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Special 26: Here are the verses in the Quran that Waseem Rizvi wants to delete
29 May, 2021
OpIndia Staff
Here are 26 disturbing Quranic verses that Waseem Rizvi wants to remove
Quran (left), Waseem Rizvi (right), image via Siasat Daily

On Saturday (March 29), former Shia Central Waqf Board Chairman Waseem Rizvi informed that he has created a new Islamic Holy book, after ommitting 26 verses from the Quran. He has argued that the 26 verses promote terrorism and has requested PM Modi to authorise the use of his ‘new Quran’ in all madrasas and Muslim institutes in the country.

It must be mentioned that Rizvi had earlier filed a Public Interest Litigation (PIL) before the Supreme Court of India, seeking the removal of the said 26 verses of the Quran. In his PIL, Rizvi stated that these verses are allegedly used by Islamist Terrorist Groups as justification for attacks on non-believers and civilians. However, his petition was dismissed for supposedly being “absolutely frivolous” and fined ₹50,000.

Here is a comprehensive list of the verses, removed by Waseem Rizvi for the ‘new Quran.’ It must be mentioned that the English translation from Arabic of the Quranic verses has been done by Saheeh International and has been sourced from the Islamic website quran.com. In Arabic, the word ‘Surah’ or ‘sura’ is considered equivalent to a chapter in the Quran.

Surah 2 (Al-Baqarah)
Verse 191:


And kill them [in battle] wherever you overtake them and expel them from wherever they have expelled you, and fitnah1 is worse than killing. And do not fight them at al-Masjid al-Ḥarām until they fight you there. But if they fight you, then kill them. Such is the recompense of the disbelievers.

Surah 3 (Ali ‘Imran)
Verse 151:

We will cast terror into the hearts of those who disbelieve for what they have associated with Allah of which He had not sent down [any] authority.1 And their refuge will be the Fire, and wretched is the residence of the wrongdoers.

Surah 4 (An-Nisa)
Verse 56:


Indeed, those who disbelieve in Our verses – We will drive them into a fire. Every time their skins are roasted through, We will replace them with other skins so they may taste the punishment. Indeed, Allah is ever Exalted in Might and Wise.

Verse 89:

They wish you would disbelieve as they disbelieved so you would be alike. So do not take from among them allies until they emigrate for the cause of Allah. But if they turn away [i.e., refuse], then seize them and kill them [for their betrayal] wherever you find them and take not from among them any ally or helper,

Verse 101:


And when you travel throughout the land, there is no blame upon you for shortening the prayer,1 [especially] if you fear that those who disbelieve may disrupt [or attack] you.2 Indeed, the disbelievers are ever to you a clear enemy.

Surah 5 (Al-Ma’idah)
Verse 14:

And from those who say, “We are Christians” We took their covenant; but they forgot a portion of that of which they were reminded.1 So We caused among them2 animosity and hatred until the Day of Resurrection. And Allah is going to inform them about what they used to do.

Verse 51:

O you who have believed, do not take the Jews and the Christians as allies. They are [in fact] allies of one another. And whoever is an ally to them among you – then indeed, he is [one] of them. Indeed, Allah guides not the wrongdoing people.

Verse 57:

O you who have believed, take not those who have taken your religion in ridicule and amusement among the ones who were given the Scripture before you nor the disbelievers as allies. And fear Allah, if you should [truly] be believers.

Surah 8 (Al-Anfal)
Verse 65:

O Prophet, urge the believers to battle. If there are among you twenty [who are] steadfast, they will overcome two hundred. And if there are among you one hundred [who are steadfast], they will overcome a thousand of those who have disbelieved because they are a people who do not understand.

Verse 69:
❤1
इस्लाम का पहला मुसलमान सन 610 में अबुबकर बना.
और पहली औरत खदीजा ने इस्लाम स्वीकार किया.
मुहम्मद साहब के चाचा अबू तालिब जिसने उनको पाला था मुसलमान नहीं बने .....
300 जातियां हैं इनकी ।स्वयं है। पैगम्बर मोहम्मद ने बोला था 73 फिरके होंगे मूसलों के ।
कौन बोलता है की इस्लाम में जातिवाद नहीं है ..?
मुस्लिम एवं मनहूस सिकुलरों द्वारा अक्सर यह भ्रम फैलाया जाता है कि.... हमारे हिन्दू धर्म में बहुत ज्यादा जातिवाद है ..... जबकि, इस्लाम में समानता की भावना है....!
इतना ही नहीं.... गद्दार सेकुलरों के मुंह से ऐसी बातें सुनकर तो रक्त में उबाल आ जाता है।

आज कल मुस्लिम अपने लुटेरे पूर्वजों के कुकर्मों को छुपाने के लिए अब एक नया तर्क यह देने लगे हैं कि हिन्दू धर्म में जातिवाद के कारण ही बहुतायत में हिंदुओं ने इस्लाम स्वीकार कर लिया .... क्योंकि, इस्लाम जातिवाद से अछूता था और, इस्लाम में काफी भाई-चारा था...!

