Assistant professor ( college education) 2025 के रिज़ल्ट आने शुरू हो गए है for interview
2 विषयों के कल जारी किए है
जल्द ही इतिहास का भी आने वाला है
जो इसमें शामिल है उनके लिए
2 विषयों के कल जारी किए है
जल्द ही इतिहास का भी आने वाला है
जो इसमें शामिल है उनके लिए
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बुद्धघोष की प्रमुख टीकाएं
🍀 सांख्यपवकासिनी ..... संयुक्तनिकाय पर टीका
🍀 पंचसूदन ..... मज्झिमनिकाय पर टीका
🍀 मनोरथपूरणी ..... अंगुत्तरनिकाय पर टीका
🍀 सामन्त पासादिका ..... विनयपिटक पर टीका
🍀 सुमंगल - विलासिनी ..... दीघनिकाय पर टीका
🍀 कन्रववितरणी ..... विनयपिटक के " पातिमोक्ख " पर टीका
🍀 सांख्यपवकासिनी ..... संयुक्तनिकाय पर टीका
🍀 पंचसूदन ..... मज्झिमनिकाय पर टीका
🍀 मनोरथपूरणी ..... अंगुत्तरनिकाय पर टीका
🍀 सामन्त पासादिका ..... विनयपिटक पर टीका
🍀 सुमंगल - विलासिनी ..... दीघनिकाय पर टीका
🍀 कन्रववितरणी ..... विनयपिटक के " पातिमोक्ख " पर टीका
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चोल सैन्य शब्दावली :
रपडईविडु - चोल सेना को सामान्यतः 'रपडईविडु' कहा जाता था।
मुनरूकैमहासनै - अश्व सेना (घोड़ों को अरब देश से आयात किया जाता था। संस्कृत में अरबी घोड़े को 'वनायुज' कहा जाता था ।
कुडिरैच्चेवगर- अश्वारोही सैनिक ।
बडपेर - पैदलसैनिक।
विल्लिगल- धनुर्धारी दल ।
कंजिर मल्लर या अनैयाटकल - गजा रोही दल ।
वेलैक्कार- राजा के अति विश्वसनीय अंग रक्षक (इन्हे चालुक्यों के अधीन-‘सहवासी', होयसल राजाओं के अधीन 'गरूड़' तथा पाण्ड्यों के अधीन - 'आपात्ता विगल' कहा जाता था। मार्कोपोलो के अनुसार चोल राजाओं के अंगरक्षक अपने स्वामी के मध्य चिता पर जल जाते थे ।
कैककोलस- अति शक्तिशाली बाहुबली।
शैगुन्दर -- भाला चलाने वाले निपुण सैनिक ।
सैन्य छावनियों को 'कड़गम' या पडैविडु' तथा सैन्य टुकड़ी को - 'गुल्प' कहा जाता था। ( चोल सेना के 70 रेजीमेण्टो का उल्लेख मिलता हैं)
चोल सेना के प्रमुख अंग थे - पैदल सेना, अश्व सेना, गज सेना, नौ सेना । चोल काल में रथ सेना का उल्लेख नहीं मिलता । स्थल सेना में गज सेना की प्रधानता थी । विजय यात्रा के पश्चात हाथियों को सम्मानसूचक उपाधियाँ प्रदान की जाती थी। चीनी यात्री 'चाऊ जु कुआ' चोलों के पास 60 हाथी होने का वर्णन करता है।☘
रपडईविडु - चोल सेना को सामान्यतः 'रपडईविडु' कहा जाता था।
मुनरूकैमहासनै - अश्व सेना (घोड़ों को अरब देश से आयात किया जाता था। संस्कृत में अरबी घोड़े को 'वनायुज' कहा जाता था ।
कुडिरैच्चेवगर- अश्वारोही सैनिक ।
बडपेर - पैदलसैनिक।
विल्लिगल- धनुर्धारी दल ।
कंजिर मल्लर या अनैयाटकल - गजा रोही दल ।
वेलैक्कार- राजा के अति विश्वसनीय अंग रक्षक (इन्हे चालुक्यों के अधीन-‘सहवासी', होयसल राजाओं के अधीन 'गरूड़' तथा पाण्ड्यों के अधीन - 'आपात्ता विगल' कहा जाता था। मार्कोपोलो के अनुसार चोल राजाओं के अंगरक्षक अपने स्वामी के मध्य चिता पर जल जाते थे ।
कैककोलस- अति शक्तिशाली बाहुबली।
शैगुन्दर -- भाला चलाने वाले निपुण सैनिक ।
सैन्य छावनियों को 'कड़गम' या पडैविडु' तथा सैन्य टुकड़ी को - 'गुल्प' कहा जाता था। ( चोल सेना के 70 रेजीमेण्टो का उल्लेख मिलता हैं)
