UPSSSC, LOWER PCS, PET ,UPSI, CTET, SUPER TET, UPTET ,TGT ,PGT , TEACHING , Other Exam.
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UPPCL : 03/04/2026 रात्रि 10 बजे से 04/02/2026 दोपहर 2 बजे कुल सोलह घंटे तक बिजली के बिल से जुड़ी सेवा बाधित रहेगी ।

नोट : कोई बिजली कटौती नहीं होगी यह सूचना केवल बिल से रिलेटेड है
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🟨 सामाजिक सुधार अधिनियम
     
◽️शिशुवध प्रतिबन्ध (अधिनियम)
   वेलेजली (गवर्नर जनरल)
   वर्ष - 1798 -1805 ई.
  विषय - शिशु हत्या पर प्रतिबन्ध।

◽️ऐज ऑफ़ कन्सेट एक्ट (अधिनियम)
   लैंस डाउन (गवर्नर जनरल)
   वर्ष - 1891 ई.
   विषय - लड़की में लिए विवाह की आयु 12 वर्ष निर्धारित।

◽️शारदा एक्ट (अधिनियम)
   इरविन (गवर्नर जनरल)
   वर्ष - 1930 ई.
  विषय - लड़की के लिए विवाह की 14 वर्ष और   लड़के की आयु 18 वर्ष निर्धारित।

◽️हिन्दू विधवा पुनर्विवाह (अधिनियम)
   लॉर्ड केनिंग (गवर्नर जनरल)
   वर्ष - 1856 ई.
   विषय - विधवा विवाह की अनुमति।

◽️दास प्रथा पर प्रतिबन्ध (अधिनियम)
   एलनबरो (गवर्नर जनरल)
   वर्ष - 1843 ई.
   विषय - 1833 ई. के चार्टर अधिनियम द्वारा 1843 ई. में दासता को प्रतिबंधित कर दिया गया।

◽️सती प्रथा प्रतिबन्ध (अधिनियम)
   लार्ड विलियम बैंटिक (गवर्नर  
जनरल)
  वर्ष - 1829 ई.
  विषय - सती प्रथा पर पूर्ण प्रतिबन्ध।

◽️नैटिव मैरिज एक्ट (अधिनियम)
    नार्थ ब्रुक (गवर्नर जनरल)
    वर्ष - 1872 ई.
    विषय - अन्तर्जातीय विवाह।

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📕TGT और Lt ग्रेड शिक्षक भर्ती में अनिवार्य

ध्यान दें 👇👇

👉आप लोग अपने सब्जेक्ट पर पकड़ बनाने के साथ साथ GS , मैथ,CDP और भाषा (हिंदी , इंग्लिश और संस्कृत) पर भी पकड़ बनाए रखिए , क्या पता कब दिन खराब हो JAYE


👉पहले कहा जाता था मास्टरी राजा की नौकरी है, ये मान कर चलिए राजा की तरह आपको अपने आप को बार बार प्रुव भी करना होगा कि

👉क्या पता भविष्य में ऐसा निर्णय आ जाए कि टीचर को हर 5 साल में TET पास करना होगा


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📕भूमि मापन इकाइयां (Land Measurement Units)

​यूपी में भूमि मापन की पारंपरिक इकाइयां अक्सर पूछी जाती हैं:

​1 बीघा = 20 बिस्वा
​1 बिस्वा = 20 बिस्वांसी
​1 लाठा = 99 इंच या 8 फीट 3 इंच
​1 एकड़ = 4840 वर्ग गज
​1 हेक्टेयर = 2.47 एकड़ (लगभग)


1. छोटे पैमाने (इकाई)

1 लाठा (Latha): 99 इंच या 8 फीट 3 इंच
1 उनवांसी (Unwansi): 24.5025 वर्ग इंच
1 कचवांसी (Kachwansi): 20 उनवांसी
1 बिसवांसी (Biswansi): 20 कचवांसी (या 1 वर्ग लाठा)


2. बिसवा और बीघा (सबसे प्रचलित)

उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में "बीघा" का माप थोड़ा बदल सकता है, लेकिन मानक माप इस प्रकार हैं:

1 बिसवा (Biswa): 20 बिसवांसी (लगभग 125 वर्ग मीटर या 1350 वर्ग फुट)
1 कच्चा बीघा (Kachcha Bigha): 6.66 बिसवा (यह पक्के बीघे का एक-तिहाई होता है)
1 पक्का बीघा (Pakka Bigha): 20 बिसवा


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📕 लेखपाल (Lekhpal) मुख्य कार्य


​1. भू-अभिलेखों का रखरखाव (Maintenance of Land Records)
​
लेखपाल का प्राथमिक कार्य अपने क्षेत्र (हलके) के भूमि रिकॉर्ड को अपडेट रखना है।

​खसरा और खतौनी: भूमि के मालिकाना हक और उपयोग का विवरण तैयार करना।

​नक्शा: गांव के नक्शे में बदलावों को दर्ज करना।


​2. सर्वेक्षण और निरीक्षण (Survey and Inspection)
​
पड़ताल: साल में तीन बार (रबी, खरीफ और जायद की फसल के समय) खेतों का निरीक्षण करना।
​फसल का ब्यौरा: यह दर्ज करना कि किस खेत में कौन सी फसल बोई गई है और उसका स्वास्थ्य कैसा है।

