AR RPSC / RSSB Exams
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राजस्थान की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए समर्पित
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राजस्थान में शहरी परिवहन को प्रदूषण मुक्त और आधुनिक बनाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 20 जून 2026 को 'प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना' के तहत राज्य में पहली बार अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक (EV) बसों की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री ने जयपुर के अमर जवान ज्योति से जयपुर के लिए 29 और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भीलवाड़ा के लिए 18 ई-बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

√ 8 जिलों का चयन: इस योजना में राजस्थान के 8 प्रमुख शहरों—जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा, अलवर और अजमेर को चुना गया है।

√ कुल 1,150 बसें: केंद्र सरकार द्वारा शुरुआती चरण में इन 8 जिलों के लिए 675 बसें स्वीकृत की गई हैं (जिन्हें दीपावली 2026 तक चलाने का लक्ष्य है)। इसके अतिरिक्त 475 और बसें मंजूर हुई हैं, जिससे राज्य को कुल 1,150 ई-बसें मिलेंगी।

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राजस्थानी स्थापत्य कला :- नौलखा विशेष

👉 नौलखा झील -बूंदी
👉 नौलखा बावड़ी -डूंगरपुर

👉 नौलखा महल-उदयपुर
👉 नौलखा बुर्ज/ नौलखा स्तंभ- चित्तौड़
👉 नौलखा द्वार -रणथंबोर

👉 नौलखा मंदिर -पाली
👉 नौलखा दुर्ग-झालरापाटन
👉 नौलखा भंडार-चित्तौड़गढ़ दुर्ग

👉 नौलखा बांध-बूंदी
👉 नौलखा तीर्थ-पाली
👉 नौलखा कुंड-पाली

👉 नौलखा बाग-भरतपुर
👉 नौलखा सरोवर-बारां
👉 नौलखा झालरा -जोधपुर
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देश का सबसे लंबा ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे

✓ मेरठ से प्रयागराज तक 594KM
✓  उद्घाटन:- 29 अप्रैल 2026 को
✓  स्थान:- हरदोई (उत्तर प्रदेश)
✓  उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने
✓  इसे अदाणी रोड ट्रांसपोर्ट लिमिटेड ने बनाया
✓  37 हजार करोड रुपए में बना एक्सप्रेस वें
उत्तरप्रदेश के 12 जिलों की 6 करोड़
की आबादी को जोड़ेगा

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राजस्थान में भूमिज शैली के उदाहरण

▪️उडेश्वर मंदिर- बिजौलिया (भीलवाड़ा)
▪️महानालेश्वर मंदिर- मेनाल (भीलवाड़ा)
▪️भूमिज शैली का सबसे प्राचीन मंदिर
      - सेवाड़ी जैन मंदिर ( पाली)

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Forwarded from AR RPSC / RSSB Exams (Mahesh)
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान कक्षा 10

महाराणा कुम्भा (1433–1468 ई.) — मोकल के बाद उसका पुत्र महाराणा कुम्भा 1433 ई. में मेवाड़ का शासक बना। राठोड़ों का मेवाड़ पर प्रभाव समाप्त कर उसने मेवाड़ी सामंतों का विश्वास अर्जित किया। कुम्भा ने चित्तौड़ एवं कुम्भलगढ़ को अपनी शक्ति का केन्द्र बनाया। 1437 ई. में सारंगपुर के युद्ध में मालवा के शासक महमूद खिलजी को परास्त कर बंदी बना लिया। इस विजय के उपलक्ष्य में कुम्भा ने कीर्ति स्तम्भ का निर्माण करवाया। नागौर के उत्तराधिकार को लेकर मेवाड़ व गुजरात में युद्ध हुआ, जिसमें गुजरात पराजित हुई। 1453 ई. में कुम्भा ने मारवाड़ से मण्डोर छीन लिया, परंतु बाद में संधि कर अपने पुत्र रायमल का विवाह मारवाड़ की राजकुमारी से कर दिया।

