Block Diagram of Computer in Hindi – कंप्यूटर का ब्लॉक डायग्राम
कंप्यूटर का ब्लॉक डायग्राम कंप्यूटर के स्ट्रक्चर के बारें में बताता है। ब्लॉक डायग्राम हमें यह बताता है कि कंप्यूटर में कितने घटक (component) होते है और वे सभी एक दूसरे के साथ कार्य कैसे करते है।
दूसरे शब्दों में कहें तो, “कंप्यूटर का ब्लॉक डायग्राम एक स्ट्रक्चर होता है जो कंप्यूटर की कार्यविधि के बारें में जानकारी प्रदान करता है और यह भी बताता है कि इसमें कितने components होते हैं।”
कंप्यूटर ब्लॉक डायग्राम के द्वारा हम आसानी से समझ सकते हैं कि कंप्यूटर काम कैसे करता है और वह अपनी प्रक्रिया को कैसे execute करता है।
चलिए इसे उदहारण के माध्यम से समझते है:- मान लीजिये एक यूजर ने कंप्यूटर को कुछ इनपुट दिया और बदले में उसे कुछ आउटपुट प्राप्त हुआ, इस बीच में होने वाली प्रक्रियाओं को हम इस ब्लॉक डायग्राम के माध्यम से समझ सकते है।
यह डायग्राम यूजर के द्वारा दिए गए इनपुट डेटा और कंप्यूटर से प्राप्त किए गए आउटपुट डेटा को प्रस्तुत (represent) करता है।
कंप्यूटर के मुख्य रूप से 6 घटक (components) होते है: – CPU, इनपुट डिवाइस, आउटपुट डिवाइस, मैमोरी, ALU और CU.
कंप्यूटर का ब्लॉक डायग्राम कंप्यूटर के स्ट्रक्चर के बारें में बताता है। ब्लॉक डायग्राम हमें यह बताता है कि कंप्यूटर में कितने घटक (component) होते है और वे सभी एक दूसरे के साथ कार्य कैसे करते है।
दूसरे शब्दों में कहें तो, “कंप्यूटर का ब्लॉक डायग्राम एक स्ट्रक्चर होता है जो कंप्यूटर की कार्यविधि के बारें में जानकारी प्रदान करता है और यह भी बताता है कि इसमें कितने components होते हैं।”
कंप्यूटर ब्लॉक डायग्राम के द्वारा हम आसानी से समझ सकते हैं कि कंप्यूटर काम कैसे करता है और वह अपनी प्रक्रिया को कैसे execute करता है।
चलिए इसे उदहारण के माध्यम से समझते है:- मान लीजिये एक यूजर ने कंप्यूटर को कुछ इनपुट दिया और बदले में उसे कुछ आउटपुट प्राप्त हुआ, इस बीच में होने वाली प्रक्रियाओं को हम इस ब्लॉक डायग्राम के माध्यम से समझ सकते है।
यह डायग्राम यूजर के द्वारा दिए गए इनपुट डेटा और कंप्यूटर से प्राप्त किए गए आउटपुट डेटा को प्रस्तुत (represent) करता है।
कंप्यूटर के मुख्य रूप से 6 घटक (components) होते है: – CPU, इनपुट डिवाइस, आउटपुट डिवाइस, मैमोरी, ALU और CU.
