Hindu Panchang Daily - प्रतिदिन हिन्दू पंचांग
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🌞 आज का शुभ मुहूर्त
📿 व्रत एवं त्योहार जानकारी
🌙 चंद्रमा व नक्षत्र स्थिति
🔥 राहुकाल, अभिजीत मुहूर्त, योग, करण
📌 सभी प्रमुख हिंदू तिथियाँ और पर्व

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*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*
*दिनांक - 05 सितम्बर 2025*
*दिन - शुक्रवार*
*विक्रम संवत् - 2082*
*अयन - दक्षिणायण*
*ऋतु - शरद*
*मास - भाद्रपद*
*पक्ष - शुक्ल*
*तिथि - त्रयोदशी रात्रि 03:12 सितम्बर 06 तक तत्पश्चात् चतुर्दशी*
*नक्षत्र - श्रवण रात्रि 11:38 तक तत्पश्चात् धनिष्ठा*
*योग - शोभन दोपहर 01:53 तक तत्पश्चात अतिगण्ड*
*राहुकाल - सुबह 11:04 से दोपहर 12:38 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)*
*सूर्योदय - 06:23*
*सूर्यास्त - 06:53 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त अहमदाबाद मानक समयानुसार)*
*दिशा शूल - पश्चिम दिशा में*
*ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:51 से प्रातः 05:37 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)*
*अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:13 से दोपहर 01:03*
*निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:15 सितम्बर 06 से रात्रि 01:01 सितम्बर 06 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)*
*⛅️व्रत पर्व विवरण - ओणम, शिक्षक दिवस, ईद-ए-मिलाद, प्रदोष व्रत, सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 06:23 से रात्रि 11:38 तक)*
*⛅️विशेष - त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

*🔹तुलसी द्वारा सद्गति🔹*

*🔸जिसकी मृत्यु के समय श्रीहरि का कीर्तन और स्मरण हो तथा तुलसी की लकड़ी से जिसके शरीर का दाह किया जाय, उसका पुनर्जन्म नहीं होता । जो चोटी में तुलसी स्थापित करके प्राणों का परित्याग करता है, वह पापराशि से मुक्त हो जाता है । जो मृत पुरुष के सम्पूर्ण अंगों में तुलसी का काष्ठ देने के बाद उसका दाह-संस्कार करता है, वह भी पाप से मुक्त हो जाता है । (पद्म पुराण)*

*🔸मुख में, पेट एवं सिर पर यथायोग्य तुलसी – लकड़ी का उपयोग करें ।*

*🔸अग्निसंस्कार में तुलसी की लकड़ी का प्रयोग करने से मृतक की सदगति सुनिश्चित है ।*

*🔹तुलसी के औषधीय गुण 🔹*

*🔸इसके सेवन से विटामिन ʹएʹ तथा ʹसीʹ की कमी दूर हो जाती है । खसरा निवारण के लिए यह रामबाण इलाज है ।*

*🔸किसी भी प्रकार के विषविकार में तुलसी का स्वरस यथेष्ट मात्रा में पीना चाहिए ।*

*🔸20 तुलसी पत्र एवं 10 कालीमिर्च एक साथ पीसकर हर आधे से दो घंटे के अंतर से बार-बार पिलाने से सर्पविष उतर जाता है । तुलसी का रस लगाने से जहरीले कीड़े, ततैया, मच्छर का विष उतर जाता है ।*

*🔸तुलसी के स्वरस का पान करने से प्रसव-वेदना कम होती है ।*

*🔸स्वप्नदोष : 10 ग्राम तुलसी के बीज मिट्टी के पात्र में रात को पानी में भिगो दें व सुबह सेवन करें। इससे लाभ होता है ।*