1456 ई. में मालवा के महमूद खिलजी व गुजरात के कुतुबुद्दीन के बीच चम्पानेर की संधि हुई। इस संधि में यह तय किया गया कि दोनों शासक मिलकर कुम्भा पर आक्रमण करके, उसे हराकर, उसके राज्य को बाँट लेंगे। 1457–58 ई. में गुजरात व मालवा के शासकों ने मेवाड़ पर आक्रमण किया। मगर कुम्भा की कूटनीति से दोनों शासकों में मतभेद पैदा होने के कारण वे विशेष सफलता प्राप्त नहीं कर सके।

ऐसा माना जाता है कि कुम्भा ने 32 दुर्गों का निर्माण करवाया, जिनमें सिरोही, अचलगढ़ एवं कुम्भलगढ़ के दुर्ग प्रसिद्ध हैं। कविराज श्यामलदास भी कुम्भा को मेवाड़ के 84 में से 32 दुर्गों का निर्माता बताते हैं। कुम्भलगढ़ का दुर्ग अपनी विशेष भौगोलिक स्थिति एवं बनावट के कारण प्रसिद्ध है। इसका शिल्प मण्डन था। कुम्भा ने चित्तौड़ में कुम्भस्वामी तथा शृंगारचवरी का मंदिर, एकलिंगजी का विष्णु मंदिर एवं रणकपुर का मंदिर बनवाये, जो अपनी विशालता एवं तक्षणकला के कारण अद्भुत हैं।

कुम्भा एक विद्वान एवं विद्यानुरागी शासक था। कान्ह व्यास द्वारा रचित एकलिंग महात्म्य से ज्ञात होता है कि वह वेद, स्मृति, मीमांसा, उपनिषद, व्याकरण एवं राजनीति में रुचि रखता था। संगीत राज, संगीत मीमांसा व सूड प्रबंध इसके द्वारा रचित ग्रंथ थे। ऐसा माना जाता है कि कुम्भा ने चण्डीशतक की व्याख्या, गीत गोविन्द और संगीत रत्नाकर पर टीका लिखी थी। इसके काल में कवि अत्रि और महेश ने कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति की रचना की। तत्कालीन साहित्यिक ग्रंथों और प्रशस्तियों में महाराणा कुम्भा को महाराजाधिराज, रावराय, दानगुरु, राजगुरु, परशुगुरु, हालगुरु, अभिनवभरताचार्य, हिन्दू सुल्तान आदि विरुदों से विभूषित किया गया।

कुम्भा निस्संदेह प्रतापी शासक था, किंतु उसका अंतिम समय कष्टमय रहा। अपने जीवन के अंतिम काल में कुम्भा को उन्माद रोग हो गया और उसके पुत्र उदा ने 1468 ई. में उसकी हत्या कर दी।https://t.me/ARRPS
जोधपुर-पाली बनेगा प्रमुख कॉरिडोर 🚀

राज्य में जोधपुर-पाली-मारवाड़ क्षेत्र और कांकणी इंडस्ट्रियल एरिया को सेमीकंडक्टर कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा।

• उद्योगों को जमीन, बिजली, पानी और सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए त्वरित सुविधाएं मिलेंगी।

• इसमें 7 साल तक बिजली शुल्क में 100% छूट, स्टाम्प ड्यूटी और भूमि रूपांतरण शुल्क में 75% छूट शामिल है। इसके अलावा टर्म लोन पर 5% ब्याज सब्सिडी और पूंजी निवेश पर अनुदान का भी प्रावधान है।

• ग्रीन प्रोजेक्ट्स की लागत पर 50% तक सहायता दी जाएगी, वहीं रिन्यूएबल एनर्जी आधारित परियोजनाओं को भी विशेष छूट मिलेगी। 🌱

• इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मजबूत करने के लिए, सरकार ने आरआईपीएस-2024 के तहत चुनिंदा घटक श्रेणियों के लिए न्यूनतम निवेश सीमा को घटाकर 15 करोड़ रुपये कर दिया है और केंद्र की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के तहत निवेश को तीन के बजाय पांच चरणों में करने की अनुमति दी है। इस क्षेत्र में महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए मासिक कौशल विकास सहायता राशि 4,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, राजस्थान वेंचर कैपिटल फंड के माध्यम से इस वर्ष 25 नए स्टार्टअप को वित्तीय सहायता मिलेगी। 🤝

