डिजिटल मार्केटिंग कोर्स
आज का दौर डिजिटल इंडिया का दौर हो गया है आजकल सभी ऑफलाइन के बजाय ऑनलाइन चीजें खरीदने और पढ़ने के शौकीन होते हैं तथा यह बहुत आसान भी होता है। इसी के साथ साथ डिजिटल मार्केटर की जरूरत भी बहुत बढ़ गई है।डिजिटल मार्केटर बनने के लिए हमें डिजिटल मार्केटिंग कोर्स करना आवश्यक है। डिजिटल मार्केटिंग कोर्स करने के बाद हम निजी या स्वयं भी एडवरटाइजिंग, यूट्यूब तथा अन्य के जरिए पैसे कमा सकते हैं। डिजिटल मार्केटिंग कोर्स में कई कोर्स शामिल है जैसे सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन, डिस्पले एडवरटाइजिंग, सर्च इंजन मार्केटिंग तथा सोशल मीडिया मार्केटिंग आदि। इस कोर्स को करके हम घर बैठे भी पैसे कमा सकते हैं परंतु उसमें स्किल्स और मेहनत की आवश्यकता होगी। यह सर्टिफिकेट कोर्स भी है हम 3 से 6 महीने का कोर्स करके भी डिजिटल मार्केटिंग का सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं। या कोर्स ऑनलाइन भी किया जा सकता है।
आज का दौर डिजिटल इंडिया का दौर हो गया है आजकल सभी ऑफलाइन के बजाय ऑनलाइन चीजें खरीदने और पढ़ने के शौकीन होते हैं तथा यह बहुत आसान भी होता है। इसी के साथ साथ डिजिटल मार्केटर की जरूरत भी बहुत बढ़ गई है।डिजिटल मार्केटर बनने के लिए हमें डिजिटल मार्केटिंग कोर्स करना आवश्यक है। डिजिटल मार्केटिंग कोर्स करने के बाद हम निजी या स्वयं भी एडवरटाइजिंग, यूट्यूब तथा अन्य के जरिए पैसे कमा सकते हैं। डिजिटल मार्केटिंग कोर्स में कई कोर्स शामिल है जैसे सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन, डिस्पले एडवरटाइजिंग, सर्च इंजन मार्केटिंग तथा सोशल मीडिया मार्केटिंग आदि। इस कोर्स को करके हम घर बैठे भी पैसे कमा सकते हैं परंतु उसमें स्किल्स और मेहनत की आवश्यकता होगी। यह सर्टिफिकेट कोर्स भी है हम 3 से 6 महीने का कोर्स करके भी डिजिटल मार्केटिंग का सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं। या कोर्स ऑनलाइन भी किया जा सकता है।
कंप्यूटर नेटवर्किंग
नेटवर्किंग से आशय है कि एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में डाटा को भेजना। आजकल ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का जमाना है तथा हम ऑनलाइन कई एप्स के जरिए डाटा को भेजते हैं। तो उस डाटा को सुरक्षित रखने और सुरक्षित रूप से भेजने के लिए कई विभागों में कंप्यूटर नेटवर्किंग का कोर्स किए हुए उम्मीदवार की आवश्यकता होती है।कम्प्यूटर नेटवर्किंग का कोर्स करने के बाद नेटवर्क इंजीनियर, नेटवर्क सिक्योरिटी एक्सपर्ट, नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर, डेस्कटॉप सपोर्ट इंजीनियर, टीम लीडर टेक्निकल हेड, टेक्निकल सपोर्ट इंजीनियर, सिस्टम एनालाइजर आदि बन सकते हैं।