चोल सेना के प्रमुख अंग थे - पैदल सेना, अश्व सेना, गज सेना, नौ सेना । चोल काल में रथ सेना का उल्लेख नहीं मिलता । स्थल सेना में गज सेना की प्रधानता थी । विजय यात्रा के पश्चात हाथियों को सम्मानसूचक उपाधियाँ प्रदान की जाती थी। चीनी यात्री 'चाऊ जु कुआ' चोलों के पास 60 हाथी होने का वर्णन करता है।☘
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जूनागढ़ अभिलेख :- गिरनार (गुजरात)
* 1832 ईस्वी में जेम्स प्रिंसेप ने इस अभिलेख की खोज की तथा इसे जनरल ऑफ एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल के सातवें अंक में प्रकाशित किया
* कीलहार्न महोदय ने से प्रकाशित करवाया
* यह अभिलेख एक चट्टान पर उत्कीर्ण है। इस पर मौर्य सम्राट अशोक का अभिलेख, गुप्त सम्राट स्कंदगुप्त के दो लेख, तथा शक शासक रुद्रदामन का एक लेख खुदा हुआ है
* अभिलेख की भाषा संस्कृत है तथा लिपि ब्राह्मी है। संस्कृत भाषा में लिखित यह प्राचीनतम वह सबसे लंबा अभिलेख है। यह चंपू शैली (गद्य पद्य में) शैली में है।
* इस पर 150 ई(शक सम्वत 72) तिथि अंकित है
* इस लेख में कुल 20 पंक्तियां हैं
* इसमें सुदर्शन झील का उल्लेख किया गया है
* 'इस अभिलेख में रुद्रदामन को भ्रष्ट राज प्रतिष्ठापक' कहा गया है
* इस अभिलेख में 6 प्रकार के करो का उल्लेख मिलता है :-बलि, भाग, शुल्क, कर, प्रणय,विष्टि
* विष्टि का सर्वप्रथम उल्लेख इसी अभिलेख में मिलता है☘
* 1832 ईस्वी में जेम्स प्रिंसेप ने इस अभिलेख की खोज की तथा इसे जनरल ऑफ एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल के सातवें अंक में प्रकाशित किया
* कीलहार्न महोदय ने से प्रकाशित करवाया
* यह अभिलेख एक चट्टान पर उत्कीर्ण है। इस पर मौर्य सम्राट अशोक का अभिलेख, गुप्त सम्राट स्कंदगुप्त के दो लेख, तथा शक शासक रुद्रदामन का एक लेख खुदा हुआ है
* अभिलेख की भाषा संस्कृत है तथा लिपि ब्राह्मी है। संस्कृत भाषा में लिखित यह प्राचीनतम वह सबसे लंबा अभिलेख है। यह चंपू शैली (गद्य पद्य में) शैली में है।
* इस पर 150 ई(शक सम्वत 72) तिथि अंकित है
* इस लेख में कुल 20 पंक्तियां हैं
* इसमें सुदर्शन झील का उल्लेख किया गया है
* 'इस अभिलेख में रुद्रदामन को भ्रष्ट राज प्रतिष्ठापक' कहा गया है
* इस अभिलेख में 6 प्रकार के करो का उल्लेख मिलता है :-बलि, भाग, शुल्क, कर, प्रणय,विष्टि
* विष्टि का सर्वप्रथम उल्लेख इसी अभिलेख में मिलता है☘
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🍀अश्वघोष की प्रमुख रचनाएं 🍀
बुद्धचरित
सौन्दरनन्द
सारिपुत्र प्रकरण
श्रद्धोत्पाद -- संग्रह
सूत्रालंकारड
वज्रसूची☘☘
बुद्धचरित
सौन्दरनन्द
सारिपुत्र प्रकरण
श्रद्धोत्पाद -- संग्रह
सूत्रालंकारड
वज्रसूची☘☘
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https://rpsc.rajasthan.gov.in/intsearch?Pie=AP_SANS_COL_EDU_2024_HISTORY_20072026
AP History ( san edu) interview लेटर
जारी कर दिये है
AP History ( san edu) interview लेटर
जारी कर दिये है
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" नलगिरी का समर्पण " नामक प्रतिमा शिल्प प्राप्त हुआ है ?
