Attention : prashant bhushan explains how modi govt has compromised all the imortant anti corruption institutions
"मैं बीजेपी-कांग्रेस को चुनौती देना चाहता हूँ की आप शिक्षा के मैदान में उतरिये, सरकारी स्कूलों में कौन सी पार्टी बेहतर काम कर सकती है इसका मुकाबला कर लीजिये"
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"मैं बीजेपी-कांग्रेस को चुनौती देना चाहता हूँ की आप शिक्षा के मैदान में उतरिये, सरकारी स्कूलों में कौन सी पार्टी बे… https://t.co/fTBqQ1iVZp
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: "इस सरकार से पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि हम डॉक्टर को किसी मंत्री या CM ने इतनी इज्जत दी हो, यह सरकार काम करने वाली है, इनकी नियत साफ है, इस सरकार के आने से हमारी इज्जत बड़ी है हमारी मेहनत को सराहा जा रहा है" - दिल्ली के डॉक्टर्स https://twitter.com/AAPInNews/status/935801877073076224/video/1
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इस सरकार से पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि हम डॉक्टर को किसी मंत्री या CM ने इतनी इज्जत दी हो, यह सरकार काम करने वाली है, इनकी नियत साफ है, इस सरकार के आने से हमारी इज्जत बड़ी है हमारी मेहनत को सराहा जा रहा है" - दिल्ली के डॉक्टर्स https://t.co/8eZa9qtaoh
गुजरात के पाटिदारो को हार्दिक पटेल का सन्देश : उखाड़ के फेन्क् दो इन झूठे वादे करने वालो को
*तुम लगे रहो इतिहास और धर्म-मजहब के मसलों में मोदी सरकार अब आम आदमी के साथ एक और बड़े fraud की तैय्यारी में*
मोदी सरकार एक कानून बनाने जा रही है , बिल पार्लियामेंट कमिटी को भेज दिया गया है l बिल का नाम है The Financial Resolution and Deposit Insurance Bill, 2017..कमिटी की रिपोर्ट संसद के टेबल पर रखी जायेगी l अगर यह बिल पास हो जाता है तो बैंक में आप जो भी पैसा टर्म डिपाजिट में रखेंगे , उसका भुगतान तभी होगा अगर भुगतान के वक्त बैंक की financial health ठीक होगी l दुसरे लफ्जों में
अब पैसे रखने वाले को बैंक की financial- health का भी ख्याल रखना होगा l बिग कॉर्पोरेट को दिया जाने वाला लोन अगर डूब जाता है तो आपके डिपाजिट से उस नुक्सान को बैंक पूरा करेगी l यानी अब बैंक में जमा किया गया पैसा ( जो आपने old-age या बिमारी या बच्चो की शिक्षा - शादी के लिए रखा होगा ) भी subject to market risk होगा l पैसा सरकार आपको घर में रखने नहीं देगी और बैंक में जमा पैसा subject to market ( corporate ) Risk
इसका नतीजा यह होगा , अब सोना , चाँदी में निवेश बढ़ेगा और FD में निवेश नीचे आएगा l बैंक के लिए अब bail- out दरअसल bail-in बनेगा l पढ़ ले provision
http://www.thehindu.com/opinion/op-ed/banking-on-legislation/article20005363.ece
मोदी सरकार एक कानून बनाने जा रही है , बिल पार्लियामेंट कमिटी को भेज दिया गया है l बिल का नाम है The Financial Resolution and Deposit Insurance Bill, 2017..कमिटी की रिपोर्ट संसद के टेबल पर रखी जायेगी l अगर यह बिल पास हो जाता है तो बैंक में आप जो भी पैसा टर्म डिपाजिट में रखेंगे , उसका भुगतान तभी होगा अगर भुगतान के वक्त बैंक की financial health ठीक होगी l दुसरे लफ्जों में
अब पैसे रखने वाले को बैंक की financial- health का भी ख्याल रखना होगा l बिग कॉर्पोरेट को दिया जाने वाला लोन अगर डूब जाता है तो आपके डिपाजिट से उस नुक्सान को बैंक पूरा करेगी l यानी अब बैंक में जमा किया गया पैसा ( जो आपने old-age या बिमारी या बच्चो की शिक्षा - शादी के लिए रखा होगा ) भी subject to market risk होगा l पैसा सरकार आपको घर में रखने नहीं देगी और बैंक में जमा पैसा subject to market ( corporate ) Risk
इसका नतीजा यह होगा , अब सोना , चाँदी में निवेश बढ़ेगा और FD में निवेश नीचे आएगा l बैंक के लिए अब bail- out दरअसल bail-in बनेगा l पढ़ ले provision
http://www.thehindu.com/opinion/op-ed/banking-on-legislation/article20005363.ece
The Hindu
Banking on legislation
The ‘bail-in’ clause, in a draft bill, would change the relationship between the customer and the bank
आपको बता दे कि किन किन जगहों से ईवीएम छेड़छाड़ के मामले दर्ज किये गया हैं !