*🔸तुलसी के बीजों को कूटकर व गुड़ में मिलाकर मटर के बराबर गोलियाँ बना लें । प्रतिदिन सुबह शाम दो-दो गोली खाकर ऊपर से गाय का दूध पीने से नपुंसकत्व दूर होता है, वीर्य में वृद्धि होती है, नसों में शक्ति आती है, पाचन शक्ति में सुधार होता है । हर प्रकार से हताश पुरुष भी सशक्त बन जाता है ।*

*🔸जल जाने पर : तुलसी के स्वरस व नारियल के तेल को उबालकर, ठण्डा होने पर जले भाग पर लगायें । इससे जलन शांत होती है तथा फफोले व घाव शीघ्र मिट जाते हैं ।*

*🔸विद्युत का झटका : विद्युत के तार का स्पर्श हो जाने या वर्षा ऋतु में बिजली गिरने के कारण यदि झटका लगा हो तो रोगी के चेहरे और माथे पर तुलसी का स्वरस मलें । इससे रोगी की मूर्च्छा दूर हो जाती है ।*

*🔸जलशुद्धि : दूषित जल की शुद्धि के लिए जल में तुलसी की हरी पत्तियाँ डालें । इससे जल शुद्ध व पवित्र हो जाएगा ।*
*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*
*दिनांक - 07 सितम्बर 2025*
*दिन - रविवार*
*विक्रम संवत् - 2082*
*अयन - दक्षिणायण*
*ऋतु - शरद*
*मास - भाद्रपद*
*पक्ष - शुक्ल*
*तिथि - पूर्णिमा रात्रि 11:38 तक तत्पश्चात् प्रतिपदा*
*नक्षत्र - शतभिषा रात्रि 09:41 तक तत्पश्चात् पूर्व भाद्रपद*
*योग - सुकर्मा सुबह 09:23 तक तत्पश्चात धृति*
*राहुकाल - शाम 05:05 से शाम 06:38 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*सूर्योदय - 06:11*
*सूर्यास्त - 06:38 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*दिशा शूल - पश्चिम दिशा में*
*ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:39 से प्रातः 05:25 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:00 से दोपहर 12:50 (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:02 सितम्बर 08 से रात्रि 12:48 सितम्बर 08 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅️व्रत पर्व विवरण - भाद्रपद पूर्णिमा, पूर्णिमा श्राद्ध, खग्रास चंद्रग्रहण (भारत में दिखेगा, ग्रहण के नियम पालनीय हैं), सन्यासी चतुर्मास समाप्त, महालय श्राद्ध पक्ष 07 सितम्बर से 21 सितम्बर तक*
*⛅️विशेष - पूर्णिमा और श्राद्ध के दिन स्त्री सहवास तथा तिल का तेल खाना व लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

*🔹सात प्रकार की पत्नियाँ🔹*

*🔸इसमें ३ प्रकार की स्त्रियाँ बुरी और अवांछनीय होती हैं ।*

*🔸इसमें से पहले प्रकार की स्त्रियाँ परेशान करनेवाली होती हैं । वे दुष्ट स्वभाववाली, क्रोधी व दयारहित होती हैं और साथ ही पति के प्रति वफादार नहीं होतीं, परपुरुषों में प्रीति रखती हैं ।*

*🔸दूसरी चोर की तरह होती हैं । वे अपने पति की सम्पदा को नष्ट करती रहती हैं या उसमें से अपने लिए चुराकर रखा करती हैं ।*

*🔸तीसरी क्रूर मालिक की तरह होती हैं । वे करुणारहित, आलसी व स्वार्थी होती हैं । वे हमेशा अपने पति व औरों को डॉटती रहती हैं ।*

*🔹अन्य ४ प्रकार की स्त्रियाँ अच्छी और प्रशंनीय होती हैं । वे अपने अच्छे आचरण से आसपास के लोगों को सुख पहुँचाने का प्रयास करती हैं ।*

