Hindu Panchang Daily - प्रतिदिन हिन्दू पंचांग
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📌 सभी प्रमुख हिंदू तिथियाँ और पर्व

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आज यानी 7 सितंबर 2025 को लगने वाले
चंद्र ग्रहण का समय (भारत – IST)

सूतक काल यानी ग्रहण का अशुभ पूर्वाभास दोपहर 12:57 बजे से शुरू होता है।

ग्रहण रात 9:58 बजे शुरू होगा और रात 1:26–1:27 बजे तक चलेगा।

ग्रहण का चरम (पीक) रात 11:41 बजे होगा।

कुल अवधि लगभग 3 ½ घंटे (3:28) है।



अध्ययन करने योग्य बातें (क्या करें और क्या न करें)

सूतक काल (दोपहर 12:57 से रात तक)

क्या न करें:

इस बीच भोजन, खाना पकाना, और शुभ या मांगलिक कार्य नहीं करें।

पूजा-पाठ, मंदिर जाना, देवी-देवता की मूर्ति को छूना ये सब निषिद्ध माने गए हैं।


विशेष छूट (बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं के लिए):

इनके लिए सूतक केवल शाम 6:35–6:36 बजे से माना जाएगा—यानी उससे पहले वो रोजमर्रा के कार्य कर सकते हैं।



ग्रहण समय (रात 9:58 – 1:26 बजे)

क्या करें:

ध्यान, मंत्र जप (जैसे शिव-मंत्र), पूजा–अर्चना करना शुभ माना जाता है।

इस समय प्रार्थना, चंद्र देव का जाप, दान, ध्यान, मेडिटेशन जैसे आध्यात्मिक कार्य किए जा सकते हैं।


विशेष उपाय:

ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें, घर या मंदिर की सफाई करें, गंगाजल छिड़काव, श्रद्धा से पूजा और दान– जैसे चावल, दूध, दही, गुड़ आदि राशियों के अनुसार दें।




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राशियों (ज्योतिष अनुसार) पर प्रभाव और सलाह

ज्योतिषीय दृष्टि से यह ग्रहण कुंभ राशि व पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में लग रहा है, जिसमें राहु और चंद्रमा की युति है—यह अशुभ योग माना जाता है।

राशियों पर प्रभाव:

मेष, वृषभ, मिथुन, कन्या, सिंह, धनु, मीन—कुछ राशियों के लिए वित्तीय लाभ, यात्रा, आत्मविश्वास के योग बन रहे हैं।

वृषभ, मिथुन, सिंह, तुला, कुंभ—कुछ राशियों को सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई है।


कुछ लेखों में परावैदिक सलाह (जैसे दान की रंग-बिरंगी वस्तुएँ राशि अनुसार) भी बताए गए हैं:

उदाहरण: मेष–लाल, वृषभ और तुला–सफेद, मिथुन/कन्या–हरी, सिंह/धनु/मीन–पीली, मकर/कुंभ–काली वस्तुएँ दान करें।




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संक्षेप सारांश तालिका

समय/अवस्था क्या करना/नहीं करना

दोपहर 12:57 onwards भोजन, पूजा, शुभ कार्य टालें
शाम 6:35 से पहले बच्चों, बुजुर्ग, गर्भवती कर सकते हैं कुछ गतिविधियाँ
रात 9:58 – 1:26 मंत्र-जप, ध्यान, पूजा करें
रात 11:41 (पीक) सर्वोच्च प्रभावकाल
शास्त्रानुसार उपाय स्नान, गंगाजल, सफाई, दान
*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*
*दिनांक - 08 सितम्बर 2025*
*दिन - सोमवार*
*विक्रम संवत् - 2082*
*अयन - दक्षिणायण*
*ऋतु - शरद*
*मास - आश्विन*
*पक्ष - कृष्ण*
*तिथि - प्रतिपदा रात्रि 09:11  तक तत्पश्चात् द्वितीया*
*नक्षत्र - पूर्व भाद्रपद रात्रि 08:02 तक तत्पश्चात् उत्तर भाद्रपद*
*योग - धृति सुबह 06:30 तक, तत्पश्चात् शूल रात्रि 03:20 सितम्बर 09 तक, तत्पश्चात् गण्ड*
*राहुकाल - सुबह 07:44 से सुबह 09:18 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*सूर्योदय - 06:11*
*सूर्यास्त - 06:37 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*दिशा शूल - पूर्व दिशा में*
*ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:39 से प्रातः 05:25 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:59 से दोपहर 12:49 (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:01 सितम्बर 09 से रात्रि 12:48 सितम्बर 09 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅️व्रत पर्व विवरण - प्रतिपदा का श्राद्ध*
*⛅️विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

