निम्न में से ताराबाई शिंदे की " स्त्री - पुरूष तुलना " 1882 पुस्तक मूलत: किस भाषा में प्रकाशित हुई ?
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6%
तमिल
71%
मराठी
13%
उर्दू
8%
संस्कृत
2%
अंग्रेजी
❤5👍1
मजदूरों की कार्यचालन स्थितियों को सुधारने के लिए प्रथम फैक्ट्री अधिनियम कब पारित किया गया ?
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61%
1881 ई.
13%
1884 ई.
19%
1886 ई.
4%
1889 ई.
3%
1892 ई.
❤3👍2
बम्बई में " स्वदेशी वस्तु प्रचारिणी सभा " (1905 ) की स्थापना किसके नेतृत्व में हुई ?
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12%
लाला लाजपत राय
7%
जवाहर लाल नेहरू
33%
आनंद मोहन बोस
36%
बाल गंगाधर तिलक
13%
सतीशचंद्र मुखर्जी
❤5
सत्यार्थ प्रकाश के किस अध्याय में कुरान की कुछ आयतों की समीक्षा की गई है ?
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11%
10 वें
39%
14 वें
37%
18 वें
9%
20 वें
3%
24 वें
❤5
पुरातत्व: अतीत की पहेली को सुलझाने का विज्ञान
पुरातत्व (Archaeology), यूनानी भाषा के दो शब्दों 'Archaios' (पुरातन) और 'Logos' (ज्ञान) से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'पुरातन ज्ञान'। यह वह वैज्ञानिक अध्ययन है जो मानव सभ्यता और संस्कृति के भूतल में दबे अतीत को वैज्ञानिक ढंग से खोजकर, उसका विश्लेषण करके इतिहास प्रस्तुत करता है। पुरातत्वविद्, जिसे 'आर्कियोलॉजिस्ट' भी कहते हैं, धरती के गर्भ में छिपी हुई सामग्रियों—जैसे अभिलेख, सिक्के, स्मारक, भवन, मूर्तियां, औजार, बर्तन, और जीवाश्म—की खुदाई और अध्ययन कर प्राचीन काल के लोगों के भौतिक जीवन, रीति-रिवाजों और सामाजिक संरचना का ज्ञान प्राप्त करते हैं।
पुरातत्व का महत्व
पुरातत्व का महत्व कई मायनों में अतुलनीय है:
* अज्ञात इतिहास का अनावरण: यह उन मानव अतीत के पहलुओं को उजागर करता है जिनके बारे में कोई लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं है, विशेष रूप से प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric period) के लिए जब लेखन कला का विकास नहीं हुआ था। लौह युग या पाषाण युग का इतिहास पुरातत्व पर ही निर्भर करता है।
* लिखित इतिहास की पुष्टि: यह ऐतिहासिक काल के लिखित साक्ष्यों (जैसे ग्रंथों) को भौतिक सामग्री प्रदान करता है, जिससे लिखित इतिहास की पुष्टि होती है और एक अधिक वास्तविक तथा प्रामाणिक इतिहास का सृजन होता है।
* सांस्कृतिक विकास को समझना: पुरातात्विक अवशेषों के माध्यम से विभिन्न 'पुरातात्विक संस्कृतियों' (Archaeological Cultures) को परिभाषित किया जाता है। ये अवशेष हमें मानव संस्कृति में आए क्रमिक परिवर्तनों, नवाचारों, और तकनीकी विकास को समझने में मदद करते हैं।
* मानव व्यवहार का सूक्ष्म ज्ञान: लिखित साक्ष्यों में अक्सर सामान्य लोगों की गतिविधियाँ गौण होती हैं, लेकिन पुरातत्व के माध्यम से दैनिक जीवन में प्रयुक्त वस्तुओं का ज्ञान होता है, जिससे हमें मानव अतीत के सूक्ष्म विषयों और आम जनजीवन को समझने में सहायता मिलती है।
पुरातत्व के स्रोत
पुरातत्व के अध्ययन में मुख्य रूप से निम्नलिखित पुरातात्विक स्रोतों का उपयोग किया जाता है:
* अभिलेख (Inscriptions): ये स्तम्भों, शिलाओं, ताम्रपत्रों, मुद्राओं, और गुफाओं में खुदे हुए मिलते हैं। ये किसी कालखंड की राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं।
