वक़्त का इशारा समझिए।
नदी तब तक बहती है, जब तक रास्ता मिलता है। जिस दिन रास्ता पत्थरों से भर जाता है, वह खुद ही मोड़ ले लेती है। उसे शिकायत नहीं होती, न ही शोर मचाती है। इंसानी रिश्ते भी कुछ ऐसे ही होते हैं। जब सामने वाला जवाब देना छोड़ दे, सुनना छोड़ दे, आपकी मौजूदगी से बचने लगे तो समझ जाइए कि बहाव बदल चुका है। तब खुद को साबित करने की कोशिश मत कीजिए। सफ़ाई देना भी बेकार होता है। सबसे बेहतर यही है कि इज़्ज़त के साथ पीछे हट जाएँ। क्योंकि जहाँ ठहरना पड़ता है, वहाँ रिश्ता नहीं, बोझ बन जाता है।
नदी तब तक बहती है, जब तक रास्ता मिलता है। जिस दिन रास्ता पत्थरों से भर जाता है, वह खुद ही मोड़ ले लेती है। उसे शिकायत नहीं होती, न ही शोर मचाती है। इंसानी रिश्ते भी कुछ ऐसे ही होते हैं। जब सामने वाला जवाब देना छोड़ दे, सुनना छोड़ दे, आपकी मौजूदगी से बचने लगे तो समझ जाइए कि बहाव बदल चुका है। तब खुद को साबित करने की कोशिश मत कीजिए। सफ़ाई देना भी बेकार होता है। सबसे बेहतर यही है कि इज़्ज़त के साथ पीछे हट जाएँ। क्योंकि जहाँ ठहरना पड़ता है, वहाँ रिश्ता नहीं, बोझ बन जाता है।
❤1
सोने का कटोरा
एक राजा ने भिखारी को सोने का कटोरा दिया। भिखारी ने उसे तुरंत मिट्टी में फेंक दिया। राजा ने हैरान होकर पूछा, "क्यों?" भिखारी बोला, "महाराज, मिट्टी से ही सोना बनता है और अंत में सोना भी मिट्टी बन जाता है। मैं बस इसे इसके असली घर पहुँचा रहा था।" राजा का अहंकार टूट गया।
शिक्षा:- अंत में सब कुछ मिट्टी ही होना है, घमंड व्यर्थ है।
एक राजा ने भिखारी को सोने का कटोरा दिया। भिखारी ने उसे तुरंत मिट्टी में फेंक दिया। राजा ने हैरान होकर पूछा, "क्यों?" भिखारी बोला, "महाराज, मिट्टी से ही सोना बनता है और अंत में सोना भी मिट्टी बन जाता है। मैं बस इसे इसके असली घर पहुँचा रहा था।" राजा का अहंकार टूट गया।
शिक्षा:- अंत में सब कुछ मिट्टी ही होना है, घमंड व्यर्थ है।
☑️ एक रुपये का सिक्का
एक गरीब बच्चा दुकान के बाहर खड़ा होकर केक देख रहा था। दुकानदार ने उसे भगा दिया। तभी एक अमीर आदमी आया और उसने बच्चे को केक खरीदकर दिया। बच्चा बहुत खुश हुआ।
जाते-जाते बच्चे ने अपनी जेब से एक घिसा हुआ 1 रुपये का सिक्का निकाला और उस अमीर आदमी को दिया।
अमीर आदमी ने पूछा, "यह क्यों?" बच्चे ने कहा, "साहब, मेरे पास बस यही था, आपने मुझे इतनी खुशी दी, तो मैं आपको अपनी सबसे कीमती चीज़ देना चाहता हूँ।"
वह अमीर आदमी रो पड़ा क्योंकि उस 1 रुपये की कीमत उसके लाखों रुपयों से ज्यादा थी।
🗣️सीख - दान की कीमत नहीं, देने वाले की नीयत और भावना मायने रखती है।
