UPPCS_मुख्य_परीक्षा_उत्तर_प्रदेश_Paper_6_2026_26122_F_E_Book_combined.pdf
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UP PGT PHYSICS 9 MAY 2026 PAPER PDF.pdf
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UP PGT BIOLOGY 9 MAY 2026 PAPER PDF.pdf
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📕 भारत की कुछ प्रमुख गायों की प्रजातियों के नाम
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👉गीर (Gir): यह गुजरात के गिर जंगलों की प्रसिद्ध नस्ल है। इसका दूध बहुत पौष्टिक होता है।
👉साहिवाल (Sahiwal): यह पंजाब और राजस्थान के इलाकों में पाई जाती है। यह भारतीय नस्लों में सबसे अधिक दूध देने वाली मानी जाती है।
👉लाल सिंधी (Red Sindhi): यह गहरे लाल रंग की होती है और काफी मात्रा में दूध देती है।
👉राठी (Rathi): यह राजस्थान के बीकानेर और जैसलमेर क्षेत्रों में पाई जाती है।
👉हरियाणा (Hariana): यह हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पाई जाने वाली एक मजबूत नस्ल है।
👉कांकरेज (Kankrej): यह गुजरात और राजस्थान की नस्ल है, जो अपनी 'सवाई चाल' के लिए जानी जाती है।
👉थारपारकर (Tharparkar): यह राजस्थान के थार रेगिस्तान की नस्ल है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अच्छी रहती है।
👉ओंगोल (Ongole): यह आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध नस्ल है, जिसकी दुनिया भर में काफी मांग है।
👉देवनी (Deoni): यह महाराष्ट्र और कर्नाटक के क्षेत्रों में पाई जाती है
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📕संविधान सभा
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👉1895 ई. संविधान सभा की संकल्पना सर्वप्रथम 1895 में बाल गंगाधर तिलक द्वारा प्रस्तुत स्वराज विधेयक में की गई, लेकिन
👉विधेयक में स्पष्ट रूप से संविधान सभा शब्द का उल्लेख नहीं था।
👉1922 ई. - स्वराज शब्द को स्पष्ट करते समय गांधी जी ने संविधान सभा का विचार दिना था।
👉1928 ई. नेहरु समिति ने पहली बार संविधान का प्रारूप दिया था।
👉1934 ई. - MN राय ने संविधान सभा की मांग की। (व्यक्तिगत रूप में)
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📕राष्ट्रपति
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अनुच्छेद 52 - भारत के राष्ट्रपति
'अनुच्छेद 53 संघ की कार्यपालिका शक्ति
• अनुच्छेद 54 - राष्ट्रपति का चुनाव
अनुच्छेद 55 - राष्ट्रपति के चुनाव की रीति-
अनुच्छेद 56 - राष्ट्रपति का कार्यकाल
अनुच्छेद 57 - पुनः चुनाव के लिए पात्रता
अनुच्छेद 58 - राष्ट्रपति पद पर निर्वाचित होने के लिए योग्यताएँ।
अनुच्छेद 59 - राष्ट्रपति के पद के लिए शर्ते
अनुच्छेद 60 - राष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान,
अनुच्छेद 61 - राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया
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42वां
संशोधन अधिनियम, 1976।
👉मौलिक अधिकारों की तुलना में निर्देशक सिद्धांतों को प्राथमिकता दी गई।
👉संवैधानिक संशोधनों की न्यायिक समीक्षा पर रोक
👉सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों की शक्तियों में कटौती।
👉देश में विधायिका का कार्यकाल 5 वर्ष से बढ़ाकर 6 वर्ष किया गया।
👉उद्देशिका में समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, अखंडता जोड़ा गया
👉संविधान में भाग 4 (क), और 14( क) जोड़ा गया
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📕ऊपरी गंगा नहर (Upper Ganga Canal)
ऊपरी गंगा नहर भारत की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण सिंचाई प्रणालियों में से एक है। यह उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कृषि विकास में एक मील का पत्थर मानी जाती है।
उद्गम (Origin):
👉इसका निर्माण कार्य 1842 में शुरू हुआ था और 1854 में यह पूरी तरह बनकर तैयार हुई थी।
👉मुख्य अभियंता (Chief Engineer):
👉लंबाई (Length):