* स्मारक और भवन (Monuments and Buildings): प्राचीन भवन, किले, मंदिर, स्तूप आदि किसी सभ्यता की वास्तुकला, कला और धार्मिक विश्वासों को दर्शाते हैं।
* मूर्तियां और चित्रकला (Sculptures and Paintings): ये कलात्मक कृतियाँ किसी समाज के सौंदर्य बोध, देवी-देवताओं और पहनावे की जानकारी देती हैं।
* सिक्के (Coins): ये शासकों के नाम, शासनकाल, आर्थिक स्थिति और धातु विज्ञान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं।
* उत्खनन से प्राप्त पुरावस्तुएँ (Excavated Artifacts): इनमें मिट्टी के बर्तन, औजार, गहने, हथियार और अन्य घरेलू सामान शामिल हैं, जो प्राचीन लोगों के रहन-सहन और तकनीक की जानकारी देते हैं।
अध्ययन की विधियाँ
पुरातत्व के अध्ययन में कई वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है:
* उत्खनन (Excavation): यह सबसे महत्वपूर्ण विधि है जिसमें व्यवस्थित तरीके से भूमि की खुदाई कर प्राचीन अवशेषों को निकाला जाता है।
* काल निर्धारण (Dating): अवशेषों की आयु जानने के लिए कार्बन-14 विधि (Carbon-14 Dating) और अन्य वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग किया जाता है।
* सर्वेक्षण (Survey): उत्खनन से पहले संभावित पुरातात्विक स्थलों की पहचान के लिए भूगर्भीय राडार (Ground Penetrating Radar) और हवाई फोटोग्राफी जैसी तकनीकें इस्तेमाल होती हैं।
पुरातत्व केवल खुदाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव विज्ञान, इतिहास, भूविज्ञान, रसायन विज्ञान और सांख्यिकी जैसे कई अन्य विषयों पर भी निर्भर करता है, जिससे यह एक अंतर-अनुशासनात्मक विज्ञान (Inter-disciplinary Science) बन जाता है। भारत में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इस क्षेत्र में प्रमुख संस्था है।
संक्षेप में, पुरातत्व एक ऐसी रोमांचक खिड़की है जो हमें हमारे पूर्वजों के जीवन और उनकी महान उपलब्धियों को समझने का अवसर प्रदान करती है, और यह सुनिश्चित करती है कि अतीत की कहानियाँ समय के साथ लुप्त न हो जाएँ।
पुरातत्व (Archaeology), यूनानी भाषा के दो शब्दों 'Archaios' (पुरातन) और 'Logos' (ज्ञान) से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'पुरातन ज्ञान'। यह वह वैज्ञानिक अध्ययन है जो मानव सभ्यता और संस्कृति के भूतल में दबे अतीत को वैज्ञानिक ढंग से खोजकर, उसका विश्लेषण करके इतिहास प्रस्तुत करता है। पुरातत्वविद्, जिसे 'आर्कियोलॉजिस्ट' भी कहते हैं, धरती के गर्भ में छिपी हुई सामग्रियों—जैसे अभिलेख, सिक्के, स्मारक, भवन, मूर्तियां, औजार, बर्तन, और जीवाश्म—की खुदाई और अध्ययन कर प्राचीन काल के लोगों के भौतिक जीवन, रीति-रिवाजों और सामाजिक संरचना का ज्ञान प्राप्त करते हैं।
पुरातत्व का महत्व
पुरातत्व का महत्व कई मायनों में अतुलनीय है:
* अज्ञात इतिहास का अनावरण: यह उन मानव अतीत के पहलुओं को उजागर करता है जिनके बारे में कोई लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं है, विशेष रूप से प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric period) के लिए जब लेखन कला का विकास नहीं हुआ था। लौह युग या पाषाण युग का इतिहास पुरातत्व पर ही निर्भर करता है।
* लिखित इतिहास की पुष्टि: यह ऐतिहासिक काल के लिखित साक्ष्यों (जैसे ग्रंथों) को भौतिक सामग्री प्रदान करता है, जिससे लिखित इतिहास की पुष्टि होती है और एक अधिक वास्तविक तथा प्रामाणिक इतिहास का सृजन होता है।
