High level
ये भाषा user friendly होती है।
इसको setup करना काफी ज्यादा आसान होता है।
इसका use इस समय काफी ज्यादा किया जाता है।
इसको आसानी से execute किया जा सकता है।
High level language कम memory space इस्तेमाल करता है।
इसको आसानी से debug किया जा सकता है।
इसको maintain करके रखना काफी ज्यादा आसान है।
ये भाषा user friendly होती है।
इसको setup करना काफी ज्यादा आसान होता है।
इसका use इस समय काफी ज्यादा किया जाता है।
इसको आसानी से execute किया जा सकता है।
High level language कम memory space इस्तेमाल करता है।
इसको आसानी से debug किया जा सकता है।
इसको maintain करके रखना काफी ज्यादा आसान है।
Low level
ये भाषा computer friendly है।
इसको setup करने में काफी ज्यादा समस्याओ का सामना करना पड़ता है।
इस समय इस language को बहुत कम जगह use किया जाता है।
Low level language को आसानी से execute नहीं किया जा सकता।
यह computer की काफी ज्यादा memory space का use करता है।
ये भाषा computer friendly है।
इसको setup करने में काफी ज्यादा समस्याओ का सामना करना पड़ता है।
इस समय इस language को बहुत कम जगह use किया जाता है।
Low level language को आसानी से execute नहीं किया जा सकता।
यह computer की काफी ज्यादा memory space का use करता है।
debug करने में मुश्किलों को सामना करना पड़ता है।
maintain करके रखना काफी ज्यादा मुश्किल हो।
maintain करके रखना काफी ज्यादा मुश्किल हो।
Disadvantages of Low Level Language in Hindi – लो लेवल लैंग्वेज के नुकसान
1. इंसानो के द्वारा इस language को नहीं समझा जा सकता।
2. इस लैंग्वेज में प्रोग्राम को लिखना बहुत कठिन होता है।
3. इस भाषा में गलतियों को ढूढ़ना मुश्किल होता है।
4. इस language में गलती होने की संभावना ज्यादा रहती है।
5. इस language के code लिखने के लिए programmer को काफी अच्छी knowledge होनी जरुरी है।
1. इंसानो के द्वारा इस language को नहीं समझा जा सकता।
2. इस लैंग्वेज में प्रोग्राम को लिखना बहुत कठिन होता है।
3. इस भाषा में गलतियों को ढूढ़ना मुश्किल होता है।
4. इस language में गलती होने की संभावना ज्यादा रहती है।
5. इस language के code लिखने के लिए programmer को काफी अच्छी knowledge होनी जरुरी है।
High level और low level language के मध्य अंतर
C++ कैसी भाषा है?
यह ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड भाषा है?
कंप्यूटर में कितनी भाषा होती है?
कंप्यूटर केवल एक ही भाषा समझता है वो है बाइनरी(Binary)। जो 0 और 1 से मिलकर बनी होती है।
C++ कैसी भाषा है?
यह ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड भाषा है?
कंप्यूटर में कितनी भाषा होती है?
कंप्यूटर केवल एक ही भाषा समझता है वो है बाइनरी(Binary)। जो 0 और 1 से मिलकर बनी होती है।
कंप्यूटर मेमोरी क्या है? – Computer Memory in Hindi
हेल्लो दोस्तों! आज हम इस पोस्ट में What is Computer Memory in Hindi & Types (कंप्यूटर मेमोरी क्या है और इसके प्रकार) के बारें में पढेंगे. इसे बहुत ही आसान भाषा में लिखा गया है. इसे आप पूरा पढ़िए, यह आपको आसानी से समझ में आ जायेगा. तो चलिए शुरू करते हैं:-
हेल्लो दोस्तों! आज हम इस पोस्ट में What is Computer Memory in Hindi & Types (कंप्यूटर मेमोरी क्या है और इसके प्रकार) के बारें में पढेंगे. इसे बहुत ही आसान भाषा में लिखा गया है. इसे आप पूरा पढ़िए, यह आपको आसानी से समझ में आ जायेगा. तो चलिए शुरू करते हैं:-
Computer Memory in Hindi – कंप्यूटर मेमोरी क्या है?
• कंप्यूटर मेमोरी एक डिवाइस होती है जिसका इस्तेमाल डेटा और सूचना को स्टोर करने के लिए किया जाता है.
• दूसरे शब्दों में कहें तो, “Computer Memory कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसमें data को स्टोर करके रखा जाता है, बिना मेमोरी के कंप्यूटर काम नहीं करता.”