एक गरीब बच्चा दुकान के बाहर खड़ा होकर केक देख रहा था। दुकानदार ने उसे भगा दिया। तभी एक अमीर आदमी आया और उसने बच्चे को केक खरीदकर दिया। बच्चा बहुत खुश हुआ।
जाते-जाते बच्चे ने अपनी जेब से एक घिसा हुआ 1 रुपये का सिक्का निकाला और उस अमीर आदमी को दिया।
अमीर आदमी ने पूछा, "यह क्यों?" बच्चे ने कहा, "साहब, मेरे पास बस यही था, आपने मुझे इतनी खुशी दी, तो मैं आपको अपनी सबसे कीमती चीज़ देना चाहता हूँ।"
वह अमीर आदमी रो पड़ा क्योंकि उस 1 रुपये की कीमत उसके लाखों रुपयों से ज्यादा थी।
🗣️सीख - दान की कीमत नहीं, देने वाले की नीयत और भावना मायने रखती है।
❤2
सोने का कटोरा
एक राजा ने भिखारी को सोने का कटोरा दिया। भिखारी ने उसे तुरंत मिट्टी में फेंक दिया। राजा ने हैरान होकर पूछा, "क्यों?" भिखारी बोला, "महाराज, मिट्टी से ही सोना बनता है और अंत में सोना भी मिट्टी बन जाता है। मैं बस इसे इसके असली घर पहुँचा रहा था।" राजा का अहंकार टूट गया।
शिक्षा:- अंत में सब कुछ मिट्टी ही होना है, घमंड व्यर्थ है।
एक राजा ने भिखारी को सोने का कटोरा दिया। भिखारी ने उसे तुरंत मिट्टी में फेंक दिया। राजा ने हैरान होकर पूछा, "क्यों?" भिखारी बोला, "महाराज, मिट्टी से ही सोना बनता है और अंत में सोना भी मिट्टी बन जाता है। मैं बस इसे इसके असली घर पहुँचा रहा था।" राजा का अहंकार टूट गया।
शिक्षा:- अंत में सब कुछ मिट्टी ही होना है, घमंड व्यर्थ है।
❤1
एक गुरु ने दुखी शिष्य से एक मुट्ठी नमक पानी के गिलास में डालने को कहा। शिष्य ने पिया और कहा, "बहुत खारा है।" फिर गुरु ने उतना ही नमक एक विशाल झील में डलवाया। अब पानी का स्वाद पूछा, तो शिष्य बोला, "मीठा है।" गुरु बोले, "जीवन के दुख नमक की तरह हैं; अपनी सोच का दायरा बढ़ाओ, दुख छोटा हो जाएगा।"
शिक्षाः हृदय जितना बड़ा होगा, जीवन की मुश्किलें उतनी ही कम प्रभाव डालेंगी।
शिक्षाः हृदय जितना बड़ा होगा, जीवन की मुश्किलें उतनी ही कम प्रभाव डालेंगी।
❤2
अस्पताल के जनरल वार्ड में दो मरीज थे। एक खिड़की के पास था और दूसरा चल नहीं सकता था। खिड़की वाला मरीज रोज़ बाहर की दुनिया का हाल सुनाता - "देखो, आज पार्क में बच्चे खेल रहे हैं, फूल खिले हैं।" दूसरा मरीज उन बातों के सहारे अपनी बीमारी भूल जाता। एक दिन खिड़की वाले मरीज की मृत्यु हो गई। जब दूसरे मरीज को खिड़की के पास शिफ्ट किया ने बाहर देखा- वहाँ सिर्फ एक अंधी दीवार थी। उसे समझ आया कि उसका साथी सिर्फ उसे जीने की उम्मीद देने के लिए मनगढ़ंत खूबसूरत कहानियाँ सुनाता था। बिना किसी रिश्ते के एक अजनबी ने दूसरे की ज़िंदगी में रंग भर दिए थे।
❤1