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लेकिन.. हकीकत यह है कि..... इस्लाम में जाति-व्यवस्था ... छुआ-छूत और आपसी घृणा के हद तक मौजूद है...!
जैसा की सर्वविदित है कि..... इस्लाम मे शुरू से ही “शिया और सुन्नी” संप्रदाय ..... एक दूसरे की जान के दुश्मन हैं, यह लोग सालों-भर आपस में ही लड़ते-मरते रहते हैं ...!!
इसके अलावा.... इस्लाम में .... अहमदिया, सलफमानी, शेख, क़ाज़ी, मुहम्मदिया, पठान आदि भी जातियां हैं.........

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परन्तु हास्यास्पद है कि.... यह एक ही अल्लाह को मानते हुए भी ... वे एक मस्जिद में नमाज़ नहीं पढते ... और, सभी जातियों के लिए अलग अलग मस्जिदें होती हैं .!!

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भारतीय मुसलमान भले कितना भी.... देश से गद्दारी कर ... वंदे-मातरम गाने से मना करे.... अथवा भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने कि चेष्टा करता रहे..... लेकिन, उनकी स्थिति वैश्विक इस्लामिक समाज में .... एक कुत्ते से भी बदतर है..... और, सउदी अरब, अरब अमीरात, ओमान, कतर आदि अन्य अरब राष्ट्रों के मुस्लिम........ भारत, पाकिस्तान एवं बंगलादेशी मुस्लिमों को नीच मुसलमान मानते हें .....और, *इनसे छुआछूत मानते हैं ।
यहाँ तक कि....सउदी अरब के ऑफिसो मे तो भारत और पाक के मुसलमानों के लिए पानी तक अलग रखा रखता है |

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जहाँ तक बात रह गई शादी-ब्याह कि तो.... शेख अपने आपको सबसे उपर मानते हैं और वे किसी अन्य जाति में निकाह नहीं करते.
और तो और..... चूँकि इंडोनेशिया में अभी हाल के 100 वर्ष पूर्व अनेकों बौद्ध और
हिंदू परिवर्तित होकर मुस्लिम बने थे.......इसी कारण सभी इस्लामिक राष्ट्र....इंडोनेशिया से घृणा की भावना रखते हैं..