• जिस प्रकार मनुष्य डेटा और सूचना को स्टोर करने के अपने दिमाग का इस्तेमाल करता है उसी प्रकार कंप्यूटर data (डेटा) और information (सूचना) को स्टोर करने के लिए memory का इस्तेमाल करता है.
• सरल शब्दो में कहे तो “कंप्यूटर मेमोरी एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसका इस्तेमाल प्रोग्राम और सूचनाओं को स्टोर करने के लिए किया जाता है। मेमोरी की मदद से कंप्यूटर अपने कार्यों को पूरा करता है. “
• कंप्यूटर की मेमोरी को छोटे छोटे हिस्सों में विभाजित (divide) किया जाता है जिन्हे हम cell कहते है। इन Cell में डेटा बाइनरी (0,1) के रूप में स्टोर होता है.
• कंप्यूटर मेमोरी इनपुट और आउटपुट दोनों प्रकार के डेटा को स्टोर करने में सक्षम होती है।
• कंप्यूटर मेमोरी बहुत प्रकार की होती है- प्राइमरी मेमोरी (Primary memory), सेकेंडरी मेमोरी (Secondary memory) , कैश मेमोरी (Cache Memory) और रजिस्टर मेमोरी (Register memory). इन सभी मेमोरी के बारे में हम नीचे विस्तार से पढ़ेंगे।
• कंप्यूटर मेमोरी एक डिवाइस होती है जिसका इस्तेमाल डेटा और सूचना को स्टोर करने के लिए किया जाता है.
• दूसरे शब्दों में कहें तो, “Computer Memory कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसमें data को स्टोर करके रखा जाता है, बिना मेमोरी के कंप्यूटर काम नहीं करता.”
• जिस प्रकार मनुष्य डेटा और सूचना को स्टोर करने के अपने दिमाग का इस्तेमाल करता है उसी प्रकार कंप्यूटर data (डेटा) और information (सूचना) को स्टोर करने के लिए memory का इस्तेमाल करता है.
• सरल शब्दो में कहे तो “कंप्यूटर मेमोरी एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसका इस्तेमाल प्रोग्राम और सूचनाओं को स्टोर करने के लिए किया जाता है। मेमोरी की मदद से कंप्यूटर अपने कार्यों को पूरा करता है. “
• कंप्यूटर की मेमोरी को छोटे छोटे हिस्सों में विभाजित (divide) किया जाता है जिन्हे हम cell कहते है। इन Cell में डेटा बाइनरी (0,1) के रूप में स्टोर होता है.
• कंप्यूटर मेमोरी इनपुट और आउटपुट दोनों प्रकार के डेटा को स्टोर करने में सक्षम होती है।
• कंप्यूटर मेमोरी बहुत प्रकार की होती है- प्राइमरी मेमोरी (Primary memory), सेकेंडरी मेमोरी (Secondary memory) , कैश मेमोरी (Cache Memory) और रजिस्टर मेमोरी (Register memory). इन सभी मेमोरी के बारे में हम नीचे विस्तार से पढ़ेंगे।
Types of Computer Memory in Hindi – कंप्यूटर मेमोरी के प्रकार
कंप्यूटर मेमोरी के निम्नलिखित प्रकार होते हैं:-
1. प्राइमरी मेमोरी (Primary memory)
2. सेकेंडरी मेमोरी (Secondary memory)
3. कैश मेमोरी (Cache Memory)
4. रजिस्टर (Register)
कंप्यूटर मेमोरी के निम्नलिखित प्रकार होते हैं:-
1. प्राइमरी मेमोरी (Primary memory)
2. सेकेंडरी मेमोरी (Secondary memory)
3. कैश मेमोरी (Cache Memory)
4. रजिस्टर (Register)
1- प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory)
प्राइमरी मेमोरी कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी (main memory) होती है जो कंप्यूटर में मौजूद डेटा और सूचना (information) को स्टोर करती है।
दूसरे शब्दों में कहें तो, “प्राइमरी मैमोरी एक प्रकार की कंप्यूटर मेमोरी है जिसे CPU के द्वारा सीधे एक्सेस (access) किया जा सकता है।“
प्राइमरी मेमोरी को प्राइमरी स्टोरेज के नाम से भी जाना जाता है जो कंप्यूटर के मदरबोर्ड पर स्थित होती है। प्राइमरी मेमोरी को Semiconductor (अर्धचालक) पदार्थ से बनाया जाता है।