नेटवर्किंग से आशय है कि एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में डाटा को भेजना। आजकल ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का जमाना है तथा हम ऑनलाइन कई एप्स के जरिए डाटा को भेजते हैं। तो उस डाटा को सुरक्षित रखने और सुरक्षित रूप से भेजने के लिए कई विभागों में कंप्यूटर नेटवर्किंग का कोर्स किए हुए उम्मीदवार की आवश्यकता होती है।कम्प्यूटर नेटवर्किंग का कोर्स करने के बाद नेटवर्क इंजीनियर, नेटवर्क सिक्योरिटी एक्सपर्ट, नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर, डेस्कटॉप सपोर्ट इंजीनियर, टीम लीडर टेक्निकल हेड, टेक्निकल सपोर्ट इंजीनियर, सिस्टम एनालाइजर आदि बन सकते हैं।
फोटोशॉप
फोटोशॉप अडोब कंपनी द्वारा शुरू किया गया फोटो एडिटर सॉफ्टवेयर है। सोशल मीडिया, मूवीस तथा बढ़ते हुए चित्र के प्रयोग से चित्रों को एडिट करना ब्राइटनेस चेंज करना क्रॉप करना तथा फोटोशॉप टूल का उपयोग करके अलग-अलग तरह से चित्र को एडिट करना आदि सब फोटोशॉप के अंदर ही आता है। यह कोर्स 12वीं के बाद किया जा सकता है। यदि आपको एडिटिंग करना अच्छा लगता है और आप इसी में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो यह आपके लिए बहुत अच्छा कंप्यूटर कोर्स है।यह कोर्स कई इंस्टिट्यूट द्वारा ऑनलाइन भी सिखाया जाता है।
फोटोशॉप अडोब कंपनी द्वारा शुरू किया गया फोटो एडिटर सॉफ्टवेयर है। सोशल मीडिया, मूवीस तथा बढ़ते हुए चित्र के प्रयोग से चित्रों को एडिट करना ब्राइटनेस चेंज करना क्रॉप करना तथा फोटोशॉप टूल का उपयोग करके अलग-अलग तरह से चित्र को एडिट करना आदि सब फोटोशॉप के अंदर ही आता है। यह कोर्स 12वीं के बाद किया जा सकता है। यदि आपको एडिटिंग करना अच्छा लगता है और आप इसी में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो यह आपके लिए बहुत अच्छा कंप्यूटर कोर्स है।यह कोर्स कई इंस्टिट्यूट द्वारा ऑनलाइन भी सिखाया जाता है।
ग्राफिक डिजाइनिंग
ग्राफिक डिजाइनिंग कोर्स अपनी कला को प्रदर्शित करने का एक माध्यम है। यह कोर्स आपकी क्रिएटिविटी को बताता है। ग्राफिक डिजाइनिंग कोर्स में टेक्स्ट और ग्राफिक की मदद से टेक्स्ट और इमेज को क्रिएटिव और यूनिक बनाया जाता है। ग्राफिक डिजाइनिंग सीखना उतना मुश्किल नहीं होता बस यह आपकी क्रिएटिविटी पर डिपेंड करता है। ग्राफिक डिजाइनिंग कोर्स करने के बाद कई कंपनी,न्यूज़ चैनल, एडवरटाइजिंग आदि में आपकी जरूरत होती है। ग्राफिक डिजाइनिंग में ब्रोशर, लोगो, न्यूज़लेटर,पोस्टर विभिन्न सॉफ्टवेयर की मदद से बनाए जाते हैं। इसमें आप अपना करियर बना सकते हैं।इसे ऑनलाइन भी सीखा जा सकता है यह उतना मुश्किल नहीं होता है।
ग्राफिक डिजाइनिंग कोर्स अपनी कला को प्रदर्शित करने का एक माध्यम है। यह कोर्स आपकी क्रिएटिविटी को बताता है। ग्राफिक डिजाइनिंग कोर्स में टेक्स्ट और ग्राफिक की मदद से टेक्स्ट और इमेज को क्रिएटिव और यूनिक बनाया जाता है। ग्राफिक डिजाइनिंग सीखना उतना मुश्किल नहीं होता बस यह आपकी क्रिएटिविटी पर डिपेंड करता है। ग्राफिक डिजाइनिंग कोर्स करने के बाद कई कंपनी,न्यूज़ चैनल, एडवरटाइजिंग आदि में आपकी जरूरत होती है। ग्राफिक डिजाइनिंग में ब्रोशर, लोगो, न्यूज़लेटर,पोस्टर विभिन्न सॉफ्टवेयर की मदद से बनाए जाते हैं। इसमें आप अपना करियर बना सकते हैं।इसे ऑनलाइन भी सीखा जा सकता है यह उतना मुश्किल नहीं होता है।
कंप्यूटर के विभिन्न फैक्टर्स कौन – कौन से होते हैं?
