(ii). ROM (रोम)
ROM का पूरा नाम Read Only Memory (रीड ओनली मेमोरी) होता है। यह एक non volatile मैमोरी है जिसका मतलब यह है कि यह हमेशा के लिए डेटा को स्टोर करके रखती है।
यदि बिजली चली जाती है और कंप्यूटर बंद हो जाता है तो भी ROM में मौजूद डेटा डिलीट नही होता। इस मेमोरी में डेटा को permanently (हमेशा के लिए) स्टोर किया जा सकता है लेकिन RAM में हम ऐसा नहीं कर सकते।
ROM के तीन प्रकार होते है पहला PROM (प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी) दूसरा EPROM (एरेजेबल प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी) और तीसरा EEPROM (इलेक्ट्रिकली इरेजेबल प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी)
ROM का पूरा नाम Read Only Memory (रीड ओनली मेमोरी) होता है। यह एक non volatile मैमोरी है जिसका मतलब यह है कि यह हमेशा के लिए डेटा को स्टोर करके रखती है।
यदि बिजली चली जाती है और कंप्यूटर बंद हो जाता है तो भी ROM में मौजूद डेटा डिलीट नही होता। इस मेमोरी में डेटा को permanently (हमेशा के लिए) स्टोर किया जा सकता है लेकिन RAM में हम ऐसा नहीं कर सकते।
ROM के तीन प्रकार होते है पहला PROM (प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी) दूसरा EPROM (एरेजेबल प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी) और तीसरा EEPROM (इलेक्ट्रिकली इरेजेबल प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी)
प्राइमरी मेमोरी की विशेषताएं (Characteristics of Primary Memory in Hindi)
1. प्राइमरी मेमोरी में मौजूद डेटा को तेज गति के साथ एक्सेस किया जा सकता है।
2. कैश मेमोरी (cache memory) के बाद प्राइमरी मेमोरी की ही स्पीड सबसे ज्यादा होती है।
3. इसका इस्तेमाल कंप्यूटर को ON करने और प्रोग्राम को run करने के लिए किया जाता है.
4. यह semiconductor (अर्धचालक) प्रदार्थ से बनी होती है.
5. प्राइमरी मेमोरी मदरबोर्ड में स्थित होती है.
6. यह मेमोरी ज्यादा मात्रा में डेटा को स्टोर नहीं कर सकती क्योकि इसकी स्टोरेज क्षमता (storage capacity) बहुत कम होती है।
7. प्राइमरी मेमोरी सीधे CPU के साथ संचार (communication) करती है।
1. प्राइमरी मेमोरी में मौजूद डेटा को तेज गति के साथ एक्सेस किया जा सकता है।
2. कैश मेमोरी (cache memory) के बाद प्राइमरी मेमोरी की ही स्पीड सबसे ज्यादा होती है।
3. इसका इस्तेमाल कंप्यूटर को ON करने और प्रोग्राम को run करने के लिए किया जाता है.
4. यह semiconductor (अर्धचालक) प्रदार्थ से बनी होती है.
5. प्राइमरी मेमोरी मदरबोर्ड में स्थित होती है.
