Computer Courses | Computer Tutorial | Computer Classes | Computer Institute | Computer Tricks
751 subscribers
272 photos
126 videos
2 files
336 links
Download Telegram
कंप्यूटर कोर्सेज
आज का युग कम्प्यूटर का युग है और हम यदि यह कहे कि कम्प्यूटर के बिना हमारी जिंदगी अधूरी है तो किसी हद तक यह सही ही होगा। आज हर काम कंप्यूटर या टेक्नोलॉजी के जरिए होता है। डिजिटल इंडिया का दौर होने से कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी का यूज दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। हम हमारे चारों ओर देखें तो टेक्नोलॉजी और कंप्यूटर इन दो चीजों का बहुत महत्व है। चाहे फिर स्कूल, कॉलेज में एडमिशन लेना हो, जॉब के लिए हो या कोई ऑनलाइन फॉर्म भरना है सभी में कंप्यूटर की आवश्यकता है। कोरोना वायरस के चलते कंप्यूटर का उपयोग और बढ़ता जा रहा है तथा कंप्यूटर से संबंधित वैकेंसी निकलती जा रही है।
टॉप कंप्यूटर कोर्सेज
कंप्यूटर के टॉप कोर्सेज की सूची नीचे दी गई है, जिनमें छात्र एडमिशन ले सकते हैं:

