𝐇𝐢𝐬𝐭𝐨𝐫𝐲 𝐒𝐭𝐮𝐝𝐲 𝐓𝐢𝐦𝐞 ᵁᵍᶜ ⁿᵉᵗ ᴿᵖˢᶜ ᶠⁱʳˢᵗ ᴳʳᵃᵈᵉ
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🇮🇳इस ग्रुप का उद्देश्य आपको इतिहास विषय से विभिन्न एग्जाम यथा UGC NET,SET,NVS,KVS,EMRS, Ass. Professor,PGT, RPSC ,UPPSC,MPSC ,DSSSB
आदि में सफलता प्राप्त करने में मदद करना एवम इतिहास विषय के ज्ञान से अवगत कराना है ।
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" मैनें मान सिंह और विक्रमजीत के भवनों का गहराई से निरीक्षण किया , वें अद्भुत हैं ,पूरी तरह से पत्थरों के भारी असममित टुकङों को तराश कर बनाए गए हैं। सभी राजाओं के भवनों में मान सिंह के भवन सबसे उदात्त और श्रेष्ठ हैं । "
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5%
ग्वालियर के राजभवन को देखने के बाद ये विचार किसने व्यक्त किए थे -
32%
1.} बाबर
36%
2.} अकबर
21%
3.} जहाँगीर
6%
4.} शाहजहाँ
👏4
बरनी ने दिल्ली के एक सुल्तान के बारे में वर्णन किया है कि जब वह गद्दी पर बैठा तो "हिंदुओं तथा मुसलमानों के दिलों को राहत मिली "तथा उसने यह भी लिखा हैं कि 1357तक खोत और मुक्कद्दम अमीर हो गये और उनके पास अनगिनत घोङे और मवेशी हो गये थे ।
वह सुल्तान कौन था ?
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13%
अलाउद्दीन खिलजी
41%
फिरोजशाह तुगलक
33%
मोहम्मद बिन तुगलक
11%
मुबारक खिलजी
2%
कुतुबद्दीन ऐबक
🏆5
मुगल काल में " परगने की कानूनी व्यवस्था " का कार्य कौन करता था ?
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28%
शिकदार
27%
आमिल
30%
फौजदार
11%
मुहतसिब
2%
सुयूरगल
❤3👌2
मुगलकाल में चिंकारा की पारदर्शी खाल के टुकङे पर अनुरेखण करके रेखाचित्र बनाया जाता था इसे क्या कहा जाता था ? [ NET -- 2021 ]
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28%
चरब
15%
कलम
44%
मुतालबा
8%
किता
5%
सर्राफ
❤6
" वे मुझे मार सकते हैं , लेकिन वे मेरे विचारों को नहीं मार सकते !!
" वे मेरे शरीर को कुचल सकते हैं , लेकिन वे मेरी आत्मा को नहीं कुचल पाएंगे !! "

                                
                                  शहीद भगत सिंह
❤8🙏2🫡1
8 अप्रैल 1929 को भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त ने केन्द्रीय असेंबली में दो बम फेंके। बम फेंकने का उद्देश्य किसी को मारना नहीं बल्कि पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल के खिलाफ आवाज उठाना था। जवाहर लाल नेहरू ने लिखा कि 'यह बम देशवासियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए बहुत बड़ा धमाका था।' बम के साथ फैंके गए पर्चों पर फ्रांसीसी अराजकतावादी शहीद वैलियां का वाक्य 'बहरों को सुनाने के लिए धमाकों की जरूरत पड़ती है' लिखा था । दिल्ली के सेशन जज ने बम केस में 12 जून 1929 को भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई ।भगतसिंह सहित 16 क्रांतिकारियों को लाहौर पड़यंत्र केस में अभियुक्त बनाया गया। यतींद्रनाथ दास बंदियों की मांगों के लिए करते हुए लाहौर जेल में 64वें दिन 13 सितम्बर 1929 को शहीद हो गए। उनके शव को रेल द्वारा लाहौर कलकत्ता ले जाया गया। दास की दौ मील लंबी शवयात्रा में लगभग छह लाख व्यक्ति शामिल हुए। दिसम्बर 1929 में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन के अधिकारियों ने दिल्ली के निकट वायसराय इरविन की गाड़ी को बम से उड़ाने का प्रयास किया । 