महाराष्ट्र के बुलढाना जिले में हुए परिषदीय चुनाव -भारत के निर्वाचन आयोग के दावों के विपरीत महाराष्ट्र में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से छेड़छाड़ की बात सामने आई थी . आरटीआई के तहत मिली जानकारी से यह खुलासा हुआ कि महाराष्ट्र के बुलढाना जिले में हाल ही में हुए परिषदीय चुनाव के दौरान लोणार के सुल्तानपुर गांव में मतदान के दौरान ईवीएम से छेड़छाड़ की बात सामने आई.
गलगली ने कहा, "मतदाता जब भी एक प्रत्याशी को आवंटित चुनाव चिह्न नारियल का बटन दबाते तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चुनाव चिह्न कमल के सामने वाला एलईडी बल्ब जल उठता. निर्वाचन अधिकारी ने इसकी जानकारी जिलाधिकारी को दी, जिसका खुलासा आरटीआई से मिली जानकारी में हुआ."
इलाके की एक निर्दलीय प्रत्याशी आशा अरुण जोरे ने 16 फरवरी को हुए मतदान के दौरान आई इस गड़बड़ी की शिकायत की थी
मध्य प्रदेश में भिंड ज़िले में ईवीएम मशीन के डेमो के दौरान लगे आरोप :-मध्य प्रदेश में भिंड ज़िले के अटेर में ईवीएम मशीन के डेमो के दौरान किसी भी बटन को दबाने पर वोट भाजपा को मिलने की बात सामने आयी थी
मध्य प्रदेश की मुख्य निर्वाचन अधिकारी सलिना सिंह ने दो विधानसभाओं के लिए 9 अप्रैल को होने वाले उपचुनाव में इस्तेमाल होने वाली मशीनों का डेमॉन्सट्रेशन रखा था.
डेमॉन्सट्रेशन के दौरान अलग-अलग बटन दबाने पर भाजपा के चुनाव निशान कमल की ही पर्ची निकली थी.
इस ख़बर के सामने आने के बाद सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया.
यूपी के नगर निगम चुनावों में ईवीएम छेड़छाड़ का मामला -यूपी में नगर निगम निकाय के चुनावो में पहले चरण के मतदान के दौरान कई जगहों से ईवीएम छेड़छाड़ के मामले सामने आये हैं
कानपुर में निकाय चुनाव में वोटिंग के दौरान मशीन में कोई भी बटनदबाओ लेकिन वोट भाजपा कमल के फूल में जा रहा है यह आरोप लगा कर कानपुर में वार्ड – 104 बम्बईया हाता बूथ शंख्या 1636 के प्रत्याशियों ने खूब हंगामा काटा जिसके कारण मतदान 1 घण्टे रुका रहा
मौके पर आला अधिकारी के सामने जब चेक किया तो बात सही पाई गयी के कोई भी बटन दबाने पर कमल के फूल पर वोट जा रहा है! पीठासीन अधिकारी ने भी कैमरे पर कबूला के हा मेरे सामने हुआ है ये मैंने अधिकारियो को सुचना दे दी है!