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भारतीय मुस्लिमों का तो हाल ये है कि..... क़ाज़ी मुस्लिम, ''भारतीय मुस्लिमों'' को मुस्लिम ही नहीं मानते... क्यूंकि, उन का मानना है के यह सब भी हिंदूधर्म से परिवर्तित हैं ।
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और, सिर्फ भारत ही क्यों..... अफ्रीका महाद्वीप के सभी इस्लामिक राष्ट्र जैसे
मोरोक्को, मिस्र, अल्जीरिया, निजेर,लीबिया आदि राष्ट्रों के मुस्लिमों को ..... तुर्की के मुस्लिम सबसे निम्न मानते हैं ।
और, सोमालिया जैसे इस्लामिक राष्ट्रों में तो... अपने बुजुर्गों को ''जीवित'' समुद्र में बहाने की प्रथा चल रही है!
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आप यह जानकर चकित ही हो जायेंगे कि.... भारत के ही बोहरा मुस्लिम किसी भी मस्जिद में नहीं जाते, क्योंकि...वो सिर्फ मज़ारों पे जाते हैं... क्योंकि..उनका
विश्वास मात्र सूफियों पे है... अल्लाह पे नहीं !
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अभी तक तो सिर्फ आपने इस्लामिक विभेद ही जाना है.....
अब जानिये .. इस्लाम के अंदर मौजूद जाति-प्रजाति ..... एवं छुआछूत को.....
दरअसल....मुस्लिमों में दो सामाजिक विभाग हैं-
1. अशरफ अथवा शरु ...और , २. अज़लफ।
अशरफ से तात्पर्य है..... 'कुलीन' .....और, शेष अन्य मुसलमान जिनमें व्यावसायिक वर्ग और निचली जातियों के मुसलमान शामिल हैं... उन्हें अज़लफ अर्थात् नीच अथवा निकृष्ट व्यक्ति माना जाता है.. और, उन्हें कमीना अथवा इतर कमीन या रासिल, जो रिजाल का भ्रष्ट रूप है, 'बेकार' कहा जाता है।
कुछ स्थानों पर एक तीसरा वर्ग 'अरज़ल' भी है, जिसमें आने वाले व्यक्ति सबसे नीच समझे जाते हैं।
और, उनके साथ कोई भी अन्य मुसलमान मिलेगा- जुलेगा नहीं और न ही उन्हें मस्जिद और सार्वजनिक कब्रिस्तानों में प्रवेश करने दिया जाता है।
1. 'अशरफ' अथवा उच्च वर्ग के मुसलमान ..... अपने नाम के साथ...... सैयद, शेख, पठान, मुगल, मलिक और मिर्ज़ा.... जैसे उपनाम लगाते हैं... !
2. 'अज़लफ' अथवा निम्न वर्ग के मुसलमान......
Ex muslim Movment pinned «इस्लाम का पहला मुसलमान सन 610 में अबुबकर बना. और पहली औरत खदीजा ने इस्लाम स्वीकार किया. मुहम्मद साहब के चाचा अबू तालिब जिसने उनको पाला था मुसलमान नहीं बने ..... 300 जातियां हैं इनकी ।स्वयं है। पैगम्बर मोहम्मद ने बोला था 73 फिरके होंगे मूसलों के । कौन बोलता…»
(A) इस्लाम के उस भाग में..... खेती करने वाले शेख और अन्य वे लोग आते हैं......जो मूलतः हिन्दू थे, किन्तु किसी बुद्धिजीवी वर्ग से सम्बन्धित नहीं थे... इसीलिए , जिन्हें अशरफ समुदाय, अर्थात् पिराली और ठकराई आदि में प्रवेश नहीं मिला है।
(B) दर्जी, जुलाहा, फकीर और रंगरेज।
(C) बाढ़ी, भटियारा, चिक, चूड़ीहार, दाई,धावा, धुनिया, गड्डी, कलाल, कसाई, कुला, कुंजरा,लहेरी, माहीफरोश, मल्लाह, नालिया, निकारी।
(D) अब्दाल, बाको, बेडिया, भाट, चंबा, डफाली, धोबी, हज्जाम, मुचो, नगारची, नट, पनवाड़िया, मदारिया, तुन्तिया।
3. जबकि.... ' अरजल' अथवा निकृष्ट वर्ग में..... भानार,हलालखोदर,हिजड़ा , कसंबी, लालबेगी, मोगता, मेहतर.... आदि आते हैं....!
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अब आप खुद ही सोचें कि..... कि ... जहाँ मुस्लिम अल्लाह एक, एक कुरान, एक .... नबी और आपस में महान एकता बतलाते हैं ....
वहीँ .... शिया और सुन्नी .....सभी मुस्लिम देशों में एक दूसरे को मार रहे हैं...
और, अधिकांश मुस्लिम देशों में.... इन दो संप्रदायों के बीच हमेशा धार्मिक दंगा होता रहता है..!
और सिर्फ... इतना ही नहीं... शिया को.., सुन्नी मस्जिद में जाना मना है .
इन दोनों को.. अहमदिया मस्जिद में नहीं जाना है.
और, ये तीनों...... सूफी मस्जिद में कभी नहीं जाएँगे.
फिर, इन चारों का मुजाहिद्दीन मस्जिद में प्रवेश वर्जित है..!
... बल्कि. आगा खानी या चेलिया मुस्लिम का भी अपना अलग मस्जिद होता है .