*🌹महालय श्राद्ध आरम्भ - 7-21 सितम्बर🌹*

*🔹श्राद्ध में रखें ये सावधानियाँ🔹*

*🔸पितरों को खिलाये बिना नहीं खायें । पराया अन्न भी नहीं खाना चाहिए ।*

*🔸श्राद्धकर्ता श्राद्ध पक्ष में पान खाना, तेल-मालिश, स्त्री-सम्भोग, संग्रह आदि न करें ।*

*🔸श्राद्ध का भोक्ता दुबारा भोजन तथा यात्रा आदि न करें । श्राद्ध खाने के बाद परिश्रम और प्रतिग्रह से बचें ।*

*🔸श्राद्ध करनेवाला व्यक्ति ३ से ज्यादा ब्राह्मणों तथा ज्यादा रिश्तेदारों को न बुलायें ।*

*🔸श्राद्ध के दिनों में ब्रह्मचर्य व सत्य का पालन करें और ब्राह्मण भी ब्रह्मचर्य का पालन करके श्राद्ध ग्रहण करने आये ।*

*🔹श्राद्ध में उत्तम क्या ?🔹*

*🔸तीन चीजें श्राद्ध में प्रशंसनीय हैं :*
*(१)शुद्धि*
*(२) अक्रोध*
*(३) अत्वरितता : जल्दबाजी नहीं, धैर्य ।*

*🔸तीन चीजें श्राद्ध में पवित्र होती हैं :*
*(१) तिल*
*(२) बेटी का बेटा दौहित्र*
*(३) कुतपकाल*

*🔸 सुबह 11:36 से लेकर 12:24 तक विशेषकाल माना जाता है । थोड़ा आगे-पीछे हो जाय तो कोई बात नहीं लेकिन इस काल में श्राद्ध की विशेष पवित्रता होती है ।*

*🔸श्राद्धकाल में सात विशेष शुद्धियों का ध्यान रखना चाहिए :*
*(1) नहा-धोकर शरीर शुद्ध हो ।*
*(2) श्राद्ध की द्रव्य-वस्तु शुद्ध हो ।*
*(3) स्त्री शुद्ध हो, मासिक धर्म में न हो ।*
*(4) जहाँ श्राद्ध करते हैं वह भूमि शुद्ध हो । गोझरण से, देशी गाय के गोबर से लीपन की हुई हो ।*
*(5) मंत्र का शुद्ध उच्चारण करें ।*
*(6) ब्राह्मण भी शुद्ध भाववाला हो और तम्बाकू, जर्दा आदि का सेवन न करता हो ।*
*(7) मन को भी शुद्ध रखें ।*

