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मंत्रिपरिषद की संरचना 🔥
❖ उपमुख्यमंत्री (2)-
(1) दीया कुमारी जी (विद्याधर नगर विधायक)
(2) श्री प्रेमचंद बैरवा (दूदू से विधायक)
❖ राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) - (4)
❖ 2 - महिला मंत्री-
(1) दीया कुमारी जी
(विद्याधर नगर, जयपुर से विधायक)
(2) श्रीमती मंजू बाघमार
(जायल विधानसभा से विधायक ,राज्य मंत्री )
Note :- राजस्थान में उपमंत्री व संसदीय सचिव अभी तक नियुक्त नहीं किए गए। https://t.me/ARRPS
❖ उपमुख्यमंत्री (2)-
(1) दीया कुमारी जी (विद्याधर नगर विधायक)
(2) श्री प्रेमचंद बैरवा (दूदू से विधायक)
❖ राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) - (4)
❖ 2 - महिला मंत्री-
(1) दीया कुमारी जी
(विद्याधर नगर, जयपुर से विधायक)
(2) श्रीमती मंजू बाघमार
(जायल विधानसभा से विधायक ,राज्य मंत्री )
Note :- राजस्थान में उपमंत्री व संसदीय सचिव अभी तक नियुक्त नहीं किए गए। https://t.me/ARRPS
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राजस्थान की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए समर्पित
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भारत ने वर्ष 2070 तक 'नेट जीरो' (शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन) का लक्ष्य हासिल करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
राजस्थान का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट - सलारपुर (खुशखेड़ा), भिवाड़ी, राजस्थान।
देवास परियोजना की तीसरी और चौथी स्टेज पूर्ण होने के पश्चात, उदयपुर शहर की झीलों में पानी की कमी नहीं रहेगी
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राजस्थान का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट - सलारपुर (खुशखेड़ा), भिवाड़ी, राजस्थान।
देवास परियोजना की तीसरी और चौथी स्टेज पूर्ण होने के पश्चात, उदयपुर शहर की झीलों में पानी की कमी नहीं रहेगी
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मारवाड़ राज्य लोक परिषद्
• प्रथम अधिवेशन : पुष्कर (अजमेर)
• अध्यक्ष : चांदकरणा शारदा
• मुख्य अतिथि : कस्तूरबा गांधी
मारवाड़ लोक परिषद् (1938)
• संस्थापक : जयनारायण व्यास
• प्रथम अध्यक्ष : रणछोड़ गट्टानी
मारवाड़ यूथ लीग (1931)
• संस्थापक : जयनारायण व्यास
मारवाड़ किसान सभा (1941)
• संस्थापक : बलदेव सिंह मिर्धा
• अध्यक्ष : मंगलसिंह कच्छावा
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• प्रथम अधिवेशन : पुष्कर (अजमेर)
• अध्यक्ष : चांदकरणा शारदा
• मुख्य अतिथि : कस्तूरबा गांधी
मारवाड़ लोक परिषद् (1938)
• संस्थापक : जयनारायण व्यास
• प्रथम अध्यक्ष : रणछोड़ गट्टानी
मारवाड़ यूथ लीग (1931)
• संस्थापक : जयनारायण व्यास
मारवाड़ किसान सभा (1941)
• संस्थापक : बलदेव सिंह मिर्धा
• अध्यक्ष : मंगलसिंह कच्छावा
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पीएम-कुसुम योजना के कम्पोनेंट-सी (पंप सोलराइजेशन) के तहत सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने में राजस्थान का देश भर में तीसरा स्थान है, इस घटक में राजस्थान केवल महाराष्ट्र और गुजरात से पीछे है। (हालांकि, योजना के कम्पोनेंट-ए में राजस्थान देश में पहले पायदान पर है)।