​3. आपदा और राहत कार्य (Disaster Relief)

​बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि या आगजनी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय नुकसान का आकलन करना।

​प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा दिलाने के लिए रिपोर्ट तैयार कर तहसील में जमा करना।

​4. प्रमाण पत्र जारी करने में सहायता
​विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए आवश्यक दस्तावेजों की जांच करना:

​आय प्रमाण पत्र (Income Certificate)

​जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate)

​निवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate

)
​5. भूमि विवाद और सीमांकन
​गाँव में भूमि संबंधी छोटे-मोटे विवादों को सुलझाना।

​भूमि की पैमाइश (नाप-जोख) में कानूनगो और तहसीलदार की मदद करना।

​अवैध कब्जों की सूचना उच्च अधिकारियों को देना।

​6. अन्य सरकारी कार्य

​जनगणना: पशु गणना या कृषि गणना में भाग लेना।

​चुनाव: चुनाव के दौरान बीएलओ (BLO) या अन्य प्रशासनिक ड्यूटी निभाना।

​सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन: पेंशन, किसान सम्मान निधि और अन्य योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान करना।
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लोक नृत्य भाग -1

लोक नृत्य पारंपरिक नृत्यों को संदर्भित करता है जो आमतौर पर एक विशेष संस्कृति, क्षेत्र या जातीय समूह से जुड़े होते हैं। ये नृत्य पीढ़ियों से चले आ रहे हैं और अक्सर उस समुदाय के इतिहास, रीति-रिवाजों और मूल्यों को दर्शाते हैं जिससे वे उत्पन्न हुए हैं। लोक नृत्य विभिन्न कारणों से किए जाते हैं, जिनमें पारिवारिक समारोह, सामाजिक समारोह, धार्मिक समारोह जैसे कई सुखद पल शामिल होते हैं। लोक नृत्यों की विशेषताएं सांस्कृतिक और भौगोलिक आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं। लोक नृत्यों के साथ संगीत आमतौर पर पारंपरिक होता है और पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर बजाया जाता है, जैसे- ड्रम, बांसुरी, तार वाले वाद्य यंत्र या अकॉर्डियन। यूपी के बृज क्षेत्र के लोक नृत्यों की बात करें तो इसमें कई प्रसिद्द नृत्य हैं। 

चरकुला नृत्य

चरकुला नृत्य को घड़ा नृत्य भी कहते हैं क्योंकि इस नृत्य में सिर के ऊपर एक रख का पहिया या चक्र रख कर उस के ऊपर कई सारे घड़े रखे जाते हैं और फिर नृत्य किया जाता है। यह नृत्य होली की दूज के अवसर पर किया है क्योंकि ऐसा माना जाता है की इसी दिन राधारानी का जन्म हुआ था और इसी अवसर पर इस नृत्य की उत्पत्ति हुई थी। इस नृत्य में सिर के ऊपर रखे घड़ों में 108 जलते हुए दिए रखे जाते हैं। यह नृत्य वाकई में इतना कठोर होता है की कभी-कभी सिर पर रखे घड़ों का वजन 50 किलो से भी ज्यादा पहुंच जाता है।

मयूर नृत्य

मयूर नृत्य में मोर के पंखों से बना एक विशेष प्रकार का पोषक पहना जाता है और इस नृत्य की भी थीम राधा कृष्ण के प्रेम प्रसंग की ही होती है।

 
झूला नृत्य

बृज क्षेत्र के अन्य प्रमुख नृत्यों में झूला नृत्य का भी नाम आता है । इस नृत्य को सावन के महीनों में किया जाता है। इस नृत्य में बालक और बालिकाएं दोनो भाग लेती हैं और इस नृत्य को मंदिरों में झूले डालकर भी किया जाता है।

रासलीला

बृज क्षेत्रों के अन्य नृत्यों में रासलीला में किया जाने वाला नृत्य और होली से पूर्व किया जाने वाला लट्ठमार होली का नृत्य भी शामिल है। लट्ठमार होली के नृत्य बृज क्षेत्र के बरसाना, वृंदावन आदि क्षेत्रों की खास पहचान बन चुका है।



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उत्तर प्रदेश, उत्तर भारत का एक राज्य है जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, और यहाँ कई लोक नृत्य हैं जो इस क्षेत्र के भीतर लोकप्रिय हैं पर अगर बात बुंदेलखंड की जाये तो यह मध्य भारत का एक ऐतिहासिक क्षेत्र, जिसमें उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्से शामिल हैं, जिसके चलते इसके अपने विशिष्ट लोक नृत्य हैं जो इस क्षेत्र की जीवंत सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। बुंदेलखंड के कुछ उल्लेखनीय लोक नृत्य इस प्रकार हैं ।