वंही ऐसा ही कुछ मामला मेरठ में भी देखने को मिला। उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव के प्रथम चरण का मतदान भले ही खत्म हो गया,पर पहले ही चरण में चुनाव आयोग की तैयारियों और वोटिंग मशीनों की पोल पूरी तरह खुल गयी !
बुधवार को मतदान के दौरान कहीं-कहीं हल्की नोकझोंक और मतदान केंद्रों पर ईवीएम खराब होने की खबरें लगातार अलग-अलग जगह से आती रहीं । बता दें कि अकेले मेरठ में ही आज निकाय चुनाव के दौरान 52 जगह EVM में गड़बड़ी पाई गई है। हालाँकि 52 जगह EVM बदल दी गयीं थी । जिले में वोटर लिस्ट से नाम बदलने को लेकर वोटर जमकर हंगामा कर रहे हैं। वोटर लिस्ट से लोगों का नाम ना डाल पाने पर लोगों में भारी नाराजगी है। लोगों ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के लिए चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है
इस तरह इन सब आरोपों के बाद अब जनता का ईवीएम से विश्वाश उठने लगा है जो कि भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है अगर ईवीएम में लोगों का विश्वास जमाना है तो चुनाव आयोग और भारतीय सरकार को पहल करनी होगी और इस मुद्दे की निष्पक्ष जाँच करा कर लोगो का विस्वाश जितना पड़ेगा ,
नहीं तो इस देश का लोकतंत्र हार जायेगा और सिर्फ ईवीएम जीता करेगी।
http://www.rajneetiofbharat.com/2017/11/evm-hack-will-not-become-dangerous-for-our-democracy.html
महाराष्ट्र के बुलढाना जिले में हुए परिषदीय चुनाव -भारत के निर्वाचन आयोग के दावों के विपरीत महाराष्ट्र में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से छेड़छाड़ की बात सामने आई थी . आरटीआई के तहत मिली जानकारी से यह खुलासा हुआ कि महाराष्ट्र के बुलढाना जिले में हाल ही में हुए परिषदीय चुनाव के दौरान लोणार के सुल्तानपुर गांव में मतदान के दौरान ईवीएम से छेड़छाड़ की बात सामने आई.
गलगली ने कहा, "मतदाता जब भी एक प्रत्याशी को आवंटित चुनाव चिह्न नारियल का बटन दबाते तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चुनाव चिह्न कमल के सामने वाला एलईडी बल्ब जल उठता. निर्वाचन अधिकारी ने इसकी जानकारी जिलाधिकारी को दी, जिसका खुलासा आरटीआई से मिली जानकारी में हुआ."
इलाके की एक निर्दलीय प्रत्याशी आशा अरुण जोरे ने 16 फरवरी को हुए मतदान के दौरान आई इस गड़बड़ी की शिकायत की थी
मध्य प्रदेश में भिंड ज़िले में ईवीएम मशीन के डेमो के दौरान लगे आरोप :-मध्य प्रदेश में भिंड ज़िले के अटेर में ईवीएम मशीन के डेमो के दौरान किसी भी बटन को दबाने पर वोट भाजपा को मिलने की बात सामने आयी थी
मध्य प्रदेश की मुख्य निर्वाचन अधिकारी सलिना सिंह ने दो विधानसभाओं के लिए 9 अप्रैल को होने वाले उपचुनाव में इस्तेमाल होने वाली मशीनों का डेमॉन्सट्रेशन रखा था.
डेमॉन्सट्रेशन के दौरान अलग-अलग बटन दबाने पर भाजपा के चुनाव निशान कमल की ही पर्ची निकली थी.
इस ख़बर के सामने आने के बाद सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया.