एक बाज़ का अंडा मुर्गियों के झुंड में मिल गया। बाज़ का बच्चा मुर्गी की तरह ही दाना चुगने लगा। एक दिन उसने आसमान में एक महान पंछी को उड़ते देखा और पूछा, "वह कौन है?" मुर्गियों ने कहा, "वह बाज़ है, तुम उसकी तरह नहीं उड़ सकते।" वह बच्चा कभी नहीं उड़ पाया क्योंकि उसने खुद को मुर्गी मान लिया था।
शिक्षा:- आपकी संगति और सोच ही आपकी ऊँचाई तय करती है।
शिक्षा:- आपकी संगति और सोच ही आपकी ऊँचाई तय करती है।
वक़्त का इशारा समझिए।
नदी तब तक बहती है, जब तक रास्ता मिलता है। जिस दिन रास्ता पत्थरों से भर जाता है, वह खुद ही मोड़ ले लेती है। उसे शिकायत नहीं होती, न ही शोर मचाती है। इंसानी रिश्ते भी कुछ ऐसे ही होते हैं। जब सामने वाला जवाब देना छोड़ दे, सुनना छोड़ दे, आपकी मौजूदगी से बचने लगे तो समझ जाइए कि बहाव बदल चुका है। तब खुद को साबित करने की कोशिश मत कीजिए। सफ़ाई देना भी बेकार होता है। सबसे बेहतर यही है कि इज़्ज़त के साथ पीछे हट जाएँ। क्योंकि जहाँ ठहरना पड़ता है, वहाँ रिश्ता नहीं, बोझ बन जाता है।
नदी तब तक बहती है, जब तक रास्ता मिलता है। जिस दिन रास्ता पत्थरों से भर जाता है, वह खुद ही मोड़ ले लेती है। उसे शिकायत नहीं होती, न ही शोर मचाती है। इंसानी रिश्ते भी कुछ ऐसे ही होते हैं। जब सामने वाला जवाब देना छोड़ दे, सुनना छोड़ दे, आपकी मौजूदगी से बचने लगे तो समझ जाइए कि बहाव बदल चुका है। तब खुद को साबित करने की कोशिश मत कीजिए। सफ़ाई देना भी बेकार होता है। सबसे बेहतर यही है कि इज़्ज़त के साथ पीछे हट जाएँ। क्योंकि जहाँ ठहरना पड़ता है, वहाँ रिश्ता नहीं, बोझ बन जाता है।
सोने का कटोरा
एक राजा ने भिखारी को सोने का कटोरा दिया। भिखारी ने उसे तुरंत मिट्टी में फेंक दिया। राजा ने हैरान होकर पूछा, "क्यों?" भिखारी बोला, "महाराज, मिट्टी से ही सोना बनता है और अंत में सोना भी मिट्टी बन जाता है। मैं बस इसे इसके असली घर पहुँचा रहा था।" राजा का अहंकार टूट गया।
शिक्षा:- अंत में सब कुछ मिट्टी ही होना है, घमंड व्यर्थ है।
एक राजा ने भिखारी को सोने का कटोरा दिया। भिखारी ने उसे तुरंत मिट्टी में फेंक दिया। राजा ने हैरान होकर पूछा, "क्यों?" भिखारी बोला, "महाराज, मिट्टी से ही सोना बनता है और अंत में सोना भी मिट्टी बन जाता है। मैं बस इसे इसके असली घर पहुँचा रहा था।" राजा का अहंकार टूट गया।
शिक्षा:- अंत में सब कुछ मिट्टी ही होना है, घमंड व्यर्थ है।
☑️ एक रुपये का सिक्का
एक गरीब बच्चा दुकान के बाहर खड़ा होकर केक देख रहा था। दुकानदार ने उसे भगा दिया। तभी एक अमीर आदमी आया और उसने बच्चे को केक खरीदकर दिया। बच्चा बहुत खुश हुआ।
जाते-जाते बच्चे ने अपनी जेब से एक घिसा हुआ 1 रुपये का सिक्का निकाला और उस अमीर आदमी को दिया।