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ये इस्लामी जातिवाद का ही नतीजा है कि.....सबसे ज्यादा मुस्लिम किसी दूसरे देश मे नही बल्कि मुस्लिम देशो मे ही मारे गए है .. और, आज भी सीरिया मे करीब हर रोज एक हज़ार मुस्लिम हर रोज मारे जा रहे है .
आपको तो याद ही होगा कि....अपने आपको इस्लाम जगत का हीरों बताने वाला सद्दाम हुसैन ने करीब एक लाख कुर्द मुसलमानों को रासायनिक बम से मार डाला था ...
और, आज भी पाकिस्तान मे हर महीने शिया और सुन्नी के बीच दंगे भड़कते है ।
"वास्तव में मुसलमान उस संतरे की तरह है , जो देखने में एक लगता है ,लेकिन उसके अन्दर फाकें ही फांकें है ....
और....मुसलामानो के कई फिरके ऐसे भी है जो एक दुसरे को फूटी आँखों से नहीं देखना चाहते है . कुरान बाइबल से मिलती जुलती है अरब में पहले यहूदी ,फारसी, सनातन तथा अन्य छोटे छोटे धर्म हुआ करते थे वहां सूर्य ,अग्नी ,चांद,कब्र और मूर्ति की पूजा हुआ करती थी यहूदी से नये धर्म बने इस्लाम को फैलाने के लिए पूरी कुरान में अल्लाह का डर दिखाया गया इस्लाम में जिंदा रहने पर अल्लाह देखता रहेगा और मरने के बाद आग में जलालेगा ,लटकायेगा ,कब्र से निकालेगा और तमाम यातनाओं के बारे में कुरान में जिक्र किया गया है दुनिया भर का झूठ, और डर अल्लाह की तरफ से है। फरिश्ते के द्वारा एक पहाड़ी के टीले पर मोहम्मद को कुरान की आयतें सिर्फ सुनाई गई है कुरान को पहली बार फरिश्ते ने मोहम्मद को सुनाने के लिए पकड़ा तो मोहम्मद डर गया फरिश्ते ने आकर मुहम्मद को खींचा तो वह डर गया उसने कहा अनपढ़ मुहम्मद को तीन बार कहा पढ़ तो मुहम्मद ने कहा मैं पढ़ना नही जानता फिर फरिश्ते ने मुहम्मद को आयात सुनाई इस बात को आकर अपने ससुर और बीवी को बताई तो दोनों ने कहा वह अल्लाह का फरिश्ता है। दूसर दिन मुहम्मद फिर टीले गया आयात सुनी फरिश्ता आयात सुनाता और फरिश्ते ने ही मुहम्मद को बताया की वह अल्लाह का रसूल है। कुछ दिन जब मुदम्मद का ससुर मर गया तो आयात आनी भी बंद हो गयी मुहम्मद के मरने के डाई सौ साल बाद कुरान को छापा गया है। आसमान से कोई कुरान नाजिल नही हुई इस्लाम धर्म को फैलाने के लिए एक हाँथ में कुरान दूसरे हाँथ तलवार का इस्तेमाल हुआ है। भारत में इस्लाम का आगमन – सन् 711 ईसवी में भारत देश में इस्लाम का आगमन हुआ था.
इसी साल की बात है जब मुसलमानों ने स्पेन में भी दाखिल किया था. दरअसल मुसलमानों के नागरिक जहाज को कुछ समुद्री लुटेरों ने बंधक बना लिया था. जिसे छुड़ाने की खातिर वो भारत आए. क्योंकि जिस जगह पर उनके पानी जहाज को बंधक बनाया गया था, वो जगह सिंध के राजा दाहिर के राज्य में आती थी. कूटनीतिक और राजनैतिक प्रयास असफल होने के बाद बगदाद के हज्जाज बिन युसुफ़ ने 17 साल की उम्र के बिन कासिम को छोटी सेना के साथ राजा दाहिर से युद्ध के लिए भेजा.
राजा दाहिर और बिन कासिम के बीच हुए युद्ध में सिंध के "दाहिर" को हराने के बाद उसकी दोनों "बेटियों" को "यौनदासियों" के रूप में "खलीफा" को तोहफा भेज दिया।
तब शायद भारत की स्त्रियों का पहली बार बलात्कार जैसे कुकर्म से सामना हुआ जिसमें "हारे हुए राजा की बेटियों" और "साधारण भारतीय स्त्रियों" का "जीती हुयी इस्लामी सेना" द्वारा बुरी तरह से बलात्कार और अपहरण किया गया ।
Ex muslim Movment pinned «(A) इस्लाम के उस भाग में..... खेती करने वाले शेख और अन्य वे लोग आते हैं......जो मूलतः हिन्दू थे, किन्तु किसी बुद्धिजीवी वर्ग से सम्बन्धित नहीं थे... इसीलिए , जिन्हें अशरफ समुदाय, अर्थात् पिराली और ठकराई आदि में प्रवेश नहीं मिला है। (B) दर्जी, जुलाहा, फकीर…»
~फिर आया 1001 इस्वी में "गजनवी"। इसके बारे में ये कहा जाता है कि इसने "इस्लाम को फ़ैलाने" के उद्देश्य से ही आक्रमण किया था।
"सोमनाथ के मंदिर" को तोड़ने के बाद इसकी सेना ने हजारों "काफिर औरतों" का बलात्कार किया फिर उनको अफगानिस्तान ले जाकर "बाजारों में बोलियाँ" लगाकर "जानवरों" की तरह "बेच" दिया ।
~फिर "गौरी" ने 1192 में "पृथ्वीराज चौहान" को हराने के बाद भारत में "इस्लाम का प्रकाश" फैलाने के लिए "हजारों काफिरों" को मौत के घाट उतर दिया और उसकी "फौज" ने "अनगिनत हिन्दू स्त्रियों" के साथ बलात्कार कर उनका "धर्म-परिवर्तन" करवाया।
~ये विदेशी मुस्लिम अपने साथ औरतों को लेकर नहीं आए थे।
~मुहम्मद बिन कासिम से लेकर सुबुक्तगीन, बख्तियार खिलजी, जूना खाँ उर्फ अलाउद्दीन खिलजी, फिरोजशाह, तैमूरलंग, आरामशाह, इल्तुतमिश, रुकुनुद्दीन फिरोजशाह, मुइजुद्दीन बहरामशाह, अलाउद्दीन मसूद, नसीरुद्दीन महमूद, गयासुद्दीन बलबन, जलालुद्दीन खिलजी, शिहाबुद्दीन उमर खिलजी, कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी, नसरत शाह तुगलक, महमूद तुगलक, खिज्र खां, मुबारक शाह, मुहम्मद शाह, अलाउद्दीन आलम शाह, बहलोल लोदी, सिकंदर शाह लोदी, बाबर, नूरुद्दीन सलीम जहांगीर,