*- 📖 ऋषि प्रसाद अगस्त 2014*
*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*
*दिनांक - 09 सितम्बर 2025*
*दिन - मंगलवार*
*विक्रम संवत् - 2082*
*अयन - दक्षिणायण*
*ऋतु - शरद*
*मास - आश्विन*
*पक्ष - कृष्ण*
*तिथि - द्वितीया शाम 06:28 तक तत्पश्चात् तृतीया*
*नक्षत्र - उत्तर भाद्रपद शाम 06:07 तक तत्पश्चात् रेवती*
*योग - गण्ड रात्रि 11:59 तक तत्पश्चात् वृद्धि*
*राहुकाल - दोपहर 03:30 से शाम 05:03 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*सूर्योदय - 06:12*
*सूर्यास्त - 06:36 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*दिशा शूल - उत्तर दिशा में*
*ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:39 से प्रातः 05:25 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:59 से दोपहर 12:49 (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:01 सितम्बर 10 से रात्रि 12:47 सितम्बर 10 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅️व्रत पर्व विवरण - द्वितीया का श्राद्ध, सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 06:12 से शाम 06:07 तक)*
*⛅️विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

*🔹श्राद्धयोग्य तिथियाँ🔹*

*🔸ऊँचे में ऊँचा, सबसे बढ़िया श्राद्ध श्राद्धपक्ष की तिथियों में होता है । हमारे पूर्वज जिस तिथि में इस संसार से गये हैं, श्राद्धपक्ष में उसी तिथि को किया जाने वाला श्राद्ध सर्वश्रेष्ठ होता है ।*

*🔸जिनके दिवंगत होने की तिथि याद न हो, उनके श्राद्ध के लिए अमावस्या की तिथि उपयुक्त मानी गयी है । बाकी तो जिनकी जो तिथि हो, श्राद्धपक्ष में उसी तिथि पर बुद्धिमानों को श्राद्ध करना चाहिए ।*

*🔸जो पूर्णमासी के दिन श्राद्धादि करता है उसकी बुद्धि, पुष्टि, स्मरणशक्ति, धारणाशक्ति, पुत्र-पौत्रादि एवं ऐश्वर्य की वृद्धि होती। वह पर्व का पूर्ण फल भोगता है ।*

*🔸प्रतिपदा धन-सम्पत्ति के लिए होती है एवं श्राद्ध करनेवाले की प्राप्त वस्तु नष्ट नहीं होती ।*

*🔸द्वितिया को श्राद्ध करने वाला व्यक्ति राजा होता है ।*

*🔸उत्तम अर्थ की प्राप्ति के अभिलाषी को तृतिया विहित है। यही तृतिया शत्रुओं का नाश करने वाली और पाप नाशिनी है ।*

*🔸जो चतुर्थी को श्राद्ध करता है वह शत्रुओं का छिद्र देखता है अर्थात उसे शत्रुओं की समस्त कूटचालों का ज्ञान हो जाता है ।*

*🔸पंचमी तिथि को श्राद्ध करने वाला उत्तम लक्ष्मी की प्राप्ति करता है ।*

*🔸जो षष्ठी तिथि को श्राद्धकर्म संपन्न करता है उसकी पूजा देवता लोग करते हैं ।*

*🔸जो सप्तमी को श्राद्धादि करता है उसको महान यज्ञों के पुण्यफल प्राप्त होते हैं और वह गणों का स्वामी होता है ।*

*🔸जो अष्टमी को श्राद्ध करता है वह सम्पूर्ण समृद्धियाँ प्राप्त करता है ।*

*🔸नवमी तिथि को श्राद्ध करने वाला प्रचुर ऐश्वर्य एवं मन के अनुसार अनुकूल चलने वाली स्त्री को प्राप्त करता है ।*

*🔸दशमी तिथि को श्राद्ध करने वाला मनुष्य ब्रह्मत्व की लक्ष्मी प्राप्त करता है ।*

*🔸एकादशी का श्राद्ध सर्वश्रेष्ठ दान है। वह समस्त वेदों का ज्ञान प्राप्त कराता है । उसके सम्पूर्ण पापकर्मों का विनाश हो जाता है तथा उसे निरंतर ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है ।*

*🔸द्वादशी तिथि के श्राद्ध से राष्ट्र का कल्याण तथा प्रचुर अन्न की प्राप्ति कही गयी है ।*