*🔸इनमें से पहले प्रकार की माँ की तरह होती हैं । वे दयालु होती हैं और अपने पति के प्रति ऐसा स्नेहभाव रखती हैं जैसे एक माँ का एक पुत्र के प्रति होता है । पति की कमाई, घर की सम्पदा व लोगों की समय-शक्ति का व्यर्थ व्यय न हो इसकी वे सावधानी रखती हैं ।*

*🔸दूसरी बहन की तरह होती हैं । वे अपने पति के प्रति ऐसा आदरभाव रखती हैं जैसा एक बहन अपने बड़े भाई के प्रति रखती हैं । वे विनम्र और अपने की इच्छाओं के प्रति आज्ञाकारी होती हैं ।*

*🔸तीसरी मित्र की तरह होती हैं । वे पति को देख उसी तरह आनंदित होती हैं जैसे कोई अपने उस सखा को देखकर आनंदित होता है जिसे उसने बहुत समय से देखा नही था । वे जन्म से कुलीन, सदाचारी और विश्वसनीय होती हैं ।*

*🔸चौथी दासी की तरह होती हैं । जब उनकी कमियों को इंगित किया जाता है तब वे एक समझदार पत्नी की रूप में व्यवहार करती हैं । वे शांत रहती हैं और उनका पति कभी कुछ कठोर शब्दों का उपयोग कर देता है तो भी वे उसको सकारात्मक लेती हैं । वे अपने  पति की इच्छाओं के प्रति आज्ञाकारी होती हैं ।*

*🔹(अपने परिवार के लोगों व अपने सम्पर्क में आनेवाले अन्य लोगों के साथ अपना व्यवहार कैसा होना चाहिए – यह जानने तथा अपने व्यवहार को मधुर बनाने हेतु पढ़ें पूज्य बापूजी के सत्संग आधारित सत्साहित्य ‘मधुर व्यवहार’ व ‘प्रभु-रसमय जीवन’। ये सत्साहित्य आश्रम की समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध हैं ।)*
*📖ऋषि प्रसाद – सितम्बर २०१९ से*
आज यानी 7 सितंबर 2025 को लगने वाले
चंद्र ग्रहण का समय (भारत – IST)

सूतक काल यानी ग्रहण का अशुभ पूर्वाभास दोपहर 12:57 बजे से शुरू होता है।

ग्रहण रात 9:58 बजे शुरू होगा और रात 1:26–1:27 बजे तक चलेगा।

ग्रहण का चरम (पीक) रात 11:41 बजे होगा।

कुल अवधि लगभग 3 ½ घंटे (3:28) है।



अध्ययन करने योग्य बातें (क्या करें और क्या न करें)

सूतक काल (दोपहर 12:57 से रात तक)

क्या न करें:

इस बीच भोजन, खाना पकाना, और शुभ या मांगलिक कार्य नहीं करें।

पूजा-पाठ, मंदिर जाना, देवी-देवता की मूर्ति को छूना ये सब निषिद्ध माने गए हैं।


विशेष छूट (बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं के लिए):

इनके लिए सूतक केवल शाम 6:35–6:36 बजे से माना जाएगा—यानी उससे पहले वो रोजमर्रा के कार्य कर सकते हैं।



ग्रहण समय (रात 9:58 – 1:26 बजे)

क्या करें:

ध्यान, मंत्र जप (जैसे शिव-मंत्र), पूजा–अर्चना करना शुभ माना जाता है।

इस समय प्रार्थना, चंद्र देव का जाप, दान, ध्यान, मेडिटेशन जैसे आध्यात्मिक कार्य किए जा सकते हैं।


विशेष उपाय:

ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें, घर या मंदिर की सफाई करें, गंगाजल छिड़काव, श्रद्धा से पूजा और दान– जैसे चावल, दूध, दही, गुड़ आदि राशियों के अनुसार दें।




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राशियों (ज्योतिष अनुसार) पर प्रभाव और सलाह

ज्योतिषीय दृष्टि से यह ग्रहण कुंभ राशि व पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में लग रहा है, जिसमें राहु और चंद्रमा की युति है—यह अशुभ योग माना जाता है।