~अपने हरम में "8000 रखैलें रखने वाला शाहजहाँ"।
~ इसके आगे अपने ही दरबारियों और कमजोर मुसलमानों की औरतों से अय्याशी करने के लिए "मीना बाजार" लगवाने वाला "जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर"।
~मुहीउद्दीन मुहम्मद से लेकर औरंगजेब तक बलात्कारियों की ये सूची बहुत लम्बी है। जिनकी फौजों ने हारे हुए राज्य की लाखों "काफिर महिलाओं" "(माल-ए-गनीमत)" का बेरहमी से बलात्कार किया और "जेहाद के इनाम" के तौर पर कभी वस्तुओं की तरह "सिपहसालारों" में बांटा तो कभी बाजारों में "जानवरों की तरह उनकी कीमत लगायी" गई।
~ये असहाय और बेबस महिलाएं "हरमों" से लेकर "वेश्यालयों" तक में पहुँची। इनकी संतानें भी हुईं पर वो अपने मूलधर्म में कभी वापस नहीं पहुँच पायीं।
~एकबार फिर से बता दूँ कि मुस्लिम "आक्रमणकारी" अपने साथ "औरतों" को लेकर नहीं आए थे।
~वास्तव में मध्यकालीन भारत में मुगलों द्वारा "पराजित काफिर स्त्रियों का बलात्कार" करना एक आम बात थी क्योंकि वो इसे "अपनी जीत" या "जिहाद का इनाम" (माल-ए-गनीमत) मानते थे।
~केवल यही नहीं इन सुल्तानों द्वारा किये अत्याचारों और असंख्य बलात्कारों के बारे में आज के किसी इतिहासकार ने नहीं लिखा।
~बल्कि खुद इन्हीं सुल्तानों के साथ रहने वाले लेखकों ने बड़े ही शान से अपनी कलम चलायीं और बड़े घमण्ड से अपने मालिकों द्वारा काफिरों को सबक सिखाने का विस्तृत वर्णन किया।
~गूगल के कुछ लिंक्स पर क्लिक करके हिन्दुओं और हिन्दू महिलाओं पर हुए "दिल दहला" देने वाले अत्याचारों के बारे में विस्तार से जान पाएँगे। वो भी पूरे सबूतों के साथ।
~इनके सैकड़ों वर्षों के खूनी शासनकाल में भारत की हिन्दू जनता अपनी महिलाओं का सम्मान बचाने के लिए देश के एक कोने से दूसरे कोने तक भागती और बसती रहीं।
~इन मुस्लिम बलात्कारियों से सम्मान-रक्षा के लिए हजारों की संख्या में हिन्दू महिलाओं ने स्वयं को जौहर की ज्वाला में जलाकर भस्म कर लिया।
~ठीक इसी काल में कभी स्वच्छंद विचरण करने वाली भारतवर्ष की हिन्दू महिलाओं को भी मुस्लिम सैनिकों की दृष्टि से बचाने के लिए पर्दा-प्रथा की शुरूआत हुई।
~महिलाओं पर अत्याचार और बलात्कार का इतना घिनौना स्वरूप तो 17वीं शताब्दी के प्रारंभ से लेकर 1947 तक अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में भी नहीं दिखीं। अंग्रेजों ने भारत को बहुत लूटा परन्तु बलात्कारियों में वे नहीं गिने जाते।
~1946 में मुहम्मद अली जिन्ना के डायरेक्टर एक्शन प्लान, 1947 विभाजन के दंगों से लेकर 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम तक तो लाखों काफिर महिलाओं का बलात्कार हुआ या फिर उनका अपहरण हो गया। फिर वो कभी नहीं मिलीं।
~इस दौरान स्थिती ऐसी हो गयी थी कि "पाकिस्तान समर्थित मुस्लिम बहुल इलाकों" से "बलात्कार" किये बिना एक भी "काफिर स्त्री" वहां से वापस नहीं आ सकती थी।
~जो स्त्रियाँ वहां से जिन्दा वापस आ भी गयीं वो अपनी जांच करवाने से डरती थी।
~जब डॉक्टर पूछते क्यों तब ज्यादातर महिलाओं का एक ही जवाब होता था कि "हमपर कितने लोगों ने बलात्कार किये हैं ये हमें भी पता नहीं"।
~विभाजन के समय पाकिस्तान के कई स्थानों में सड़कों पर काफिर स्त्रियों की "नग्न यात्राएं (धिंड) "निकाली गयीं, "बाज़ार सजाकर उनकी बोलियाँ लगायी गयीं"
और 10 लाख से ज्यादा की संख्या में उनको दासियों की तरह खरीदा बेचा गया।
20 लाख से ज्यादा महिलाओं को जबरन मुस्लिम बना कर अपने घरों में रखा गया। (देखें फिल्म "पिंजर" और पढ़ें पूरा सच्चा इतिहास गूगल पर)।
Ex muslim Movment pinned «~फिर आया 1001 इस्वी में "गजनवी"। इसके बारे में ये कहा जाता है कि इसने "इस्लाम को फ़ैलाने" के उद्देश्य से ही आक्रमण किया था। "सोमनाथ के मंदिर" को तोड़ने के बाद इसकी सेना ने हजारों "काफिर औरतों" का बलात्कार किया फिर उनको अफगानिस्तान ले जाकर "बाजारों में बोलियाँ"…»
~इस विभाजन के दौर में हिन्दुओं को मारने वाले सबके सब विदेशी नहीं थे। इन्हें मारने वाले स्थानीय मुस्लिम भी थे।
~वे समूहों में कत्ल से पहले हिन्दुओं के अंग-भंग करना, आंखें निकालना, नाखुन खींचना, बाल नोचना, जिंदा जलाना, चमड़ी खींचना खासकर महिलाओं का बलात्कार करने के बाद उनके "स्तनों को काटकर" तड़पा-तड़पा कर मारना आम बात थी।
अंत में कश्मीर की बात~
19 जनवरी 1990
सारे कश्मीरी पंडितों के घर के दरवाजों पर नोट लगा दिया जिसमें लिखा था "या तो मुस्लिम बन जाओ या मरने के लिए तैयार हो जाओ या फिर कश्मीर छोड़कर भाग जाओ लेकिन अपनी औरतों को यहीं छोड़कर "।