*🔸त्रयोदशी के श्राद्ध से संतति, बुद्धि, धारणाशक्ति, स्वतंत्रता, उत्तम पुष्टि, दीर्घायु तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है ।*

*🔸चतुर्दशी का श्राद्ध जवान मृतकों के लिए किया जाता है तथा जो हथियारों द्वारा मारे गये हों उनके लिए भी चतुर्दशी को श्राद्ध करना चाहिए ।*

*🔸अमावस्या का श्राद्ध समस्त विषम उत्पन्न होने वालों के लिए अर्थात तीन कन्याओं के बाद पुत्र या तीन पुत्रों के बाद कन्याएँ हों उनके लिए होता ह । जुड़वे उत्पन्न होने वालों के लिए भी इसी दिन श्राद्ध करना चाहिए ।*

*🔸सधवा अथवा विधवा स्त्रियों का श्राद्ध आश्विन (गुजरात-महाराष्ट्र के मुताबिक भाद्रपद) कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि के दिन किया जाता है ।*

*🔸बच्चों का श्राद्ध कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है ।*

*🔸दुर्घटना में अथवा युद्ध में घायल होकर मरने वालों का श्राद्ध कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है ।*

*🔸जो इस प्रकार श्राद्धादि कर्म संपन्न करते हैं वे समस्त मनोरथों को प्राप्त करते हैं और अनंत काल तक स्वर्ग का उपभोग करते हैं । मघा नक्षत्र पितरों को अभीष्ट सिद्धि देने वाला है । अतः उक्त नक्षत्र के दिनों में किया गया श्राद्ध अक्षय कहा गया है । पितृगण उसे सर्वदा अधिक पसंद करते हैं ।*

*🔸जो व्यक्ति अष्टकाओं में पितरों की पूजा आदि नहीं करते उनका यह जो इन अवसरों पर श्राद्धादि का दान करते हैं वे देवताओं के समीप अर्थात् स्वर्गलोक को जाते हैं और जो नहीं करते वे तिर्यक्(पक्षी आदि अधम) योनियों में जाते हैं ।*

*🔶 रात्रि के समय श्राद्धकर्म निषिद्ध है । (वायु पुराणः 78.3)*
*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*
*दिनांक - 12 सितम्बर 2025*
*दिन - शुक्रवार*
*विक्रम संवत् - 2082*
*अयन - दक्षिणायण*
*ऋतु - शरद*
*मास - आश्विन*
*पक्ष - कृष्ण*
*तिथि - पञ्चमी सुबह 09:58 तक तत्पश्चात् षष्ठी*
*नक्षत्र - भरणी सुबह 11:58 तक तत्पश्चात् कृत्तिका*
*योग - व्याघात दोपहर 01:44 तक तत्पश्चात् हर्षण*
*राहुकाल - सुबह 10:50 से दोपहर 12:23 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*सूर्योदय - 06:12*
*सूर्यास्त - 06:33 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*दिशा शूल - पश्चिम दिशा में*
*ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:39 से प्रातः 05:26 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:58 से दोपहर 12:48 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:00 सितम्बर 13 से रात्रि 12:46 सितम्बर 13 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅️व्रत पर्व विवरण - पञ्चमी व षष्ठी का श्राद्ध, मासिक कार्तिगाई*
*⛅️विशेष - पञ्चमी को बेल फल खाने से कलंक लगता है व षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातून मुंह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

*🔹जीवन में उपयोगी नियम ( भाग - २)🔹*

*🔸11. अश्लील पुस्तक आदि न पढ़कर ज्ञानवर्धक पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए ।*

*🔸12. चोरी कभी न करो ।*

*🔸13. किसी की भी वस्तु लें तो उसे सँभाल कर रखो । कार्य पूरा हो फिर तुरन्त ही वापिस दे दो ।*

*🔸14. समय का महत्त्व समझो । व्यर्थ बातें, व्यर्थ काम में समय न गँवाओ । नियमित तथा समय पर काम करो ।*