कंप्यूटर सिस्टम अपने आसपास के वातावरण से बातचीत करने के लिए कंप्यूटर पेरिफेरल्स या इनपुट/ आउटपुट डिवाइस का उपयोग करता है।सभी प्रकार के कम्प्यूटरों का basic structure एक जैसा ही होता है लेकिन कंप्यूटर की इंटरनल डिज़ाइन विभिन्न प्रकार और आकार की होती है। कंप्यूटर के पांच आम मुख्य कंपोनेंट्स नीचे दिए गए हैं-
इनपुट यूनिट
आउटपूत यूनिट
CU
ALU
मेमोरी
इनपुट यूनिट- कंप्यूटर सिस्टम कि वह यूनिट जिसके द्वारा कमांड या इंस्ट्रक्शन को लिया जाता है, इनपुट यूनिट कहलाती है। उदाहरण: कीबोर्ड, माउस, ट्रैकबॉल, जॉयस्टिक, स्कैनर, बारकोड रीडर आदि।
आउटपुट यूनिट- कंप्यूटर सिस्टम कि वह यूनिट जिसके द्वारा लिए गए कमांड व इंस्ट्रक्शंस को प्रोसेस करके रिजल्ट दर्शाया जाता है उसे आउटपुट यूनिट कहा जाता है। उदाहरण: मॉनिटर, प्रिंटर, स्पीकर आदि।
मेमोरी यूनिट- यह कंप्यूटर की स्टोरेज यूनिट होती है। कंप्यूटर मेमोरी मानव मस्तिष्क के समान होती है जो डाटा एवं इंफॉर्मेशन को स्टोर करती है। कंप्यूटर मेमोरी एक स्टोरेज स्पेस है जहां डाटा और इंफॉर्मेशन को रखा जाता है जिसको प्रोसेस किया जाना है।मेमोरी तीन प्रकार की होती है-
कैश मेमोरी
प्राइमरी मेमोरी और
सेकेंडरी मेमोरी
CU- CU का पूरा नाम कंट्रोल यूनिट होता है। यह पूरे कंप्यूटर सिस्टम को कंट्रोल करता है तथा यह CPU का एक मुख्य भाग होता है।
ALU- ALU का पूरा नाम अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट होता है। इसके अंतर्गत सभी प्रकार के अर्थमैटिक गणितीय व लॉजिकल ऑपरेशन परफॉर्म किए जाते हैं यह कंप्यूटर सिस्टम की मुख्य यूनिट होती है। ALU प्रोसेसर के अंदर स्थित होता है।
” CU और ALU मिलकर CPU(central Processing Unit ) का निर्माण करते हैं जिसे कंप्यूटर का मस्तिष्क भी कहा जाता है। सीपीयू पूरे कंप्यूटर सिस्टम को कंट्रोल करता है।”
कंप्यूटर सिस्टम अपने आसपास के वातावरण से बातचीत करने के लिए कंप्यूटर पेरिफेरल्स या इनपुट/ आउटपुट डिवाइस का उपयोग करता है।सभी प्रकार के कम्प्यूटरों का basic structure एक जैसा ही होता है लेकिन कंप्यूटर की इंटरनल डिज़ाइन विभिन्न प्रकार और आकार की होती है। कंप्यूटर के पांच आम मुख्य कंपोनेंट्स नीचे दिए गए हैं-
इनपुट यूनिट
आउटपूत यूनिट
CU
ALU
मेमोरी
इनपुट यूनिट- कंप्यूटर सिस्टम कि वह यूनिट जिसके द्वारा कमांड या इंस्ट्रक्शन को लिया जाता है, इनपुट यूनिट कहलाती है। उदाहरण: कीबोर्ड, माउस, ट्रैकबॉल, जॉयस्टिक, स्कैनर, बारकोड रीडर आदि।
आउटपुट यूनिट- कंप्यूटर सिस्टम कि वह यूनिट जिसके द्वारा लिए गए कमांड व इंस्ट्रक्शंस को प्रोसेस करके रिजल्ट दर्शाया जाता है उसे आउटपुट यूनिट कहा जाता है। उदाहरण: मॉनिटर, प्रिंटर, स्पीकर आदि।
मेमोरी यूनिट- यह कंप्यूटर की स्टोरेज यूनिट होती है। कंप्यूटर मेमोरी मानव मस्तिष्क के समान होती है जो डाटा एवं इंफॉर्मेशन को स्टोर करती है। कंप्यूटर मेमोरी एक स्टोरेज स्पेस है जहां डाटा और इंफॉर्मेशन को रखा जाता है जिसको प्रोसेस किया जाना है।मेमोरी तीन प्रकार की होती है-
कैश मेमोरी
प्राइमरी मेमोरी और
सेकेंडरी मेमोरी
CU- CU का पूरा नाम कंट्रोल यूनिट होता है। यह पूरे कंप्यूटर सिस्टम को कंट्रोल करता है तथा यह CPU का एक मुख्य भाग होता है।
ALU- ALU का पूरा नाम अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट होता है। इसके अंतर्गत सभी प्रकार के अर्थमैटिक गणितीय व लॉजिकल ऑपरेशन परफॉर्म किए जाते हैं यह कंप्यूटर सिस्टम की मुख्य यूनिट होती है। ALU प्रोसेसर के अंदर स्थित होता है।
” CU और ALU मिलकर CPU(central Processing Unit ) का निर्माण करते हैं जिसे कंप्यूटर का मस्तिष्क भी कहा जाता है। सीपीयू पूरे कंप्यूटर सिस्टम को कंट्रोल करता है।”
कंप्यूटर के भाग और उनके कार्य लिखिए?