अमीर आदमी ने पूछा, "यह क्यों?" बच्चे ने कहा, "साहब, मेरे पास बस यही था, आपने मुझे इतनी खुशी दी, तो मैं आपको अपनी सबसे कीमती चीज़ देना चाहता हूँ।"
वह अमीर आदमी रो पड़ा क्योंकि उस 1 रुपये की कीमत उसके लाखों रुपयों से ज्यादा थी।
🗣️सीख - दान की कीमत नहीं, देने वाले की नीयत और भावना मायने रखती है।
एक गरीब बच्चा दुकान के बाहर खड़ा होकर केक देख रहा था। दुकानदार ने उसे भगा दिया। तभी एक अमीर आदमी आया और उसने बच्चे को केक खरीदकर दिया। बच्चा बहुत खुश हुआ।
जाते-जाते बच्चे ने अपनी जेब से एक घिसा हुआ 1 रुपये का सिक्का निकाला और उस अमीर आदमी को दिया।
अमीर आदमी ने पूछा, "यह क्यों?" बच्चे ने कहा, "साहब, मेरे पास बस यही था, आपने मुझे इतनी खुशी दी, तो मैं आपको अपनी सबसे कीमती चीज़ देना चाहता हूँ।"
वह अमीर आदमी रो पड़ा क्योंकि उस 1 रुपये की कीमत उसके लाखों रुपयों से ज्यादा थी।
🗣️सीख - दान की कीमत नहीं, देने वाले की नीयत और भावना मायने रखती है।
❤2
आजकल कुछ लोग बड़ा भारी ज्ञान देते हैं कि “बेरोज़गार की कोई होली नहीं होती।”
ज़रा उनसे पूछिए —
परसों हम रहेंगे, इसकी क्या गारंटी है?
नौकरी के बाद होली मना पाएँगे, इसकी क्या गारंटी है?
ज़िंदगी इंतज़ार करने के लिए नहीं, जीने के लिए मिली है।
जो है, जैसा है, जिस समय है,
उसी में, उपलब्ध संसाधनों के साथ
दिल खोलकर सेलिब्रेट कीजिए…!! 🎨
Happy Holi 🌈✨
ज़रा उनसे पूछिए —
परसों हम रहेंगे, इसकी क्या गारंटी है?
नौकरी के बाद होली मना पाएँगे, इसकी क्या गारंटी है?
ज़िंदगी इंतज़ार करने के लिए नहीं, जीने के लिए मिली है।
जो है, जैसा है, जिस समय है,
उसी में, उपलब्ध संसाधनों के साथ
दिल खोलकर सेलिब्रेट कीजिए…!! 🎨
Happy Holi 🌈✨
ईश्वर पर विश्वास
जिस इंसान की वजह से आप परेशान है, दुःखी है, डिप्रेशन में है, आपका कहीं भी मन नहीं लग रहा, आप बर्बादी की कगार पर है, आपको क्या लगता है
ऊपर वाला उसे माफ कर देगा. कभी नहीं, हिम्मत रखिए आपके एक-एक आँसू का हिसाब होगा ईश्वर बुरा करने वालों को कभी भी क्षमा नहीं करता है।
एक ना एक दिन इंसाफ जरूर मिलेगा बस आपको ईश्वर पर विश्वास बनाए रखना है। क्योंकि ईश्वर के घर देर है अंधेर नहीं।
जिस इंसान की वजह से आप परेशान है, दुःखी है, डिप्रेशन में है, आपका कहीं भी मन नहीं लग रहा, आप बर्बादी की कगार पर है, आपको क्या लगता है
ऊपर वाला उसे माफ कर देगा. कभी नहीं, हिम्मत रखिए आपके एक-एक आँसू का हिसाब होगा ईश्वर बुरा करने वालों को कभी भी क्षमा नहीं करता है।
एक ना एक दिन इंसाफ जरूर मिलेगा बस आपको ईश्वर पर विश्वास बनाए रखना है। क्योंकि ईश्वर के घर देर है अंधेर नहीं।
एक जंगल में एक पेड़ था, आधा सूखा और टेढ़ा-मेढ़ा। बाकी पेड़ उसे देखकर हँसते थे —
"तुम बेकार हो, न सीधे हो, न हरे-भरे!"