6. यह मेमोरी ज्यादा मात्रा में डेटा को स्टोर नहीं कर सकती क्योकि इसकी स्टोरेज क्षमता (storage capacity) बहुत कम होती है।
7. प्राइमरी मेमोरी सीधे CPU के साथ संचार (communication) करती है।
2 – Secondary Memory (सेकेंडरी मेमोरी)
सेकेंडरी मेमोरी भी कंप्यूटर की एक मेमोरी है जिसे CPU के द्वारा सीधे (direct) एक्सेस नहीं किया जा सकता। सेकेंडरी मेमोरी कंप्यूटर का हिस्सा नहीं होती है इसे कंप्यूटर में अलग से जोड़ा जाता है।
सेकेंडरी मेमोरी एक प्रकार की non-volatile मेमोरी है अर्थात् इसमें डेटा हमेशा के लिए स्टोर रहता है यानी कि अगर कंप्यूटर बंद भी हो जाए तो इसका डेटा डिलीट नही होता।
Secondary memory का इस्तेमाल permanent डेटा को स्टोर करने के लिए किया जाता है ताकि भविष्य में यूजर उस डेटा का उपयोग कर सके।
प्राइमरी मेमोरी की तुलना में सेकेंडरी मेमोरी की स्टोरेज क्षमता अधिक होती है जिसके कारण यह ज्यादा मात्रा में डेटा को स्टोर कर सकती है।
इस मेमोरी का इस्तेमाल बड़े आकार वाले डेटा जैसे (वीडियो, इमेज, ऑडियो, फाइल) को स्टोर करने के लिए किया जाता है। इस मेमोरी में यदि बिजली चली जाती है तो भी डेटा डिलीट नहीं होता।
CPU सीधे सेकेंडरी मेमोरी को एक्सेस नहीं कर सकता। इसे ऐसा करने के लिए सेकेंडरी मेमोरी के डेटा को प्राइमरी मेमोरी में ट्रांसफर करना होगा इसके बाद CPU सेकडरी मेमोरी को एक्सेस कर पायेगा।
सेकेंडरी मेमोरी भी कंप्यूटर की एक मेमोरी है जिसे CPU के द्वारा सीधे (direct) एक्सेस नहीं किया जा सकता। सेकेंडरी मेमोरी कंप्यूटर का हिस्सा नहीं होती है इसे कंप्यूटर में अलग से जोड़ा जाता है।
सेकेंडरी मेमोरी एक प्रकार की non-volatile मेमोरी है अर्थात् इसमें डेटा हमेशा के लिए स्टोर रहता है यानी कि अगर कंप्यूटर बंद भी हो जाए तो इसका डेटा डिलीट नही होता।
Secondary memory का इस्तेमाल permanent डेटा को स्टोर करने के लिए किया जाता है ताकि भविष्य में यूजर उस डेटा का उपयोग कर सके।
प्राइमरी मेमोरी की तुलना में सेकेंडरी मेमोरी की स्टोरेज क्षमता अधिक होती है जिसके कारण यह ज्यादा मात्रा में डेटा को स्टोर कर सकती है।
इस मेमोरी का इस्तेमाल बड़े आकार वाले डेटा जैसे (वीडियो, इमेज, ऑडियो, फाइल) को स्टोर करने के लिए किया जाता है। इस मेमोरी में यदि बिजली चली जाती है तो भी डेटा डिलीट नहीं होता।
CPU सीधे सेकेंडरी मेमोरी को एक्सेस नहीं कर सकता। इसे ऐसा करने के लिए सेकेंडरी मेमोरी के डेटा को प्राइमरी मेमोरी में ट्रांसफर करना होगा इसके बाद CPU सेकडरी मेमोरी को एक्सेस कर पायेगा।
इस मेमोरी को एक्सटर्नल मेमोरी या सहायक मेमोरी भी कहते है। इस मेमोरी में हम डेटा को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में ट्रांसफर कर सकते है।
यह मेमोरी प्राइमरी मेमोरी की तुलना में काफी सस्ती होती है। सेकेंडरी में मेमोरी के कुछ उदहारण :- हार्ड डिस्क , pendrive , DVD, CD, और मैग्नेटिक टेप आदि।
यह मेमोरी प्राइमरी मेमोरी की तुलना में काफी सस्ती होती है। सेकेंडरी में मेमोरी के कुछ उदहारण :- हार्ड डिस्क , pendrive , DVD, CD, और मैग्नेटिक टेप आदि।
सेकेंडरी मेमोरी की विशेषताएं (Characteristics of Secondary Memory in Hindi)
1. यह मेमोरी अधिक मात्रा में डेटा को स्टोर कर सकती है। इसकी स्टोरेज क्षमता अधिक होती है।
2. इसमें बिजली चले जाने पर डेटा डिलीट नहीं होता।
3. यह प्राइमरी मेमोरी की तुलना में सस्ती होती है।
4. इस मेमोरी की स्पीड धीमी (slow) होती है।
5. इसके डेटा को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में आसानी से ट्रान्सफर कर सकते हैं.
6. इस मेमोरी को CPU के द्वारा सीधे (direct) एक्सेस नहीं किया जा सकता।
1. यह मेमोरी अधिक मात्रा में डेटा को स्टोर कर सकती है। इसकी स्टोरेज क्षमता अधिक होती है।
2. इसमें बिजली चले जाने पर डेटा डिलीट नहीं होता।
3. यह प्राइमरी मेमोरी की तुलना में सस्ती होती है।
4. इस मेमोरी की स्पीड धीमी (slow) होती है।
5. इसके डेटा को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में आसानी से ट्रान्सफर कर सकते हैं.