1 मई 1930 को गवर्नर जनरल के अध्यादेश द्वारा जस्टिस जे. कोल्डस्ट्रीम की अध्यक्षता में एक स्पेशल ट्रिब्यूनल की स्थापना की गई जिसके दो अन्य सदस्यों जस्टिस आगा हैदर व जस्टिस जी. सी. हिल्टन थे । ट्रिब्यूनल में भगतसिंह सहित 15 क्रांतिकारियों पर मुकदमा चलाया गया । तीव्र विरोध के कारण ट्रिब्यूनल को सिरे से गठित करना पड़ा जिसमें जस्टिस जी. सी. हिल्टन को अध्यक्ष और जस्टिस जे. के. टैप व जस्टिस अब्दुल कादिर को सदस्य बनाया गया। स्पेशल ट्रिब्यूनल ने 7 अक्टूबर 1930 को भगतसिंह, राजगुरू व सुखदेव को सजा-ए-मौत की सजा सुनाई गई। नौजवान सभा ने अपील कमेटी का गठन कर भगतसिंह की सजा के विरुद्ध सम्राट के समक्ष अपील की और 17 फरवरी 1931 को भगतसिंह दिवस
मनाया गया ।
लाहौर षड़यंत्र केस (सांडर्स हत्याकांड) की सुनवाई के दौरान क्रांतिकारियों ने बम फेंककर अभियुक्तों की रिहाई की योजना बनाई। इसी उद्देश्य से परीक्षण के दौरान बम फटने से 28 मई 1930 को रावी नदी के किनारे वतीचरण वोहरा की शहादत हो गई। चंद्रशेखर आजाद भी 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में पुलिस के एक शौर्यपूर्ण मुकाबले
में शहीद हुए। 23 मार्च 1931 को भगतसिंह, राजगुरू और । सुखदेव को लाहौर षड़यंत्र केस में फांसी पर लटका दिया गया। सुभाषचंद्र बोस ने भगतसिंह को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि ' भगतसिंह जिंदाबाद और इंकलाब जिंदाबाद एक ही अर्थ है | 'गांधी ने भी स्वीकार किया कि 'किसी भी व्यक्ति के जीवन के साथ इतना अधिक रोमांच नहीं जुड़ा जितना कि भगतसिंह के साथ जुड़ा था ।
🙏7
" मैं सिक्ख धर्म की अंग - अंग कटवाने की परम्परा का कायल हूँ , अभी तो मैंने एक ही अंग (केश) कटवाया है वह भी पेट के लिए नहीं , देश के लिये जल्दी ही गर्दन कटवाऊंगा " -- कथन है ?
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61%
सरदार भगत सिंह
20%
खुदीराम बोस
11%
सुभाष चन्द्र बोस
8%
आचार्य विनोबा भावे
1%
जयप्रकाश नारायण
अछूत - समस्या


[ काकीनाडा में 1923 में कांग्रेस - अधिवेशन हुआ । मुहम्मद अली ने अपने अध्यक्षीय भाषण में आजकल की अनुसूचित जातियों को , जिन्हें उन दिनों " अछूत " कहा जाता था , हिन्दू और मुस्लिम मिशनरी संस्थाओं में बाँट देने का सुझाव दिया । हिन्दू और मुस्लिम अमीर इस वर्ग - भेद को पक्का करने के लिए धन देने को तैयार थे ।
         इस प्रकार अछूतों के यह " दोस्त " उन्हें धर्म के नाम पर बाँटने की कोशिशें करते थे । उसी समय जब इस मसले पर बहस का वातावरण था , भगत सिंह ने " अछूत का सवाल " नामक लेख लिखा ।इस लेख में श्रमिक वर्ग की शक्ति व सीमाओं का अनुमान लगाकर उसकी प्रगति के लिए ठोस सुझाव दिए । भगत सिंह का यह लेख जून , 1928 के " किरती " में " विद्रोही " नाम से प्रकाशित हुआ था ।
🙏5
1924 में कोलकाता से प्रकाशित होने वाली " मतवाला " में बलवंत सिंह के छद्म नाम से तथा 1927 में विद्रोही के नाम से काकोरी के वीरों से परिचय शीर्षक वाला पंजाबी लेख निम्न में से किसने छपवाया था ?
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5%
लाल बहादुर शास्त्री
10%
वल्लभभाई पटेल
63%
सरदार भगत सिंह
12%
बाल गंगाधर तिलक
10%
लाला लाजपत राय
👌5💯1
आलमशाही मुगलिया सिक्का राजस्थान में कहा प्रचलित था?
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20%
जयपुर
42%
बीकानेर
32%
अलवर
6%
भरतपुर
👌3❤1
अपराजित के शिलालेख के रचियता निम्नलिखित में से कौन है?
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21%
सोमदेव
35%
नारायण
35%
दामोदर
9%
गजोधर