*🔸15. स्वावलंबी बनो । इससे मनोबल बढ़ता है ।*

*🔸16. हमेशा सच बोलो । किसी की लालच या धमकी में आकर झूठ का आश्रय न लो ।*

*🔸17. अपने से छोटे दुर्बल बालकों को अथवा किसी को भी कभी सताओ मत । हो सके उतनी सबकी मदद करो ।*

*🔸18. अपने मन के गुलाम नहीं परन्तु मन के स्वामी बनो । तुच्छ इच्छाओं की पूर्ति के लिए कभी स्वार्थी न बनो ।*

*🔸19. किसी का तिरस्कार, उपेक्षा, हँसी-मजाक कभी न करो । किसी की निंदा न करो और न सुनो ।*

*🔸20. किसी भी व्यक्ति, परिस्थिति या मुश्किल से कभी न डरो परन्तु हिम्मत से उसका सामना करो ।*
*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*
*दिनांक - 13 सितम्बर 2025*
*दिन - शनिवार*
*विक्रम संवत् - 2082*
*अयन - दक्षिणायण*
*ऋतु - शरद*
*मास - आश्विन*
*पक्ष - कृष्ण*
*तिथि - षष्ठी सुबह 07:23 तक, तत्पश्चात् सप्तमी प्रातः 05:04 सितम्बर 14 तक, तत्पश्चात् अष्टमी*
*नक्षत्र - कृत्तिका सुबह 10:11 तक तत्पश्चात् रोहिणी*
*योग - हर्षण सुबह 10:32 तक तत्पश्चात् वज्र*
*राहुकाल - सुबह 09:18 से सुबह 10:50 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*सूर्योदय - 06:13*
*सूर्यास्त - 06:32 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*दिशा शूल - पूर्व दिशा में*
*ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:40 से प्रातः 05:26 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:58 से दोपहर 12:47 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:59 से रात्रि 12:46 सितम्बर 14 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅️व्रत पर्व विवरण - षष्ठी व सप्तमी का श्राद्ध, त्रिपुष्कर योग, अमृत सिद्धियोग, सर्वार्थ सिद्धियोग (प्रातः 07:23 से प्रातः 06:26 सितम्बर 14 तक)*
*⛅️विशेष - सप्तमी को ताड़ फल खाने से रोग बढ़ता है व शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

*🔹ॐ कार का अर्थ एवं महत्त्व🔹*

*🔸ॐ = अ+उ+म+(ँ) अर्ध तन्मात्रा । ॐ का अ कार स्थूल जगत का आधार है। उ कार सूक्ष्म जगत का आधार है । म कार कारण जगत का आधार है । अर्ध तन्मात्रा (ँ) जो इन तीनों जगत से प्रभावित नहीं होता बल्कि तीनों जगत जिससे सत्ता-स्फूर्ति लेते हैं फिर भी जिसमें तिलभर भी फर्क नहीं पड़ता, उस परमात्मा का द्योतक है ।*

*🔸ॐ आत्मिक बल देता है । ॐ के उच्चारण से जीवनशक्ति उर्ध्वगामी होती है । इसके सात बार के उच्चारण से शरीर के रोग को कीटाणु दूर होने लगते हैं एवं चित्त से हताशा-निराशा भी दूर होतीहै । यही कारण है कि ऋषि-मुनियों ने सभी मंत्रों के आगे ॐ जोड़ा है । शास्त्रों में भी ॐ की बड़ी भारी महिमा गायी गयी है ।*

*🔸भगवान शंकर का मंत्र हो तो ॐ नमः शिवाय । भगवान गणपति का मंत्र हो तो ॐ गणेशाय नमः। भगवान राम का मंत्र हो तो ॐ रामाय नमः । श्री कृष्ण मंत्र हो तो ॐ नमो भगवते वासुदेवाय । माँ गायत्री का मंत्र हो तो ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गोदेवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। इस प्रकार सब मंत्रों के आगे ॐ तो जुड़ा ही है ।*