6. इस मेमोरी को CPU के द्वारा सीधे (direct) एक्सेस नहीं किया जा सकता।
3- Cache Memory (कैश मेमोरी)
Cache Memory एक तेज गति से काम करने वाली मेमोरी है जिसका इस्तेमाल सीपीयू की स्पीड तथा परफॉरमेंस को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
कैश मेमोरी एक हाई-स्पीड मेमोरी है जिसका आकार तो छोटा होता है लेकिन प्राइमरी मेमोरी से तेज होती है।
इस मेमोरी को एक्सेस करना आसान है और CPU इसे तेज गति से एक्सेस करता है। इस मेमोरी को अन्य डिवाइस के द्वारा एक्सेस नहीं किया जा सकता बल्कि इसे केवल CPU के द्वारा ही एक्सेस किया जा सकता है।
Cache Memory एक तेज गति से काम करने वाली मेमोरी है जिसका इस्तेमाल सीपीयू की स्पीड तथा परफॉरमेंस को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
कैश मेमोरी एक हाई-स्पीड मेमोरी है जिसका आकार तो छोटा होता है लेकिन प्राइमरी मेमोरी से तेज होती है।
इस मेमोरी को एक्सेस करना आसान है और CPU इसे तेज गति से एक्सेस करता है। इस मेमोरी को अन्य डिवाइस के द्वारा एक्सेस नहीं किया जा सकता बल्कि इसे केवल CPU के द्वारा ही एक्सेस किया जा सकता है।
कैश मेमोरी में उस डेटा या फाइलों को स्टोर किया जाता है जिनका इस्तेमाल CPU नियमित रूप से करता है। जब भी सीपीयू को कोई डेटा चाहिए होता है तो सीपीयू सबसे पहले उस डेटा को कैश मेमोरी में ढूंढता है।
कैश मैमोरी के प्रकार –
इसके तीन प्रकार होते हैं:-
1. L1 Cache
2. L2 Cache
3. L3 Cache
कैश मैमोरी के प्रकार –
इसके तीन प्रकार होते हैं:-
1. L1 Cache
2. L2 Cache
3. L3 Cache
L2 Cache
L2 cache का साइज़ L1 cache से थोडा बढ़ा होता है और इसकी स्पीड L1 cache से थोड़ी कम होती है। इसका आकार 256 kb से 512 kb के बीच होता है।
L2 cache का साइज़ L1 cache से थोडा बढ़ा होता है और इसकी स्पीड L1 cache से थोड़ी कम होती है। इसका आकार 256 kb से 512 kb के बीच होता है।
L3 Cache
यह साइज में L1 cache और L2 cache से थोड़ी बड़ी होती है और इसकी स्पीड L1 cache और L2 cache मेमोरी से थोड़ी कम होती है। इसका आकार 1 MB से 8 MB तक होता है।
यह साइज में L1 cache और L2 cache से थोड़ी बड़ी होती है और इसकी स्पीड L1 cache और L2 cache मेमोरी से थोड़ी कम होती है। इसका आकार 1 MB से 8 MB तक होता है।
कैश मैमोरी की विशेषताएं (Characteristics of Cache Memory in Hindi)
1. Cache Memory प्राइमरी मेमोरी से भी अधिक Fast (तेज) होती है.
2. इसमें डेटा हमेशा के लिए स्टोर नहीं रहता.
3. यह बहुत कम मात्रा में data को स्टोर कर सकता है.
4. इसकी कीमत बहुत ज्यादा होती है.
1. Cache Memory प्राइमरी मेमोरी से भी अधिक Fast (तेज) होती है.
2. इसमें डेटा हमेशा के लिए स्टोर नहीं रहता.
3. यह बहुत कम मात्रा में data को स्टोर कर सकता है.
4. इसकी कीमत बहुत ज्यादा होती है.