यूपी के नगर निगम चुनावों में ईवीएम छेड़छाड़ का मामला -यूपी में नगर निगम निकाय के चुनावो में पहले चरण के मतदान के दौरान कई जगहों से ईवीएम छेड़छाड़ के मामले सामने आये हैं
कानपुर में निकाय चुनाव में वोटिंग के दौरान मशीन में कोई भी बटनदबाओ लेकिन वोट भाजपा कमल के फूल में जा रहा है यह आरोप लगा कर कानपुर में वार्ड – 104 बम्बईया हाता बूथ शंख्या 1636 के प्रत्याशियों ने खूब हंगामा काटा जिसके कारण मतदान 1 घण्टे रुका रहा
मौके पर आला अधिकारी के सामने जब चेक किया तो बात सही पाई गयी के कोई भी बटन दबाने पर कमल के फूल पर वोट जा रहा है! पीठासीन अधिकारी ने भी कैमरे पर कबूला के हा मेरे सामने हुआ है ये मैंने अधिकारियो को सुचना दे दी है!
वंही ऐसा ही कुछ मामला मेरठ में भी देखने को मिला। उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव के प्रथम चरण का मतदान भले ही खत्म हो गया,पर पहले ही चरण में चुनाव आयोग की तैयारियों और वोटिंग मशीनों की पोल पूरी तरह खुल गयी !
बुधवार को मतदान के दौरान कहीं-कहीं हल्की नोकझोंक और मतदान केंद्रों पर ईवीएम खराब होने की खबरें लगातार अलग-अलग जगह से आती रहीं । बता दें कि अकेले मेरठ में ही आज निकाय चुनाव के दौरान 52 जगह EVM में गड़बड़ी पाई गई है। हालाँकि 52 जगह EVM बदल दी गयीं थी । जिले में वोटर लिस्ट से नाम बदलने को लेकर वोटर जमकर हंगामा कर रहे हैं। वोटर लिस्ट से लोगों का नाम ना डाल पाने पर लोगों में भारी नाराजगी है। लोगों ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के लिए चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है
इस तरह इन सब आरोपों के बाद अब जनता का ईवीएम से विश्वाश उठने लगा है जो कि भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है अगर ईवीएम में लोगों का विश्वास जमाना है तो चुनाव आयोग और भारतीय सरकार को पहल करनी होगी और इस मुद्दे की निष्पक्ष जाँच करा कर लोगो का विस्वाश जितना पड़ेगा ,
नहीं तो इस देश का लोकतंत्र हार जायेगा और सिर्फ ईवीएम जीता करेगी।
http://www.rajneetiofbharat.com/2017/11/evm-hack-will-not-become-dangerous-for-our-democracy.html
उसमानाबाद जिले की ग्राम पंचायत पर आम आदमी पार्टी को मिली भारी जीत।सभी सीटों पर मिली जीत। बीजेपी कांग्रेस, सपा,बसपा,एनसीपी, शिवसेना की जमानत जप्त। न्यूज देखिए..