*पतंजलि महाराज ने कहा हैः तस्य वाचकः प्रणवः। ॐ (प्रणव) परमात्मा का वाचक है, उसकी स्वाभाविक ध्वनि है ।*

*🔸ॐ के रहस्य को जानने के लिए कुछ प्रयोग करने के बाद रूस के वैज्ञानिक भी आश्चर्यचकित हो उठे । उन्होंने प्रयोग करके देखा कि जब व्यक्ति बाहर एक शब्द बोले एवं अपने भीतर दूसरे शब्द का विचार करे तब उनकी सूक्ष्म मशीन में दोनों शब्द अंकित हो जाते थे । उदाहरणार्थ, बाहर के क कहा गया हो एवं भीतर से विचार ग का किया गया हो तो क और ग दोनों छप जाते थे। यदि बाहर कोई शब्द न बोले, केवल भीतर विचार करे तो विचारा गया शब्द भी अंकित हो जाता था ।*

*🔸किन्तु एकमात्र ॐ ही ऐसा शब्द था कि व्यक्ति केवल बाहर से ॐ बोले और अंदर दूसरा कोई भी शब्द विचारे फिर भी दोनों ओर का ॐ ही अंकित होता था। अथवा अंदर ॐ का विचार करे और बाहर कुछ भी बोले तब भी अंदर-बाहर का ॐ ही छपता था ।*

*🔸समस्त नामों में ॐ का प्रथम स्थान है। मुसलमान लोग भी अल्ला होssssss अकबर........ कहकर नमाज पढ़ते हैं जिसमें ॐ की ध्वनि का हिस्सा है ।*

*🔸सिख धर्म में भी एको ओंकार सतिनामु...... कहकर उसका लाभ उठाया जाता है । सिख धर्म का पहला ग्रन्थ है, जपुजी और जपुजी का पहला वचन हैः एको ओंकार सतिनामु.........*
*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*
*दिनांक - 14 सितम्बर 2025*
*दिन - रविवार*
*विक्रम संवत् - 2082*
*अयन - दक्षिणायण*
*ऋतु - शरद*
*मास - आश्विन*
*पक्ष - कृष्ण*
*तिथि - अष्टमी रात्रि 03:06 सितम्बर 15 तक तत्पश्चात् नवमी*
*नक्षत्र - रोहिणी सुबह 08:41 तक तत्पश्चात् मृगशिरा*
*योग - वज्र सुबह 07:35 तक, तत्पश्चात् सिद्धि प्रातः 04:55 सितम्बर 15 तक, तत्पश्चात् व्यतीपात*
*राहुकाल - शाम 04:59 से शाम 06:31 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*सूर्योदय - 06:13*
*सूर्यास्त - 06:31 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*दिशा शूल - पश्चिम दिशा में*
*ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:40 से प्रातः 05:26 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:58 से दोपहर 12:47 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:59 से रात्रि 12:46 सितम्बर 15 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅️व्रत पर्व विवरण - अष्टमी का श्राद्ध, राष्ट्रीय हिन्दी दिवस, जितिया व्रत, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, कालाष्टमी, महालक्ष्मी व्रत पूर्ण, रोहिणी व्रत*
*⛅️विशेष - अष्टमी को नारियल फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

*🔹परिक्रमा क्यों 🔹?*

*🔹 भगवत्प्राप्त संत-महापुरुष के व्यासपीठ या निवास स्थान की, उनके द्वारा शक्तिपात किये हुए वट या पीपल वृक्ष की, महापुरुषों के समाधि स्थल अथवा किसी देव प्रतिमा की किसी कामना या संकल्पपूर्ति हेतु जो परिक्रमा (प्रदक्षिणा) की जाती है उसके पीछे अत्यंत सूक्ष्म रहस्य छिपे हैं । इसके द्वारा मानवी मन की श्रद्धा समर्पण की भावना का सदुपयोग करते हुए उसे अत्यंत प्रभावशाली 'आभा विज्ञान' का लाभ दिलाने की सुंदर व्यवस्था हमारी संस्कृति में है ।*