कंप्यूटर कई सारे कंपोनेंट्स का एक संयोजन होता है जिसमें जिसमें प्रत्येक कंपोनेंट का अपना कार्य होता है इसी आधार पर कंप्यूटर के मुख्य 5 भाग होते हैं-
इनपुट/आउटपुट डिवाइस
सिस्टम यूनिट
कंप्यूटर मेमोरी
स्टोरेज यूनिट
कम्युनिकेशन
कंप्यूटर कई सारे कंपोनेंट्स का एक संयोजन होता है जिसमें जिसमें प्रत्येक कंपोनेंट का अपना कार्य होता है इसी आधार पर कंप्यूटर के मुख्य 5 भाग होते हैं-
इनपुट/आउटपुट डिवाइस
सिस्टम यूनिट
कंप्यूटर मेमोरी
स्टोरेज यूनिट
कम्युनिकेशन
1) Title Bar :
यह वर्ड विंडो के सबसे उपर स्थित होता है। यह जिस डॉक्युमेंट्स में आप वर्तमान में काम कर रहे हैं उसका नाम डिस्प्ले करता है। टाइटल बार के दाईं ओर Minimize, Maximize/Restore और Close के बटन होते है। और इसके लेफ्ट साइड में एक Quick Access टूल बार होता है।
यह वर्ड विंडो के सबसे उपर स्थित होता है। यह जिस डॉक्युमेंट्स में आप वर्तमान में काम कर रहे हैं उसका नाम डिस्प्ले करता है। टाइटल बार के दाईं ओर Minimize, Maximize/Restore और Close के बटन होते है। और इसके लेफ्ट साइड में एक Quick Access टूल बार होता है।
Tabs That Appear Only When You Need Them
उपर दिए गए टैब्स के अलावा, यहाँ टैब्स के अन्य प्रकार भी हैं। लेकिन वे जब आप उनसे संबंधित टास्क कर रहे होते है, तभी दिखाई देते है।
Contextual Tools : जब आप किसी ऑब्जेक्ट पर काम कर रहे होते है और जब आप उस ऑब्जेक्ट को सिलेक्ट करते है, तब यह टैब आपको दिखाई देगा।
e.g. –
वर्ड में एक इमेज इन्सर्ट करें।
जब आप इमेज को सिलेक्ट करेंगे, तब आप Format Tab रिबन के राइट साइड में देख सकते है।
उपर दिए गए टैब्स के अलावा, यहाँ टैब्स के अन्य प्रकार भी हैं। लेकिन वे जब आप उनसे संबंधित टास्क कर रहे होते है, तभी दिखाई देते है।
Contextual Tools : जब आप किसी ऑब्जेक्ट पर काम कर रहे होते है और जब आप उस ऑब्जेक्ट को सिलेक्ट करते है, तब यह टैब आपको दिखाई देगा।
e.g. –
वर्ड में एक इमेज इन्सर्ट करें।
जब आप इमेज को सिलेक्ट करेंगे, तब आप Format Tab रिबन के राइट साइड में देख सकते है।
3) File Button :
यह बटन वर्ड विंडो के उपर लेफ्ट कॉर्नर में होता है। इस बटन पर New, Open, Save, Save As, Print and Close जैसे कमांड के बटन होते है।
यह बटन वर्ड विंडो के उपर लेफ्ट कॉर्नर में होता है। इस बटन पर New, Open, Save, Save As, Print and Close जैसे कमांड के बटन होते है।
4) Quick Access Toolbar:
Office बटन के राइट साइड में Quick Access Toolbar होता है, जिसमें हमेशा इस्तेमाल होने वाले आइटम के बटन होते है। उदा, Save, और Undo या Redo बटन। इस टूलबार में और बटन्स को एड करने के लिए इसके राइड साइड के छोटे ऐरो पर क्लिक करें।
Office बटन के राइट साइड में Quick Access Toolbar होता है, जिसमें हमेशा इस्तेमाल होने वाले आइटम के बटन होते है। उदा, Save, और Undo या Redo बटन। इस टूलबार में और बटन्स को एड करने के लिए इसके राइड साइड के छोटे ऐरो पर क्लिक करें।
5) Zoom Slider
विंडो के राइट कॉर्नर में स्टेटस बार पर यह Zoom slider होता है। डॉक्युमेंट को अलग अलग जूम के परसेंटेज देखने के लिए प्लस या माइनस बटन पर क्लिक करें।
विंडो के राइट कॉर्नर में स्टेटस बार पर यह Zoom slider होता है। डॉक्युमेंट को अलग अलग जूम के परसेंटेज देखने के लिए प्लस या माइनस बटन पर क्लिक करें।
6) Document View Buttons
Zoom Slider के लेफ्ट साइड में Document View बटन्स होते है। अपने डॉक्युमेंट को Print Layout, Full Screen, Web Layout, Outline या Draft में देखने के लिए आप इनमेंसे किसी एक पर क्लिक कर सकते है।
Zoom Slider के लेफ्ट साइड में Document View बटन्स होते है। अपने डॉक्युमेंट को Print Layout, Full Screen, Web Layout, Outline या Draft में देखने के लिए आप इनमेंसे किसी एक पर क्लिक कर सकते है।
1) File :
File मेनू में निचें के कमांडस् है:
a) Save (Ctrl+S) : इस कमांड को डॉक्युमेंट सेव करने के लिए यूज किया जाता है। जब आप इस कमांड पर क्लिक करते है, तब निचें का एक डायलॉग बॉक्स दिखाई देता है।
File Name : यहाँ आप फाइल के लिए नाम दे सकते है।
Save As : यहाँ फाइल फॉर्मेट एक लिस्ट होती है, जिसमें वह फाइल सेव होती है। डिफ़ॉल्ट रूप से यहाँ Word Document फॉर्मेट सिलेक्ट होता है, जिसमें यह डॉक्युमेंट वर्ड 2010 के फॉर्मेट मे सेव किया जाता है।
File मेनू में निचें के कमांडस् है:
a) Save (Ctrl+S) : इस कमांड को डॉक्युमेंट सेव करने के लिए यूज किया जाता है। जब आप इस कमांड पर क्लिक करते है, तब निचें का एक डायलॉग बॉक्स दिखाई देता है।
File Name : यहाँ आप फाइल के लिए नाम दे सकते है।
Save As : यहाँ फाइल फॉर्मेट एक लिस्ट होती है, जिसमें वह फाइल सेव होती है। डिफ़ॉल्ट रूप से यहाँ Word Document फॉर्मेट सिलेक्ट होता है, जिसमें यह डॉक्युमेंट वर्ड 2010 के फॉर्मेट मे सेव किया जाता है।
यदि आप इस फाइल को पीडीएफ फॉर्मेट में सेव करना चाहते है, तो PDF सिलेक्ट करें।
यदि आप इस फाइल को वेब पेज फॉर्मेट में सेव करना चाहते है, तो web page सिलेक्ट करें।
Tools : यह बटन Save के लेफ्ट साइड में होता है। इसमें डॉक्युमेंट सेव करने के लिए अतिरिक्त् ऑप्शन होते है। यहाँ आप अपने डॉक्युमेंट को प्रोटेक्ट करने के लिए पासवर्ड सेट कर सकते है।
b) Save As :
यदि आप पहले से क्रिएट फाइल को दूसरे नाम से या दूसरे फॉर्मेट में सेव करना चाहते है, तो Save As कमांड का उपयोग करें।
c) Open (Ctrl+O):
पहले से क्रिएट डॉक्युमेंट फाइल को ओपन करने के लिए यह कमांड होती है। जब आप इस कमांड पर क्लिक करते है, तब एक डॉयलॉग बॉक्स ओपन होता है, जिसमें आपको अपने फाइल का पाथ देता है। फिर Open बटन पर क्लिक करना होता है।
d) Close :
बिना एमएस वर्ड क्लोज किए ओपन फाइल को क्लोज करने के लिए इस कमांड का उपयोग करें।
e) Info :
इसमें करंट डॉक्यूमेंट से संबंधित निम्न जानकारी होती है –
यदि आप इस फाइल को वेब पेज फॉर्मेट में सेव करना चाहते है, तो web page सिलेक्ट करें।
Tools : यह बटन Save के लेफ्ट साइड में होता है। इसमें डॉक्युमेंट सेव करने के लिए अतिरिक्त् ऑप्शन होते है। यहाँ आप अपने डॉक्युमेंट को प्रोटेक्ट करने के लिए पासवर्ड सेट कर सकते है।
b) Save As :
यदि आप पहले से क्रिएट फाइल को दूसरे नाम से या दूसरे फॉर्मेट में सेव करना चाहते है, तो Save As कमांड का उपयोग करें।
c) Open (Ctrl+O):
पहले से क्रिएट डॉक्युमेंट फाइल को ओपन करने के लिए यह कमांड होती है। जब आप इस कमांड पर क्लिक करते है, तब एक डॉयलॉग बॉक्स ओपन होता है, जिसमें आपको अपने फाइल का पाथ देता है। फिर Open बटन पर क्लिक करना होता है।
d) Close :
बिना एमएस वर्ड क्लोज किए ओपन फाइल को क्लोज करने के लिए इस कमांड का उपयोग करें।
e) Info :
इसमें करंट डॉक्यूमेंट से संबंधित निम्न जानकारी होती है –
ii) Permission : दूसरे यूजर्स से अपने फाइल को प्रोटेक्ट करने के लिए यहाँ आप एक पासवर्ड सेट कर सकते है। लेकिन याद रहे की अगर आप यह पासवर्ड भूल गए तो इस पासवर्ड को पुनः प्राप्त नही कर सकते।
f) Recent :
यहाँ पिछली बार ओपन किए डॉक्यूमेंट फाइलों की एक लिस्ट होती है, जिनपर क्लिक करने से आप तुरंत वे फाइलें ओपन कर सकते है।
g) New (Ctrl+N):
इस कमांड को उपयोग एक ब्लैंक डॉक्यूमेंट क्रिएट करने के लिए होता है। इसके साथ ही यहाँ कई टेम्प्लेट्स भी होते है।
h) Print (Ctrl+P):
डॉक्यूमेंट को प्रिंट करने के लिए इस कमांड का उपयोग होता है। इसमें निचें के ऑप्शन होते है –
i) Print : इस बटन पर क्लिक करने पर फाइल को प्रिंट करने के लिए भेज दिया जाता है।
ii) Copies : यहाँ से आप इस डॉक्यूमेंट की कितनी कॉपीज़ प्रिंट करनी है यह तय कर सकते है।
iii) Printer : यहाँ आपके पीसी पर इंस्टॉल प्रिंटर कि लिस्ट होती है, जिसमें से आपको प्रिंटर सिलेक्ट करना होता है।
iv) Settings : यहाँ इस फाइल के कौनसे पेजेस को प्रिंट करना है, यह तय कर सकते है।