बेसिक कम्प्यूटर कोर्स (Introduction to Computers – Hindi
एक्सेल का बेसिक कोर्स – Microsoft Excel Basic & Advanced Hindi
एम एस वर्ड का बेसिक कोर्स – Microsoft Word Basic & Advanced Hindi
डीटीपी कोर्स (DTP Course) – Desk Top Publishing Course in Hindi
साइबर सुरक्षा और एथिकल हैकिंग कोर्स(Cyber security and Ethical Hacking)
प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कोर्स – Programming Languages Courses
वेब डिजाइनिंग कोर्स – Web Designing Courses
एनीमेशन और मल्टीमीडिया कोर्स ANIMATION & MULTIMEDIA Courses
कंप्यूटर विज्ञान में डिप्लोमा (Diploma in Computer Science)
डाटा एंट्री ऑपरेटर कोर्स (Data entry operator Course)
कम्प्यूटरीकृत लेखा कोर्स (COMPUTERIZED ACCOUNTING)
कम्प्यूटर एडेड डिजाइन और ड्राइंग कोर्स (CADD (COMPUTER AIDED DESIGN AND DRAWING Course )
डिजिटल मार्केटिंग कोर्स (Digital marketing Course)
सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन कोर्स – Search engine optimization Course
वेब डिजाइनिंग
वेब डिजाइनिंग में वेब का मतलब होता है वेबसाइट वेब डिजाइनिंग कोर्स में आपको वेबसाइट बनाना, वेबसाइट को मैनेज करना वेबसाइट के लिए डेटाबेस बनाना आदि सिखाया जाता है। वेब डिजाइनिंग का कोर्स करने के बाद आप अच्छी जॉब पा सकते हैं।परंतु उसके लिए आपको अच्छी प्रैक्टिस की आवश्यकता होगी। वेब डिजाइनिंग के दो पार्ट्स होते हैं एक फ्रंटेंड वेब डिजाइनिंग दूसरा बैकऐंड वेब डिजाइनिंग। यह कोर्स कंप्यूटर साइंस में डिप्लोमा करके, बीसीए कोर्स करके, भी करके या बीटेक करके भी कर सकते हैं।इस कोर्स में आप अपनी स्किल्स को जितना बढ़ाएंगे उतना ही अच्छी और ज्यादा सैलरी वाली जॉब मिल पाएगी। वेब डेवलपमेंट का कोर्स करने के लिए आपको Html, Javascript और Css की नॉलेज होना आवश्यक है।
टैली
टैली का आविष्कार Tally Solutions Pvt. Ltd. द्वारा किया गया था। कई जॉब में टेली का कोर्स अनिवार्य होता है। टेली कोर्स एकाउंटिंग से संबंधित होता है। आजकल कई मॉल, शोरूम्स तथा होटल में पक्का बिल दिया जाता है। यह बिल टैली के सॉफ्टवेयर के द्वारा बनाया जाता है तथा जिसने टैली का कोर्स किया होता है जॉब को करता है। टैली का कोर्स 12 तथा ग्रेजुएशन के बाद भी किया जा सकता है। टैली का कोर्स कंप्यूटर साइंस में डिप्लोमा या डिग्री करके भी किया जा सकता है। इसे सीखने में ज्यादा समय की आवश्यकता नहीं होती कुछ महीनों में ही हम इसे सीख सकते हैं
माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस एंड टाइपिंग कोर्स
माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस कंप्यूटर का बेसिक होता है। इसमें माइक्रोसॉफ्ट वर्ड, माइक्रोसॉफ्ट ऍक्सेल, माइक्रोसॉफ्ट पावरप्वाइण्ट, माइक्रोसॉफ्ट एक्सेस, माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक आदि आते हैं। इसमें डॉक्यूमेंट को आसानी से लिखा जा सकता है इसके साथ-साथ इसमें कई सारे टूल्स होते हैं जिसकी सहायता से डॉक्यूमेंट को एडिट बैकग्राउंड चेंज, पूरी बुक भी टाइप कर सकते हैं। यह कोर्स करने के लिए सिर्फ आपको हिंदी इंग्लिश का सही ज्ञान होना चाहिए। इसे 5th से 12th तक का स्टूडेंट सीख सकता है। तथा इसके बाद भी चाहे वह किसी भी स्ट्रीम से हो यह कोर्स कर सकता है। इसके साथ-साथ हिंदी इंग्लिश की टाइपिंग सीखकर प्राइवेट जॉब कर सकते हैं तथा कई गवर्नमेंट जॉब ऐसी आती है जिनमें टाइपिंग कोर्स अनिवार्य माना जाता है उसके लिए भी आप आवेदन कर सकते हैं।
डिजिटल मार्केटिंग कोर्स
आज का दौर डिजिटल इंडिया का दौर हो गया है आजकल सभी ऑफलाइन के बजाय ऑनलाइन चीजें खरीदने और पढ़ने के शौकीन होते हैं तथा यह बहुत आसान भी होता है। इसी के साथ साथ डिजिटल मार्केटर की जरूरत भी बहुत बढ़ गई है।डिजिटल मार्केटर बनने के लिए हमें डिजिटल मार्केटिंग कोर्स करना आवश्यक है। डिजिटल मार्केटिंग कोर्स करने के बाद हम निजी या स्वयं भी एडवरटाइजिंग, यूट्यूब तथा अन्य के जरिए पैसे कमा सकते हैं। डिजिटल मार्केटिंग कोर्स में कई कोर्स शामिल है जैसे सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन, डिस्पले एडवरटाइजिंग, सर्च इंजन मार्केटिंग तथा सोशल मीडिया मार्केटिंग आदि। इस कोर्स को करके हम घर बैठे भी पैसे कमा सकते हैं परंतु उसमें स्किल्स और मेहनत की आवश्यकता होगी। यह सर्टिफिकेट कोर्स भी है हम 3 से 6 महीने का कोर्स करके भी डिजिटल मार्केटिंग का सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं। या कोर्स ऑनलाइन भी किया जा सकता है।
कंप्यूटर नेटवर्किंग
नेटवर्किंग से आशय है कि एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में डाटा को भेजना। आजकल ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का जमाना है तथा हम ऑनलाइन कई एप्स के जरिए डाटा को भेजते हैं। तो उस डाटा को सुरक्षित रखने और सुरक्षित रूप से भेजने के लिए कई विभागों में कंप्यूटर नेटवर्किंग का कोर्स किए हुए उम्मीदवार की आवश्यकता होती है।कम्प्यूटर नेटवर्किंग का कोर्स करने के बाद नेटवर्क इंजीनियर, नेटवर्क सिक्योरिटी एक्सपर्ट, नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर, डेस्कटॉप सपोर्ट इंजीनियर, टीम लीडर टेक्निकल हेड, टेक्निकल सपोर्ट इंजीनियर, सिस्टम एनालाइजर आदि बन सकते हैं।
फोटोशॉप
फोटोशॉप अडोब कंपनी द्वारा शुरू किया गया फोटो एडिटर सॉफ्टवेयर है। सोशल मीडिया, मूवीस तथा बढ़ते हुए चित्र के प्रयोग से चित्रों को एडिट करना ब्राइटनेस चेंज करना क्रॉप करना तथा फोटोशॉप टूल का उपयोग करके अलग-अलग तरह से चित्र को एडिट करना आदि सब फोटोशॉप के अंदर ही आता है। यह कोर्स 12वीं के बाद किया जा सकता है। यदि आपको एडिटिंग करना अच्छा लगता है और आप इसी में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो यह आपके लिए बहुत अच्छा कंप्यूटर कोर्स है।यह कोर्स कई इंस्टिट्यूट द्वारा ऑनलाइन भी सिखाया जाता है।
ग्राफिक डिजाइनिंग
ग्राफिक डिजाइनिंग कोर्स अपनी कला को प्रदर्शित करने का एक माध्यम है। यह कोर्स आपकी क्रिएटिविटी को बताता है। ग्राफिक डिजाइनिंग कोर्स में टेक्स्ट और ग्राफिक की मदद से टेक्स्ट और इमेज को क्रिएटिव और यूनिक बनाया जाता है। ग्राफिक डिजाइनिंग सीखना उतना मुश्किल नहीं होता बस यह आपकी क्रिएटिविटी पर डिपेंड करता है। ग्राफिक डिजाइनिंग कोर्स करने के बाद कई कंपनी,न्यूज़ चैनल, एडवरटाइजिंग आदि में आपकी जरूरत होती है। ग्राफिक डिजाइनिंग में ब्रोशर, लोगो, न्यूज़लेटर,पोस्टर विभिन्न सॉफ्टवेयर की मदद से बनाए जाते हैं। इसमें आप अपना करियर बना सकते हैं।इसे ऑनलाइन भी सीखा जा सकता है यह उतना मुश्किल नहीं होता है।
कंप्यूटर के विभिन्न फैक्टर्स कौन – कौन से होते हैं?
कंप्यूटर सिस्टम अपने आसपास के वातावरण से बातचीत करने के लिए कंप्यूटर पेरिफेरल्स या इनपुट/ आउटपुट डिवाइस का उपयोग करता है।सभी प्रकार के कम्प्यूटरों का basic structure एक जैसा ही होता है लेकिन कंप्यूटर की इंटरनल डिज़ाइन विभिन्न प्रकार और आकार की होती है। कंप्यूटर के पांच आम मुख्य कंपोनेंट्स नीचे दिए गए हैं-