*🔹प्रदक्षिणा में छिपे वैज्ञानिक रहस्य🔹*

*🔹देवमूर्ति व ब्रह्मनिष्ठ संत-महापुरुषों के चारों तरफ दिव्य आभामंडल होता है । वैसे तो हर व्यक्ति के शरीर से एक आभा (aura) निकलती है किंतु ब्रह्मनिष्ठ महापुरुष का आभामंडल दूर-दूर तक फैला होता है । यदि वे महापुरुष कुंडलिनी योग के अनुभवनिष्ठ योगी भी हों तो उनका आभामंडल इतना व्यापक होता है कि उसे नापने में यंत्र भी असमर्थ हो जाते हैं । ऐसे आत्मारामी संत जहाँ साधना करते हैं, निवास करते हैं वह स्थल उनकी दिव्य आभा से, उनके शरीर से निकलनेवाली दिव्य सूक्ष्म तरंगों से सुस्पंदित, ऊर्जा-सम्पन्न हो जाता है । इस कारण ऐसे महापुरुष की परिक्रमा करने से तो लाभ होता ही है, साथ ही उनके सान्निध्य से सुस्पंदित स्थानों की भी परिक्रमा से हमारे अंदर आश्चर्यजनक उन्नतिकारक परिवर्तन होने लगते हैं ।*

*🔹प्रदक्षिणा 🔹*

*🔹 प्र + दक्षिणा अर्थात् दक्षिण (दायीं दिशा) की ओर फेरे करना । परिक्रमा सदैव अपने बायें हाथ की ओर से दायें हाथ की ओर ही की जाती है क्योंकि दैवी शक्ति के आभामंडल की गति दक्षिणावर्ती होती है । इसकी विपरीत दिशा में परिक्रमा करने से उक्त आभामंडल की तरंगों और हमारी स्वयं की आभा-तरंगों में टकराव पैदा होता है, जिससे हमारी जीवनीशक्ति नष्ट होने लगती है ।*

*🔹प्रदक्षिणा ७, लाभ अनगिनत !🔹*

*🔹तीर्थों की अपनी महिमा है परंतु हयात ब्रह्मवेत्ता सत्पुरुषों की महिमा तो निराली ही है । उनके लिए शास्त्र कहते हैं कि 'वे तो चलते-फिरते तीर्थराज हैं, तीर्थ शिरोमणि हैं । ऐसे महापुरुष की यदि किसी वस्तु पर दृष्टि पड़ जाय, स्पर्श हो जाय अथवा वे उस पर संकल्प कर दें तो वह हमारे लिए 'प्रसाद' हो जाती है, प्रसन्नता, आनंद-उल्लास एवं शांति देनेवाली हो जाती है, साथ ही मनोकामनाएँ भी पूर्ण करती है ।*

*🔹इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है विश्वभर में स्थित संत श्री आशारामजी आश्रमों में ब्रह्मनिष्ठ महापुरुष पूज्य बापूजी द्वारा शक्तिपात किये हुए वटवृक्ष या पीपल वृक्ष, जिन्हें 'बड़ बादशाह' अथवा 'पीपल बादशाह' के नाम से जाना जाता है । ये कलियुग के साक्षात् कल्पवृक्ष साबित हो रहे हैं । इनकी श्रद्धापूर्वक मात्र ७ प्रदक्षिणा करने से लाखों-लाखों लोगों ने अनगिनत लाभ उठाये हैं । कितनों के रोग मिट गये, कितनों के दुःख-संताप दूर हुए, कितनों की मनोकामनाएँ पूर्ण हुई हैं तथा कितनों की आध्यात्मिक उन्नति हुई है ।*