4- Register (रजिस्टर)
रजिस्टर कंप्यूटर की सबसे छोटी मेमोरी होती है और काफी तेज होती है। Register का प्रयोग CPU के द्वारा बहुत सारे कार्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है।
जब हम कोई इनपुट कंप्यूटर को देते है तो ये इनपुट रजिस्टर में store हो जाते है और कंप्यूटर के प्रोसेसिंग के बाद जो आउटपुट मिलता है वो भी register से ही प्राप्त होता है। तो हम कह सकते है कि register का प्रयोग CPU के द्वारा data को प्रोसेस करने के लिए किया जाता है।
रजिस्टर कंप्यूटर की सबसे छोटी मेमोरी होती है और काफी तेज होती है। Register का प्रयोग CPU के द्वारा बहुत सारे कार्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है।
जब हम कोई इनपुट कंप्यूटर को देते है तो ये इनपुट रजिस्टर में store हो जाते है और कंप्यूटर के प्रोसेसिंग के बाद जो आउटपुट मिलता है वो भी register से ही प्राप्त होता है। तो हम कह सकते है कि register का प्रयोग CPU के द्वारा data को प्रोसेस करने के लिए किया जाता है।
यह मुख्य मेमोरी का हिस्सा बिलकुल नहीं है। यह मेमोरी temporary डेटा और निर्देशों को स्टोर करती है जिन निर्देशों का उपयोग तुरंत किसी कार्य को करने के लिए किया जाता है।
कंप्यूटर के कार्य करने की स्पीड उसमें मौजूद रजिस्टर की संख्या पर निर्भर होती है। अर्थात् कंप्यूटर में जितने ज्यादा रजिस्टर होंगे उतनी ही ज्यादा कंप्यूटर की स्पीड होगी.
रजिस्टर कई प्रकार के होते है जैसे :- अड्रेस रजिस्टर , प्रोग्राम काउंटर और डेटा रजिस्टर आदि।
कंप्यूटर के कार्य करने की स्पीड उसमें मौजूद रजिस्टर की संख्या पर निर्भर होती है। अर्थात् कंप्यूटर में जितने ज्यादा रजिस्टर होंगे उतनी ही ज्यादा कंप्यूटर की स्पीड होगी.
रजिस्टर कई प्रकार के होते है जैसे :- अड्रेस रजिस्टर , प्रोग्राम काउंटर और डेटा रजिस्टर आदि।
Types of Register in Hindi – रजिस्टर के प्रकार
1- Data Register – यह एक 16-बिट रजिस्टर है जिसका उपयोग CPU के द्वारा प्रोसेस किये जाने वाले operands (variables) को स्टोर करने के लिए किया जाता है।
2- Program Counter – प्रोग्राम काउंटर एक 16 bit रजिस्टर होता है जो execute होने वाली अगली instruction (निर्देश) के address को स्टोर करके रखता है।
3- Instructor Register – यह भी एक 16-बिट रजिस्टर है जो उन निर्देशों को स्टोर करता जो main memory से प्राप्त होते है।
4- Accumulator – यह रजिस्टर 16 बिट का होता है जिसका इस्तेमाल कंप्यूटर के द्वारा उतपन्न (produce) आउटपुट को स्टोर करने के लिए किया जाता है।
5- Address Register – यह एक 12 बिट रजिस्टर है जिसका इस्तेमाल मेमोरी लोकेशन के address को स्टोर करने के लिए किया जाता है.
6- I/O Register – यह रजिस्टर किसी I/O डिवाइस के एड्रेस को स्टोर करता है।
Computer Memory क्या है?
कंप्यूटर मेमोरी एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होती है जिसका इस्तेमाल डेटा और सूचना को स्टोर करने के लिए किया जाता है.
1- Data Register – यह एक 16-बिट रजिस्टर है जिसका उपयोग CPU के द्वारा प्रोसेस किये जाने वाले operands (variables) को स्टोर करने के लिए किया जाता है।
2- Program Counter – प्रोग्राम काउंटर एक 16 bit रजिस्टर होता है जो execute होने वाली अगली instruction (निर्देश) के address को स्टोर करके रखता है।
3- Instructor Register – यह भी एक 16-बिट रजिस्टर है जो उन निर्देशों को स्टोर करता जो main memory से प्राप्त होते है।
4- Accumulator – यह रजिस्टर 16 बिट का होता है जिसका इस्तेमाल कंप्यूटर के द्वारा उतपन्न (produce) आउटपुट को स्टोर करने के लिए किया जाता है।
5- Address Register – यह एक 12 बिट रजिस्टर है जिसका इस्तेमाल मेमोरी लोकेशन के address को स्टोर करने के लिए किया जाता है.
6- I/O Register – यह रजिस्टर किसी I/O डिवाइस के एड्रेस को स्टोर करता है।
Computer Memory क्या है?
कंप्यूटर मेमोरी एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होती है जिसका इस्तेमाल डेटा और सूचना को स्टोर करने के लिए किया जाता है.