~लखनऊ में विस्थापित जीवन जी रहे कश्मीरी पण्डित संजय बहादुर उस मंजर को याद करते हुए आज भी सिहर जाते हैं।
~वह कहते हैं कि "मस्जिदों के लाउडस्पीकर" लगातार तीन दिन तक यही आवाज दे रहे थे कि यहां क्या चलेगा, "निजाम-ए-मुस्तफा", 'आजादी का मतलब क्या "ला इलाहा इलल्लाह", 'कश्मीर में अगर रहना है, "अल्लाह-ओ-अकबर" कहना है।
~और 'असि गच्ची पाकिस्तान, बताओ "रोअस ते बतानेव सान" जिसका मतलब था कि हमें यहां अपना पाकिस्तान बनाना है, कश्मीरी पंडितों के बिना मगर कश्मीरी पंडित महिलाओं के साथ।
~सदियों का भाईचारा कुछ ही समय में समाप्त हो गया जहाँ पंडितों से ही तालीम हासिल किए लोग उनकी ही महिलाओं की अस्मत लूटने को तैयार हो गए थे।
~सारे कश्मीर की मस्जिदों में एक टेप चलाया गया। जिसमें मुस्लिमों को कहा गया की वो हिन्दुओं को कश्मीर से निकाल बाहर करें। उसके बाद कश्मीरी मुस्लिम सड़कों पर उतर आये।
~उन्होंने कश्मीरी पंडितों के घरों को जला दिया, कश्मीर पंडित महिलाओ का बलात्कार करके, फिर उनकी हत्या करके उनके "नग्न शरीर को पेड़ पर लटका दिया गया"।
~कुछ महिलाओं को बलात्कार कर जिन्दा जला दिया गया और बाकियों को लोहे के गरम सलाखों से मार दिया गया।
~कश्मीरी पंडित नर्स जो श्रीनगर के सौर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में काम करती थी, का सामूहिक बलात्कार किया गया और मार मार कर उसकी हत्या कर दी गयी।
~बच्चों को उनकी माँओं के सामने स्टील के तार से गला घोंटकर मार दिया गया।
~कश्मीरी काफिर महिलाएँ पहाड़ों की गहरी घाटियों और भागने का रास्ता न मिलने पर ऊंचे मकानों की छतों से कूद कूद कर जान देने लगी।
~लेखक राहुल पंडिता उस समय 14 वर्ष के थे। बाहर माहौल ख़राब था। मस्जिदों से उनके ख़िलाफ़ नारे लग रहे थे। पीढ़ियों से उनके भाईचारे से रह रहे पड़ोसी ही कह रहे थे, 'मुसलमान बनकर आज़ादी की लड़ाई में शामिल हो या वादी छोड़कर भागो'।
~राहुल पंडिता के परिवार ने तीन महीने इस उम्मीद में काटे कि शायद माहौल सुधर जाए। राहुल आगे कहते हैं, "कुछ लड़के जिनके साथ हम बचपन से क्रिकेट खेला करते थे वही हमारे घर के बाहर पंडितों के ख़ाली घरों को आपस में बांटने की बातें कर रहे थे और हमारी लड़कियों के बारे में गंदी बातें कह रहे थे। ये बातें मेरे ज़हन में अब भी ताज़ा हैं।
~1989 में कश्मीर में जिहाद के लिए गठित जमात-ए-इस्लामी संगठन का नारा था- 'हम सब एक, तुम भागो या मरो'।
~घाटी में कई कश्मीरी पंडितों की बस्तियों में सामूहिक बलात्कार और लड़कियों के अपहरण किए गए। हालात और बदतर हो गए थे।
~कुल मिलाकर हजारों की संख्या में काफिर महिलाओं का बलात्कार किया गया।
आप जिस जन्नत कश्मीर घूमकर मजे लेने जाते हैं और वहाँ के लोगों को रोजगार देने जाते हैं। उसी कश्मीर की हसीन वादियों में आज भी सैकड़ों कश्मीरी हिन्दू बेटियों की बेबस कराहें गूंजती हैं, जिन्हें केवल काफिर होने की सजा मिली।
~घर, बाजार, हाट, मैदान से लेकर उन खूबसूरत वादियों में न जाने कितनी जुल्मों की दास्तानें दफन हैं जो आज तक अनकही हैं। घाटी के खाली, जले मकान यह चीख-चीख के बताते हैं कि रातों-रात दुनिया जल जाने का मतलब कोई हमसे पूछे। झेलम का बहता हुआ पानी उन रातों की वहशियत के गवाह हैं जिसने कभी न खत्म होने वाले दाग इंसानियत के दिल पर दिए।
~लखनऊ में विस्थापित जीवन जी रहे कश्मीरी पंडित रविन्द्र कोत्रू के चेहरे पर अविश्वास की सैकड़ों लकीरें पीड़ा की शक्ल में उभरती हुईं बयान करती हैं कि यदि आतंक के उन दिनों में घाटी की मुस्लिम आबादी ने उनका साथ दिया होता जब उन्हें वहां से खदेड़ा जा रहा था, उनके साथ कत्लेआम हो रहा था तो किसी भी आतंकवादी में ये हिम्मत नहीं होती कि वह किसी कश्मीरी पंडित को चोट पहुंचाने की सोच पाता लेकिन तब उन्होंने हमारा साथ देने के बजाय कट्टरपंथियों के सामने घुटने टेक दिए थे या उनके ही लश्कर में शामिल हो गए थे।
~अभी हाल में ही आपलोगों ने टीवी पर "अबू बकर अल बगदादी" के जेहादियों को काफिर "यजीदी महिलाओं" को रस्सियों से बाँधकर कौड़ियों के भाव बेचते देखा होगा।
❤1
Ex muslim Movment pinned «~इस विभाजन के दौर में हिन्दुओं को मारने वाले सबके सब विदेशी नहीं थे। इन्हें मारने वाले स्थानीय मुस्लिम भी थे। ~वे समूहों में कत्ल से पहले हिन्दुओं के अंग-भंग करना, आंखें निकालना, नाखुन खींचना, बाल नोचना, जिंदा जलाना, चमड़ी खींचना खासकर महिलाओं का बलात्कार…»
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आजकल ये मुस्लटे बहुत ज्यादा ही कर रहे हैं -- सनातन धर्म पर डिबेट करते हैं, अगैरा - वगैरह