*🔹जब श्रद्धालु अपना दायाँ अंग आराध्य देव की ओर करके एवं मन-ही-मन प्रदक्षिणा की संख्या व संकल्प निश्चित करके प्रदक्षिणा करता है तो उसके शरीर, मन व बुद्धि पर इष्ट देवता की दिव्य तरंगों का विशेष प्रभाव पड़ता है । परिक्रमा के समय यदि मन से शुभ संकल्प व समर्पण भावना के साथ सर्वसिद्धि प्रदायक भगवन्नाम या गुरुमंत्र का जप सुमिरन होता है तो मन शुद्धि भी होती है और लौकिक शारीरिक, सांसारिक और भी लाभ होते हैं ।*
*📖 - ऋषि प्रसाद जनवरी 2022*
*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*
*दिनांक - 15 सितम्बर 2025*
*दिन - सोमवार*
*विक्रम संवत् - 2082*
*अयन - दक्षिणायण*
*ऋतु - शरद*
*मास - आश्विन*
*पक्ष - कृष्ण*
*तिथि - नवमी रात्रि 01:31 सितम्बर 16 तक तत्पश्चात् दशमी*
*नक्षत्र - मृगशिरा सुबह 07:31 तक तत्पश्चात् आद्रा*
*योग - व्यतीपात रात्रि 02:34 सितम्बर 16 तक तत्पश्चात् वरीयान्*
*राहुकाल - सुबह 07:45 से सुबह 09:18 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*सूर्योदय - 06:13*
*सूर्यास्त - 06:30 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*दिशा शूल - पूर्व दिशा में*
*ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:40 से प्रातः 05:27 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:57 से दोपहर 12:46 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:59 से रात्रि 12:45 सितम्बर 16 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅️व्रत पर्व विवरण - नवमी का श्राद्ध, व्यतीपात योग (प्रातः 04:56 से रात्रि 02:34 सितम्बर 16 तक), सर्वार्थ सिद्धियोग, अमृत सिद्धियोग (प्रातः 06:13 से प्रातः 07:31 तक)*
*⛅️विशेष - नवमी को लौकी खाना गौमांस के समान त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

*🔹घर में समृद्धि के लिए🔹*

*🔸घर में समृद्धि लाना चाहते हो तो जिस घर के पुरुष काम पर जाते हों तो घर की महिलाएँ, जब पुरुष काम पर जायें तब गीता के 11 वें अध्याय का 40 वां श्लोक 108 बार पढ़ें और भगवान से प्रार्थना करें कि मैंने ये जो पाठ किया है इसका पुण्य हमारे घर के अमुक-अमुक पुरुष को ( उनका नाम लेकर) दीजिये उन्हें कार्य खूब सफलता मिल ऐसी प्रार्थना करके अर्घ्य दें इससे घर के काम करने वाले व्यक्ति को बहुत सफलता मिलेगी यह कई लोगों का अनुभव है इस श्लोक की इतनी महिमा है और इतना सरल भी है ।*

*🔹रसोई घर ही औषधालय🔹*

*🔸संयम तथा उचित खान-पान के अभाव में बीमारियाँ दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है । थोड़ी भी तकलीफ होने पर हम महँगी, नुकसानदायक एलोपैथिक दवाईयों की शरण लेते हैं जिससे कुछ देर तक तो स्वास्थ्य ठीक रहता है परन्तु इनके लगातार उपयोग से शरीर खोखला होने लगता है और धीरे-धीरे बीमारियों का घर बन जाता है, अतः इनसे बचें । हमारे ऋषि-मुनियों नें मसाले एवं अन्य खाद्य पदार्थों को ही औषधियों के रुप में प्रयोग करने की सुन्दर रीति समाज को प्रदान की है जिसका अनुसरण कर हम कम खर्च में ही दीर्घकाल तक स्वस्थ रह सकते हैं ।*

*📖 लोक कल्याण सेतु, जून 2010*
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