Components of Computer in Hindi – कंप्यूटर के घटक
इसके 6 घटक होते हैं –
1. Input Device (इनपुट डिवाइस)
2. Output Device (आउटपुट डिवाइस)
3. CPU (सीपीयू)
4. ALU (ए.एल.यू)
5. CU (सी.यू.)
6. Memory (मैमोरी)
इसके 6 घटक होते हैं –
1. Input Device (इनपुट डिवाइस)
2. Output Device (आउटपुट डिवाइस)
3. CPU (सीपीयू)
4. ALU (ए.एल.यू)
5. CU (सी.यू.)
6. Memory (मैमोरी)
1- Input Device (इनपुट डिवाइस)
इनपुट डिवाइस ऐसे हार्डवेयर डिवाइस होते है जिनका इस्तेमाल यूजर के द्वारा कंप्यूटर को डेटा और निर्देश देने के लिए किया जाता है।
इनपुट डिवाइस के माध्यम से यूजर कंप्यूटर को कमांड या इनपुट देता है और बदले में आउटपुट प्राप्त करता है।
इनपुट डिवाइस की मदद से यूजर कंप्यूटर के साथ सीधे इंटरैक्ट करता है और कंप्यूटर को कण्ट्रोल करता है। इनपुट डिवाइस के कुछ लोकप्रिय उदहारण कीबोर्ड , माउस , स्कैनर आदि हैं।
इनपुट डिवाइस ऐसे हार्डवेयर डिवाइस होते है जिनका इस्तेमाल यूजर के द्वारा कंप्यूटर को डेटा और निर्देश देने के लिए किया जाता है।
इनपुट डिवाइस के माध्यम से यूजर कंप्यूटर को कमांड या इनपुट देता है और बदले में आउटपुट प्राप्त करता है।
इनपुट डिवाइस की मदद से यूजर कंप्यूटर के साथ सीधे इंटरैक्ट करता है और कंप्यूटर को कण्ट्रोल करता है। इनपुट डिवाइस के कुछ लोकप्रिय उदहारण कीबोर्ड , माउस , स्कैनर आदि हैं।
कंप्यूटर केवल बाइनरी भाषा (0,1) को ही समझता है इसलिए इनपुट डिवाइस यूजर के द्वारा दिए गए डेटा और निर्देश को बाइनरी भाषा में बदलता है।
इनपुट डिवाइस के प्रमुख कार्य –
1. यह यूजर से डेटा और निर्देश को लेता है।
2. इसके बाद यह इस डेटा और निर्देश को बाइनरी भाषा में बदलता है।
3. बाइनरी भाषा में बदले हुए डेटा और निर्देश को यह कंप्यूटर को भेज देता है।
Input device के उदाहरण –
● Keyboard (कीबोर्ड)
● Mouse (माउस)
● Microphone (माइक्रोफोन)
● Scanner (स्कैनर)
● Trackball (ट्रैकबॉल)
● Joystick (जॉयस्टिक)
● web cam (वेब केम)
इनपुट डिवाइस के प्रमुख कार्य –
1. यह यूजर से डेटा और निर्देश को लेता है।
2. इसके बाद यह इस डेटा और निर्देश को बाइनरी भाषा में बदलता है।
3. बाइनरी भाषा में बदले हुए डेटा और निर्देश को यह कंप्यूटर को भेज देता है।
Input device के उदाहरण –
● Keyboard (कीबोर्ड)
● Mouse (माउस)
● Microphone (माइक्रोफोन)
● Scanner (स्कैनर)
● Trackball (ट्रैकबॉल)
● Joystick (जॉयस्टिक)
● web cam (वेब केम)
2- Output Device (आउटपुट डिवाइस)
आउटपुट डिवाइस वे डिवाइस होते है जो यूजर के द्वारा दिए गए इनपुट को प्रदर्शित (display) करते है।
दुसरे शब्दो में कहे तो आउटपुट डिवाइस एक प्रकार का हार्डवेयर होता है जिसका इस्तेमाल आउटपुट डेटा को डिस्प्ले करने के लिए किया जाता है।
आउटपुट डिवाइस कंप्यूटर से डेटा को प्राप्त करते है और उस डेटा को टेक्स्ट, वीडियो और ऑडियो के फॉरमेट में बदल देते है।
Output device के उदाहरण –
● Monitor (मॉनिटर)
● Speaker (स्पीकर)
● Printer (प्रिंटर)
● Projector (प्रोजेक्टर)
● Plotter (प्लॉटर)
● Headphone (हेडफोन)
आउटपुट डिवाइस वे डिवाइस होते है जो यूजर के द्वारा दिए गए इनपुट को प्रदर्शित (display) करते है।
दुसरे शब्दो में कहे तो आउटपुट डिवाइस एक प्रकार का हार्डवेयर होता है जिसका इस्तेमाल आउटपुट डेटा को डिस्प्ले करने के लिए किया जाता है।