f) Recent :
यहाँ पिछली बार ओपन किए डॉक्यूमेंट फाइलों की एक लिस्ट होती है, जिनपर क्लिक करने से आप तुरंत वे फाइलें ओपन कर सकते है।
g) New (Ctrl+N):
इस कमांड को उपयोग एक ब्लैंक डॉक्यूमेंट क्रिएट करने के लिए होता है। इसके साथ ही यहाँ कई टेम्प्लेट्स भी होते है।
h) Print (Ctrl+P):
डॉक्यूमेंट को प्रिंट करने के लिए इस कमांड का उपयोग होता है। इसमें निचें के ऑप्शन होते है –
i) Print : इस बटन पर क्लिक करने पर फाइल को प्रिंट करने के लिए भेज दिया जाता है।
ii) Copies : यहाँ से आप इस डॉक्यूमेंट की कितनी कॉपीज़ प्रिंट करनी है यह तय कर सकते है।
iii) Printer : यहाँ आपके पीसी पर इंस्टॉल प्रिंटर कि लिस्ट होती है, जिसमें से आपको प्रिंटर सिलेक्ट करना होता है।
iv) Settings : यहाँ इस फाइल के कौनसे पेजेस को प्रिंट करना है, यह तय कर सकते है।
MS Excel क्या है MS Excel का पूरा नाम Microsoft Excel है। और इसे मुख्य रूप (Main Form) से Excel के नाम से भी जानते है। ये एक स्प्रेडशीड प्रोग्राम है, जो Microsoft Office Suite के अंतर्गत आने वाले एप्लीकेशन में से एक एप्लीकेशन है।
माइक्रोसॉफ्ट के जरिए बनाया गया एक कमर्शियल स्प्रेडशीट एप्लीकेशन है। इसका इस्तेमाल बेसिक कैलकुलेशन, ग्राफ़िक टूल, पाइवोट टूल, पाइवोट टेबल, और मैक्रोस बनाने के लिए किया जाता है।
एक्सेल में दूसरी एप्लीकेशन के जैसी ही Spreadsheet बनाने के लिए बेसिक Feature उपलब्ध होते हैं। जिसमे Rows और Columns के रूप में Cells के Collection Arranged होते हैं। और जिनमे डाटा (DATA) को Organize और Manipulate होतें हैं।
यहाँ पर हम डाटा को Line Graph, Chart और Histogram के रूप में भी दर्शाया जाता है। एक्सेल में हम डाटा के अलग-अलग पहलुओं से बहुत तरह के तथ्यों के साथ प्रयोग कर सकते हैं।
मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री से लेकर एक छोटी दूकान, सरकारी दफ्तर हर जगह एमएस एक्सेल का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है।
जब आप किसी जॉब को ज्वाइन करते हैं, और अगर उसमे आपको सिस्टम से जुड़ा कोई काम दिया जाता है, जैसे की DATA Entry, Back Office, तो आप समझ लेना की आप को एक्सेल का इस्तेमाल करना ही होगा।
ये दफ्तरों में सबसे सामान्य रूप से प्रयोग होने वाला सॉफ्टवेयर हैं। इसके क्या-क्या प्रयोग हैं ये मैं आपको आगे विस्तार से बताऊंगा।
एक्सेल में दूसरी एप्लीकेशन के जैसी ही Spreadsheet बनाने के लिए बेसिक Feature उपलब्ध होते हैं। जिसमे Rows और Columns के रूप में Cells के Collection Arranged होते हैं। और जिनमे डाटा (DATA) को Organize और Manipulate होतें हैं।
यहाँ पर हम डाटा को Line Graph, Chart और Histogram के रूप में भी दर्शाया जाता है। एक्सेल में हम डाटा के अलग-अलग पहलुओं से बहुत तरह के तथ्यों के साथ प्रयोग कर सकते हैं।
मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री से लेकर एक छोटी दूकान, सरकारी दफ्तर हर जगह एमएस एक्सेल का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है।
जब आप किसी जॉब को ज्वाइन करते हैं, और अगर उसमे आपको सिस्टम से जुड़ा कोई काम दिया जाता है, जैसे की DATA Entry, Back Office, तो आप समझ लेना की आप को एक्सेल का इस्तेमाल करना ही होगा।
ये दफ्तरों में सबसे सामान्य रूप से प्रयोग होने वाला सॉफ्टवेयर हैं। इसके क्या-क्या प्रयोग हैं ये मैं आपको आगे विस्तार से बताऊंगा।
Features of MS Excel : MS-Excel का User Interface बहुत ही आसान और अच्छा है। Microsoft ने इसे कुछ इस तरह से डिजाइन (Design) किया है, कि कोई भी व्यक्ति कुछ ही समय में MS-Excel की Basic Training लेकर अपना काम शुरू कर सकता है।
यह दुनिया का सबसे भरोसेमंद Spread Sheet Program है। कठिन से कठिन Calculation को एम-एस एक्सेल (MS-Excel) की सहायता से बड़ी आसानी से समाधान (Solve) किया जा सकता है।
