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सोने का कटोरा

एक राजा ने भिखारी को सोने का कटोरा दिया। भिखारी ने उसे तुरंत मिट्टी में फेंक दिया। राजा ने हैरान होकर पूछा, "क्यों?" भिखारी बोला, "महाराज, मिट्टी से ही सोना बनता है और अंत में सोना भी मिट्टी बन जाता है। मैं बस इसे इसके असली घर पहुँचा रहा था।" राजा का अहंकार टूट गया।

शिक्षा:- अंत में सब कुछ मिट्टी ही होना है, घमंड व्यर्थ है।
1
एक गुरु ने दुखी शिष्य से एक मुट्ठी नमक पानी के गिलास में डालने को कहा। शिष्य ने पिया और कहा, "बहुत खारा है।" फिर गुरु ने उतना ही नमक एक विशाल झील में डलवाया। अब पानी का स्वाद पूछा, तो शिष्य बोला, "मीठा है।" गुरु बोले, "जीवन के दुख नमक की तरह हैं; अपनी सोच का दायरा बढ़ाओ, दुख छोटा हो जाएगा।"

शिक्षाः हृदय जितना बड़ा होगा, जीवन की मुश्किलें उतनी ही कम प्रभाव डालेंगी।
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अस्पताल के जनरल वार्ड में दो मरीज थे। एक खिड़की के पास था और दूसरा चल नहीं सकता था। खिड़की वाला मरीज रोज़ बाहर की दुनिया का हाल सुनाता - "देखो, आज पार्क में बच्चे खेल रहे हैं, फूल खिले हैं।" दूसरा मरीज उन बातों के सहारे अपनी बीमारी भूल जाता। एक दिन खिड़की वाले मरीज की मृत्यु हो गई। जब दूसरे मरीज को खिड़की के पास शिफ्ट किया ने बाहर देखा- वहाँ सिर्फ एक अंधी दीवार थी। उसे समझ आया कि उसका साथी सिर्फ उसे जीने की उम्मीद देने के लिए मनगढ़ंत खूबसूरत कहानियाँ सुनाता था। बिना किसी रिश्ते के एक अजनबी ने दूसरे की ज़िंदगी में रंग भर दिए थे।
एक बाज़ का अंडा मुर्गियों के झुंड में मिल गया। बाज़ का बच्चा मुर्गी की तरह ही दाना चुगने लगा। एक दिन उसने आसमान में एक महान पंछी को उड़ते देखा और पूछा, "वह कौन है?" मुर्गियों ने कहा, "वह बाज़ है, तुम उसकी तरह नहीं उड़ सकते।" वह बच्चा कभी नहीं उड़ पाया क्योंकि उसने खुद को मुर्गी मान लिया था।

शिक्षा:- आपकी संगति और सोच ही आपकी ऊँचाई तय करती है।
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वक़्त का इशारा समझिए।

नदी तब तक बहती है, जब तक रास्ता मिलता है। जिस दिन रास्ता पत्थरों से भर जाता है, वह खुद ही मोड़ ले लेती है। उसे शिकायत नहीं होती, न ही शोर मचाती है। इंसानी रिश्ते भी कुछ ऐसे ही होते हैं। जब सामने वाला जवाब देना छोड़ दे, सुनना छोड़ दे, आपकी मौजूदगी से बचने लगे तो समझ जाइए कि बहाव बदल चुका है। तब खुद को साबित करने की कोशिश मत कीजिए। सफ़ाई देना भी बेकार होता है। सबसे बेहतर यही है कि इज़्ज़त के साथ पीछे हट जाएँ। क्योंकि जहाँ ठहरना पड़ता है, वहाँ रिश्ता नहीं, बोझ बन जाता है।
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सोने का कटोरा

एक राजा ने भिखारी को सोने का कटोरा दिया। भिखारी ने उसे तुरंत मिट्टी में फेंक दिया। राजा ने हैरान होकर पूछा, "क्यों?" भिखारी बोला, "महाराज, मिट्टी से ही सोना बनता है और अंत में सोना भी मिट्टी बन जाता है। मैं बस इसे इसके असली घर पहुँचा रहा था।" राजा का अहंकार टूट गया।

शिक्षा:- अंत में सब कुछ मिट्टी ही होना है, घमंड व्यर्थ है।
☑️ एक रुपये का सिक्का

एक गरीब बच्चा दुकान के बाहर खड़ा होकर केक देख रहा था। दुकानदार ने उसे भगा दिया। तभी एक अमीर आदमी आया और उसने बच्चे को केक खरीदकर दिया। बच्चा बहुत खुश हुआ।

जाते-जाते बच्चे ने अपनी जेब से एक घिसा हुआ 1 रुपये का सिक्का निकाला और उस अमीर आदमी को दिया।

अमीर आदमी ने पूछा, "यह क्यों?" बच्चे ने कहा, "साहब, मेरे पास बस यही था, आपने मुझे इतनी खुशी दी, तो मैं आपको अपनी सबसे कीमती चीज़ देना चाहता हूँ।"

वह अमीर आदमी रो पड़ा क्योंकि उस 1 रुपये की कीमत उसके लाखों रुपयों से ज्यादा थी।

🗣️सीख - दान की कीमत नहीं, देने वाले की नीयत और भावना मायने रखती है।
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माटी से उठकर शिखर तक पहुंचने की प्रेरक गाथा, संघर्ष से सफलता तक का अमर इतिहास—ऐसे अद्वितीय महापुरुष संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी को जयंती पर कोटिश: नमन।🙏