आउटपुट डिवाइस कंप्यूटर से डेटा को प्राप्त करते है और उस डेटा को टेक्स्ट, वीडियो और ऑडियो के फॉरमेट में बदल देते है।
Output device के उदाहरण –
● Monitor (मॉनिटर)
● Speaker (स्पीकर)
● Printer (प्रिंटर)
● Projector (प्रोजेक्टर)
● Plotter (प्लॉटर)
● Headphone (हेडफोन)
3- CPU (सीपीयू)
CPU का पूरा नाम Central Processing Unit (सेंट्रल प्रोसेस यूनिट) होता है। सीपीयू कंप्यूटर का दिमाग होता है। यह कंप्यूटर के सभी कामों को नियंत्रित करता है।
CPU को माइक्रोप्रोसेसर भी कहा जाता है, यह यूजर से प्राप्त डेटा को प्रोसेस करता है और इस डेटा को महत्वपूर्ण जानकारी में बदल देता है।
CPU कंप्यूटर से जुड़े सभी बाहरी डिवाइस (जैसे कि – कीबोर्ड, प्रिंटर या माउस) को कण्ट्रोल और मैनेज करता है ।
जिस प्रकार मनुष्य के पास दिमाग होता है बिना दिमाग के मनुष्य कुछ भी नही कर सकता, उसी प्रकार कंप्यूटर के पास CPU होता है। बिना CPU के कंप्यूटर कोई भी काम नही कर सकता।
ब्लॉक डायग्राम में, CPU को कण्ट्रोल यूनिट कहा जाता है। यह कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण घटक (component) है जो यूजर के द्वारा दिए गए इनपुट को प्राप्त करता है और उन्हें आउटपुट प्रदान करता है।
कंप्यूटर की सारी प्रक्रियाएं CPU में execute होती है। इसमें डेटा को प्राप्त करना, स्टोर करना और उसकी कैलकुलेशन करना जैसे कार्य शामिल है।
CPU की दो यूनिट होती है-
1. ALU (ए.एल.यू)
2. CU (सी.यू)
CPU का पूरा नाम Central Processing Unit (सेंट्रल प्रोसेस यूनिट) होता है। सीपीयू कंप्यूटर का दिमाग होता है। यह कंप्यूटर के सभी कामों को नियंत्रित करता है।
CPU को माइक्रोप्रोसेसर भी कहा जाता है, यह यूजर से प्राप्त डेटा को प्रोसेस करता है और इस डेटा को महत्वपूर्ण जानकारी में बदल देता है।
CPU कंप्यूटर से जुड़े सभी बाहरी डिवाइस (जैसे कि – कीबोर्ड, प्रिंटर या माउस) को कण्ट्रोल और मैनेज करता है ।
जिस प्रकार मनुष्य के पास दिमाग होता है बिना दिमाग के मनुष्य कुछ भी नही कर सकता, उसी प्रकार कंप्यूटर के पास CPU होता है। बिना CPU के कंप्यूटर कोई भी काम नही कर सकता।
ब्लॉक डायग्राम में, CPU को कण्ट्रोल यूनिट कहा जाता है। यह कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण घटक (component) है जो यूजर के द्वारा दिए गए इनपुट को प्राप्त करता है और उन्हें आउटपुट प्रदान करता है।
कंप्यूटर की सारी प्रक्रियाएं CPU में execute होती है। इसमें डेटा को प्राप्त करना, स्टोर करना और उसकी कैलकुलेशन करना जैसे कार्य शामिल है।
CPU की दो यूनिट होती है-
1. ALU (ए.एल.यू)
2. CU (सी.यू)
4- ALU (ए.एल.यू)
ALU का पूरा नाम आर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit) होता है। यह सीपीयू का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है इसका इस्तेमाल अंकगणितीय और तार्किक (logic) कार्यों को करने के लिए किया जाता है।
जोड़ना, घटाना, भाग करना, और गुणा करना आदि अंकगणित के कार्य होते हैं और AND, NOT, NOR आदि कार्य तार्किक होते हैं।
ALU का पूरा नाम आर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit) होता है। यह सीपीयू का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है इसका इस्तेमाल अंकगणितीय और तार्किक (logic) कार्यों को करने के लिए किया जाता है।