लेकिन यदि इसकी सभी शाखाओं (Distributaries) को मिला दिया जाए, तो इसकी कुल लंबाई 6,000 किमी से भी अधिक हो जाती है।
नोट 👉UPSSSC में एक अभियंता को पूछा गया है
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ऊपरी गंगा नहर भारत की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण सिंचाई प्रणालियों में से एक है। यह उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कृषि विकास में एक मील का पत्थर मानी जाती है।
उद्गम (Origin):
यह नहर उत्तराखंड के हरिद्वार में भीमगोड़ा बैराज (Bhimgauda Barrage) से निकलती है।
👉इसका निर्माण कार्य 1842 में शुरू हुआ था और 1854 में यह पूरी तरह बनकर तैयार हुई थी।
👉मुख्य अभियंता (Chief Engineer):
इसके निर्माण का श्रेय सर प्रोबी कॉटले (Sir Proby Cautley) को जाता है।
👉लंबाई (Length):
इसकी मुख्य नहर की लंबाई लगभग 272 किमी है,
लेकिन यदि इसकी सभी शाखाओं (Distributaries) को मिला दिया जाए, तो इसकी कुल लंबाई 6,000 किमी से भी अधिक हो जाती है।
नोट 👉UPSSSC में एक अभियंता को पूछा गया है
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📕साहित्य अकादमी पुरस्कार (Sahitya Akademi Award)
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👉माखनलाल चतुर्वेदी: 'हिम तरंगिणी' (1955) - हिंदी का प्रथम साहित्य अकादमी।नोट 👉ऊपर लिखे गए पुरस्कार को आयोग बार बार पूछ रहा है, यहां से एक प्रश्न बनना पक्का है, रट्टा मार लीजिए
👉आचार्य नरेंद्र देव: 'बौद्ध धर्म दर्शन' (1957)।
👉राहुल सांकृत्यायन: 'मध्य एशिया का इतिहास' (1958)।
👉भगवती चरण वर्मा: 'भूले बिसरे चित्र' (1961)।
👉अमृत राय: 'प्रेमचंद: कलम का सिपाही' (1963) - यह मुंशी प्रेमचंद की जीवनी है।
👉हरिवंश राय बच्चन: 'दो चट्टानें' (1968)।
👉श्रीलाल शुक्ल: 'राग दरबारी' (1969)।
👉हजारी प्रसाद द्विवेदी: 'आलोक पर्व' (1973)।
👉काशीनाथ सिंह: 'रेहन पर रग्घू' (2011)।
👉बद्री नारायण: 'तुमड़ी के शब्द' (2022
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📕ज्ञानपीठ पुरस्कार (Jnanpith Award)
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उत्तर प्रदेश के प्रमुख हिंदी के लेखक और कवि
👉सुमित्रानंदन पंत 1968 चिदंबरा (हिंदी के लिए पहला ज्ञानपीठ)
👉सच्चिदानंद ह. वा. अज्ञेय 1978 कितनी नावों में कितनी बार
👉महादेवी वर्मा 1982 यामा
👉कुंवर नारायण 2005 संपूर्ण साहित्य
👉अमरकांत और श्रीलाल शुक्ल 2009 संयुक्त रूप से संपूर्ण साहित्य के लिए
👉केदारनाथ सिंह 2013 संपूर्ण साहित्य
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📕सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की कार्य एवं शक्तियां
अनुच्छेद 129 - अभिलेख/रिकार्डड न्यायलय/अवमानना का दण्ड देने की शक्ति ।https://t.me/Amoghclasses
👉अनुच्छेद 131 - प्रराम्भिक क्षेत्राधिकरण की शक्ति।
एक या एक से अधिक राज्यों या एक राज्य व राज्यों व भारत सरकार के मध्य कोई विवाद पर फैसला एस. सी. करेगी
👉अनुच्छेद 132 - अपीलय क्षेत्राधिकार।
👉अनुच्छेद 133 - दीवानी मामलों में अपील का अधिकार।
👉अनुच्छेद 134 - फौजदारी मामलों में अपील का अधिकार
👉अनुच्छेद 135 - सैन्य मामलों में अपील का अधिकार।
👉अनुच्छेद 136 - विशेष अपीळेल का अधिकार।
👉अनुच्छेद 137 - न्यायिक पूनावलोकन की शक्ति।
👉अनुच्छेद 141 - सुप्रिम कोट के सभी निर्णय सम्पुर्ण भारत में मान्य होंगे।
👉अनुच्छेद - 143 राष्ट्रपति का सुप्रिम कोट से परामर्श लेने का अधिकार।
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📔 संविधान की अनुसूचियां
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◽️पहली अनुसूची – राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची
◽️दूसरी अनुसूची –वेतन, भत्ते और पेंशन।
◽️तीसरी अनुसूची– शपथ संबंधित उल्लेख।
◽️चौथी अनुसूची –राज्यसभा की सीटों का उल्लेख।
◽️पांचवी अनुसूची –अनुसूचित जाति और जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन का उल्लेख।