“जीवन लंबा नहीं, महान होना चाहिए”❤️
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सोने का कटोरा

एक राजा ने भिखारी को सोने का कटोरा दिया। भिखारी ने उसे तुरंत मिट्टी में फेंक दिया। राजा ने हैरान होकर पूछा, "क्यों?" भिखारी बोला, "महाराज, मिट्टी से ही सोना बनता है और अंत में सोना भी मिट्टी बन जाता है। मैं बस इसे इसके असली घर पहुँचा रहा था।" राजा का अहंकार टूट गया।

शिक्षा:- अंत में सब कुछ मिट्टी ही होना है, घमंड व्यर्थ है।
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एक गुरु ने दुखी शिष्य से एक मुट्ठी नमक पानी के गिलास में डालने को कहा। शिष्य ने पिया और कहा, "बहुत खारा है।" फिर गुरु ने उतना ही नमक एक विशाल झील में डलवाया। अब पानी का स्वाद पूछा, तो शिष्य बोला, "मीठा है।" गुरु बोले, "जीवन के दुख नमक की तरह हैं; अपनी सोच का दायरा बढ़ाओ, दुख छोटा हो जाएगा।"

शिक्षाः हृदय जितना बड़ा होगा, जीवन की मुश्किलें उतनी ही कम प्रभाव डालेंगी।
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अस्पताल के जनरल वार्ड में दो मरीज थे। एक खिड़की के पास था और दूसरा चल नहीं सकता था। खिड़की वाला मरीज रोज़ बाहर की दुनिया का हाल सुनाता - "देखो, आज पार्क में बच्चे खेल रहे हैं, फूल खिले हैं।" दूसरा मरीज उन बातों के सहारे अपनी बीमारी भूल जाता। एक दिन खिड़की वाले मरीज की मृत्यु हो गई। जब दूसरे मरीज को खिड़की के पास शिफ्ट किया ने बाहर देखा- वहाँ सिर्फ एक अंधी दीवार थी। उसे समझ आया कि उसका साथी सिर्फ उसे जीने की उम्मीद देने के लिए मनगढ़ंत खूबसूरत कहानियाँ सुनाता था। बिना किसी रिश्ते के एक अजनबी ने दूसरे की ज़िंदगी में रंग भर दिए थे।
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एक बाज़ का अंडा मुर्गियों के झुंड में मिल गया। बाज़ का बच्चा मुर्गी की तरह ही दाना चुगने लगा। एक दिन उसने आसमान में एक महान पंछी को उड़ते देखा और पूछा, "वह कौन है?" मुर्गियों ने कहा, "वह बाज़ है, तुम उसकी तरह नहीं उड़ सकते।" वह बच्चा कभी नहीं उड़ पाया क्योंकि उसने खुद को मुर्गी मान लिया था।

शिक्षा:- आपकी संगति और सोच ही आपकी ऊँचाई तय करती है।
वक़्त का इशारा समझिए।

नदी तब तक बहती है, जब तक रास्ता मिलता है। जिस दिन रास्ता पत्थरों से भर जाता है, वह खुद ही मोड़ ले लेती है। उसे शिकायत नहीं होती, न ही शोर मचाती है। इंसानी रिश्ते भी कुछ ऐसे ही होते हैं। जब सामने वाला जवाब देना छोड़ दे, सुनना छोड़ दे, आपकी मौजूदगी से बचने लगे तो समझ जाइए कि बहाव बदल चुका है। तब खुद को साबित करने की कोशिश मत कीजिए। सफ़ाई देना भी बेकार होता है। सबसे बेहतर यही है कि इज़्ज़त के साथ पीछे हट जाएँ। क्योंकि जहाँ ठहरना पड़ता है, वहाँ रिश्ता नहीं, बोझ बन जाता है।
सोने का कटोरा

एक राजा ने भिखारी को सोने का कटोरा दिया। भिखारी ने उसे तुरंत मिट्टी में फेंक दिया। राजा ने हैरान होकर पूछा, "क्यों?" भिखारी बोला, "महाराज, मिट्टी से ही सोना बनता है और अंत में सोना भी मिट्टी बन जाता है। मैं बस इसे इसके असली घर पहुँचा रहा था।" राजा का अहंकार टूट गया।

शिक्षा:- अंत में सब कुछ मिट्टी ही होना है, घमंड व्यर्थ है।
☑️ एक रुपये का सिक्का

एक गरीब बच्चा दुकान के बाहर खड़ा होकर केक देख रहा था। दुकानदार ने उसे भगा दिया। तभी एक अमीर आदमी आया और उसने बच्चे को केक खरीदकर दिया। बच्चा बहुत खुश हुआ।

जाते-जाते बच्चे ने अपनी जेब से एक घिसा हुआ 1 रुपये का सिक्का निकाला और उस अमीर आदमी को दिया।

अमीर आदमी ने पूछा, "यह क्यों?" बच्चे ने कहा, "साहब, मेरे पास बस यही था, आपने मुझे इतनी खुशी दी, तो मैं आपको अपनी सबसे कीमती चीज़ देना चाहता हूँ।"

वह अमीर आदमी रो पड़ा क्योंकि उस 1 रुपये की कीमत उसके लाखों रुपयों से ज्यादा थी।

🗣️सीख - दान की कीमत नहीं, देने वाले की नीयत और भावना मायने रखती है।
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