जोड़ना, घटाना, भाग करना, और गुणा करना आदि अंकगणित के कार्य होते हैं और AND, NOT, NOR आदि कार्य तार्किक होते हैं।
5- CU (सी.यू)
CU का पूरा नाम कंट्रोल यूनिट (control unit) है। कंट्रोल यूनिट कंप्यूटर से जुड़ी हुई सभी डिवाइसो और उनके कार्यों को नियंत्रित (control) करती है।
इसके साथ साथ कंट्रोल यूनिट Input Output कार्यो को भी नियंत्रित करती है। यह Memory और ALU के बीच हो रहे निर्देशो और डेटा के आदान प्रदान को control करने का कार्य भी करती है।
CU का पूरा नाम कंट्रोल यूनिट (control unit) है। कंट्रोल यूनिट कंप्यूटर से जुड़ी हुई सभी डिवाइसो और उनके कार्यों को नियंत्रित (control) करती है।
इसके साथ साथ कंट्रोल यूनिट Input Output कार्यो को भी नियंत्रित करती है। यह Memory और ALU के बीच हो रहे निर्देशो और डेटा के आदान प्रदान को control करने का कार्य भी करती है।
6- Memory (मैमोरी)
कंप्यूटर में डेटा और सूचना को स्टोर करने के लिए जिस डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है उसे मैमोरी कहते हैं।
मेमोरी कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जिसका काम डेटा और निर्देशों को कंप्यूटर में स्टोर करना होता है।
कंप्यूटर में memory दो प्रकार की होती हैं –
1. Primary Memory (प्राइमरी मैमोरी)
2. Secondary Memory (सेकेंडरी मैमोरी)
कंप्यूटर में डेटा और सूचना को स्टोर करने के लिए जिस डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है उसे मैमोरी कहते हैं।
मेमोरी कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जिसका काम डेटा और निर्देशों को कंप्यूटर में स्टोर करना होता है।
कंप्यूटर में memory दो प्रकार की होती हैं –
1. Primary Memory (प्राइमरी मैमोरी)
2. Secondary Memory (सेकेंडरी मैमोरी)
Primary Memory (प्राइमरी मैमोरी)
प्राइमरी मेमोरी एक प्रकार की कंप्यूटर मेमोरी है जिसे सीधे (direct) प्रोसेसर के द्वारा एक्सेस किया जाता है।
प्राइमरी मैमोरी कंप्यूटर की Main Memory होती है, जो CPU का एक हिस्सा होती है. CPU में लगे होने के कारण इस मैमोरी को आंतरिक मैमोरी भी कहा जाता है.
प्राइमरी मैमोरी को Semiconductor (अर्धचालक) पदार्थ से बनाया जाता है।
सरल शब्दो में कहे तो यह एक ऐसी मेमोरी है जिसका इस्तेमाल कंप्यूटर में मौजूद प्रोग्राम को स्टोर करने के लिए किया जाता है।
यह कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी होती है जिसे प्राइमरी स्टोरेज के नाम से भी जाना जाता है। इसमें दो तरह की मेमोरी शामिल है RAM (रैंडम एक्सेस मेमोरी) और ROM (रीड ओनली मेमोरी) .
प्राइमरी मेमोरी कंप्यूटर के motherboard पर स्थित होती है और बिजली चले जाने पर इस मेमोरी में स्टोर डेटा खो जाता है।
यह मेमोरी महंगी होती है लेकिन सेकेंडरी मेमोरी की तुलना में डेटा को एक्सेस करने की गति (speed) तेज होती है।
प्राइमरी मेमोरी एक प्रकार की कंप्यूटर मेमोरी है जिसे सीधे (direct) प्रोसेसर के द्वारा एक्सेस किया जाता है।
प्राइमरी मैमोरी कंप्यूटर की Main Memory होती है, जो CPU का एक हिस्सा होती है. CPU में लगे होने के कारण इस मैमोरी को आंतरिक मैमोरी भी कहा जाता है.
