Forwarded from UPSSSC, LOWER PCS, PET ,UPSI, CTET, SUPER TET, UPTET ,TGT ,PGT , TEACHING , Other Exam. (Kavya tiwari)
कल होगा हमारे भविष्य का महा आंदोलन आप सभी लोग जरूर शामिल हो
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कनाडा सरकार ने रुका फास्ट्रेक वीजा
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6 कदमों से भारतीय अर्थव्यवस्था हो रहीमजबूत
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प्रदूषण के लिए 10000 मार्शल तैयार
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🔥आठवीं अनुसूची - इसमें भारतीय संविधान द्वारा वर्तमान में मान्यता प्राप्त 22 भाषाओं का उल्लेख किया गया है।
मूलतः इसमें 14 भाषाएं थीं।
🔥वर्ष 1967 में सिंधी को 21वें संविधान संशोधन द्वारा,
🔥वर्ष 1992 में कोंकणी, नेपाली तथा मणिपुरी को 71वें संविधान संशोधन द्वारा
🔥वर्ष 2004 में संथाली, डोगरी, मैथिली तथा बोडो को 92वें संविधान संशोधन, 2003 द्वारा आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है।
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#PrelimsBoosterfact
मूलतः इसमें 14 भाषाएं थीं।
🔥वर्ष 1967 में सिंधी को 21वें संविधान संशोधन द्वारा,
🔥वर्ष 1992 में कोंकणी, नेपाली तथा मणिपुरी को 71वें संविधान संशोधन द्वारा
🔥वर्ष 2004 में संथाली, डोगरी, मैथिली तथा बोडो को 92वें संविधान संशोधन, 2003 द्वारा आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है।
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🔥भारतीय संविधान (प्रथम) संशोधन अधिनियम, 1951 के जरिए संविधान में नौवीं अनुसूची तथा अनुच्छेद 31-क और 31-ख जोड़े गए।
🔥संसद द्वारा विधि विशेष (यथा- भूमि सुधार विधियां) को नौवीं अनुसूची में रखा जा सकता है, जिन्हें न्यायिक समीक्षा से बचाव दिया जाना आशयित हो।
🔥 वर्तमान में (मई, 2022 की स्थिति अनुसार) नौवीं अनुसूची में ऐसी 282 विधियां शामिल हैं।
अनुच्छेद 31-ख यह कहता है कि नौवीं अनुसूची में उल्लिखित नियमों और विनियमों को इस आधार पर शून्य नहीं
🔥समझा जाएगा कि वे भाग 3 के किन्हीं उपबंधों और प्रदत्त अधिकारों में से किसी से असंगत हैं या उनको छीन लेते हैं या न्यून करते हैं।
🔥किंतु वर्ष 2007 में सर्वोच्च न्यायालय ने आई.आर. कोएल्हो बनाम तमिलनाडु के मामले में निर्णय देते हुए यह स्पष्ट किया कि संसद को नौवीं अनुसूची में विधि विशेष को प्रविष्टि करने की शक्ति प्रदान की गई है, किंतु यह न्यायिक संवीक्षा के दायरे से बाहर नहीं है।
🔥न्यायालय ने निर्धारित किया कि 24 अप्रैल, 1973 (केशवानंद भारती वाद निर्णय की तिथि) के बाद नौवीं अनुसूची में शामिल किए गए विधायनों की न्यायिक समीक्षा इस आधार पर की जा सकेगी कि वे अनुच्छेद 21, 14 एवं 19 में प्रतिबिम्बित संविधान के मूल ढांचे की अवधारणा का उल्लंघन करते हैं।
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🔥संसद द्वारा विधि विशेष (यथा- भूमि सुधार विधियां) को नौवीं अनुसूची में रखा जा सकता है, जिन्हें न्यायिक समीक्षा से बचाव दिया जाना आशयित हो।
🔥 वर्तमान में (मई, 2022 की स्थिति अनुसार) नौवीं अनुसूची में ऐसी 282 विधियां शामिल हैं।
अनुच्छेद 31-ख यह कहता है कि नौवीं अनुसूची में उल्लिखित नियमों और विनियमों को इस आधार पर शून्य नहीं
🔥समझा जाएगा कि वे भाग 3 के किन्हीं उपबंधों और प्रदत्त अधिकारों में से किसी से असंगत हैं या उनको छीन लेते हैं या न्यून करते हैं।
🔥किंतु वर्ष 2007 में सर्वोच्च न्यायालय ने आई.आर. कोएल्हो बनाम तमिलनाडु के मामले में निर्णय देते हुए यह स्पष्ट किया कि संसद को नौवीं अनुसूची में विधि विशेष को प्रविष्टि करने की शक्ति प्रदान की गई है, किंतु यह न्यायिक संवीक्षा के दायरे से बाहर नहीं है।
🔥न्यायालय ने निर्धारित किया कि 24 अप्रैल, 1973 (केशवानंद भारती वाद निर्णय की तिथि) के बाद नौवीं अनुसूची में शामिल किए गए विधायनों की न्यायिक समीक्षा इस आधार पर की जा सकेगी कि वे अनुच्छेद 21, 14 एवं 19 में प्रतिबिम्बित संविधान के मूल ढांचे की अवधारणा का उल्लंघन करते हैं।
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