प्राइमरी मेमोरी कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी (main memory) होती है जो कंप्यूटर में मौजूद डेटा और सूचना (information) को स्टोर करती है।
दूसरे शब्दों में कहें तो, “प्राइमरी मैमोरी एक प्रकार की कंप्यूटर मेमोरी है जिसे CPU के द्वारा सीधे एक्सेस (access) किया जा सकता है।“
प्राइमरी मेमोरी को प्राइमरी स्टोरेज के नाम से भी जाना जाता है जो कंप्यूटर के मदरबोर्ड पर स्थित होती है। प्राइमरी मेमोरी को Semiconductor (अर्धचालक) पदार्थ से बनाया जाता है।
इस मेमोरी की स्टोरेज क्षमता सिमित (limited) होती है जिसके कारण यह बहुत कम मात्रा में डेटा को स्टोर कर पाती है। एक कंप्यूटर में प्राइमरी मेमोरी का साइज लगभग 4 GB होता है।
प्राइमरी मेमोरी Volatile और Non Volatile दोनों प्रकार की होती है। Volatile memory वह मेमोरी होती है जो कंप्यूटर के ON रहने तक ही डेटा को स्टोर करती है, कंप्यूटर के off होने पर इसमें रखा डेटा अपने आप डिलीट हो जाता है। Non-Volatile वह मेमोरी होती है जो हमेशा के लिए डेटा को स्टोर करके रखती है।
सेकेंडरी मेमोरी की तुलना में प्राइमरी मेमोरी महंगी होती है लेकिन यह तेज गति (speed) के साथ डेटा को एक्सेस करती है। इस मेमोरी के दो प्रकार होते है पहला RAM (रैंडम एक्सेस मेमोरी) और दूसरा ROM (रीड ओनली मेमोरी)
प्राइमरी मेमोरी Volatile और Non Volatile दोनों प्रकार की होती है। Volatile memory वह मेमोरी होती है जो कंप्यूटर के ON रहने तक ही डेटा को स्टोर करती है, कंप्यूटर के off होने पर इसमें रखा डेटा अपने आप डिलीट हो जाता है। Non-Volatile वह मेमोरी होती है जो हमेशा के लिए डेटा को स्टोर करके रखती है।
सेकेंडरी मेमोरी की तुलना में प्राइमरी मेमोरी महंगी होती है लेकिन यह तेज गति (speed) के साथ डेटा को एक्सेस करती है। इस मेमोरी के दो प्रकार होते है पहला RAM (रैंडम एक्सेस मेमोरी) और दूसरा ROM (रीड ओनली मेमोरी)
प्राइमरी मेमोरी के प्रकार
(i). RAM (रैम)
RAM का पूरा नाम Random Access Memory (रैंडम एक्सेस मेमोरी) होता है। RAM में डेटा कंप्यूटर के ON रहने तक ही स्टोर रहता है, कंप्यूटर के OFF होने पर इसमें मौजूद डेटा अपने आप डिलीट हो जाता है। इसलिए इसे Volatile memory भी कहा जाता है।
RAM को सिस्टम मेमोरी, और रीड राइट मेमोरी के नाम से भी जाना जाता है। इसमें डेटा को एक्सेस करने के लिए बिजली की आवश्यकता पड़ती है। यदि कंप्यूटर बंद हो जाता है या बिजली चली जाती है तो इसमें मौजूद सारा डेटा डिलीट हो जाता है।
(i). RAM (रैम)
RAM का पूरा नाम Random Access Memory (रैंडम एक्सेस मेमोरी) होता है। RAM में डेटा कंप्यूटर के ON रहने तक ही स्टोर रहता है, कंप्यूटर के OFF होने पर इसमें मौजूद डेटा अपने आप डिलीट हो जाता है। इसलिए इसे Volatile memory भी कहा जाता है।
RAM को सिस्टम मेमोरी, और रीड राइट मेमोरी के नाम से भी जाना जाता है। इसमें डेटा को एक्सेस करने के लिए बिजली की आवश्यकता पड़ती है। यदि कंप्यूटर बंद हो जाता है या बिजली चली जाती है तो इसमें मौजूद सारा डेटा डिलीट हो जाता है।
कंप्यूटर RAM में मौजूद डेटा को तेज गति के साथ एक्सेस करता है जिसके कारण कंप्यूटर तेजी से कार्यो को पूरा कर पाता है।
RAM के दो प्रकार होते है पहला SRAM (स्टेटिक रैंडम एक्सेस मेमोरी) और दूसरा DRAM (डायनामिक रैंडम एक्सेस मैमोरी) .