Anonymous Quiz
15%
भरहुत में
51%
अमरावती में
20%
सांची में
11%
मथुरा में
2%
अनुत्तरित प्रश्न
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निम्न में से किस मंदिर को " कलिंग स्थापत्य का रत्न " कहा जाता है ? [ नेट इण्डियन कल्चर 2023 ]
Anonymous Quiz
14%
मुक्तेश्वर मंदिर
31%
जगन्नाथ मंदिर
31%
परशुराममेश्वर मंदिर
20%
वेताल देउल मंदिर
4%
कपिलेश्वर मंदिर
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निम्न में से " मेरू ब्रह्मांडिकी " का सम्बन्ध है ?
Anonymous Quiz
14%
बौद्ध धर्म से
32%
सांख्य धर्म से
31%
जैन धर्म से
17%
आजीवक धर्म से
6%
उपरोक्त सभी
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𝐇𝐢𝐬𝐭𝐨𝐫𝐲 𝐒𝐭𝐮𝐝𝐲 𝐓𝐢𝐦𝐞 ᵁᵍᶜ ⁿᵉᵗ ᴿᵖˢᶜ ᶠⁱʳˢᵗ ᴳʳᵃᵈᵉ
॰ प्रतिहार -- अन्त:पुर का रक्षक
॰ महाप्रतिहार -- राजमहल का प्रधान सुरक्षा अधिकारी
॰ महाबलाधिकृत / महासेनापति -- सेना का सर्वोच्च अधिकारी
॰ महादण्डनायक -- मुख्य न्यायाधीश
॰ पुस्तपाल -- भूमि का लेखा - जोखा रखने वाला अधिकारी
॰ महासंधिविग्रहिक -- युद्ध व शान्ति का अधिकारी , विदेशमंत्री
॰ दण्डपाशिक - पुलिस अधिकारी
॰ विनयस्थितिस्थापक -- नैतिक एवं धार्मिक मामलों का अधिकारी
॰ महाअक्षपटलिक -- आय -- व्यय का लेखा - जोखा रखने वाला अधिकारी
॰ शौल्लिक -- सीमा - शुल्क विभाग का प्रधान
॰ गौल्लिक -- वन अधिकारी
॰ ध्रुवाधिकरणिक -- राजस्व एकत्र करने वाला अधिकारी
॰ अमात्य -- नौकरशाह
॰ कुमारामात्य -- सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी
॰ पुरपाल -- नगर का मुख्य अधिकारी
॰ महाभंडागाराधिकृत -- राजकीय कोष का प्रधान
॰ अग्रहारिक -- दान विभाग का प्रधान
॰ रणभाण्डागारिक -- सेना के सामान की व्यवस्था रखने वाला पदाधिकारी
॰ करणिक - लिपिक
॰ महाप्रतिहार -- राजमहल का प्रधान सुरक्षा अधिकारी
॰ महाबलाधिकृत / महासेनापति -- सेना का सर्वोच्च अधिकारी
॰ महादण्डनायक -- मुख्य न्यायाधीश
॰ पुस्तपाल -- भूमि का लेखा - जोखा रखने वाला अधिकारी
॰ महासंधिविग्रहिक -- युद्ध व शान्ति का अधिकारी , विदेशमंत्री
॰ दण्डपाशिक - पुलिस अधिकारी
॰ विनयस्थितिस्थापक -- नैतिक एवं धार्मिक मामलों का अधिकारी
॰ महाअक्षपटलिक -- आय -- व्यय का लेखा - जोखा रखने वाला अधिकारी
॰ शौल्लिक -- सीमा - शुल्क विभाग का प्रधान
॰ गौल्लिक -- वन अधिकारी
॰ ध्रुवाधिकरणिक -- राजस्व एकत्र करने वाला अधिकारी
॰ अमात्य -- नौकरशाह
॰ कुमारामात्य -- सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी
॰ पुरपाल -- नगर का मुख्य अधिकारी