• "राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2026" को राज्य की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है, जो राजस्थान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में सहायक होगा।
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राजस्थान की राधा - मीराबाई
डिंगल का हेरोस - पृथ्वीराज राठौड़
राजस्थान का अबुल फजल - मुहणोत नैणसी
मेवाड़ का उद्धारक - हम्मीर देव सिसोदिया
कलयुग का कर्ण - राव लूणकरण
राजपूताने का कर्ण - रायसिंह
मेवाड़ का कर्ण - भामाशाह
गांधीजी का पांचवा पुत्र - जमनालाल बजाज
राजस्थान का गाँधी - गोकुल भाई भट्ट
वागड़ का गाँधी - भोगीलाल पांड्या
शेर ए  राजस्थान - जयनारायण व्यास
भारत की मोनालिसा - बनी ठनी
हल्दीघाटी का शेर - महाराणा प्रताप
राजस्थान का कबीर - दादू दयाल
राजस्थान की जलपरी - रीमा दत्ता
मारवाड़ का प्रताप - राव चन्द्रसेन
वागड़ का नृसिंग - संत दुर्लभ जी
राजस्थान का लोक नायक - जय नारायण व्यास
राजस्थान का भागीरथ - गंगासिंह
आदिवासियों का मसीहा - मोतीलाल तेजावत
पत्रकारिता का भीष्मपितामह-झाबरमल्ल शर्मा

    
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संविधान

▪️मौलिक रूप से

• 395 अनुच्छेद
• 8 अनुसूचियां
• 22 भाग
• निर्माण समय: 2 वर्ष 11 माह 18 दिन
• 11 सत्र
• 22 समितियाँ
• 26-11-1949 को अपनाया गया।
• 26-1-1950 से लागू किया गया।

▪️वर्तमान

• 470 अनुच्छेद
• 12 अनुसूचियां
• 25 भाग
• 127 संशोधन
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राजस्थान की छतरियाँ – खंभों की विविधता से पहचानें

🔸 8 खंभों की छतरी:
▫️ महाराणा प्रताप – बाँडोली, सलूम्बर
▫️ महाराणा साँगा – माण्डलगढ़, भीलवाड़ा

🔸 10 खंभों की छतरी:
▫️ मामा-भांजा (धन्ना-भींया) – जोधपुर

🔸 12 खंभों की छतरी:
▫️ पृथ्वीराज – कुम्भलगढ़, राजसमंद

🔸 16 खंभों की छतरी:
▫️ अमरसिंह राठौड़ – नागौर दुर्ग, नागौर

🔸 20 खंभों की छतरी:
▫️ अखैराज सिंघवी – जोधपुर
▫️ गोपालसिंह – करौली

🔸 32 खंभों की छतरी:
▫️ जोधसिंह बदनोर – ब्यावर (पूर्व अजमेर)
▫️ जगन्नाथ कछवाहा – मांडल, भीलवाड़ा
▫️ जयसिंह जैत्रसिंह – सवाई माधोपुर

🔸 80 खंभों की छतरी:
▫️ मूसी महारानी – अलवर
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• मारवाड़ी व्याकरण : रामकरण आसोपा [प्रकाशन 1896 ईस्वी में]

• राजस्थांनी व्याकरण : सीताराम लालस [नैरवा निवासी]

• राजस्थानी भाषा में रामायण के रचयिता : हनुमंत किंकर

• राजस्थानी रामायण : समय सुंदर [समय सुंदर जी ने सीताराम चौपाई लिखी है जिसे राजस्थानी रामायण" कहा जाता है।]
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1857  क्रांति कालक्रम

▪️28 मई 1857 नसीराबाद में विद्रोह
▪️31 मई 1857 भरतपुर राज्य में विद्रोह
▪️3 जून 1857 नीमच में विद्रोह
▪️10 जून 1857 देवली छावनी में विद्रोह