राशियों पर प्रभाव:

मेष, वृषभ, मिथुन, कन्या, सिंह, धनु, मीन—कुछ राशियों के लिए वित्तीय लाभ, यात्रा, आत्मविश्वास के योग बन रहे हैं।

वृषभ, मिथुन, सिंह, तुला, कुंभ—कुछ राशियों को सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई है।


कुछ लेखों में परावैदिक सलाह (जैसे दान की रंग-बिरंगी वस्तुएँ राशि अनुसार) भी बताए गए हैं:

उदाहरण: मेष–लाल, वृषभ और तुला–सफेद, मिथुन/कन्या–हरी, सिंह/धनु/मीन–पीली, मकर/कुंभ–काली वस्तुएँ दान करें।




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संक्षेप सारांश तालिका

समय/अवस्था क्या करना/नहीं करना

दोपहर 12:57 onwards भोजन, पूजा, शुभ कार्य टालें
शाम 6:35 से पहले बच्चों, बुजुर्ग, गर्भवती कर सकते हैं कुछ गतिविधियाँ
रात 9:58 – 1:26 मंत्र-जप, ध्यान, पूजा करें
रात 11:41 (पीक) सर्वोच्च प्रभावकाल
शास्त्रानुसार उपाय स्नान, गंगाजल, सफाई, दान
*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*
*दिनांक - 08 सितम्बर 2025*
*दिन - सोमवार*
*विक्रम संवत् - 2082*
*अयन - दक्षिणायण*
*ऋतु - शरद*
*मास - आश्विन*
*पक्ष - कृष्ण*
*तिथि - प्रतिपदा रात्रि 09:11  तक तत्पश्चात् द्वितीया*
*नक्षत्र - पूर्व भाद्रपद रात्रि 08:02 तक तत्पश्चात् उत्तर भाद्रपद*
*योग - धृति सुबह 06:30 तक, तत्पश्चात् शूल रात्रि 03:20 सितम्बर 09 तक, तत्पश्चात् गण्ड*
*राहुकाल - सुबह 07:44 से सुबह 09:18 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*सूर्योदय - 06:11*
*सूर्यास्त - 06:37 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*दिशा शूल - पूर्व दिशा में*
*ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:39 से प्रातः 05:25 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:59 से दोपहर 12:49 (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:01 सितम्बर 09 से रात्रि 12:48 सितम्बर 09 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅️व्रत पर्व विवरण - प्रतिपदा का श्राद्ध*
*⛅️विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

*🌹महालय श्राद्ध आरम्भ - 7-21 सितम्बर🌹*

*🔹श्राद्ध में रखें ये सावधानियाँ🔹*

*🔸पितरों को खिलाये बिना नहीं खायें । पराया अन्न भी नहीं खाना चाहिए ।*

*🔸श्राद्धकर्ता श्राद्ध पक्ष में पान खाना, तेल-मालिश, स्त्री-सम्भोग, संग्रह आदि न करें ।*

*🔸श्राद्ध का भोक्ता दुबारा भोजन तथा यात्रा आदि न करें । श्राद्ध खाने के बाद परिश्रम और प्रतिग्रह से बचें ।*

*🔸श्राद्ध करनेवाला व्यक्ति ३ से ज्यादा ब्राह्मणों तथा ज्यादा रिश्तेदारों को न बुलायें ।*

*🔸श्राद्ध के दिनों में ब्रह्मचर्य व सत्य का पालन करें और ब्राह्मण भी ब्रह्मचर्य का पालन करके श्राद्ध ग्रहण करने आये ।*

*🔹श्राद्ध में उत्तम क्या ?🔹*

*🔸तीन चीजें श्राद्ध में प्रशंसनीय हैं :*
*(१)शुद्धि*
*(२) अक्रोध*
*(३) अत्वरितता : जल्दबाजी नहीं, धैर्य ।*