॰ महाभंडागाराधिकृत -- राजकीय कोष का प्रधान
॰ अग्रहारिक -- दान विभाग का प्रधान
॰ रणभाण्डागारिक -- सेना के सामान की व्यवस्था रखने वाला पदाधिकारी
॰ करणिक - लिपिक
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𝐇𝐢𝐬𝐭𝐨𝐫𝐲 𝐒𝐭𝐮𝐝𝐲 𝐓𝐢𝐦𝐞 ᵁᵍᶜ ⁿᵉᵗ ᴿᵖˢᶜ ᶠⁱʳˢᵗ ᴳʳᵃᵈᵉ
बौद्ध ग्रंथों के अनुसार इस समय 6 महत्वपूर्ण सम्प्रदाय थे --
1.) पूरण कश्यप -- घोर अक्रियावादी या अकर्मवादी
2.) अजितकेसकम्बलिन -- उच्छेदवादी या भौतिकवादी
3.) मक्खलिगोशाल -- नियतिवादी या भाग्यवादी
4.) पकुधकच्चायन -- नित्यवादी
5.) संजय वेलट्ठपुत -- संदेहवादी या अनिश्चयवादी
6.) निगण्ठनाथपुत्त -- बौद्ध ग्रंथों में महावीर को निगण्ठनाथपुत्त कहा गया है ।
👌5
हङप्पा -- रावी
मोहनजोदङो -- सिंधु
लोथल -- भोगवा
चन्हूदङो -- सिंधु
कालीबंगा -- घग्घर
राखीगढ़ी -- घग्घर
कोटदीजी -- सिंधु
बनावली -- सरस्वती
रोपङ -- सतलुज
छरंगपुर -- भादर
आलमगीरपुर -- हिंडन
सुत्कांगेडोर -- दाश्क
माण्डा -- चेनाब
सुत्काकोह -- शादी कौर
सुरकोटदा -- सरस्वती
मोहनजोदङो -- सिंधु
लोथल -- भोगवा
चन्हूदङो -- सिंधु
कालीबंगा -- घग्घर
राखीगढ़ी -- घग्घर
कोटदीजी -- सिंधु
बनावली -- सरस्वती
रोपङ -- सतलुज
छरंगपुर -- भादर
आलमगीरपुर -- हिंडन
सुत्कांगेडोर -- दाश्क
माण्डा -- चेनाब
सुत्काकोह -- शादी कौर
सुरकोटदा -- सरस्वती
सिंधु घाटी सभ्यता का स्थल " लोथल " किस नदी के किनारे स्थित था ?
Anonymous Quiz
5%
हिंडन
8%
चिनाब
82%
भोगवा
4%
रावी
2%
सरस्वती
👌4
निम्नलिखित में से संगम काल में " करई " क्या था ?
Anonymous Quiz
8%
सीमा शुल्क
49%
भूमिकर
10%
अधिकारी
33%
भूमि माप की इकाई
1%
आभूषण
𝐇𝐢𝐬𝐭𝐨𝐫𝐲 𝐒𝐭𝐮𝐝𝐲 𝐓𝐢𝐦𝐞 ᵁᵍᶜ ⁿᵉᵗ ᴿᵖˢᶜ ᶠⁱʳˢᵗ ᴳʳᵃᵈᵉ
निम्नलिखित में से संगम काल में " करई " क्या था ?
करई / इरै / करै -- भूमिकर .... जोकि 1/6 होता था । यह नगद एवं उपज दोनो रूपों से लिया जाता था ।
बेलि -- भूपि माप की इकाई
इरई -- लूट से प्राप्त धन
वरियम -- भूमिकर लगाने वाली संस्था
कदमई -- राजा को दिया जाने वाला भाग
वरियमवारि -- जिस क्षेत्र से कर प्राप्त हो
ईराबू -- बलपूर्वक प्राप्त उपहार
उलूग -- पथकर एवं सीमा शुल्क
वरियार -- कर वसूलने वाला अधिकारी
बेलि -- भूपि माप की इकाई
इरई -- लूट से प्राप्त धन
वरियम -- भूमिकर लगाने वाली संस्था
कदमई -- राजा को दिया जाने वाला भाग
वरियमवारि -- जिस क्षेत्र से कर प्राप्त हो
ईराबू -- बलपूर्वक प्राप्त उपहार
उलूग -- पथकर एवं सीमा शुल्क
वरियार -- कर वसूलने वाला अधिकारी
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