RAM के दो प्रकार होते है पहला SRAM (स्टेटिक रैंडम एक्सेस मेमोरी) और दूसरा DRAM (डायनामिक रैंडम एक्सेस मैमोरी) .
(ii). ROM (रोम)
ROM का पूरा नाम Read Only Memory (रीड ओनली मेमोरी) होता है। यह एक non volatile मैमोरी है जिसका मतलब यह है कि यह हमेशा के लिए डेटा को स्टोर करके रखती है।
यदि बिजली चली जाती है और कंप्यूटर बंद हो जाता है तो भी ROM में मौजूद डेटा डिलीट नही होता। इस मेमोरी में डेटा को permanently (हमेशा के लिए) स्टोर किया जा सकता है लेकिन RAM में हम ऐसा नहीं कर सकते।
ROM के तीन प्रकार होते है पहला PROM (प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी) दूसरा EPROM (एरेजेबल प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी) और तीसरा EEPROM (इलेक्ट्रिकली इरेजेबल प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी)
ROM का पूरा नाम Read Only Memory (रीड ओनली मेमोरी) होता है। यह एक non volatile मैमोरी है जिसका मतलब यह है कि यह हमेशा के लिए डेटा को स्टोर करके रखती है।
यदि बिजली चली जाती है और कंप्यूटर बंद हो जाता है तो भी ROM में मौजूद डेटा डिलीट नही होता। इस मेमोरी में डेटा को permanently (हमेशा के लिए) स्टोर किया जा सकता है लेकिन RAM में हम ऐसा नहीं कर सकते।
ROM के तीन प्रकार होते है पहला PROM (प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी) दूसरा EPROM (एरेजेबल प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी) और तीसरा EEPROM (इलेक्ट्रिकली इरेजेबल प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी)
प्राइमरी मेमोरी की विशेषताएं (Characteristics of Primary Memory in Hindi)
1. प्राइमरी मेमोरी में मौजूद डेटा को तेज गति के साथ एक्सेस किया जा सकता है।
2. कैश मेमोरी (cache memory) के बाद प्राइमरी मेमोरी की ही स्पीड सबसे ज्यादा होती है।
3. इसका इस्तेमाल कंप्यूटर को ON करने और प्रोग्राम को run करने के लिए किया जाता है.
4. यह semiconductor (अर्धचालक) प्रदार्थ से बनी होती है.
5. प्राइमरी मेमोरी मदरबोर्ड में स्थित होती है.
6. यह मेमोरी ज्यादा मात्रा में डेटा को स्टोर नहीं कर सकती क्योकि इसकी स्टोरेज क्षमता (storage capacity) बहुत कम होती है।
7. प्राइमरी मेमोरी सीधे CPU के साथ संचार (communication) करती है।
1. प्राइमरी मेमोरी में मौजूद डेटा को तेज गति के साथ एक्सेस किया जा सकता है।
2. कैश मेमोरी (cache memory) के बाद प्राइमरी मेमोरी की ही स्पीड सबसे ज्यादा होती है।
3. इसका इस्तेमाल कंप्यूटर को ON करने और प्रोग्राम को run करने के लिए किया जाता है.
4. यह semiconductor (अर्धचालक) प्रदार्थ से बनी होती है.
5. प्राइमरी मेमोरी मदरबोर्ड में स्थित होती है.