*🔸तीन चीजें श्राद्ध में पवित्र होती हैं :*
*(१) तिल*
*(२) बेटी का बेटा दौहित्र*
*(३) कुतपकाल*

*🔸 सुबह 11:36 से लेकर 12:24 तक विशेषकाल माना जाता है । थोड़ा आगे-पीछे हो जाय तो कोई बात नहीं लेकिन इस काल में श्राद्ध की विशेष पवित्रता होती है ।*

*🔸श्राद्धकाल में सात विशेष शुद्धियों का ध्यान रखना चाहिए :*
*(1) नहा-धोकर शरीर शुद्ध हो ।*
*(2) श्राद्ध की द्रव्य-वस्तु शुद्ध हो ।*
*(3) स्त्री शुद्ध हो, मासिक धर्म में न हो ।*
*(4) जहाँ श्राद्ध करते हैं वह भूमि शुद्ध हो । गोझरण से, देशी गाय के गोबर से लीपन की हुई हो ।*
*(5) मंत्र का शुद्ध उच्चारण करें ।*
*(6) ब्राह्मण भी शुद्ध भाववाला हो और तम्बाकू, जर्दा आदि का सेवन न करता हो ।*
*(7) मन को भी शुद्ध रखें ।*

*- 📖 ऋषि प्रसाद अगस्त 2014*
*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*
*दिनांक - 09 सितम्बर 2025*
*दिन - मंगलवार*
*विक्रम संवत् - 2082*
*अयन - दक्षिणायण*
*ऋतु - शरद*
*मास - आश्विन*
*पक्ष - कृष्ण*
*तिथि - द्वितीया शाम 06:28 तक तत्पश्चात् तृतीया*
*नक्षत्र - उत्तर भाद्रपद शाम 06:07 तक तत्पश्चात् रेवती*
*योग - गण्ड रात्रि 11:59 तक तत्पश्चात् वृद्धि*
*राहुकाल - दोपहर 03:30 से शाम 05:03 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*सूर्योदय - 06:12*
*सूर्यास्त - 06:36 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*दिशा शूल - उत्तर दिशा में*
*ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:39 से प्रातः 05:25 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:59 से दोपहर 12:49 (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:01 सितम्बर 10 से रात्रि 12:47 सितम्बर 10 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅️व्रत पर्व विवरण - द्वितीया का श्राद्ध, सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 06:12 से शाम 06:07 तक)*
*⛅️विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

*🔹श्राद्धयोग्य तिथियाँ🔹*

*🔸ऊँचे में ऊँचा, सबसे बढ़िया श्राद्ध श्राद्धपक्ष की तिथियों में होता है । हमारे पूर्वज जिस तिथि में इस संसार से गये हैं, श्राद्धपक्ष में उसी तिथि को किया जाने वाला श्राद्ध सर्वश्रेष्ठ होता है ।*

*🔸जिनके दिवंगत होने की तिथि याद न हो, उनके श्राद्ध के लिए अमावस्या की तिथि उपयुक्त मानी गयी है । बाकी तो जिनकी जो तिथि हो, श्राद्धपक्ष में उसी तिथि पर बुद्धिमानों को श्राद्ध करना चाहिए ।*

*🔸जो पूर्णमासी के दिन श्राद्धादि करता है उसकी बुद्धि, पुष्टि, स्मरणशक्ति, धारणाशक्ति, पुत्र-पौत्रादि एवं ऐश्वर्य की वृद्धि होती। वह पर्व का पूर्ण फल भोगता है ।*

*🔸प्रतिपदा धन-सम्पत्ति के लिए होती है एवं श्राद्ध करनेवाले की प्राप्त वस्तु नष्ट नहीं होती ।*

*🔸द्वितिया को श्राद्ध करने वाला व्यक्ति राजा होता है ।*

*🔸उत्तम अर्थ की प्राप्ति के अभिलाषी को तृतिया विहित है। यही तृतिया शत्रुओं का नाश करने वाली और पाप नाशिनी है ।*