ख्याल नृत्य

इस कड़ी में सबसे पहला नाम आता है ख्याल नृत्य का। जैसे ख्याल गायकी होती है उसी तरह ख्याल नाम का एक नृत्य भी होता है। यह नृत्य बुंदेलखंड में पुत्र के जन्म के समय किया जाता है । इस अवसर पर बांस और रंगीन कागजों से बना एक मंदिर सिर पर रखकर नृत्य करने की परंपरा है ।

लट्ठमार नृत्य
इसी कड़ी में अगला नाम आता है लट्ठमार नृत्य का यह लट्ठमार नृत्य बृज क्षेत्र की लट्ठमार होली से बिलकुल अलग है । इसे बुंदेलखंड क्षेत्र में दीपावली के समय किया जाता है जबकि लट्ठमार नृत्य बृज क्षेत्र में होली के समय होती है । इस नृत्य में हर आयु और वर्ग के लोग हाथों में लठ्ठ लेकर एक प्रकार की प्रतिस्पर्धा वाला नृत्य करते हैं ।
सौर या सोहरा
इसी क्षेत्र का एक और प्रसिद्ध नृत्य है सौर या सोहरा । यह नृत्य हमीरपुर झांसी और ललितपुर से जुड़े क्षेत्रों में किया जाता है तथा यह फसल की कटाई से जुड़ा नृत्य होता है । जब युवक और युवतियां फसल काटने जाती हैं हाथ में डंडा लेकर इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए ये नृत्य करती हैं ।

दीवारी पाई डंडा
बुंदेलखंड क्षेत्र का एक और प्रसिद्ध नृत्य है दीवारी पाई डंडा। यह एक बहुत ही प्राचीन नृत्य है और यह नृत्य भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़ा हुआ है । इसमें नर्तक भगवान कृष्ण का भेष बनाकर ग्वालों के संग डंडे लड़ाकर नाचते हैं । इस नृत्य को प्रायः अहीर समुदाय के लोगों के द्वारा ही किया जाता है । यह नृत्य दिवाली के समय से शुरू होकर संक्रांति के समय तक चलता रहता है ।


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आज सुबह प्रयागराज में हुए बारिश और तूफान की वजह से ROARO MAINS 2023 का फाइनल रिजल्ट नहीं आ पाया 😂😂😂😂😂


अकॉर्डिंग खुफिया विभाग , टेलीग्राम चैनल
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📕आयोग ने दोगुने परिक्षा केंद्रों की मांगी सूची

👉21 मई को होने वाली लेखपाल भर्ती परीक्षा के लिए अब नए सिरे से परिक्षा केंद्र बनाए जाएंगे.


इस पेपर वाले ने गलत डेट (12 मई) लिखा है😂😂
👉शिक्षा मित्रो को 18 और अनुदेशकों को 17 हजार इसी महीने से मिलेगा
B.ed प्रवेश फार्म का आज अंतिम दिन
प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान
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📕 उत्तर प्रदेश विशेष

✍🏻उत्तर प्रदेश कृषि जलवायु क्षेत्र 9

✍🏻उत्तर प्रदेश कृषि मृदा समूह क्षेत्र 8 है

✍🏻भारत का कृषि का प्रतिशत उत्तर प्रदेश का सहभागिता 19.17% है l

✍🏻 उत्तर प्रदेश में सीमांत जोत का प्रतिशत 80.18 है l

✍🏻 सीमांत जोत का औसत हेक्टेयर 0.38 हेक्टेयर है

✍🏻 खादर नवीन निक्षेप को कहा जाता है इसका अन्य नाम कछार भी कहा जाता है l ज्यादा उपजाऊ भूमि है यहां बाढ़ से संबंधित क्षेत्र है l

✍🏻 बांगर पुरानी मिट्टी को कहा जाता है l यहां हर वर्ष बाढ़ नहीं आती l यह कम उपजाऊ होती है खादर की अपेक्षा l

👉खादर मृदा को नवीन जलोढ़ मृदा भी कहा जाता है  l

👉यह हल्के भूरे रंग की छिद्र युक्त महीन वाली मृदा होती है

👉बांगर की अपेक्षा जल्द धारण करने की क्षमता अधिक होती है l

👉खादर मृदा की परत अधिक गहराई तक निक्षेपित नहीं होती l


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👉जलोढ़ मिट्टी दो प्रकार की होती है: खादर, बांगर. 

👉खादर, नई जलोढ़ मिट्टी होती है, जो हर साल बाढ़ के कारण जमा होती है. 

👉वहीं, बांगर, पुरानी जलोढ़ मिट्टी होती
है।

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UPPSC ROARO MAINS 2023 RESULT, comming soon 👍👍👍👍
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जब रणभूमि में उतरा हूं , तो लड़ने से इनकार नहीं अब हार भले जाऊं, लेकिन पीछे हटना स्वीकार नहीं खुद से उतरा सागर में ,साहब यह मेरी भूल नही कश्ती भी जर्जर है मेरी ,धाराएं भी अनुकूल नहीं पर रोक सके संवेग मेरा ,लहरों में इतनी धार नहीं अब डूब भले जाऊं लेकिन वापस आना स्वीकार नहीं

कटऑफ की चर्चा नहीं करेंगे ,जो होगा देखा जाएगा 👆👆
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