प्राइमरी मैमोरी को Semiconductor (अर्धचालक) पदार्थ से बनाया जाता है।
सरल शब्दो में कहे तो यह एक ऐसी मेमोरी है जिसका इस्तेमाल कंप्यूटर में मौजूद प्रोग्राम को स्टोर करने के लिए किया जाता है।
यह कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी होती है जिसे प्राइमरी स्टोरेज के नाम से भी जाना जाता है। इसमें दो तरह की मेमोरी शामिल है RAM (रैंडम एक्सेस मेमोरी) और ROM (रीड ओनली मेमोरी) .
प्राइमरी मेमोरी कंप्यूटर के motherboard पर स्थित होती है और बिजली चले जाने पर इस मेमोरी में स्टोर डेटा खो जाता है।
यह मेमोरी महंगी होती है लेकिन सेकेंडरी मेमोरी की तुलना में डेटा को एक्सेस करने की गति (speed) तेज होती है।
Secondary Memory (सेकेंडरी मैमोरी)
यह भी एक प्रकार की कंप्यूटर मेमोरी है जिसे सीधे (direct) प्रोसेसर के द्वारा एक्सेस नहीं किया जा सकता।
सेकेंडरी मेमोरी एक ऐसी मेमोरी है जिसकी स्टोरेज छमता अधिक होती है और यह बड़ी मात्रा में डेटा को स्टोर कर सकती है।
इस मेमोरी का उपयोग बड़े आकार वाले डेटा जैसे (वीडियो, इमेज, ऑडियो, फाइल) को स्टोर करने के लिए किया जाता है।
इस मेमोरी में यूजर डेटा को आसानी से स्टोर कर सकता है और उस डेटा को पुनर्प्राप्त (restore) कर सकता है।
इस मेमोरी का उपयोग स्थाई (permanent) रूप से डेटा को स्टोर करने के लिए किया जाता है। permanent डेटा का अर्थ यह है की बिजली चली जाने के बाद भी डेटा बरकार रहे या डिलीट ना हो।
प्राइमरी मेमोरी में बिजली चली जाने पर डेटा खो जाता है परन्तु सेकेंडरी मेमोरी में ऐसा नहीं होता। CPU डायरेक्ट सेकेंडरी मेमोरी को एक्सेस कर सकता।
इसे ऐसा करने के लिए सेकेंडरी मेमोरी के डेटा को प्राइमरी मेमोरी में ट्रांसफर करना होगा इसके बाद CPU सेकडरी मेमोरी को एक्सेस कर पायेगा।
इसे सेकेंडरी स्टोरेज के नाम से भी जाना जाता है जो प्राइमरी मेमोरी की तुलना में सस्ती होती है।
यह भी एक प्रकार की कंप्यूटर मेमोरी है जिसे सीधे (direct) प्रोसेसर के द्वारा एक्सेस नहीं किया जा सकता।
सेकेंडरी मेमोरी एक ऐसी मेमोरी है जिसकी स्टोरेज छमता अधिक होती है और यह बड़ी मात्रा में डेटा को स्टोर कर सकती है।
इस मेमोरी का उपयोग बड़े आकार वाले डेटा जैसे (वीडियो, इमेज, ऑडियो, फाइल) को स्टोर करने के लिए किया जाता है।
इस मेमोरी में यूजर डेटा को आसानी से स्टोर कर सकता है और उस डेटा को पुनर्प्राप्त (restore) कर सकता है।
इस मेमोरी का उपयोग स्थाई (permanent) रूप से डेटा को स्टोर करने के लिए किया जाता है। permanent डेटा का अर्थ यह है की बिजली चली जाने के बाद भी डेटा बरकार रहे या डिलीट ना हो।
प्राइमरी मेमोरी में बिजली चली जाने पर डेटा खो जाता है परन्तु सेकेंडरी मेमोरी में ऐसा नहीं होता। CPU डायरेक्ट सेकेंडरी मेमोरी को एक्सेस कर सकता।
इसे ऐसा करने के लिए सेकेंडरी मेमोरी के डेटा को प्राइमरी मेमोरी में ट्रांसफर करना होगा इसके बाद CPU सेकडरी मेमोरी को एक्सेस कर पायेगा।
इसे सेकेंडरी स्टोरेज के नाम से भी जाना जाता है जो प्राइमरी मेमोरी की तुलना में सस्ती होती है।
Generation of Computer in Hindi – कंप्यूटर की पीढियां