*🔸जो चतुर्थी को श्राद्ध करता है वह शत्रुओं का छिद्र देखता है अर्थात उसे शत्रुओं की समस्त कूटचालों का ज्ञान हो जाता है ।*

*🔸पंचमी तिथि को श्राद्ध करने वाला उत्तम लक्ष्मी की प्राप्ति करता है ।*

*🔸जो षष्ठी तिथि को श्राद्धकर्म संपन्न करता है उसकी पूजा देवता लोग करते हैं ।*

*🔸जो सप्तमी को श्राद्धादि करता है उसको महान यज्ञों के पुण्यफल प्राप्त होते हैं और वह गणों का स्वामी होता है ।*

*🔸जो अष्टमी को श्राद्ध करता है वह सम्पूर्ण समृद्धियाँ प्राप्त करता है ।*

*🔸नवमी तिथि को श्राद्ध करने वाला प्रचुर ऐश्वर्य एवं मन के अनुसार अनुकूल चलने वाली स्त्री को प्राप्त करता है ।*

*🔸दशमी तिथि को श्राद्ध करने वाला मनुष्य ब्रह्मत्व की लक्ष्मी प्राप्त करता है ।*

*🔸एकादशी का श्राद्ध सर्वश्रेष्ठ दान है। वह समस्त वेदों का ज्ञान प्राप्त कराता है । उसके सम्पूर्ण पापकर्मों का विनाश हो जाता है तथा उसे निरंतर ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है ।*

*🔸द्वादशी तिथि के श्राद्ध से राष्ट्र का कल्याण तथा प्रचुर अन्न की प्राप्ति कही गयी है ।*

*🔸त्रयोदशी के श्राद्ध से संतति, बुद्धि, धारणाशक्ति, स्वतंत्रता, उत्तम पुष्टि, दीर्घायु तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है ।*

*🔸चतुर्दशी का श्राद्ध जवान मृतकों के लिए किया जाता है तथा जो हथियारों द्वारा मारे गये हों उनके लिए भी चतुर्दशी को श्राद्ध करना चाहिए ।*

*🔸अमावस्या का श्राद्ध समस्त विषम उत्पन्न होने वालों के लिए अर्थात तीन कन्याओं के बाद पुत्र या तीन पुत्रों के बाद कन्याएँ हों उनके लिए होता ह । जुड़वे उत्पन्न होने वालों के लिए भी इसी दिन श्राद्ध करना चाहिए ।*

*🔸सधवा अथवा विधवा स्त्रियों का श्राद्ध आश्विन (गुजरात-महाराष्ट्र के मुताबिक भाद्रपद) कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि के दिन किया जाता है ।*

*🔸बच्चों का श्राद्ध कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है ।*

*🔸दुर्घटना में अथवा युद्ध में घायल होकर मरने वालों का श्राद्ध कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है ।*

*🔸जो इस प्रकार श्राद्धादि कर्म संपन्न करते हैं वे समस्त मनोरथों को प्राप्त करते हैं और अनंत काल तक स्वर्ग का उपभोग करते हैं । मघा नक्षत्र पितरों को अभीष्ट सिद्धि देने वाला है । अतः उक्त नक्षत्र के दिनों में किया गया श्राद्ध अक्षय कहा गया है । पितृगण उसे सर्वदा अधिक पसंद करते हैं ।*

*🔸जो व्यक्ति अष्टकाओं में पितरों की पूजा आदि नहीं करते उनका यह जो इन अवसरों पर श्राद्धादि का दान करते हैं वे देवताओं के समीप अर्थात् स्वर्गलोक को जाते हैं और जो नहीं करते वे तिर्यक्(पक्षी आदि अधम) योनियों में जाते हैं ।*

*🔶 रात्रि के समय श्राद्धकर्म निषिद्ध है । (वायु पुराणः 78.3)*