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• सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता और PM कुसुम कम्पोनेन्ट A में देश में प्रथम स्थान
• अक्षय ऊर्जा उत्पादन में - द्वितीय स्थान
• PM कुसुम कम्पोनेन्ट C में देश में - तृतीय स्थान
• रुफ टॉप सोलर संयंत्र स्थापना में देशभर में - तीसरा स्थान
नोट:- समय के साथ इनके स्थान में परिवर्तन हो सकता
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• अक्षय ऊर्जा उत्पादन में - द्वितीय स्थान
• PM कुसुम कम्पोनेन्ट C में देश में - तृतीय स्थान
• रुफ टॉप सोलर संयंत्र स्थापना में देशभर में - तीसरा स्थान
नोट:- समय के साथ इनके स्थान में परिवर्तन हो सकता
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राजस्थान में शहरी परिवहन को प्रदूषण मुक्त और आधुनिक बनाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 20 जून 2026 को 'प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना' के तहत राज्य में पहली बार अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक (EV) बसों की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री ने जयपुर के अमर जवान ज्योति से जयपुर के लिए 29 और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भीलवाड़ा के लिए 18 ई-बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
√ 8 जिलों का चयन: इस योजना में राजस्थान के 8 प्रमुख शहरों—जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा, अलवर और अजमेर को चुना गया है।
√ कुल 1,150 बसें: केंद्र सरकार द्वारा शुरुआती चरण में इन 8 जिलों के लिए 675 बसें स्वीकृत की गई हैं (जिन्हें दीपावली 2026 तक चलाने का लक्ष्य है)। इसके अतिरिक्त 475 और बसें मंजूर हुई हैं, जिससे राज्य को कुल 1,150 ई-बसें मिलेंगी।
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√ 8 जिलों का चयन: इस योजना में राजस्थान के 8 प्रमुख शहरों—जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा, अलवर और अजमेर को चुना गया है।
√ कुल 1,150 बसें: केंद्र सरकार द्वारा शुरुआती चरण में इन 8 जिलों के लिए 675 बसें स्वीकृत की गई हैं (जिन्हें दीपावली 2026 तक चलाने का लक्ष्य है)। इसके अतिरिक्त 475 और बसें मंजूर हुई हैं, जिससे राज्य को कुल 1,150 ई-बसें मिलेंगी।
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राजस्थानी स्थापत्य कला :- नौलखा विशेष
👉 नौलखा झील -बूंदी
👉 नौलखा बावड़ी -डूंगरपुर
👉 नौलखा महल-उदयपुर
👉 नौलखा बुर्ज/ नौलखा स्तंभ- चित्तौड़
👉 नौलखा द्वार -रणथंबोर
👉 नौलखा मंदिर -पाली
👉 नौलखा दुर्ग-झालरापाटन
👉 नौलखा भंडार-चित्तौड़गढ़ दुर्ग
👉 नौलखा बांध-बूंदी
👉 नौलखा तीर्थ-पाली
👉 नौलखा कुंड-पाली
👉 नौलखा बाग-भरतपुर
👉 नौलखा सरोवर-बारां
👉 नौलखा झालरा -जोधपुर
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👉 नौलखा सरोवर-बारां
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देश का सबसे लंबा ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे
✓ मेरठ से प्रयागराज तक 594KM
✓ उद्घाटन:- 29 अप्रैल 2026 को
✓ स्थान:- हरदोई (उत्तर प्रदेश)
✓ उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने
✓ इसे अदाणी रोड ट्रांसपोर्ट लिमिटेड ने बनाया