बहुत साल पहले भी कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता था और आज भी किया जाता है। पहले के computers और आज के computers में बहुत अंतर है। कंप्यूटर में समय के साथ काफी परिवर्तन हुआ है।
आज के समय के कंप्यूटर काफी मॉडर्न और एडवांस देखने को मिलते है। लेकिन पुराने समय के कंप्यूटर इतने modern (आधुनिक) और advance नहीं हुआ करते थे। लेकिन बदलते समय के साथ कंप्यूटर के क्षेत्र में सुधार हुआ। जिसमें काफी समय लगा। पहले के कंप्यूटर आकार में बहुत बड़े हुआ करते थे। लेकिन आज के कंप्यूटर साइज़ में भी बहुत छोटे होते है और इनकी speed (गति) भी तेज होती है।
सरल भाषा में इसे समझे तो “वह time period (समय अवधि) जिसमें कंप्यूटर की टेक्नोलॉजी का विकास हुआ है। इसी time period को हम generation of computer (कंप्यूटर की पीढ़ी) कहते है।“
कम्प्यूटर की तकनीक को विकसित होने में लगभग पांच पीढियों का वक़्त लग गया है। इसीलिए कंप्यूटर की पांच पीढियां होती है। जो कि नीचे दी गयी हैं-
1. पहली पीढ़ी के कंप्यूटर (1940 से 1956 तक)
2. दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर (1956 से 1963 तक)
3. तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर (1964 से 1971 तक)
4. चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर (1971 से 1985 तक)
5. पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर (वर्तमान में मौजूद)
बहुत साल पहले भी कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता था और आज भी किया जाता है। पहले के computers और आज के computers में बहुत अंतर है। कंप्यूटर में समय के साथ काफी परिवर्तन हुआ है।
आज के समय के कंप्यूटर काफी मॉडर्न और एडवांस देखने को मिलते है। लेकिन पुराने समय के कंप्यूटर इतने modern (आधुनिक) और advance नहीं हुआ करते थे। लेकिन बदलते समय के साथ कंप्यूटर के क्षेत्र में सुधार हुआ। जिसमें काफी समय लगा। पहले के कंप्यूटर आकार में बहुत बड़े हुआ करते थे। लेकिन आज के कंप्यूटर साइज़ में भी बहुत छोटे होते है और इनकी speed (गति) भी तेज होती है।
सरल भाषा में इसे समझे तो “वह time period (समय अवधि) जिसमें कंप्यूटर की टेक्नोलॉजी का विकास हुआ है। इसी time period को हम generation of computer (कंप्यूटर की पीढ़ी) कहते है।“
कम्प्यूटर की तकनीक को विकसित होने में लगभग पांच पीढियों का वक़्त लग गया है। इसीलिए कंप्यूटर की पांच पीढियां होती है। जो कि नीचे दी गयी हैं-
1. पहली पीढ़ी के कंप्यूटर (1940 से 1956 तक)
2. दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर (1956 से 1963 तक)
3. तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर (1964 से 1971 तक)
4. चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर (1971 से 1985 तक)
5. पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर (वर्तमान में मौजूद)
First Generation computer in Hindi (पहली पीढ़ी के कंप्यूटर)
• पहली पीढ़ी के कंप्यूटर साइज़ में काफी बड़े हुआ करते थे। आप इनके size (आकार) का अन्दाज़ा इसी बात से लगा सकते है कि इन कंप्यूटर को रखने के लिए एक कमरे की ज़रूरत पड़ती थी।
• पहली पीढ़ी की शुरुआत 1940 में हुई और इसका अंत 1956 में हुआ।