अगर आपने एक बार एम एस एक्सेल (MS Excel) सीख लिया तो आपको कहीं न कहीं जरूर काम आयेगा।
एम-एस-एक्सेल का डिजाइन (Design) कुछ इस तरह का होता है जिसमें आपको Automatic Table बने हुए
मिलते हैं। टेबल बनाने की आवश्यकता नहीं होती आप एक्सेल को ओपन कीजिये और आप Data Entry शुरू कर सकते हैं।
MS Excel Formulas काम को और भी आसान बना देते हैं। अगर आप एक्सेल फार्मूलों का बेसिक ज्ञान ले लेते हैं, तो कई घण्टों का काम मिनटों में एक्सेल के फार्मूलों की सहायता से किया जा सकता है। जो कि ऑटो अपडेटेड भी होते रहते हैं।
Excel की सबसे अच्छी बात ये है की एम-एस- एक्सेल में एक सीट से दूसरी सीट को और एक फाइल से दूसरी फाइल को भी लिंक किया जा सकता है। आपके पास चाहे कितना भी बडा डाटा हो एक्सेल उसे हैण्डल कर लेगा।
एम-एस- एक्सेल के माध्यम से आप Automatic Chart और Dashboard बना सकते हो।
यह दुनिया का सबसे भरोसेमंद Spread Sheet Program है। कठिन से कठिन Calculation को एम-एस एक्सेल (MS-Excel) की सहायता से बड़ी आसानी से समाधान (Solve) किया जा सकता है।
अगर आपने एक बार एम एस एक्सेल (MS Excel) सीख लिया तो आपको कहीं न कहीं जरूर काम आयेगा।
एम-एस-एक्सेल का डिजाइन (Design) कुछ इस तरह का होता है जिसमें आपको Automatic Table बने हुए
मिलते हैं। टेबल बनाने की आवश्यकता नहीं होती आप एक्सेल को ओपन कीजिये और आप Data Entry शुरू कर सकते हैं।
MS Excel Formulas काम को और भी आसान बना देते हैं। अगर आप एक्सेल फार्मूलों का बेसिक ज्ञान ले लेते हैं, तो कई घण्टों का काम मिनटों में एक्सेल के फार्मूलों की सहायता से किया जा सकता है। जो कि ऑटो अपडेटेड भी होते रहते हैं।
Excel की सबसे अच्छी बात ये है की एम-एस- एक्सेल में एक सीट से दूसरी सीट को और एक फाइल से दूसरी फाइल को भी लिंक किया जा सकता है। आपके पास चाहे कितना भी बडा डाटा हो एक्सेल उसे हैण्डल कर लेगा।
एम-एस- एक्सेल के माध्यम से आप Automatic Chart और Dashboard बना सकते हो।
MS Excel Usage – MS Excel के उपयोग
इसके उपयोग क्या क्या हैं।
To organize and resurface the data – डाटा ऑर्गनाइज़ करने और उसेके रेसुररेक्शन करने में
Data Filtering – डाटा फ़िल्टरिंग करने में
Mathematical Formula – मैथमेटिकल फार्मूला
Online Access – ऑनलाइन एक्सेस
Goal Seek analysis – • लक्ष्य का विश्लेषण
Build Dashboard – डैशबोर्ड का निर्माण
Interactive Charts and Graphs – इंटरएक्टिव चार्ट और ग्राफ़
Automation through Excel – एक्सेल के माध्यम से ऑटोमेशन
Data Analysis and Interpretation – डाटा एनालिसिस और इंटरप्रिटेशन
Collect Data – डाटा को इकठा
For data Entry and Storage – डाटा एंट्री और स्टोरेज करने के लिए
In preparing Account and Budget – अकाउंट और बजट तैयार करने में
Identify Trends – ट्रेंड्स की पहचान करने में
In Administrative and Managerial Work – एडमिनिस्ट्रियल और मैनेजरियल काम में
इसके उपयोग क्या क्या हैं।
To organize and resurface the data – डाटा ऑर्गनाइज़ करने और उसेके रेसुररेक्शन करने में
Data Filtering – डाटा फ़िल्टरिंग करने में
Mathematical Formula – मैथमेटिकल फार्मूला
Online Access – ऑनलाइन एक्सेस
Goal Seek analysis – • लक्ष्य का विश्लेषण
Build Dashboard – डैशबोर्ड का निर्माण
Interactive Charts and Graphs – इंटरएक्टिव चार्ट और ग्राफ़
Automation through Excel – एक्सेल के माध्यम से ऑटोमेशन
Data Analysis and Interpretation – डाटा एनालिसिस और इंटरप्रिटेशन
Collect Data – डाटा को इकठा
For data Entry and Storage – डाटा एंट्री और स्टोरेज करने के लिए
In preparing Account and Budget – अकाउंट और बजट तैयार करने में
Identify Trends – ट्रेंड्स की पहचान करने में
In Administrative and Managerial Work – एडमिनिस्ट्रियल और मैनेजरियल काम में
MS Excel Keyboard Shortcuts in Hindi
एमएस एक्सेल के कीबोर्ड शॉर्टकट?