कंप्यूटर की सीमाएं – Limitations of Computer in Hindi
हेल्लो दोस्तों! आज हम इस पोस्ट में Limitations of Computer in Hindi (कंप्यूटर की सीमाएं) के बारें में पढेंगे. इसे बहुत ही आसान भाषा में लिखा गया है. इसे आप पूरा पढ़िए, यह आपको आसानी से समझ में आ जायेगा. तो चलिए शुरू करते हैं:-
Limitations of Computer in Hindi – कंप्यूटर की सीमाएं
कंप्यूटर की बहुत सारीं सीमाएं होती हैं जिनके बारें में नीचे दिया गया है :-
1. कोई बुद्धिमत्ता नहीं (No Intellignece)
2. कोई भावना नहीं (No Feelings)
3. कम निर्णय क्षमता (Lack of Decision Making)
4. स्वयं से सीखने की क्षमता नहीं (No Learning Capability)
5. मनुष्य पर निर्भरता (Human Dependency)
6. वायरस का खतरा (Virus Threat)
7. अपडेट करने की जरुरत (Need Update)
8. बिजली पर निर्भरता (Electricity Dependent)
9. हैंग होने की समस्या (Hang Problem)
10. लागू नहीं कर सकता (Cannot Implement)
11. सामान्य बोध की कमी (Lack of Common Sense)
हेल्लो दोस्तों! आज हम इस पोस्ट में Limitations of Computer in Hindi (कंप्यूटर की सीमाएं) के बारें में पढेंगे. इसे बहुत ही आसान भाषा में लिखा गया है. इसे आप पूरा पढ़िए, यह आपको आसानी से समझ में आ जायेगा. तो चलिए शुरू करते हैं:-
Limitations of Computer in Hindi – कंप्यूटर की सीमाएं
कंप्यूटर की बहुत सारीं सीमाएं होती हैं जिनके बारें में नीचे दिया गया है :-
1. कोई बुद्धिमत्ता नहीं (No Intellignece)
2. कोई भावना नहीं (No Feelings)
3. कम निर्णय क्षमता (Lack of Decision Making)
4. स्वयं से सीखने की क्षमता नहीं (No Learning Capability)
5. मनुष्य पर निर्भरता (Human Dependency)
6. वायरस का खतरा (Virus Threat)
7. अपडेट करने की जरुरत (Need Update)
8. बिजली पर निर्भरता (Electricity Dependent)
9. हैंग होने की समस्या (Hang Problem)
10. लागू नहीं कर सकता (Cannot Implement)
11. सामान्य बोध की कमी (Lack of Common Sense)
CPU Working Process in Hindi – सीपीयू के कार्य करने की प्रक्रिया
CPU के कार्य करने की प्रक्रिया को नीचे 4 स्टेप के माध्यम से समझाया गया है:-
1- Fetch (फ़ेच)
कंप्यूटर की मेमोरी में कई प्रकार के निर्देश (instructions) स्टोर होते है। इस स्टेप में CPU निर्देश को पढ़ता है और इन्हें प्रोसेस करता है।
2- Decode (डिकोड)
सभी निर्देशों को पढ़ने के बाद CPU सभी निर्देशों को डिकोड (decode) करता है। यह निर्देशों को बाइनरी कोड में डिकोड करता है.
3- Execute (एक्सीक्यूट)
यह सीपीयू की कार्यविधि का तीसरा स्टेप है, इसमें CPU सभी निर्देशों (instructions) को execute करता है और सभी कार्य को पूरा करता है।
4- Store (स्टोर)
निर्देशों को execute करने के बाद जो डेटा प्राप्त होता है उसे सीपीयू कंप्यूटर की मेमोरी में स्टोर कर देता है।
CPU के कार्य करने की प्रक्रिया को नीचे 4 स्टेप के माध्यम से समझाया गया है:-
1- Fetch (फ़ेच)
कंप्यूटर की मेमोरी में कई प्रकार के निर्देश (instructions) स्टोर होते है। इस स्टेप में CPU निर्देश को पढ़ता है और इन्हें प्रोसेस करता है।
2- Decode (डिकोड)
सभी निर्देशों को पढ़ने के बाद CPU सभी निर्देशों को डिकोड (decode) करता है। यह निर्देशों को बाइनरी कोड में डिकोड करता है.