• इस पीढ़ी के कंप्यूटरों में कांच के बने वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग किया जाता था। इनमें हजारों की संख्या में वैक्यूम ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता था इसलिए इन कंप्यूटरों का आकार बहुत बड़ा होता था।
• पहली पीढ़ी के कंप्यूटर इतने advance और modern नहीं हुआ करते थे। इनमे काफी कमियां थी। ये कंप्यूटर काम करते वक़्त जल्दी गर्म हो जाया करते थे और reliable (विस्वश्नीय) नहीं हुआ करते थे।
• पहली पीढ़ी के कंप्यूटर का उपयोग गणना करने, डेटा को स्टोर करने, और वैज्ञानिक कार्यों के लिए किया जाता था।
• इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में मुख्य रूप से batch processing ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता था।
• इन कम्प्यूटरों में प्रोग्रामिंग करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल काम था और ये बिजली भी बहुत खर्च करते थे।
पहली पीढ़ी के कंप्यूटर के उदाहरण
• ENIAC
• EDVAC
• UNIVAC
• IBM-701
• EDSAC
• IBM 650
• पहली पीढ़ी के कंप्यूटर साइज़ में काफी बड़े हुआ करते थे। आप इनके size (आकार) का अन्दाज़ा इसी बात से लगा सकते है कि इन कंप्यूटर को रखने के लिए एक कमरे की ज़रूरत पड़ती थी।
• पहली पीढ़ी की शुरुआत 1940 में हुई और इसका अंत 1956 में हुआ।
• इस पीढ़ी के कंप्यूटरों में कांच के बने वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग किया जाता था। इनमें हजारों की संख्या में वैक्यूम ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता था इसलिए इन कंप्यूटरों का आकार बहुत बड़ा होता था।
• पहली पीढ़ी के कंप्यूटर इतने advance और modern नहीं हुआ करते थे। इनमे काफी कमियां थी। ये कंप्यूटर काम करते वक़्त जल्दी गर्म हो जाया करते थे और reliable (विस्वश्नीय) नहीं हुआ करते थे।
• पहली पीढ़ी के कंप्यूटर का उपयोग गणना करने, डेटा को स्टोर करने, और वैज्ञानिक कार्यों के लिए किया जाता था।
• इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में मुख्य रूप से batch processing ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता था।
• इन कम्प्यूटरों में प्रोग्रामिंग करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल काम था और ये बिजली भी बहुत खर्च करते थे।
पहली पीढ़ी के कंप्यूटर के उदाहरण
• ENIAC
• EDVAC
• UNIVAC
• IBM-701
• EDSAC
• IBM 650
Advantages of First Generation Computer in Hindi (पहली पीढ़ी कंप्यूटर के फायदे)
1. इस पीढ़ी के कंप्यूटर डाटा की calculation (गणना) बहुत तेजी से करते थे। ये millisecond में गणना कर सकते थे।
2. उस समय वैक्यूम ट्यूब आसानी से मिल जाया करते थे।
3. वैक्यूम ट्यूब की technology ज्यादा महंगी नहीं थी।
4. इन कम्प्यूटरों में scientific (वैज्ञानिक) काम कर सकते थे।
5. इन कम्प्यूटरों में information और data को स्टोर करने की क्षमता थी।
1. इस पीढ़ी के कंप्यूटर डाटा की calculation (गणना) बहुत तेजी से करते थे। ये millisecond में गणना कर सकते थे।
2. उस समय वैक्यूम ट्यूब आसानी से मिल जाया करते थे।
3. वैक्यूम ट्यूब की technology ज्यादा महंगी नहीं थी।
4. इन कम्प्यूटरों में scientific (वैज्ञानिक) काम कर सकते थे।
5. इन कम्प्यूटरों में information और data को स्टोर करने की क्षमता थी।