◽️छठी अनुसूची –असम, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम का जनजातीय प्रशासन।
◽️सातवीं अनुसूची –केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति का बंटवारा।
◽️आठवीं अनुसूची– भाषाएं
◽️नौवीं अनुसूची –भूमि सुधार संबंधित।
◽️दसवीं अनुसूची –दल बदल संबंधित प्रावधान।(52वां संशोधन–1985)
◽️ग्यारहवीं अनुसूची – पंचायतों का प्रावधान।(73वां संशोधन–1992)
◽️बारहवीं अनुसूची – नगर निकायों का प्रावधान।(74वां संशोधन–1992)
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📕 स्वतंत्रता पश्चात भारत में भूमि सुधार
स्वतंत्रता के समय भारत में कृषि व्यवस्था अत्यंत शोषणकारी थी। बिचौलियों (ज़मींदारों) का वर्चस्व था और किसान मात्र बटाईदार बनकर रह गए थे।
भूमि सुधारों को चार मुख्य स्तंभों में विभाजित किया जा सकता है।
1. बिचौलियों का उन्मूलन (Abolition of Intermediaries)
प्रमुख अधिनियम: उत्तर प्रदेश ज़मींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 (UP Zamindari Abolition and Land Reforms Act - UPZALR)।
2. काश्तकारी सुधार (Tenancy Reforms)
।
।
3. जोत की सीमा निर्धारण (Ceiling on Land Holdings)
अधिनियम: उत्तर प्रदेश अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम, 1960 (UP Imposition of Ceiling on Land Holdings Act)।
संशोधन: 1972-73 में इस सीमा को और कम किया गया ताकि अधिक अधिशेष भूमि प्राप्त की जा सके।
4. चकबंदी (Consolidation of Holdings)
अधिनियम: उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम, 1953 (UP Consolidation of Holdings Act)।
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स्वतंत्रता के समय भारत में कृषि व्यवस्था अत्यंत शोषणकारी थी। बिचौलियों (ज़मींदारों) का वर्चस्व था और किसान मात्र बटाईदार बनकर रह गए थे।
भूमि सुधारों को चार मुख्य स्तंभों में विभाजित किया जा सकता है।
1. बिचौलियों का उन्मूलन (Abolition of Intermediaries)
यह भूमि सुधार का पहला और सबसे सफल चरण था। इसका मुख्य उद्देश्य ज़मींदारी प्रथा को समाप्त कर भूमि का स्वामित्व वास्तविक काश्तकारों (किसानों) को देना था।
प्रमुख अधिनियम: उत्तर प्रदेश ज़मींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 (UP Zamindari Abolition and Land Reforms Act - UPZALR)।
परिणाम: इस अधिनियम के माध्यम से लगभग 2 करोड़ काश्तकारों का सीधा संबंध राज्य से स्थापित हुआ। बिचौलियों को हटाकर भूमि का मालिकाना हक किसानों को दिया गया।
2. काश्तकारी सुधार (Tenancy Reforms)
जो किसान दूसरों की ज़मीन पर खेती करते थे, उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के लिए तीन स्तरों पर काम किया गया:
लगान का विनियमन: लगान की दर को फसल के मूल्य के 1/4 या 1/5 भाग तक सीमित किया गया।
पट्टे की सुरक्षा: किसानों को मनमाने ढंग से बेदखल करने पर रोक लगाई गई
।
स्वामित्व का अधिकार: लंबे समय से खेती कर रहे काश्तकारों को ज़मीन खरीदने या स्वामित्व प्राप्त करने का अधिकार दिया गया
।
3. जोत की सीमा निर्धारण (Ceiling on Land Holdings)
सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए एक परिवार के पास अधिकतम भूमि रखने की सीमा तय की गई। अतिरिक्त भूमि (Surplus Land) को भूमिहीन मजदूरों और छोटे किसानों में वितरित करना इसका लक्ष्य था।
अधिनियम: उत्तर प्रदेश अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम, 1960 (UP Imposition of Ceiling on Land Holdings Act)।
संशोधन: 1972-73 में इस सीमा को और कम किया गया ताकि अधिक अधिशेष भूमि प्राप्त की जा सके।
चुनौती: बेनामी संपत्ति और पारिवारिक बँटवारे के कानूनी दांवपेच के कारण यह चरण पूर्णतः सफल नहीं रहा।
4. चकबंदी (Consolidation of Holdings)
किसानों की भूमि छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखरी हुई थी, जिससे वैज्ञानिक खेती संभव नहीं थी। बिखरे हुए खेतों को एक स्थान पर एकत्रित करने की प्रक्रिया 'चकबंदी' कहलाई।
