Forwarded from Hindutvadal || हिंदुत्व दल 🚩🚩
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अतः इस्लाम मत खण्डनम् —
इस्लाम में यह मान्यता है कि अल्लाह ने सबसे पहले "कलम" (pen) को बनाया, और यह भी माना जाता है कि समय (time) को भी अल्लाह ने ही बनाया — अर्थात् समय सृष्टि का भाग है, वह स्वयंभू नहीं है। परन्तु यही मान्यता अपने में ही विरोधाभास उत्पन्न करती है।
अब प्रश्न उठता है — यदि अल्लाह ने समय को बनाया, और कलम को भी बनाया, तो सबसे पहले क्या बनाया?
1. यदि कहा जाए कि सबसे पहले कलम बनाई गई, तो “बनाई गई” का अर्थ होता है कि एक समय ऐसा था जब कलम नहीं थी और फिर वह बनी —
→ पर "कलम बनी" यह कथन स्वयं समय की उपस्थिति को आवश्यक मानता है।
क्योंकि “बनना”, “पहले न होना” और “बाद में होना” — ये सब समय की अवधारणाएँ हैं।
अतः यह कैसे कहा जा सकता है कि समय तो था ही नहीं, और तब कलम बनी?
2. यदि कहा जाए कि समय पहले बनाया गया, तो यह हदीस से टकराव (contradiction) पैदा करता है, क्योंकि हदीस तो यह कहती है कि सबसे पहले कलम बनाई गई थी, न कि समय।
3. अब कोई कह सकता है कि अल्लाह ने समय और कलम को एक साथ बनाया।
→ किन्तु “एक साथ बनाना” भी समय की धारणा पर आधारित है, क्योंकि एक साथ होना और पहले या बाद में होना — यह सब समय में ही संभव है।
→ और जब आप कहते हैं कि “कलम बनी” और “पहले नहीं थी”, तो यह स्पष्ट है कि समय पहले से उपस्थित था, वरना “पहले नहीं थी” का कोई अर्थ ही नहीं।
निष्कर्ष:
इस्लामी सिद्धांत में यह स्पष्ट विरोधाभास है —
यदि समय नहीं था, तो "कलम बनी" यह कथन असंभव है।
यदि कलम बनी और पहले नहीं थी — तो समय पहले से होना चाहिए।
यदि समय पहले था, तो कलम पहली नहीं बनी — हदीस का खण्डन होता है।
यदि समय और कलम साथ बने — तो भी "पहले नहीं थी" यह बात झूठी हो जाती है।
इसलिए इस्लामी सिद्धांत में "अल्लाह ने सबसे पहले कलम बनाई और समय भी बनाया" — यह तर्क की कसौटी पर टिक नहीं पाता।
यदि कोई मुस्लिम भाई/बहन इस तर्क का उत्तर देना चाहें, तो कृपया स्पष्ट और तार्किक रूप से उत्तर दें।
इस्लाम में यह मान्यता है कि अल्लाह ने सबसे पहले "कलम" (pen) को बनाया, और यह भी माना जाता है कि समय (time) को भी अल्लाह ने ही बनाया — अर्थात् समय सृष्टि का भाग है, वह स्वयंभू नहीं है। परन्तु यही मान्यता अपने में ही विरोधाभास उत्पन्न करती है।
अब प्रश्न उठता है — यदि अल्लाह ने समय को बनाया, और कलम को भी बनाया, तो सबसे पहले क्या बनाया?
1. यदि कहा जाए कि सबसे पहले कलम बनाई गई, तो “बनाई गई” का अर्थ होता है कि एक समय ऐसा था जब कलम नहीं थी और फिर वह बनी —
→ पर "कलम बनी" यह कथन स्वयं समय की उपस्थिति को आवश्यक मानता है।
क्योंकि “बनना”, “पहले न होना” और “बाद में होना” — ये सब समय की अवधारणाएँ हैं।
अतः यह कैसे कहा जा सकता है कि समय तो था ही नहीं, और तब कलम बनी?
2. यदि कहा जाए कि समय पहले बनाया गया, तो यह हदीस से टकराव (contradiction) पैदा करता है, क्योंकि हदीस तो यह कहती है कि सबसे पहले कलम बनाई गई थी, न कि समय।
3. अब कोई कह सकता है कि अल्लाह ने समय और कलम को एक साथ बनाया।
→ किन्तु “एक साथ बनाना” भी समय की धारणा पर आधारित है, क्योंकि एक साथ होना और पहले या बाद में होना — यह सब समय में ही संभव है।
→ और जब आप कहते हैं कि “कलम बनी” और “पहले नहीं थी”, तो यह स्पष्ट है कि समय पहले से उपस्थित था, वरना “पहले नहीं थी” का कोई अर्थ ही नहीं।
निष्कर्ष:
इस्लामी सिद्धांत में यह स्पष्ट विरोधाभास है —
यदि समय नहीं था, तो "कलम बनी" यह कथन असंभव है।
यदि कलम बनी और पहले नहीं थी — तो समय पहले से होना चाहिए।
यदि समय पहले था, तो कलम पहली नहीं बनी — हदीस का खण्डन होता है।
यदि समय और कलम साथ बने — तो भी "पहले नहीं थी" यह बात झूठी हो जाती है।
इसलिए इस्लामी सिद्धांत में "अल्लाह ने सबसे पहले कलम बनाई और समय भी बनाया" — यह तर्क की कसौटी पर टिक नहीं पाता।
यदि कोई मुस्लिम भाई/बहन इस तर्क का उत्तर देना चाहें, तो कृपया स्पष्ट और तार्किक रूप से उत्तर दें।
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Ya Allah LuLlah 🤡 🤡
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