* सांस्कृतिक विकास को समझना: पुरातात्विक अवशेषों के माध्यम से विभिन्न 'पुरातात्विक संस्कृतियों' (Archaeological Cultures) को परिभाषित किया जाता है। ये अवशेष हमें मानव संस्कृति में आए क्रमिक परिवर्तनों, नवाचारों, और तकनीकी विकास को समझने में मदद करते हैं।
* मानव व्यवहार का सूक्ष्म ज्ञान: लिखित साक्ष्यों में अक्सर सामान्य लोगों की गतिविधियाँ गौण होती हैं, लेकिन पुरातत्व के माध्यम से दैनिक जीवन में प्रयुक्त वस्तुओं का ज्ञान होता है, जिससे हमें मानव अतीत के सूक्ष्म विषयों और आम जनजीवन को समझने में सहायता मिलती है।
पुरातत्व के स्रोत
पुरातत्व के अध्ययन में मुख्य रूप से निम्नलिखित पुरातात्विक स्रोतों का उपयोग किया जाता है:
* अभिलेख (Inscriptions): ये स्तम्भों, शिलाओं, ताम्रपत्रों, मुद्राओं, और गुफाओं में खुदे हुए मिलते हैं। ये किसी कालखंड की राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं।
* स्मारक और भवन (Monuments and Buildings): प्राचीन भवन, किले, मंदिर, स्तूप आदि किसी सभ्यता की वास्तुकला, कला और धार्मिक विश्वासों को दर्शाते हैं।
* मूर्तियां और चित्रकला (Sculptures and Paintings): ये कलात्मक कृतियाँ किसी समाज के सौंदर्य बोध, देवी-देवताओं और पहनावे की जानकारी देती हैं।
* सिक्के (Coins): ये शासकों के नाम, शासनकाल, आर्थिक स्थिति और धातु विज्ञान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं।
* उत्खनन से प्राप्त पुरावस्तुएँ (Excavated Artifacts): इनमें मिट्टी के बर्तन, औजार, गहने, हथियार और अन्य घरेलू सामान शामिल हैं, जो प्राचीन लोगों के रहन-सहन और तकनीक की जानकारी देते हैं।
अध्ययन की विधियाँ
पुरातत्व के अध्ययन में कई वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है:
* उत्खनन (Excavation): यह सबसे महत्वपूर्ण विधि है जिसमें व्यवस्थित तरीके से भूमि की खुदाई कर प्राचीन अवशेषों को निकाला जाता है।
* काल निर्धारण (Dating): अवशेषों की आयु जानने के लिए कार्बन-14 विधि (Carbon-14 Dating) और अन्य वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग किया जाता है।
* सर्वेक्षण (Survey): उत्खनन से पहले संभावित पुरातात्विक स्थलों की पहचान के लिए भूगर्भीय राडार (Ground Penetrating Radar) और हवाई फोटोग्राफी जैसी तकनीकें इस्तेमाल होती हैं।
पुरातत्व केवल खुदाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव विज्ञान, इतिहास, भूविज्ञान, रसायन विज्ञान और सांख्यिकी जैसे कई अन्य विषयों पर भी निर्भर करता है, जिससे यह एक अंतर-अनुशासनात्मक विज्ञान (Inter-disciplinary Science) बन जाता है। भारत में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इस क्षेत्र में प्रमुख संस्था है।
संक्षेप में, पुरातत्व एक ऐसी रोमांचक खिड़की है जो हमें हमारे पूर्वजों के जीवन और उनकी महान उपलब्धियों को समझने का अवसर प्रदान करती है, और यह सुनिश्चित करती है कि अतीत की कहानियाँ समय के साथ लुप्त न हो जाएँ।
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𝐇𝐢𝐬𝐭𝐨𝐫𝐲 𝐒𝐭𝐮𝐝𝐲 𝐓𝐢𝐦𝐞 ᵁᵍᶜ ⁿᵉᵗ ᴿᵖˢᶜ ᶠⁱʳˢᵗ ᴳʳᵃᵈᵉ pinned «पुरातत्व: अतीत की पहेली को सुलझाने का विज्ञान पुरातत्व (Archaeology), यूनानी भाषा के दो शब्दों 'Archaios' (पुरातन) और 'Logos' (ज्ञान) से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'पुरातन ज्ञान'। यह वह वैज्ञानिक अध्ययन है जो मानव सभ्यता और संस्कृति के भूतल में दबे…»
निम्न में से " बंदी जीवन " किस क्रांतिकारी की रचना है ?