अधिनियम: उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम, 1953 (UP Consolidation of Holdings Act)।
लाभ: सिंचाई और प्रबंधन में आसानी।
मुकदमेबाजी में कमी।
कृषि उत्पादकता में वृद्धि।
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उत्तर प्रदेश में भूमि सुधारों की दिशा में 'उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006' (UP Revenue Code, 2006) एक मील का पत्थर है। इसने स्वतंत्रता के बाद के दर्जनों जटिल कानूनों (जैसे UPZALR Act 1950) को समाहित कर एक सरल व्यवस्था दी है। इसे 11 फरवरी 2016 से प्रभावी रूप से लागू किया गया।
1. जोतदारों (Tenure Holders) का सरलीकरण
संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर (Bhumidhar with Transferable Rights):
इन्हें भूमि पर पूर्ण अधिकार प्राप्त है। ये भूमि बेच सकते हैं, उपहार में दे सकते हैं या बंधक रख सकते हैं।
असंक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर
2. भूमि उपयोग का परिवर्तन (धारा 80)
शर्त: अनुमति तभी मिलती है जब विक्रेता के पास बिक्री के बाद कम से कम 1.26 हेक्टेयर भूमि शेष बच रही हो, या कोई गंभीर आपात स्थिति (बीमारी, शिक्षा) हो।
4. पट्टेदारी (Leasing) में ढील
5. स्वामित्व और उत्तराधिकार के नियम
वसीयत:
6. विवादों का निपटारा और डिजिटल रिकॉर्ड
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1. जोतदारों (Tenure Holders) का सरलीकरण
इस संहिता के तहत भूमि धारकों को मुख्यतः चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर (Bhumidhar with Transferable Rights):
इन्हें भूमि पर पूर्ण अधिकार प्राप्त है। ये भूमि बेच सकते हैं, उपहार में दे सकते हैं या बंधक रख सकते हैं।
असंक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर
(Bhumidhar with Non-Transferable Rights): इन्हें खेती का अधिकार है, लेकिन ये भूमि बेच नहीं सकते। हालांकि, 5 वर्ष की अवधि के बाद इन्हें संक्रमणीय अधिकार मिल सकते हैं।
असामी (Asami): ये आमतौर पर पट्टेदार होते हैं जिन्हें विशिष्ट अवधि के लिए भूमि दी जाती है।
सरकारी पट्टेदार: जिन्हें सरकार द्वारा विशेष उद्देश्यों के लिए भूमि आवंटित की जाती है।
2. भूमि उपयोग का परिवर्तन (धारा 80)
पुराने कानूनों में कृषि भूमि को गैर-कृषि (आवासीय या औद्योगिक) घोषित कराना बहुत कठिन था।3. दलितों और पिछड़ों की भूमि का संरक्षण
प्रावधान: अब कृषि भूमि का उपयोग गैर-कृषि कार्य के लिए करने हेतु एसडीएम (SDM) से अनुमति लेने की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बना दिया गया है।
भूमिहीनों और कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं:
धारा 98: अनुसूचित जाति (SC) का व्यक्ति अपनी भूमि गैर-SC व्यक्ति को जिलाधिकारी (DM) की पूर्व अनुमति के बिना नहीं बेच सकता।
शर्त: अनुमति तभी मिलती है जब विक्रेता के पास बिक्री के बाद कम से कम 1.26 हेक्टेयर भूमि शेष बच रही हो, या कोई गंभीर आपात स्थिति (बीमारी, शिक्षा) हो।
4. पट्टेदारी (Leasing) में ढील
पुराने कानूनों में भूमि को पट्टे पर देना (बटाई पर देना) कानूनी रूप से प्रतिबंधित था, जिससे भू-स्वामी को भूमि छिन जाने का डर रहता था।
नया प्रावधान: अब कोई भी भू-स्वामी अपनी भूमि को खेती के लिए कानूनी रूप से पट्टे पर दे सकता है। इससे 'बटाई' व्यवस्था को कानूनी मान्यता मिली है और भूमि मालिक का स्वामित्व सुरक्षित रहता है।
5. स्वामित्व और उत्तराधिकार के नियम
वसीयत:
संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर अपनी भूमि की वसीयत कर सकता है।
उत्तराधिकार: यदि किसी किसान की मृत्यु बिना वसीयत के होती है, तो उत्तराधिकार की एक स्पष्ट वरीयता सूची (Order of Succession) दी गई है, जिसमें अब बेटियों और विधवाओं के अधिकारों को अधिक स्पष्टता दी गई है।
6. विवादों का निपटारा और डिजिटल रिकॉर्ड
