She arrived as a stranger, turned into a story, and departed as a stranger again; yet the story stayed.
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Wasn’t I clear enough?
As simple as it seems
the sun will dawn, the moon will rise,
my love for you will always shine.
No matter what you think of me,
you’re a precious thought,
drifting through my dreams
like a quiet ship on endless waters.
𝐀𝐥𝐢𝐯𝐞 くそ
Wasn’t I clear enough? As simple as it seems the sun will dawn, the moon will rise, my love for you will always shine. No matter what you think of me, you’re a precious thought, drifting through my dreams like a quiet ship on endless waters.
Btw, her smile >>>
I miss it; I just wish it never turns into tears.
Even if she isn’t mine,
her smile is something precious to preserve.
I remember all our memories.
I don’t know what the outcome will be now,
but all those memories and that love were real and true.
I miss it; I just wish it never turns into tears.
Even if she isn’t mine,
her smile is something precious to preserve.
I remember all our memories.
I don’t know what the outcome will be now,
but all those memories and that love were real and true.
इतना इंतज़ार कर लिया मैंने उसका,
कि अब वो ख़ुद भी अजनबी-सी लगने लगी है।
इन अजनबियों की भीड़ में,
वो भी अब बेजान-सी दिखने लगी है।
इश्क़ को मुरशिद समझा था मैंने,
इश्क़ की नमाज़ पढ़ा कर जा चुकी है वो।
अब क्या जानूँ कौन है वो,
जो ग़ैरों में भी बेग़ैर-सी दिखने लगी है मुझे।
उसे देखूँ तो भी दिल में
कोई आहट नहीं उठती मुझमें।
काश, कोई तो आवाज़ दे दे मुझे
“उठ जा, वो तेरे लिए ही आने लगी है अब।”
कैसे देखूँगा तुझे उस शादी के जोड़े में,
ये पैग़ाम मुझे अपने निकाह का दे गई।
पर इस वीरान ज़िंदगी में, वो लाल रंग तेरे आने से था,
आज आख़िरी बार वो लाल रंग देख कर,
तुझे सोचते-सोचते ये सफ़ेदी की चादर ओढ़ कर सो जाना चाहूँगा मैं।
ये पैग़ाम मुझे अपने निकाह का दे गई।
पर इस वीरान ज़िंदगी में, वो लाल रंग तेरे आने से था,
आज आख़िरी बार वो लाल रंग देख कर,
तुझे सोचते-सोचते ये सफ़ेदी की चादर ओढ़ कर सो जाना चाहूँगा मैं।
❤1
अब जान का क्या मोल, जब उसने मुझे बेजान कह दिया,
इन जान देने वाले फ़रिश्तों के बीच, ठहर सा गया हूँ मैं।
कौन हूँ मैं, ये खुद से पूछता हूँ बार-बार,
सिर्फ़ सहमा-सा खड़ा हूँ, जैसे अपना ही साया खो गया हो।
फिर भी इबादत करने का दिल चाहता है,
क्योंकि रूह अब भी वही कहती है, जो सच है।
मगर हर बार वो एक दिन याद आ जाता है,
जब सोचा था - कैसा था मैं, कैसा हूँ मैं,
और इस दफ़ा कैसा रह जाऊँगा…
इन जान देने वाले फ़रिश्तों के बीच, ठहर सा गया हूँ मैं।
कौन हूँ मैं, ये खुद से पूछता हूँ बार-बार,
सिर्फ़ सहमा-सा खड़ा हूँ, जैसे अपना ही साया खो गया हो।
फिर भी इबादत करने का दिल चाहता है,
क्योंकि रूह अब भी वही कहती है, जो सच है।
मगर हर बार वो एक दिन याद आ जाता है,
जब सोचा था - कैसा था मैं, कैसा हूँ मैं,
और इस दफ़ा कैसा रह जाऊँगा…
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What I really want at this point.
थक गया हु।
तुम दीवाली के संग आने वाली नई रौशनी,
मैं वही पुरानी अँधेरी रात हूँ…
तुम्हारे घर आज खुशियों का मेला है,
मेरे हिस्से टूटी-फूटी सीबर यादें और बातें तात हैं…
तुम्हारी छत पे दीयों की कतारें हैं,
मेरी पलकों पे बस आँसुओं की बरसात है…
तुम खिलखिला कर किसी का हो चुके,
और मैं दिल के खंडहर में अकेला इबादत-ए-विरह की सौगात हूँ…
तुम्हारी दुनिया चटकीले रंगों में रमी,
मेरे लफ़्ज़ों में बस फुसफुसाती स्याह रात है…
तुम बन गए किसी की मुबारक दीवाली,
मैं आज भी उसी बुझा दिया हुआ ख़त-ए-मोहब्बत की लाश हूँ…
तुम शायद होतीं तो दीवाली लगती, अब बस एक रात है।
तुम्हारे आने से खुशियाँ अपनी‑सी लगतीं, अब तो बस बेगाने लोगों की अफ़्वाए‑बात है।
सब सुर‑सर्गम मुझे अब एक कहानी लगती,
तुम बिन ये जज़्बे कमबख़्त वही फुसफुसाहट‑ए‑बेबात हैं।
काश तुम फिर से मेरी होतीं,
क्योंकि तुम्हारे बिना हर रात मेरे दिल में एक अधूरी बात है।
में बारिश की बोली समझता नहीं था,
हवाओ से में यू उलझता नहीं था।
है सीने में दिल भी कहा थी मुझे ये खबर ?
हवाओ से में यू उलझता नहीं था।
है सीने में दिल भी कहा थी मुझे ये खबर ?