✓ 37 हजार करोड रुपए में बना एक्सप्रेस वें
उत्तरप्रदेश के 12 जिलों की 6 करोड़
की आबादी को जोड़ेगा
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✓ मेरठ से प्रयागराज तक 594KM
✓ उद्घाटन:- 29 अप्रैल 2026 को
✓ स्थान:- हरदोई (उत्तर प्रदेश)
✓ उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने
✓ इसे अदाणी रोड ट्रांसपोर्ट लिमिटेड ने बनाया
✓ 37 हजार करोड रुपए में बना एक्सप्रेस वें
उत्तरप्रदेश के 12 जिलों की 6 करोड़
की आबादी को जोड़ेगा
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राजस्थान में भूमिज शैली के उदाहरण
▪️उडेश्वर मंदिर- बिजौलिया (भीलवाड़ा)
▪️महानालेश्वर मंदिर- मेनाल (भीलवाड़ा)
▪️भूमिज शैली का सबसे प्राचीन मंदिर
- सेवाड़ी जैन मंदिर ( पाली)
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▪️उडेश्वर मंदिर- बिजौलिया (भीलवाड़ा)
▪️महानालेश्वर मंदिर- मेनाल (भीलवाड़ा)
▪️भूमिज शैली का सबसे प्राचीन मंदिर
- सेवाड़ी जैन मंदिर ( पाली)
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Forwarded from AR RPSC / RSSB Exams (Mahesh)
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान कक्षा 10
महाराणा कुम्भा (1433–1468 ई.) — मोकल के बाद उसका पुत्र महाराणा कुम्भा 1433 ई. में मेवाड़ का शासक बना। राठोड़ों का मेवाड़ पर प्रभाव समाप्त कर उसने मेवाड़ी सामंतों का विश्वास अर्जित किया। कुम्भा ने चित्तौड़ एवं कुम्भलगढ़ को अपनी शक्ति का केन्द्र बनाया। 1437 ई. में सारंगपुर के युद्ध में मालवा के शासक महमूद खिलजी को परास्त कर बंदी बना लिया। इस विजय के उपलक्ष्य में कुम्भा ने कीर्ति स्तम्भ का निर्माण करवाया। नागौर के उत्तराधिकार को लेकर मेवाड़ व गुजरात में युद्ध हुआ, जिसमें गुजरात पराजित हुई। 1453 ई. में कुम्भा ने मारवाड़ से मण्डोर छीन लिया, परंतु बाद में संधि कर अपने पुत्र रायमल का विवाह मारवाड़ की राजकुमारी से कर दिया।
1456 ई. में मालवा के महमूद खिलजी व गुजरात के कुतुबुद्दीन के बीच चम्पानेर की संधि हुई। इस संधि में यह तय किया गया कि दोनों शासक मिलकर कुम्भा पर आक्रमण करके, उसे हराकर, उसके राज्य को बाँट लेंगे। 1457–58 ई. में गुजरात व मालवा के शासकों ने मेवाड़ पर आक्रमण किया। मगर कुम्भा की कूटनीति से दोनों शासकों में मतभेद पैदा होने के कारण वे विशेष सफलता प्राप्त नहीं कर सके।
ऐसा माना जाता है कि कुम्भा ने 32 दुर्गों का निर्माण करवाया, जिनमें सिरोही, अचलगढ़ एवं कुम्भलगढ़ के दुर्ग प्रसिद्ध हैं। कविराज श्यामलदास भी कुम्भा को मेवाड़ के 84 में से 32 दुर्गों का निर्माता बताते हैं। कुम्भलगढ़ का दुर्ग अपनी विशेष भौगोलिक स्थिति एवं बनावट के कारण प्रसिद्ध है। इसका शिल्प मण्डन था। कुम्भा ने चित्तौड़ में कुम्भस्वामी तथा शृंगारचवरी का मंदिर, एकलिंगजी का विष्णु मंदिर एवं रणकपुर का मंदिर बनवाये, जो अपनी विशालता एवं तक्षणकला के कारण अद्भुत हैं।
कुम्भा एक विद्वान एवं विद्यानुरागी शासक था। कान्ह व्यास द्वारा रचित एकलिंग महात्म्य से ज्ञात होता है कि वह वेद, स्मृति, मीमांसा, उपनिषद, व्याकरण एवं राजनीति में रुचि रखता था। संगीत राज, संगीत मीमांसा व सूड प्रबंध इसके द्वारा रचित ग्रंथ थे। ऐसा माना जाता है कि कुम्भा ने चण्डीशतक की व्याख्या, गीत गोविन्द और संगीत रत्नाकर पर टीका लिखी थी। इसके काल में कवि अत्रि और महेश ने कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति की रचना की। तत्कालीन साहित्यिक ग्रंथों और प्रशस्तियों में महाराणा कुम्भा को महाराजाधिराज, रावराय, दानगुरु, राजगुरु, परशुगुरु, हालगुरु, अभिनवभरताचार्य, हिन्दू सुल्तान आदि विरुदों से विभूषित किया गया।