इनपुट यूनिट
आउटपूत यूनिट
CU
ALU
मेमोरी
इनपुट यूनिट- कंप्यूटर सिस्टम कि वह यूनिट जिसके द्वारा कमांड या इंस्ट्रक्शन को लिया जाता है, इनपुट यूनिट कहलाती है। उदाहरण: कीबोर्ड, माउस, ट्रैकबॉल, जॉयस्टिक, स्कैनर, बारकोड रीडर आदि।
आउटपुट यूनिट- कंप्यूटर सिस्टम कि वह यूनिट जिसके द्वारा लिए गए कमांड व इंस्ट्रक्शंस को प्रोसेस करके रिजल्ट दर्शाया जाता है उसे आउटपुट यूनिट कहा जाता है। उदाहरण: मॉनिटर, प्रिंटर, स्पीकर आदि।
मेमोरी यूनिट- यह कंप्यूटर की स्टोरेज यूनिट होती है। कंप्यूटर मेमोरी मानव मस्तिष्क के समान होती है जो डाटा एवं इंफॉर्मेशन को स्टोर करती है। कंप्यूटर मेमोरी एक स्टोरेज स्पेस है जहां डाटा और इंफॉर्मेशन को रखा जाता है जिसको प्रोसेस किया जाना है।मेमोरी तीन प्रकार की होती है-
कैश मेमोरी
प्राइमरी मेमोरी और
सेकेंडरी मेमोरी
CU- CU का पूरा नाम कंट्रोल यूनिट होता है। यह पूरे कंप्यूटर सिस्टम को कंट्रोल करता है तथा यह CPU का एक मुख्य भाग होता है।
ALU- ALU का पूरा नाम अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट होता है। इसके अंतर्गत सभी प्रकार के अर्थमैटिक गणितीय व लॉजिकल ऑपरेशन परफॉर्म किए जाते हैं यह कंप्यूटर सिस्टम की मुख्य यूनिट होती है। ALU प्रोसेसर के अंदर स्थित होता है।
” CU और ALU मिलकर CPU(central Processing Unit ) का निर्माण करते हैं जिसे कंप्यूटर का मस्तिष्क भी कहा जाता है। सीपीयू पूरे कंप्यूटर सिस्टम को कंट्रोल करता है।”
कंप्यूटर के भाग और उनके कार्य लिखिए?
कंप्यूटर कई सारे कंपोनेंट्स का एक संयोजन होता है जिसमें जिसमें प्रत्येक कंपोनेंट का अपना कार्य होता है इसी आधार पर कंप्यूटर के मुख्य 5 भाग होते हैं-

इनपुट/आउटपुट डिवाइस
सिस्टम यूनिट
कंप्यूटर मेमोरी
स्टोरेज यूनिट
कम्युनिकेशन
1) Title Bar :