Ctrl+O Workbook Open करने के लिए।
Ctrl+N New Workbook बनाने के लिए।
Ctrl+S Workbook Save करने के लिए।
Ctrl+A Select All करने के लिए।
F11 Chart बनाने के लिए।
Ctrl+P Worksheet का Data Print निकालने के लिए।
Ctrl+Page Up पिछली वर्कशीट (Previous Worksheet) में जाने के लिए।
Ctrl+Page Down अगली वर्कशीट (Next Worksheet) में जाने के लिए।
Ctrl+B बोल्ड (Bold) करने के लिए।
Ctrl+I इटेलिक (Italic) करने के लिए।
Ctrl+U अन्डर लाइन (Underline) करने के लिए।
Ctrl+F वर्कशीट में फाइण्ड (Finds in Worksheet) करने के लिए।
Ctrl+H वर्कशीट में रिप्लेस करने के लिए।
Ctrl+G / F5 Go To Command Open करने के लिए।
Alt+F4 एक्सेल को बंद (Close Excel) करने के लिए।
Alt+i+C Column Add करने के लिए।
Alt+i+R Row Add करने के लिए।
Shift+F11 New Sheet Add करने के लिए।
Shift+F3 Function Option Open करने के लिए।
Ctrl+F1 Ribbon Bar Hide / Show करने के लिए।
Ctrl+1 Format Cell Option Open करने के लिए।
Ctrl+C Copy करने के लिए।
Ctrl+X Cut / Move करने के लिए।
Ctrl+P Paste करने के लिए।
Ctrl+K Hyperlink Apply करने के लिए।
F12 Save As करने के लिए।
F2 Edit Cell / Formula करने के लिए।
Alt+F8 Macro Dialog Box Openकरने के लिए।
Ctrl+; Current Date लिने के लिए।
Ctrl+Shift+; Current Time लिने के लिए।
एमएस एक्सेल के कीबोर्ड शॉर्टकट?
Ctrl+O Workbook Open करने के लिए।
Ctrl+N New Workbook बनाने के लिए।
Ctrl+S Workbook Save करने के लिए।
Ctrl+A Select All करने के लिए।
F11 Chart बनाने के लिए।
Ctrl+P Worksheet का Data Print निकालने के लिए।
Ctrl+Page Up पिछली वर्कशीट (Previous Worksheet) में जाने के लिए।
Ctrl+Page Down अगली वर्कशीट (Next Worksheet) में जाने के लिए।
Ctrl+B बोल्ड (Bold) करने के लिए।
Ctrl+I इटेलिक (Italic) करने के लिए।
Ctrl+U अन्डर लाइन (Underline) करने के लिए।
Ctrl+F वर्कशीट में फाइण्ड (Finds in Worksheet) करने के लिए।
Ctrl+H वर्कशीट में रिप्लेस करने के लिए।
Ctrl+G / F5 Go To Command Open करने के लिए।
Alt+F4 एक्सेल को बंद (Close Excel) करने के लिए।
Alt+i+C Column Add करने के लिए।
Alt+i+R Row Add करने के लिए।
Shift+F11 New Sheet Add करने के लिए।
Shift+F3 Function Option Open करने के लिए।
Ctrl+F1 Ribbon Bar Hide / Show करने के लिए।
Ctrl+1 Format Cell Option Open करने के लिए।
Ctrl+C Copy करने के लिए।
Ctrl+X Cut / Move करने के लिए।
Ctrl+P Paste करने के लिए।
Ctrl+K Hyperlink Apply करने के लिए।
F12 Save As करने के लिए।
F2 Edit Cell / Formula करने के लिए।
Alt+F8 Macro Dialog Box Openकरने के लिए।
Ctrl+; Current Date लिने के लिए।
Ctrl+Shift+; Current Time लिने के लिए।