चलो आज देख लेते है फिर 👇👇

वेद का ईश्वर और कुरान का अल्लाह एक नहीं हैं।


१) ईश्वर सर्वव्यापक (omnipresent) है, जबकि अल्लाह सातवें आसमान पर रहने वाला एकदेशीय है.
२) ईश्वर सर्वशक्तिमान (omnipotent) है, वह कार्य करने में किसी की सहायता नहीं लेता, जबकि अल्लाह को फरिश्तों और जिन्नों जैसे आने-जाने वाले शरीरधारियों की सहायता लेनी पडती है.
३) ईश्वर न्यायकारी है, वह जीवों के कर्मानुसार नित्य न्याय करता है, जबकि अल्लाह जीवनभर न्याय पेंडिंग रखकर केवल क़यामत के दिन ही न्याय करता है, और वह भी उनका जो की कब्रों में दफनाये गए हैं.
४) ईश्वर क्षमाशील नहीं, वह दुष्टों को दण्ड अवश्य देता है, जबकि अल्लाह दुष्टों, बलात्कारियों के पाप क्षमा कर देता है. मुसलमान बनने वाले के पाप माफ़ कर जन्नत की गारंटी देता है।
५) ईश्वर कहता है, "मनुष्य बनों" मनु॑र्भव ज॒नया॒ दैव्यं॒ जन॑म् - ऋग्वेद 10.53.6,
जबकि अल्लाह कहता है, मुसलमान बनों, फिर चाहे जितने भी पाप करो वे सब क्षमा होंगे ! सूरा-2, अलबकरा पारा-1, आयत-134,135,136
६) ईश्वर सर्वज्ञ है, जीवों के कर्मों की अपेक्षा से तीनों कालों की बातों को जानता है, जबकि अल्लाह अल्पज्ञ है, उसे पता ही नहीं था की शैतान उसकी आज्ञा पालन नहीं करेगा कि नहीं, अन्यथा शैतान को पैदा क्यों करता ?
७) ईश्वर निराकार होने से शरीर-रहित है, जबकि अल्लाह शरीर वाला है, एक आँख से देखता है.