*युवाओं की आकांक्षा की हत्या का राष्ट्रीय प्रोजेक्ट*
भारत से अमरीका पढ़ने जाने वाले छात्रों की संख्या में इस साल 12.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। चीन से जाने वाले छात्रों की संख्या में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
लगातार तीन साल से अमरीका जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या बढ़ती जा रहीहै। 186,267 छात्र अमरीका गए हैं। अमरीकी यूनिवर्सिटी में पचास फीसदी छात्र भारत और चीन से पढ़ रहे हैं।
बिजनेस स्टैंडर्ड में विनय उमरजी की रिपोर्ट है। यह वृद्धि तब है, जब अमरीका ने वीज़ा मिलने की प्रक्रिया को जटिल और धीमा कर दिया है।
जिन्हें पढ़ना है और जो सक्षम हैं, वो यहां से निकल लिए। उन्हें पता है कि भारत की यूनिवर्सिटी किसी लायक नहीं बची है। उनका भरोसा सिर्फ नेता में रह गया है। स्कूल कालेज और अस्पताल में नहीं। यह सही भी है कि भारत की यूनिवर्सिटी कबाड़खाने से ज़्यादा नहीं हैं।
पिछले दिनों फाइनेंशियल एक्सप्रेस में एक और रिपोर्ट आई थी। भारत की उच्च शिक्षा का बजट 25,000 करोड़ है। अमरीका में भारतीय छात्र जो अपनी पढ़ाई के लिए निवेश कर रहे हैं वो 42,000 करोड़ से ज़्यादा है।
*अब भी आप हिन्दू मुस्लिम टापिक में ही धंसे रहना चाहते हैं तो आपकी मर्ज़ी। भविष्य बर्बाद हो रहा है और नेता आपका इतिहास टीवी पर करेक्ट करवा रहा है। धंसे रहिए इस दलदल में।*
कम से कम आई टी सेल के लिए ट्रोल की कमी नहीं होगी। जो लोग आईआईटी नहीं कर पाते हैं वो आज कल आईटी सेल में चले जाते हैं।
दो चार आई आई टी हैं, आई आई एम हैं, कुछ कालेज हैं, उन्हीं को पिछले बीस साल से साल में दस बार गिना जा रहा है। इन्हें फिर से गिनने के लिए एक और रैंकिंग आई है। हमारे देश में फ्राड ख़ूब चलता है।
क्लास के क्लास में योग्य शिक्षक नहीं हैं। शिक्षकों की भर्ती होती नहीं, होती है तो राजनीतिक मुख्यालयों से पर्ची कटाकर हो रही है। हमारे नौजवान किसी भी शिक्षक को स्वीकार कर लेते हैं। क्योंकि वे इस लायक ही नहीं होते हैं कि अच्छे शिक्षक और बुरे शिक्षक में फर्क कर सकें। जिन स्कूलों से कालेज आते हैं वहां भी कहां सबको अच्छे शिक्षक मिलते हैं।
यह कैसा युवा है जो क्लास न हो तो मंज़ूर, परीक्षा में चोरी हो तो मंज़ूर, टीचर न मिले, लैपटॉप मिल जाए तो वह मंज़ूर, लाइब्रेरी न हो, वह भी मंंज़ूर। कितने लोगों का ढंग से पढ़ने का सपना रोज़ ध्वस्त होता होगा।
कस्बों में दूर- दूर से लड़कियां बसों में आती हैं कि कालेज में पढ़ाई होगी, नहीं होती है। लड़के भी जाते हैं मगर किसी को पता ही नहीं कि घटिया मास्टर ने घटिया पढ़ाकर उल्लू बनाया है।
ऐसे नौजवान टीवी पर बांचे जा रहे कचरे की तरह इतिहास को किताब न समझेंगे तो कौन समझेगा। सिस्टम ने जिस लायक बनाया है, ज़्यादातर उसी लायक परफार्म कर रहे हैं।
इसलिए भारत के युवा चाहें जितने प्रतिशत हैं, नेता उन्हें बोरी में रखे आलू से ज़्यादा नहीं समझते हैं। युवा भी नेताओं को ग़लत साबित नहीं करते हैं।
भारत के नौजवानों को उल्लू बनाना सबसे आसान है। जो न बनाया उसने नेतागिरी ही क्या की। क्या किसी का कलेजा नहीं फटता कि हम इन युवाओं की क्षमता का किस निर्ममता से हत्या कर रहे हैं? क्या युवाओं को ही फर्क नहीं पड़ता है क्या?
