गया और 1855 ई. में भारतीय सिविल सर्विस में प्रतियोगिता परीक्षा आरम्भ हो जाने पर उक्त कॉलेज समाप्त कर दिया गया था।
निम्नलिखित में से किस हङप्पा सभ्यता स्थल से मनके बनाने के कारखाने के अवशेष नही मिले है -
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8%
लोथल
40%
चन्हूदङो
30%
बगसरा
22%
रोपङ
मोहनजोदङो से प्राप्त पशुपति मुहर में निम्नलिखित में से किस जानवर का अंकन नही है ?
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6%
गैंडा
14%
भैंसा
22%
हाथी
18%
बाघ
40%
बैल
निम्नलिखित में से किस स्थल पर 2001 में जीवाश्मीकृत मानव शिशु कपाल पाया गया था ?
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11%
भीमबैटका
42%
हथनोरा
16%
डीडवाना
6%
हङप्पा
26%
ओडई
👌6👍3
सिक्ख गुरू ..........
🌿 गुरू नानक देव जी - 1469 - 1539 ई. ( संगत का सकल्प , लंगर की संस्था )
🌿 गुरू अंगद देव जी - 1504 - 1552 ई. ( गुरू मुखी लिपि को लोकप्रिय बनाना , लंगर प्रथा का विस्तार , उदासी मत का खण्डन , गोइंदवाल साहिब की स्थापना )
🌿 गुरू अमरदास जी - 1479 - 1574 ई. ( गोइंदवाल साहिब में बाऊली का निर्माण , मंजी प्रथा )
🌿 गुरू रामदास जी - 1534 - 1581 ई. ( रामदासपुरा की स्थापना , मसन्द प्रथा का आरम्भ , अकबर के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध )
🌿 गुरू अर्जुन देव जी - 1563 - 1606 ई. ( हरिमन्दिर साहिब का निर्माण , तरनतारन की स्थापना , करतारपुर एवं हरगोबिन्द पुर की स्थापना , आदि ग्रन्थ साहिब का संकलन , अमृतसर की स्थापना )
🌿 गुरू हरिगोबिन्द जी - 1595 - 1645 ई. ( मीरी तथा पीरी तलवारें धारण करना , अकाल तख्त का निर्माण )
🌿 गुरू हर राय - 1630 - 1661 ई. ( दारा की सहायता )
🌿 गुरू हरकृष्ण - 1656 - 1664 ई. ( बाबा - बकाला का उच्चारण )
🌿 गुरू तेग बहादुर जी - 1621 - 1675 ई. ( कश्मीरी पण्डितों की पुकार पर .... बलिदान ( हिंद की चादर ..... भी कहा जाता है )
🌿 गुरू गोबिन्द सिंह - 1666 - 1708 ई. ( खालसा पंथ का सृजन ......
जापु साहिब , बचित्र नाटक , जफरनामा , चण्डी दी वार , अकाल उस्तति प्रमुख रचनाएं
( Note ...... Most important )
🌿 गुरू नानक देव जी - 1469 - 1539 ई. ( संगत का सकल्प , लंगर की संस्था )
🌿 गुरू अंगद देव जी - 1504 - 1552 ई. ( गुरू मुखी लिपि को लोकप्रिय बनाना , लंगर प्रथा का विस्तार , उदासी मत का खण्डन , गोइंदवाल साहिब की स्थापना )
🌿 गुरू अमरदास जी - 1479 - 1574 ई. ( गोइंदवाल साहिब में बाऊली का निर्माण , मंजी प्रथा )
🌿 गुरू रामदास जी - 1534 - 1581 ई. ( रामदासपुरा की स्थापना , मसन्द प्रथा का आरम्भ , अकबर के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध )
🌿 गुरू अर्जुन देव जी - 1563 - 1606 ई. ( हरिमन्दिर साहिब का निर्माण , तरनतारन की स्थापना , करतारपुर एवं हरगोबिन्द पुर की स्थापना , आदि ग्रन्थ साहिब का संकलन , अमृतसर की स्थापना )
🌿 गुरू हरिगोबिन्द जी - 1595 - 1645 ई. ( मीरी तथा पीरी तलवारें धारण करना , अकाल तख्त का निर्माण )
🌿 गुरू हर राय - 1630 - 1661 ई. ( दारा की सहायता )
🌿 गुरू हरकृष्ण - 1656 - 1664 ई. ( बाबा - बकाला का उच्चारण )
🌿 गुरू तेग बहादुर जी - 1621 - 1675 ई. ( कश्मीरी पण्डितों की पुकार पर .... बलिदान ( हिंद की चादर ..... भी कहा जाता है )
🌿 गुरू गोबिन्द सिंह - 1666 - 1708 ई. ( खालसा पंथ का सृजन ......
जापु साहिब , बचित्र नाटक , जफरनामा , चण्डी दी वार , अकाल उस्तति प्रमुख रचनाएं
( Note ...... Most important )
👍5❤2🙏1
वैदिककाल में समन अथवा समज्या का संबंध था ?
Anonymous Quiz
10%
शिल्पकारी
42%
व्यापार व्यवस्था
25%
स्वयंवर
22%
पारम्परिक उत्सव
👍7