3- Execute (एक्सीक्यूट)
यह सीपीयू की कार्यविधि का तीसरा स्टेप है, इसमें CPU सभी निर्देशों (instructions) को execute करता है और सभी कार्य को पूरा करता है।
4- Store (स्टोर)
निर्देशों को execute करने के बाद जो डेटा प्राप्त होता है उसे सीपीयू कंप्यूटर की मेमोरी में स्टोर कर देता है।
Types of CPU in Hindi – सीपीयू के प्रकार
CPU के निम्नलिखित प्रकार है:-
1- Single Core CPU (सिंगल कोर सीपीयू)
यह एक प्रकार का सीपीयू है जिसमें केवल एक ही कोर (core) होता है। सिंगल कोर सीपीयू में एक समय में केवल एक ही कमांड या निर्देश को execute किया जा सकता है।
Single Core CPU एक समय में केवल एक ही काम को पूरा कर सकता है। सिग्नल कोर सीपीयू सबसे पुराना सीपीयू है जिसका उपयोग ज्यादातर personal (व्यक्तिगत) और official (आधिकारिक) कंप्यूटर में किया जाता है।
यह सीपीयू महंगे नहीं होते क्योकि इन्हे बनाने में ज्यादा पैसो का खर्चा नहीं आता है। परफॉरमेंस के मामले में यह कम अच्छे होते है क्योकि यह धीमी गति से कार्यो को पूरा करते है। सिंगल कोर का उदाहरण है – Intel 4004.
CPU के निम्नलिखित प्रकार है:-
1- Single Core CPU (सिंगल कोर सीपीयू)
यह एक प्रकार का सीपीयू है जिसमें केवल एक ही कोर (core) होता है। सिंगल कोर सीपीयू में एक समय में केवल एक ही कमांड या निर्देश को execute किया जा सकता है।
Single Core CPU एक समय में केवल एक ही काम को पूरा कर सकता है। सिग्नल कोर सीपीयू सबसे पुराना सीपीयू है जिसका उपयोग ज्यादातर personal (व्यक्तिगत) और official (आधिकारिक) कंप्यूटर में किया जाता है।
यह सीपीयू महंगे नहीं होते क्योकि इन्हे बनाने में ज्यादा पैसो का खर्चा नहीं आता है। परफॉरमेंस के मामले में यह कम अच्छे होते है क्योकि यह धीमी गति से कार्यो को पूरा करते है। सिंगल कोर का उदाहरण है – Intel 4004.
2- Dual Core CPU (ड्यूल कोर सीपीयू)
इस सीपीयू में दो कोर होते है जिसकी वजह से इसकी परफॉरमेंस अच्छी होती है। ड्यूल कोर सीपीयू एक ऐसा सीपीयू है जिसमे कंप्यूटर एक समय में कई कार्यो को पूरा कर सकता है।
सिंगल कोर सीपीयू की तुलना में ड्यूल कोर सीपीयू की गति तेज होती है. इसके कुछ लोकप्रिय उदहारण है :- Intel Core Duo, और AMD X2 आदि।
3- Quad Core CPU (क्वाड कोर)
Quad Core CPU में चार कोर का इस्तेमाल किया जाता है। यह यूजर को multitasking की सुविधा प्रदान करता है जिसकी वजह से यूजर एक समय में एक से अधिक कार्यो को आसानी से कर सकता है। यह अन्य सीपीयू की तुलना में चार गुना तेज होते है क्योकि इसमें चार कोर लगे होते है जो इसकी काम करने की स्पीड को बढ़ाते है।
इस सीपीयू में दो कोर होते है जिसकी वजह से इसकी परफॉरमेंस अच्छी होती है। ड्यूल कोर सीपीयू एक ऐसा सीपीयू है जिसमे कंप्यूटर एक समय में कई कार्यो को पूरा कर सकता है।
सिंगल कोर सीपीयू की तुलना में ड्यूल कोर सीपीयू की गति तेज होती है. इसके कुछ लोकप्रिय उदहारण है :- Intel Core Duo, और AMD X2 आदि।
3- Quad Core CPU (क्वाड कोर)
Quad Core CPU में चार कोर का इस्तेमाल किया जाता है। यह यूजर को multitasking की सुविधा प्रदान करता है जिसकी वजह से यूजर एक समय में एक से अधिक कार्यो को आसानी से कर सकता है। यह अन्य सीपीयू की तुलना में चार गुना तेज होते है क्योकि इसमें चार कोर लगे होते है जो इसकी काम करने की स्पीड को बढ़ाते है।