राजस्व न्यायालय: मुकदमों के शीघ्र निस्तारण के लिए राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित किया गया है।
सीमा विवाद (धारा 24): मेड़ या सीमा संबंधी विवादों के लिए SDM को त्वरित पैमाइश कराने का अधिकार दिया गया है।
डिजिटलीकरण: खतौनी और खसरा का कंप्यूटरीकरण अनिवार्य किया गया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
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📕 लेखपाल (Lekhpal) मुख्य कार्य
1. भू-अभिलेखों का रखरखाव (Maintenance of Land Records)
2. सर्वेक्षण और निरीक्षण (Survey and Inspection)
3. आपदा और राहत कार्य (Disaster Relief)
4. प्रमाण पत्र जारी करने में सहायता
)
5. भूमि विवाद और सीमांकन
6. अन्य सरकारी कार्य
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1. भू-अभिलेखों का रखरखाव (Maintenance of Land Records)
लेखपाल का प्राथमिक कार्य अपने क्षेत्र (हलके) के भूमि रिकॉर्ड को अपडेट रखना है।
खसरा और खतौनी: भूमि के मालिकाना हक और उपयोग का विवरण तैयार करना।
नक्शा: गांव के नक्शे में बदलावों को दर्ज करना।
2. सर्वेक्षण और निरीक्षण (Survey and Inspection)
पड़ताल: साल में तीन बार (रबी, खरीफ और जायद की फसल के समय) खेतों का निरीक्षण करना।
फसल का ब्यौरा: यह दर्ज करना कि किस खेत में कौन सी फसल बोई गई है और उसका स्वास्थ्य कैसा है।
3. आपदा और राहत कार्य (Disaster Relief)
बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि या आगजनी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय नुकसान का आकलन करना।
प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा दिलाने के लिए रिपोर्ट तैयार कर तहसील में जमा करना।
4. प्रमाण पत्र जारी करने में सहायता
विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए आवश्यक दस्तावेजों की जांच करना:
आय प्रमाण पत्र (Income Certificate)
जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate)
निवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate
)
5. भूमि विवाद और सीमांकन
गाँव में भूमि संबंधी छोटे-मोटे विवादों को सुलझाना।
भूमि की पैमाइश (नाप-जोख) में कानूनगो और तहसीलदार की मदद करना।
अवैध कब्जों की सूचना उच्च अधिकारियों को देना।
6. अन्य सरकारी कार्य
जनगणना: पशु गणना या कृषि गणना में भाग लेना।Join 👉https://t.me/Amoghclasses
चुनाव: चुनाव के दौरान बीएलओ (BLO) या अन्य प्रशासनिक ड्यूटी निभाना।
सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन: पेंशन, किसान सम्मान निधि और अन्य योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान करना।
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📕भूमि मापन इकाइयां (Land Measurement Units)
यूपी में भूमि मापन की पारंपरिक इकाइयां अक्सर पूछी जाती हैं:
1. छोटे पैमाने (इकाई)
2. बिसवा और बीघा (सबसे प्रचलित)
उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में "बीघा" का माप थोड़ा बदल सकता है, लेकिन मानक माप इस प्रकार हैं:
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यूपी में भूमि मापन की पारंपरिक इकाइयां अक्सर पूछी जाती हैं:
1 बीघा = 20 बिस्वा
1 बिस्वा = 20 बिस्वांसी
1 लाठा = 99 इंच या 8 फीट 3 इंच
1 एकड़ = 4840 वर्ग गज
1 हेक्टेयर = 2.47 एकड़ (लगभग)
1. छोटे पैमाने (इकाई)
1 लाठा (Latha): 99 इंच या 8 फीट 3 इंच
1 उनवांसी (Unwansi): 24.5025 वर्ग इंच
1 कचवांसी (Kachwansi): 20 उनवांसी
1 बिसवांसी (Biswansi): 20 कचवांसी (या 1 वर्ग लाठा)
2. बिसवा और बीघा (सबसे प्रचलित)
उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में "बीघा" का माप थोड़ा बदल सकता है, लेकिन मानक माप इस प्रकार हैं:
1 बिसवा (Biswa): 20 बिसवांसी (लगभग 125 वर्ग मीटर या 1350 वर्ग फुट)
1 कच्चा बीघा (Kachcha Bigha): 6.66 बिसवा (यह पक्के बीघे का एक-तिहाई होता है)
1 पक्का बीघा (Pakka Bigha): 20 बिसवा
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