यह वर्ड विंडो के सबसे उपर स्थित होता है। यह जिस डॉक्युमेंट्स में आप वर्तमान में काम कर रहे हैं उसका नाम डिस्‍प्‍ले करता है। टाइटल बार के दाईं ओर Minimize, Maximize/Restore और Close के बटन होते है। और इसके लेफ्ट साइड में एक Quick Access टूल बार होता है।
Tabs That Appear Only When You Need Them

उपर दिए गए टैब्‍स के अलावा, यहाँ टैब्स के अन्य प्रकार भी हैं। लेकिन वे जब आप उनसे संबंधित टास्‍क कर रहे होते है, तभी दिखाई देते है।

Contextual Tools : जब आप किसी ऑब्‍जेक्‍ट पर काम कर रहे होते है और जब आप उस ऑब्‍जेक्‍ट को सिलेक्‍ट करते है, तब यह टैब आपको दिखाई देगा।

e.g. –

वर्ड में एक इमेज इन्सर्ट करें।
जब आप इमेज को सिलेक्‍ट करेंगे, तब आप Format Tab रिबन के राइट साइड में देख सकते है।
3) File Button :

यह बटन वर्ड विंडो के उपर लेफ्ट कॉर्नर में होता है। इस बटन पर New, Open, Save, Save As, Print and Close जैसे कमांड के बटन होते है।
4) Quick Access Toolbar:

Office बटन के राइट साइड में Quick Access Toolbar होता है, जिसमें हमेशा इस्‍तेमाल होने वाले आइटम के बटन होते है। उदा, Save, और Undo या Redo बटन। इस टूलबार में और बटन्‍स को एड करने के लिए इसके राइड साइड के छोटे ऐरो पर क्लिक करें‍।
5) Zoom Slider

विंडो के राइट कॉर्नर में स्‍टेटस बार पर यह Zoom slider होता है। डॉक्युमेंट को अलग अलग जूम के परसेंटेज देखने के लिए प्‍लस या माइनस बटन पर क्लिक करें।
6) Document View Buttons

Zoom Slider के लेफ्ट साइड में Document View बटन्‍स होते है। अपने डॉक्‍युमेंट को Print Layout, Full Screen, Web Layout, Outline या Draft में देखने के लिए आप इनमेंसे किसी एक पर क्लिक कर सकते है।
1) File :

File मेनू में निचें के कमांडस्‍ है:

a) Save (Ctrl+S) : इस कमांड को डॉक्‍युमेंट सेव करने के लिए यूज किया जाता है। जब आप इस कमांड पर क्लिक करते है, तब निचें का एक डायलॉग बॉक्‍स दिखाई देता है।

File Name : यहाँ आप फाइल के लिए नाम दे सकते है।

Save As : यहाँ फाइल फॉर्मेट एक लिस्‍ट होती है, जिसमें वह फाइल सेव होती है। डिफ़ॉल्ट रूप से यहाँ Word Document फॉर्मेट सिलेक्‍ट होता है, जिसमें यह डॉक्‍युमेंट वर्ड 2010 के फॉर्मेट मे सेव किया जाता है।
यदि आप इस फाइल को पीडीएफ फॉर्मेट में सेव करना चाहते है, तो PDF सिलेक्‍ट करें।

यदि आप इस फाइल को वेब पेज फॉर्मेट में सेव करना चाहते है, तो web page सिलेक्‍ट करें।

Tools : यह बटन Save के लेफ्ट साइड में होता है। इसमें डॉक्‍युमेंट सेव करने के लिए अतिरिक्‍त्‍ ऑप्‍शन होते है। यहाँ आप अपने डॉक्‍युमेंट को प्रोटेक्‍ट करने के लिए पासवर्ड सेट कर सकते है।

b) Save As :

यदि आप पहले से क्रिएट फाइल को दूसरे नाम से या दूसरे फॉर्मेट में सेव करना चाहते है, तो Save As कमांड का उपयोग करें।

c) Open (Ctrl+O):

पहले से क्रिएट डॉक्‍युमेंट फाइल को ओपन करने के लिए यह कमांड होती है। जब आप इस कमांड पर क्लिक करते है, तब एक डॉयलॉग बॉक्‍स ओपन होता है, जिसमें आपको अपने फाइल का पाथ देता है। फिर Open बटन पर क्लिक करना होता है।

d) Close :

बिना एमएस वर्ड क्‍लोज किए ओपन फाइल को क्‍लोज करने के लिए इस कमांड का उपयोग करें।

e) Info :

इसमें करंट डॉक्यूमेंट से संबंधित निम्‍न जानकारी होती है –