6. यह मेमोरी ज्यादा मात्रा में डेटा को स्टोर नहीं कर सकती क्योकि इसकी स्टोरेज क्षमता (storage capacity) बहुत कम होती है।
7. प्राइमरी मेमोरी सीधे CPU के साथ संचार (communication) करती है।
2 – Secondary Memory (सेकेंडरी मेमोरी)
सेकेंडरी मेमोरी भी कंप्यूटर की एक मेमोरी है जिसे CPU के द्वारा सीधे (direct) एक्सेस नहीं किया जा सकता। सेकेंडरी मेमोरी कंप्यूटर का हिस्सा नहीं होती है इसे कंप्यूटर में अलग से जोड़ा जाता है।
सेकेंडरी मेमोरी एक प्रकार की non-volatile मेमोरी है अर्थात् इसमें डेटा हमेशा के लिए स्टोर रहता है यानी कि अगर कंप्यूटर बंद भी हो जाए तो इसका डेटा डिलीट नही होता।
Secondary memory का इस्तेमाल permanent डेटा को स्टोर करने के लिए किया जाता है ताकि भविष्य में यूजर उस डेटा का उपयोग कर सके।
प्राइमरी मेमोरी की तुलना में सेकेंडरी मेमोरी की स्टोरेज क्षमता अधिक होती है जिसके कारण यह ज्यादा मात्रा में डेटा को स्टोर कर सकती है।
इस मेमोरी का इस्तेमाल बड़े आकार वाले डेटा जैसे (वीडियो, इमेज, ऑडियो, फाइल) को स्टोर करने के लिए किया जाता है। इस मेमोरी में यदि बिजली चली जाती है तो भी डेटा डिलीट नहीं होता।
CPU सीधे सेकेंडरी मेमोरी को एक्सेस नहीं कर सकता। इसे ऐसा करने के लिए सेकेंडरी मेमोरी के डेटा को प्राइमरी मेमोरी में ट्रांसफर करना होगा इसके बाद CPU सेकडरी मेमोरी को एक्सेस कर पायेगा।
सेकेंडरी मेमोरी भी कंप्यूटर की एक मेमोरी है जिसे CPU के द्वारा सीधे (direct) एक्सेस नहीं किया जा सकता। सेकेंडरी मेमोरी कंप्यूटर का हिस्सा नहीं होती है इसे कंप्यूटर में अलग से जोड़ा जाता है।
सेकेंडरी मेमोरी एक प्रकार की non-volatile मेमोरी है अर्थात् इसमें डेटा हमेशा के लिए स्टोर रहता है यानी कि अगर कंप्यूटर बंद भी हो जाए तो इसका डेटा डिलीट नही होता।
Secondary memory का इस्तेमाल permanent डेटा को स्टोर करने के लिए किया जाता है ताकि भविष्य में यूजर उस डेटा का उपयोग कर सके।
प्राइमरी मेमोरी की तुलना में सेकेंडरी मेमोरी की स्टोरेज क्षमता अधिक होती है जिसके कारण यह ज्यादा मात्रा में डेटा को स्टोर कर सकती है।
इस मेमोरी का इस्तेमाल बड़े आकार वाले डेटा जैसे (वीडियो, इमेज, ऑडियो, फाइल) को स्टोर करने के लिए किया जाता है। इस मेमोरी में यदि बिजली चली जाती है तो भी डेटा डिलीट नहीं होता।
CPU सीधे सेकेंडरी मेमोरी को एक्सेस नहीं कर सकता। इसे ऐसा करने के लिए सेकेंडरी मेमोरी के डेटा को प्राइमरी मेमोरी में ट्रांसफर करना होगा इसके बाद CPU सेकडरी मेमोरी को एक्सेस कर पायेगा।
इस मेमोरी को एक्सटर्नल मेमोरी या सहायक मेमोरी भी कहते है। इस मेमोरी में हम डेटा को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में ट्रांसफर कर सकते है।
यह मेमोरी प्राइमरी मेमोरी की तुलना में काफी सस्ती होती है। सेकेंडरी में मेमोरी के कुछ उदहारण :- हार्ड डिस्क , pendrive , DVD, CD, और मैग्नेटिक टेप आदि।
यह मेमोरी प्राइमरी मेमोरी की तुलना में काफी सस्ती होती है। सेकेंडरी में मेमोरी के कुछ उदहारण :- हार्ड डिस्क , pendrive , DVD, CD, और मैग्नेटिक टेप आदि।
सेकेंडरी मेमोरी की विशेषताएं (Characteristics of Secondary Memory in Hindi)
1. यह मेमोरी अधिक मात्रा में डेटा को स्टोर कर सकती है। इसकी स्टोरेज क्षमता अधिक होती है।
2. इसमें बिजली चले जाने पर डेटा डिलीट नहीं होता।
3. यह प्राइमरी मेमोरी की तुलना में सस्ती होती है।
4. इस मेमोरी की स्पीड धीमी (slow) होती है।
5. इसके डेटा को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में आसानी से ट्रान्सफर कर सकते हैं.
6. इस मेमोरी को CPU के द्वारा सीधे (direct) एक्सेस नहीं किया जा सकता।
1. यह मेमोरी अधिक मात्रा में डेटा को स्टोर कर सकती है। इसकी स्टोरेज क्षमता अधिक होती है।
2. इसमें बिजली चले जाने पर डेटा डिलीट नहीं होता।
3. यह प्राइमरी मेमोरी की तुलना में सस्ती होती है।
4. इस मेमोरी की स्पीड धीमी (slow) होती है।
5. इसके डेटा को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में आसानी से ट्रान्सफर कर सकते हैं.
6. इस मेमोरी को CPU के द्वारा सीधे (direct) एक्सेस नहीं किया जा सकता।