पेड़ चुप रहता था, लेकिन अंदर से दुखी था।
एक दिन तेज़ आँधी आई 🌪️
सभी बड़े और सीधे पेड़ अपने घमंड में अकड़े रहे… और हवा के दबाव से एक-एक करके गिर गए।
लेकिन वो टेढ़ा-मेढ़ा पेड़ हवा के साथ झुकता रहा… और बच गया।
आँधी के बाद जंगल में वही एक पेड़ खड़ा था।
तब उसे समझ आया —
"कमज़ोरी नहीं, लचीलापन मेरी ताकत थी।"
सिख -
👉 हर कमी वास्तव में कमजोरी नहीं होती
👉 जो परिस्थिति के अनुसार खुद को बदल लेता है, वही टिकता है
👉 जिंदगी में कठोर नहीं, लचीला बनना ज़रूरी है
"तुम बेकार हो, न सीधे हो, न हरे-भरे!"
पेड़ चुप रहता था, लेकिन अंदर से दुखी था।
एक दिन तेज़ आँधी आई 🌪️
सभी बड़े और सीधे पेड़ अपने घमंड में अकड़े रहे… और हवा के दबाव से एक-एक करके गिर गए।
लेकिन वो टेढ़ा-मेढ़ा पेड़ हवा के साथ झुकता रहा… और बच गया।
आँधी के बाद जंगल में वही एक पेड़ खड़ा था।
तब उसे समझ आया —
"कमज़ोरी नहीं, लचीलापन मेरी ताकत थी।"
सिख -
👉 हर कमी वास्तव में कमजोरी नहीं होती
👉 जो परिस्थिति के अनुसार खुद को बदल लेता है, वही टिकता है
👉 जिंदगी में कठोर नहीं, लचीला बनना ज़रूरी है
!! ईश्वर सब ठीक क्यों नहीं करते !!
"चक्रव्यूह में अभिमन्यु के निहत्थे मारे जाने पर अर्जुन ने रोते हुए कृष्ण से पूछा- 'माधव ! आप तो भगवान थे, आप चाहते तो एक पल में अभिमन्यु को बचा सकते थे, फिर आपने ऐसा क्यों नहीं किया?' कृष्ण ने गहरा जवाब दिया-'पार्थ, मैं सृष्टि का रचयिता हूँ, लेकिन हर मनुष्य को अपने कर्म और अपना युद्ध स्वयं ही लड़ना पड़ता है। अगर मैं आज अभिमन्यु को बचाता, तो दुनिया को यह सीखु पे मिलती कि अकेला इंसान भी लाखों की भोड़ से लड़ने का साहस रख सकता है?"
"चक्रव्यूह में अभिमन्यु के निहत्थे मारे जाने पर अर्जुन ने रोते हुए कृष्ण से पूछा- 'माधव ! आप तो भगवान थे, आप चाहते तो एक पल में अभिमन्यु को बचा सकते थे, फिर आपने ऐसा क्यों नहीं किया?' कृष्ण ने गहरा जवाब दिया-'पार्थ, मैं सृष्टि का रचयिता हूँ, लेकिन हर मनुष्य को अपने कर्म और अपना युद्ध स्वयं ही लड़ना पड़ता है। अगर मैं आज अभिमन्यु को बचाता, तो दुनिया को यह सीखु पे मिलती कि अकेला इंसान भी लाखों की भोड़ से लड़ने का साहस रख सकता है?"
❤2