▪️14 जून 1857 टोंक राज्य में विद्रोह
▪️11 जुलाई 1857 अलवर राज्य में विद्रोह
▪️9 अगस्त 1857 अजमेर के केंद्रीय कारागार
▪️21 अगस्त 1857 एरिनपुरा में विद्रोह

▪️23 अगस्त 1857 जोधपुरा लीजियन में
▪️8 सितम्बर, 1857  बिथोड़ा का युद्ध
▪️18 सितम्बर 1857 चेलावास का युद्ध
▪️27 अक्टूबर 1857 धौलपुर राज्य में विद्रोह
▪️15 अक्टूबर 1857कोटा में विद्रोह https://t.me/ARRPS
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ऐसा प्रश्न जो हर बार रिपीट हो रहा है

• जमादार में पूछा
• 3rd ग्रेड में पूछा
• वनपाल में पूछा
• LDC में पूछ
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राजस्थान की चित्रकला व चित्रकार
(RBSE 10th Rajasthan Gk)

1⃣ मेवाड़ - नासिरुद्दीन, साहिबदीन, नुरुददीन, मनोहर, कृपाराम

2⃣ नाथद्वारा - बाबा रामचंद्र, नारायण, चतुर्भुज, राम लिंग, चंपालाल, घासीराम, तुलसीराम

3⃣ देवगढ़ - श्रीधर अधारे, बगता, कंवला प्रथम, कंवला द्वितीय, हरचंद,बैजनाथ, नंगा, चोखा

4⃣ जोधपुर - अमरदास भाटी, दाना भाटी, शंकर दास, माधोदास, रामसिंह भाटी, शिवदास, रामा, नाथा, छज्जू, सेफु, डालचंद, वीर जी

5⃣ बीकानेर - उस्ता अली रजा एवं उस्ता हामिद रूकनुद्धीन, जयकिशन मथेरण, शाह मोहम्मद
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राजस्थान में पंचायत शैली के उदाहरण

▪️भंडदेवरा शिव मंदिर- बारां
▪️बूढ़ादीत सूर्य मंदिर- कोटा
▪️जगदीश मंदिर- उदयपुर
▪️बाडोली के शिव मंदिर- बाडोली
▪️हरिहर मंदिर - औसिया

राजस्थान में भूमिज शैली के उदाहरण

▪️उडेश्वर मंदिर- बिजौलिया (भीलवाड़ा)
▪️महानालेश्वर मंदिर- मेनाल (भीलवाड़ा)
▪️भूमिज शैली का सबसे प्राचीन मंदिर
      - सेवाड़ी जैन मंदिर ( पाली
)
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हाल ही, थार मरुस्थलीय क्षेत्र में जल संचय की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना की मुख्य नहर पर स्थित आरडी-1356 पर बनी एस्केप संरचना को अब 28 किलोमीटर परिधि को बड़ी कृतिम झील के रूप में विकसित किया गया है। मानसून के दौरान पंजाब की ओर से आने वाला अतिरिक्त पानी इस विशाल कृत्रिम झील में इकट्ठा होगा। जैसलमेर जिले के घांटियाली क्षेत्र में निर्मित यह जलाशय जैलसमेर-बाड़मेर जिलों में पानी की बढ़ती मांग को पूरा करेगा।

दरअसल इंदिरा गांधी मुख्य नहर की लंबी प्रणाली में शुरू से ही कई स्थानों पर एस्केप संरचनाएं बनी हुई हैं। ताकि आपात स्थिति के दौरान नहर के अतिरिक्त पानी को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। मानसून के समय जब सिंचाई की मांग घट जाती है, तब भारी मात्रा में पानी संग्रहण व्यवस्था के अभाव में बहकर अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार पाकिस्तान में बेकार चला जाता है।
जैवलिन थ्रो (भाला फेंक)
ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026

रुमेश थरंगा पथिरागे -श्रीलंका🥇🇱🇰
गोल्ड मेडल- 89.75 मीटर

नीरज चोपड़ा -सिल्वर मेडल -85.83 मी.🇮🇳

यशवीर सिंह- ब्रॉन्ज मेडल - 85.41मी.🇮🇳
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