Disadvantages of First Generation Computer in Hindi (पहली पीढ़ी कंप्यूटर के नुकसान)
1. पहली जनरेशन के कंप्यूटर का size काफी बड़ा होता था।
2. इस जनरेशन के computer काम करते समय काफी गर्म हो जाया करते थे।
3. कम्प्यूटर को ठंडा रखने के लिए Air-Condition (AC) की ज़रूरत पड़ती थी।
4. अपने बड़े आकर के कारण ये बहुत अधिक मात्रा में बिजली का इस्तेमाल करते थे।
5. इन कंप्यूटरों को मेन्टेन करके रखना काफी ज्यादा मुश्किल होता था।
6. ये केवल मशीन लैंग्वेज का इस्तेमाल करते थे और इसमें प्रोग्रामिंग करना भी एक कठिन कार्य था।
1. पहली जनरेशन के कंप्यूटर का size काफी बड़ा होता था।
2. इस जनरेशन के computer काम करते समय काफी गर्म हो जाया करते थे।
3. कम्प्यूटर को ठंडा रखने के लिए Air-Condition (AC) की ज़रूरत पड़ती थी।
4. अपने बड़े आकर के कारण ये बहुत अधिक मात्रा में बिजली का इस्तेमाल करते थे।
5. इन कंप्यूटरों को मेन्टेन करके रखना काफी ज्यादा मुश्किल होता था।
6. ये केवल मशीन लैंग्वेज का इस्तेमाल करते थे और इसमें प्रोग्रामिंग करना भी एक कठिन कार्य था।
Second Generation Computer in Hindi (दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर)
• कंप्यूटर की दूसरी पीढ़ी की शुरुआत 1956 में हुई थी और इसका अंत 1963 में हुआ था।
• दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में transistor (ट्रांजिस्टर) का इस्तेमाल किया जाता था। ट्रांजिस्टर वैक्यूम ट्यूब के मुकाबले काफी छोटे होते थे।
• ट्रांजिस्टर के कारण कंप्यूटर का साइज पहली पीढ़ी के मुकाबले छोटा हो गया। ट्रांजिस्टर के आने के बाद कंप्यूटर के क्षेत्र में काफी ज्यादा विकास हुआ।
• ट्रांजिस्टर, वैक्यूम ट्यूब की तुलना में काफी सस्ते थे , size में छोटे थे , ज्यादा reliable थे , और काफी तेज काम करते थे।
• इस पीढ़ी में असेंबली लैंग्वेज और हाई-लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता था।
• इस पीढ़ी के कंप्यूटरों में batch processing और multi-programming ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग किया जाता था।
• कंप्यूटर की दूसरी पीढ़ी की शुरुआत 1956 में हुई थी और इसका अंत 1963 में हुआ था।
• दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में transistor (ट्रांजिस्टर) का इस्तेमाल किया जाता था। ट्रांजिस्टर वैक्यूम ट्यूब के मुकाबले काफी छोटे होते थे।
• ट्रांजिस्टर के कारण कंप्यूटर का साइज पहली पीढ़ी के मुकाबले छोटा हो गया। ट्रांजिस्टर के आने के बाद कंप्यूटर के क्षेत्र में काफी ज्यादा विकास हुआ।
• ट्रांजिस्टर, वैक्यूम ट्यूब की तुलना में काफी सस्ते थे , size में छोटे थे , ज्यादा reliable थे , और काफी तेज काम करते थे।
• इस पीढ़ी में असेंबली लैंग्वेज और हाई-लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता था।
• इस पीढ़ी के कंप्यूटरों में batch processing और multi-programming ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग किया जाता था।
दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर के उदाहरण –
• UNIVAC 1108
• CDC 1604
• Honeywell 400CDC 3600
• IBM 7094
• UNIVAC 1108
• CDC 1604
• Honeywell 400CDC 3600
• IBM 7094