कुम्भा निस्संदेह प्रतापी शासक था, किंतु उसका अंतिम समय कष्टमय रहा। अपने जीवन के अंतिम काल में कुम्भा को उन्माद रोग हो गया और उसके पुत्र उदा ने 1468 ई. में उसकी हत्या कर दी।https://t.me/ARRPS
महाराणा कुम्भा (1433–1468 ई.) — मोकल के बाद उसका पुत्र महाराणा कुम्भा 1433 ई. में मेवाड़ का शासक बना। राठोड़ों का मेवाड़ पर प्रभाव समाप्त कर उसने मेवाड़ी सामंतों का विश्वास अर्जित किया। कुम्भा ने चित्तौड़ एवं कुम्भलगढ़ को अपनी शक्ति का केन्द्र बनाया। 1437 ई. में सारंगपुर के युद्ध में मालवा के शासक महमूद खिलजी को परास्त कर बंदी बना लिया। इस विजय के उपलक्ष्य में कुम्भा ने कीर्ति स्तम्भ का निर्माण करवाया। नागौर के उत्तराधिकार को लेकर मेवाड़ व गुजरात में युद्ध हुआ, जिसमें गुजरात पराजित हुई। 1453 ई. में कुम्भा ने मारवाड़ से मण्डोर छीन लिया, परंतु बाद में संधि कर अपने पुत्र रायमल का विवाह मारवाड़ की राजकुमारी से कर दिया।
1456 ई. में मालवा के महमूद खिलजी व गुजरात के कुतुबुद्दीन के बीच चम्पानेर की संधि हुई। इस संधि में यह तय किया गया कि दोनों शासक मिलकर कुम्भा पर आक्रमण करके, उसे हराकर, उसके राज्य को बाँट लेंगे। 1457–58 ई. में गुजरात व मालवा के शासकों ने मेवाड़ पर आक्रमण किया। मगर कुम्भा की कूटनीति से दोनों शासकों में मतभेद पैदा होने के कारण वे विशेष सफलता प्राप्त नहीं कर सके।
ऐसा माना जाता है कि कुम्भा ने 32 दुर्गों का निर्माण करवाया, जिनमें सिरोही, अचलगढ़ एवं कुम्भलगढ़ के दुर्ग प्रसिद्ध हैं। कविराज श्यामलदास भी कुम्भा को मेवाड़ के 84 में से 32 दुर्गों का निर्माता बताते हैं। कुम्भलगढ़ का दुर्ग अपनी विशेष भौगोलिक स्थिति एवं बनावट के कारण प्रसिद्ध है। इसका शिल्प मण्डन था। कुम्भा ने चित्तौड़ में कुम्भस्वामी तथा शृंगारचवरी का मंदिर, एकलिंगजी का विष्णु मंदिर एवं रणकपुर का मंदिर बनवाये, जो अपनी विशालता एवं तक्षणकला के कारण अद्भुत हैं।
कुम्भा एक विद्वान एवं विद्यानुरागी शासक था। कान्ह व्यास द्वारा रचित एकलिंग महात्म्य से ज्ञात होता है कि वह वेद, स्मृति, मीमांसा, उपनिषद, व्याकरण एवं राजनीति में रुचि रखता था। संगीत राज, संगीत मीमांसा व सूड प्रबंध इसके द्वारा रचित ग्रंथ थे। ऐसा माना जाता है कि कुम्भा ने चण्डीशतक की व्याख्या, गीत गोविन्द और संगीत रत्नाकर पर टीका लिखी थी। इसके काल में कवि अत्रि और महेश ने कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति की रचना की। तत्कालीन साहित्यिक ग्रंथों और प्रशस्तियों में महाराणा कुम्भा को महाराजाधिराज, रावराय, दानगुरु, राजगुरु, परशुगुरु, हालगुरु, अभिनवभरताचार्य, हिन्दू सुल्तान आदि विरुदों से विभूषित किया गया।
कुम्भा निस्संदेह प्रतापी शासक था, किंतु उसका अंतिम समय कष्टमय रहा। अपने जीवन के अंतिम काल में कुम्भा को उन्माद रोग हो गया और उसके पुत्र उदा ने 1468 ई. में उसकी हत्या कर दी।https://t.me/ARRPS
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