(Copied msg of ravish kumar ndtv)
भारत से अमरीका पढ़ने जाने वाले छात्रों की संख्या में इस साल 12.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। चीन से जाने वाले छात्रों की संख्या में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
लगातार तीन साल से अमरीका जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या बढ़ती जा रहीहै। 186,267 छात्र अमरीका गए हैं। अमरीकी यूनिवर्सिटी में पचास फीसदी छात्र भारत और चीन से पढ़ रहे हैं।
बिजनेस स्टैंडर्ड में विनय उमरजी की रिपोर्ट है। यह वृद्धि तब है, जब अमरीका ने वीज़ा मिलने की प्रक्रिया को जटिल और धीमा कर दिया है।
जिन्हें पढ़ना है और जो सक्षम हैं, वो यहां से निकल लिए। उन्हें पता है कि भारत की यूनिवर्सिटी किसी लायक नहीं बची है। उनका भरोसा सिर्फ नेता में रह गया है। स्कूल कालेज और अस्पताल में नहीं। यह सही भी है कि भारत की यूनिवर्सिटी कबाड़खाने से ज़्यादा नहीं हैं।
पिछले दिनों फाइनेंशियल एक्सप्रेस में एक और रिपोर्ट आई थी। भारत की उच्च शिक्षा का बजट 25,000 करोड़ है। अमरीका में भारतीय छात्र जो अपनी पढ़ाई के लिए निवेश कर रहे हैं वो 42,000 करोड़ से ज़्यादा है।
*अब भी आप हिन्दू मुस्लिम टापिक में ही धंसे रहना चाहते हैं तो आपकी मर्ज़ी। भविष्य बर्बाद हो रहा है और नेता आपका इतिहास टीवी पर करेक्ट करवा रहा है। धंसे रहिए इस दलदल में।*
कम से कम आई टी सेल के लिए ट्रोल की कमी नहीं होगी। जो लोग आईआईटी नहीं कर पाते हैं वो आज कल आईटी सेल में चले जाते हैं।
दो चार आई आई टी हैं, आई आई एम हैं, कुछ कालेज हैं, उन्हीं को पिछले बीस साल से साल में दस बार गिना जा रहा है। इन्हें फिर से गिनने के लिए एक और रैंकिंग आई है। हमारे देश में फ्राड ख़ूब चलता है।
क्लास के क्लास में योग्य शिक्षक नहीं हैं। शिक्षकों की भर्ती होती नहीं, होती है तो राजनीतिक मुख्यालयों से पर्ची कटाकर हो रही है। हमारे नौजवान किसी भी शिक्षक को स्वीकार कर लेते हैं। क्योंकि वे इस लायक ही नहीं होते हैं कि अच्छे शिक्षक और बुरे शिक्षक में फर्क कर सकें। जिन स्कूलों से कालेज आते हैं वहां भी कहां सबको अच्छे शिक्षक मिलते हैं।
यह कैसा युवा है जो क्लास न हो तो मंज़ूर, परीक्षा में चोरी हो तो मंज़ूर, टीचर न मिले, लैपटॉप मिल जाए तो वह मंज़ूर, लाइब्रेरी न हो, वह भी मंंज़ूर। कितने लोगों का ढंग से पढ़ने का सपना रोज़ ध्वस्त होता होगा।
कस्बों में दूर- दूर से लड़कियां बसों में आती हैं कि कालेज में पढ़ाई होगी, नहीं होती है। लड़के भी जाते हैं मगर किसी को पता ही नहीं कि घटिया मास्टर ने घटिया पढ़ाकर उल्लू बनाया है।
ऐसे नौजवान टीवी पर बांचे जा रहे कचरे की तरह इतिहास को किताब न समझेंगे तो कौन समझेगा। सिस्टम ने जिस लायक बनाया है, ज़्यादातर उसी लायक परफार्म कर रहे हैं।
इसलिए भारत के युवा चाहें जितने प्रतिशत हैं, नेता उन्हें बोरी में रखे आलू से ज़्यादा नहीं समझते हैं। युवा भी नेताओं को ग़लत साबित नहीं करते हैं।
भारत के नौजवानों को उल्लू बनाना सबसे आसान है। जो न बनाया उसने नेतागिरी ही क्या की। क्या किसी का कलेजा नहीं फटता कि हम इन युवाओं की क्षमता का किस निर्ममता से हत्या कर रहे हैं? क्या युवाओं को ही फर्क नहीं पड़ता है क्या?
(Copied msg of ravish kumar ndtv)