मैंने (ईश्वर) ने इस कल्याणकारी वेदवाणी को सब लोगों के कल्याण के लिए दिया हैं-
यजुर्वेद 26/
''अल्लाह भेदभाव रखता है वह 'काफिर' लोगों (गैर-मुस्लिमों ) को मार्ग नहीं दिखाता'' (१०.९.३७ पृ. ३७४) (कुरान 9:37) .
८- ईशवर कहता है सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनांसि जानताम् ।
देवां भागं यथापूर्वे संजानाना उपासते ।।-(ऋ० १०/१९१/२)
अर्थ:-हे मनुष्यो ! मिलकर चलो,परस्पर मिलकर बात करो। तुम्हारे चित्त एक-समान होकर ज्ञान प्राप्त करें। जिस प्रकार पूर्व विद्वान,ज्ञानीजन सेवनीय प्रभु को जानते हुए उपासना करते आये हैं, वैसे ही तुम भी किया करो।
क़ुरान का अल्ला लड़ाई झगडे चाहता है कहता है ''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों) उन 'काफिरों' (गैर-मुस्लिमों) से लड़ो जो तुम्हारे आस पास हैं, और चाहिए कि वे तुममें सख्ती पायें।'' (११.९.१२३ पृ. ३९१) (कुरान 9:123) .
९- अज्येष्ठासो अकनिष्ठास एते सं भ्रातरो वावृधुः सौभाय ।-(ऋग्वेद ५/६०/५)
अर्थ:- वेद का ईश्वर कहता है कि हे संसार के लोगों ! न तो तुममें कोई बड़ा है और न छोटा। तुम सब भाई-भाई हो। सौभाग्य की प्राप्ति के लिए मिलकर आगे बढ़ो।
पर कुरान का अल्लाह भेदभाव करता है कहता है ''हे 'ईमान' लाने वालों (केवल एक आल्ला को मानने वालों ) 'मुश्रिक' काफिरों (मूर्तिपूजक) नापाक (अपवित्र) हैं।'' (१०.९.२८ पृ. ३७१) (कुरान 9:28)
१० क़ुरान का अल्ला अज्ञानी है वे मुसलमानों का इम्तिहान लेता है तभी तो इब्राहीम से पुत्र की क़ुर्बानी माँगीं।
वेद का ईश्वर सर्वज्ञ अर्थात मन की बात को भी जानता है उसे इम्तिहान लेने की अवशयकता ही नहीं।
११ अल्ला दयालु नहीं,वह जीवों के और काफ़िरों के प्राण लेकर खुश होता है।
लेकिन वेद का ईश्वर मानव व जीवों पर समग्र सेवा भलाई दया परोपकार करने पर खुश होता है।
ऐसे तो अनेक प्रमाण हैं, किन्तु इतने से ही बुद्धिमान लोग समझ जायेंगे की ईश्वर और अल्लाह एक नहीं हैं.
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कुरान की प्रामाणिकता:

सहीह मुस्लिम के हदिशों में बच्ची आयशा बोलती है को कुरान में दस बार और पांच बार स्तन पान करवाने को आयात उतरी थी जो की हिजड़े मुहम्मद के मौत से पहले कुरान में मोजूद थी लेकिन आज वह आयत कुरान में कहीं नहीं मिलती।

सहिह मुस्लिम की रिवायत है मुल्लों इसलिए Sunan Ibn majah वाला रोना मत रोना। 😂😂
9_Muhammad Weds Khadija 🤑🏧 :
🥃 Against her father's permission
•• Sirat Halbiyah vol 1 page 434-435
•• Musnad Ahmed 2705
•• Al Tabari vol 6 Page 49
•• Al Sira Nabawiyya bol 1 page 417
10_Safiyya (17) weds Muhammad (59) 🥀🔞
•• Life of Muhammad by ibn ishak 464
•• Al Tabari vol 8 Page 117
•• Qur'an 48:20 + Bukhari 4197
✓ Al Tabari vol 8 Page 122-123
•• Sahi Bukhari 335, + Sahi Muslim 1365f
•• Life of Muh. by al waqidi's kitab al maghazi 331
•• Sirat Rasul Ibn ishaq 511 + Muslim 1365
•• Qur'an 33:21 + Sahi Bukhari 4212, 371
11_Women and Islam ( the first victims ) 🥀
✓ Child marriage→ Qur'an 65:4
✓ Hijab→Qur'an 33:59→ibn kathir
→ Bukhari 146, 4795 + Muslim 2170ad
→ Imam muwatta malik book 30 No.14,12
→ Musannaf ibn abi Shaybah 6382
✓ Qur'an 4:23→lust daughter divorce mother
✓ Qur'an 25:54→illegal beti se nikah + fatwa 78597
✓ Mut'ah marriage → Qur'an 5:87 + Muslim 1404a, 1405ace, 1406a + Bukhari 4518, 4615 + majah 1962

गर्भवती is Always गर्भवती
हिजड़ा is Always हिजड़ा
गर्भवती अल्लाह के हिजड़े रसूल का गुप्तरोग

📝Muhammad a Mystery.🤡

- Mohammad ka Baap kaun?

PART - 1

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