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11%
सरदार भगत सिंह
8%
सूर्यसेन
19%
खुदीराम बोस
55%
शचींद्रनाथ सान्याल
7%
जतिन दास
❤2👍2
" साराबन्दी आंदोलन " 1922 ई. में किसके नेतृत्व में प्रारम्भ हुआ ?
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22%
लाला लाजपत राय
38%
सरदार पटेल
23%
महात्मा गांधी
12%
सुभाष चन्द्र बोस
5%
महात्मा गांधी
❤2👌2
कांग्रेस के किस अधिवेशन में " मौलिक अधिकारों " पर एक प्रस्ताव पारित किया गया ?
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9%
लखनऊ , 1916
14%
नागपुर , 1920
24%
कलकत्ता , 1928
48%
कराची , 1931
5%
त्रिपुरी , 1939
❤2👍2
𝐇𝐢𝐬𝐭𝐨𝐫𝐲 𝐒𝐭𝐮𝐝𝐲 𝐓𝐢𝐦𝐞 ᵁᵍᶜ ⁿᵉᵗ ᴿᵖˢᶜ ᶠⁱʳˢᵗ ᴳʳᵃᵈᵉ
वह कौन प्रथम मुगल शासक था जिसने अकाल के समय किसी प्रकार की सुविधा की व्यवस्था की? (a) अकबर (b) जहाँगीर (c) शाहजहाँ (d) औरंगजेब
व्याख्या- मुगल काल में कई अवसरों पर गम्भीर अकाल भी पड़े। इनमें पहला 1555-56 ई. में अकबर के समय दिल्ली अकाल था जिसका उल्लेख बदांयूनी ने किया है। उसके अनुसार, "मनुष्य, मनुष्य को खाने को तैयार हो गया।" 1573-74 ई. में गुजरात में अकाल पड़ा। 1595 ई. में अकबर ने बुखारा के शेख फरीद को अकाल पीड़ित व्यक्तियों की मदद हेतु विशेष तौर पर नियुक्त किया। शाहजहाँ के समय 1630-32 में दक्षिण भारत एवं गुजरात में मुगल काल का सबसे विनाशकारी अकाल पड़ा। इस अकाल की भयंकरता का उल्लेख पीटर मुण्डी एवं अब्दुल हमीद लाहौरी ने किया है। शाहजहाँ ने 70 लाख की मालगुजारी माफ कर दी। 1641 ई. में कश्मीर एवं 1646 में पंजाब में अकाल पड़ा। शाहजहाँ ने राहत निदान हेतु कश्मीर में कुछ वैध करों को माफ कर दिया। औरंगजेब के शासन काल में 1658-59, 1670-71 1682 एवं 1702-04 ई. में अकाल पड़ा। आलमगीरनामा का लेखक मुहम्मद काजिम बताता है कि 1658 ई. के अकाल के समय औरंगजेब ने 10 रसोवड़े (लंगर) राजधानी दिल्ली में तथा आगरा एवं लाहौर में खोला था।☘☘
❤5🔥2
किसने 1921 में पहली बार " पूर्ण स्वतंत्रता " की मांग को उठाया ?
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7%
महात्मा गांधी
26%
जवाहर लाल नेहरू
36%
हसरत मोहानी
20%
बाल गंगाधर तिलक
10%
चितरंजन दास
❤3🙏1😍1
डाॅ. अम्बेडकर ने भारतीय बौद्ध महासभा की स्थापना कब की ?
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10%
1945
16%
1949
60%
1955
11%
1959
3%
1962
❤3👍1